Framework Trade Deal
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India-US Framework Trade Deal , साल के अंत तक बड़ी प्रोग्रेस की उम्मीद

भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापारिक बातचीत अब लास्ट स्टेज में पहुंचती दिखाई दे रही है। Crypto India की X पोस्ट से सामने आया है की, Commerce Secretary राजेश अग्रवाल ने FICCI की Annual General Meeting में पुष्टि की कि दोनों देशों के बीच Framework Trade Deal पर तेजी से प्रोग्रेस हो रही है और टारगेट है कि इस साल के अंत तक पहला Tranche साइन कर दिया जाए। यह Framework Trade Deal Reuters और NDTV की 28 नवंबर की रिपोर्ट के अनुरूप है, जिसमें बताया गया था कि वर्चुअल चर्चाओं में कई Tariff और Market Access मुद्दों का सॉल्यूशन हो चुका है। 

पहले Tranche की क्या अपडेट है


Commerce Secretary ने बताया कि भारत और अमेरिका पहले इस Tranche को 2025 की फॉल तक पूरा करना चाहते थे, लेकिन अमेरिका की नई ट्रेड पॉलिसीज और बढ़े हुए Tariffs की वजह से समय थोड़ा आगे बढ़ गया। इसके बावजूद उनका कहना है कि अब बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है और सॉल्यूशन जल्द मिल सकता है। 


हाल के महीनों में दोनों देशों ने कई अहम मुद्दों पर सहमति बनाई है। कई ऐसे पॉइंट्स, जिन पर पहले रुकावट थी, अब साफ हो चुके हैं। अब सिर्फ दोनों देशों को सही समय चुनना है, जब इस पहले Framework Trade Deal Tranche को ऑफिशियल रूप से घोषित किया जा सके।


हाल ही में खबर आयी थी की Indian Crypto Framework की राह में Systemic Risks रोड़ा बन रहा है। Reuters के मुताबिक, RBI के एक डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि क्रिप्टो को पूरी तरह लीगल करने से भारत के वित्तीय सिस्टम पर खतरा पड़ सकता है। इसी वजह से सरकार क्रिप्टो रेगुलेशन को लेकर अभी सावधानी बरत रही है। 


क्या Deadline और आगे बढ़ सकती है


Secretary ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि Framework Trade Deal का पहला Tranche साल के अंत तक साइन हो सकता है, लेकिन उन्होंने यह भी माना कि देरी की संभावना हमेशा बनी रहती है। उनका कहना है कि अगर किसी एक देश के मन में भी कोई सवाल या छोटी सी चिंता बाकी रह जाती है, तो फैसला आगे बढ़ सकता है। इसका मतलब है कि अभी भी कुछ मुद्दों पर अंतिम बातचीत चल रही है, जिन्हें पूरी तरह साफ होने के बाद ही घोषणा होगी।


उन्होंने यह भी बताया कि दुनिया भर में पिछले कुछ सालों में ट्रेड का माहौल काफी बदल गया है। कई देशों में अमेरिका ने एक्स्ट्रा टैरिफ लगाए थे, जिनमें भारत भी शामिल है। इन बदलावों की वजह से दोनों देशों की बातचीत और प्राथमिकताएँ भी प्रभावित हुईं और उन्हें नई परिस्थितियों के हिसाब से अपनी स्ट्रेटेजी तय करनी पड़ी।


दो मोर्चों पर बातचीत, BTA और Framework Trade Deal


राजेश अग्रवाल ने बताया कि भारत और अमेरिका एक ही समय में दो तरह की बातचीत कर रहे हैं। पहली है Bilateral Trade Agreement (BTA), जो एक बड़ा और लॉन्ग टर्म का समझौता होगा। दूसरी है Framework Trade Deal, जिसका मकसद है भारत पर लगे ज्यादा Tariffs को जल्दी कम करना और तुरंत राहत देना।


Secretary ने कहा कि Framework Trade Deal पर बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है। ज्यादातर मुद्दों पर दोनों देशों की सहमति बन गई है और अब बस सही डिसीजन का समय तय करना बाकी है। उन्होंने यह भी समझाया कि BTA एक बड़ा और विस्तार वाला समझौता है, जिसमें Tariffs को पूरी तरह हटाने का टारगेट है। इस वजह से BTA को पूरा होने में समय लगेगा, इसलिए Framework Deal को पहले फाइनल किया जा रहा है ताकि शुरुआती फायदे तुरंत मिल सकें।


India-US Framework Trade Deal क्यों है महत्वपूर्ण


फरवरी में पेश किए गए BTA का मुख्य उद्देश्य भारत और अमेरिका की बिज़नेस पार्टनरशिप को और मजबूत बनाना है। इस बड़े Agreement का लक्ष्य है कि मौजूदा 191 बिलियन डॉलर के व्यापार को बढ़ाकर 2030 तक 500 बिलियन डॉलर किया जाए। यह मुद्दा पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाशिंगटन यात्रा के दौरान खास तौर पर सामने आया था।


Framework Trade Deal  में मुख्य ध्यान उन Tariffs को कम करने पर है, जिनकी वजह से भारत के लगभग 23 बिलियन डॉलर के निर्यात पर असर पड़ता है। अगर ये Tariffs कम होते हैं, तो भारत के व्यापार, टेक सेक्टर और क्रॉस बॉर्डर निवेश को अच्छी बढ़त मिल सकती है।


US Tariffs ने कैसे बढ़ाई मुश्किलें


हालिया महीनों में अमेरिकी पॉलिसीज ने बातचीत को नया मोड़ दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगस्त से भारतीय सामानों पर 25% टैरिफ लगाया और कुछ ही दिन बाद इसे और 25% बढ़ा दिया। Trump Tariff से Market में हलचल हो गई थी, इसका कारण बताया गया कि भारत अब भी रूसी तेल खरीद रहा है।


इन Reciprocal Tariffs को अमेरिका ने उन देशों पर लागू किया जिनके साथ उसका व्यापार घाटा है। इससे भारत-अमेरिका बातचीत चुनौतीपूर्ण हो गई और Framework Trade Deal की जरूरत बढ़ी।


Crypto और Market Sentiment पर संभावित असर


यह खबर भले ही व्यापार से जुड़ी हो, लेकिन क्रिप्टो कम्युनिटी ने इसे एक अच्छा संकेत माना है। सोशल मीडिया पर कई निवेशकों का मानना है कि इस Framework Trade Deal से दोनों देशों के बीच Tech और Finance से जुड़े काम तेज़ हो सकते हैं। अगर Tariffs कम होते हैं और व्यापार आसान बनता है, तो इसका अप्रत्यक्ष फायदा Digital Assets, Fintech प्रोजेक्ट्स और नए Tech सहयोग पर भी पड़ सकता है।


मेरे 7 साल के ट्रेड, फिनटेक और क्रिप्टो एनालिसिस एक्सपीरियंस के आधार पर यह साफ दिखता है कि India-US Framework Trade Deal दोनों देशों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। कम टैरिफ और सरल व्यापार न सिर्फ ट्रेडिशनल सेक्टरों को मजबूती देंगे, बल्कि टेक, डिजिटल पेमेंट्स और क्रिप्टो इनोवेशन को भी तेज़ गति देंगे।


कन्क्लूजन 

Commerce Secretary के अनुसार, दोनों देशों की बातचीत अब ऐसे मुकाम पर पहुँच चुकी है जहाँ समझौता बहुत जल्द हो सकता है। भारत और अमेरिका की टीमें मिलकर Framework Trade Deal के फाइनल ड्राफ्ट को तैयार कर रही हैं। अगर सब कुछ प्लान के हिसाब से चला, तो साल के अंत तक पहला Tranche साइन हो जाएगा और इससे भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों को नई रफ्तार और नई दिशा मिलेगी। 

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About the Author Akansha Vyas

Crypto Journalist Cryptohindinews.in

आकांक्षा व्यास एक स्किल्ड क्रिप्टो राइटर हैं, जिनके पास 7 वर्षों का अनुभव है और वे ब्लॉकचेन और Web3 के कॉम्पलेक्स टॉपिक्स को सरल और समझने योग्य बनाने में एक्सपर्ट हैं। वे डीप रिसर्च के साथ आर्टिकल्स, ब्लॉग और न्यूज़ लिखती हैं, जिनमें SEO पर विशेष ध्यान दिया जाता है ताकि रीडर्स का जुड़ाव बढ़ सके। आकांक्षा की राइटिंग क्रिएटिव एक्सप्रेशन और एनालिटिकल अप्रोच का एक बेहतरीन मिश्रण है, जो रीडर्स को जटिल विषयों को स्पष्टता के साथ समझने में मदद करता है। क्रिप्टो स्पेस के प्रति उनकी गहरी रुचि उन्हें इस उद्योग में एक अच्छे राइटर के रूप में स्थापित कर रही है। अपने कंटेंट के माध्यम से, उनका उद्देश्य रीडर्स को क्रिप्टो की तेजी से बदलती दुनिया में गाइड करना है।

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यह एक समझौता है जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच लगे ऊंचे टैरिफ को कम करना और व्यापार को आसान बनाना है।

Commerce Secretary के अनुसार, इसे साल के अंत तक फाइनल करने का लक्ष्य है।

BTA एक बड़ा और लंबी अवधि का समझौता है, जबकि Framework Deal तत्काल टैरिफ राहत पर फोकस करता है।

टैरिफ कम होने से निर्यात, टेक सेक्टर और क्रॉस-बॉर्डर निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

हाँ, अगर किसी मुद्दे पर दोनों देशों की सहमति न बने तो देरी संभव है।