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'यह Chain उसे पीछे छोड़ देगी': ऐसे दावों की असली परख

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'यह Chain उसे पीछे छोड़ देगी': ऐसे दावों की असली परख
'यह Chain उसे पीछे छोड़ देगी': ऐसे दावों की असली परख

क्रिप्टोकरेंसी Bitcoin के बाद दूसरा सबसे बड़ा नाम है Ethereum

क्रिप्टोकरेंसी की दुनिया में Bitcoin के बाद यदि दूसरा सबसे बड़ा नाम है तो वो Ethereum का ही है, लेकिन इसके बावजूद एक कुछ एक्सपर्ट इसके अस्तिस्व को लेकर ही सवाल खड़े करने लगे हैं। दरअसल Cardano के संस्थापक Charles Hoskinson ने Ethereum के भविष्य को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि Ethereum अगले 10 से 15 वर्षों में पूरी तरह से गायब हो जाएगा या पूरी तरह से नए रूप में सामने आ जाएगा। एथेरियम (Ethereum) क्या है, इस बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। 

Blackberry से की Ethereum के तुलना

Charles Hoskinson के इस दावे के बाद कई निवेशकों में खलबली मच गई है, हालांकि चार्ल्स होस्किन्सन ने Ethereum की तकनीकी कमजोरियों की तरफ इशारा करते हुए इसे blackberry की तरह बताया है, जो एक समय दुनिया की नंबर-1 कंपनी थी, लेकिन समय के साथ तकनीक व पॉलिसी में बदलाव नहीं किया तो बाजार से पूरी तरह गायब हो गई। 

आपको बता दें कि ब्लैकबेरी एक कनाडियन मोबाइल कंपनी थी, जिसने 2000 के दशक की शुरुआत में मोबाइल मार्केट पर अपना राज कायम कर लिया था, लेकिन टचस्क्रीन ट्रेंड को नजरअंदाज करने, एप्स का कमजोर इकोसिस्टम, यूजर एक्सपीरियंस की कमी और देरी से फैसले लेने के कारण बाजार में पिछड़ गई थी। 

Ethereum में गिनाई ये तीन खामियां

Charles Hoskinson ने हाल ही में ‘Ask Me Anything’ सेशन में के दौरान Ethereum की 3 प्रमुख तकनीकी खामियों को लेकर बात कही, जो इस प्रकार है – 

  • Ethereum ब्लॉकचेन पर जिस तरीके से लेनदेन और बैलेंस को ट्रैक किया जाता है, वह काफी जटिल और अव्यवस्थित है।

  • इस ब्लॉकचेन में Ethereum Virtual Machine (EVM) वह तकनीक है, जो स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स को चलाती है। Hoskinson के मुताबिक, इसमें कई कमजोरियां और सीमाएं है। 

  • इसके अलावा Hoskinson ने कहा कि Ethereum ने हाल ही में ‘प्रूफ ऑफ स्टेक’ मॉडल अपनाया है, जो भविष्य के लिए टिकाऊ नहीं लगता है।

क्या है प्रूफ ऑफ स्टेक (Proof of Stake)

दरअसल प्रूफ ऑफ स्टेक (PoS) ब्लॉकचेन नेटवर्क में एक तरह का सिक्योरिटी सिस्टम (consensus mechanism) होता है, जो यह तय करता है कि है। इसका कौन सा यूजर नया डेटा ब्लॉकचेन में जोड़ सकता है। दरअसल इसकी जरूरत इसलिए पड़ती है क्योंकि जब ब्लॉकचेन पर हजारों लाखों लोग एक ही डिजिटल सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हों, जैसे कि Ethereum या Bitcoin, तो यह तय करना जरूरी हो जाता है कि कौन सही डेटा जोड़ रहा है और कोई धोखा तो नहीं कर रहा। 

लेयर-2 नेटवर्क्स पर भी उठाए सवाल

Ethereum के स्केलिंग सॉल्यूशंस यानी लेयर-2 नेटवर्क जैसे Optimism, Arbitrum और Polygon पर भी Hoskinson ने सवाल उठाते हुए कहा कि इन सभी नेटवर्क्स को एक तरह से परजीवी कहा है। उन्होंने कहा कि ये नेटवर्क Ethereum से ट्रैफिक और वैल्यू तो लेते हैं, लेकिन बदले में Ethereum की मुख्य चेन को कोई विशेष लाभ नहीं पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि Ethereum में कोई मजबूत ऑन-चेन गवर्नेंस सिस्टम नहीं है, यानी कोई तय प्रक्रिया नहीं है जिससे उपयोगकर्ता और डेवलपर्स मिलकर सिस्टम में बदलाव कर सकें।

कन्क्लूजन

Cardano के संस्थापक चार्ल्स होस्किन्सन की चेतावनी भले ही अभी चर्चा में आ गई है, लेकिन Ethereum आज भी दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी है और इसके पास विशाल डेवलपर कम्युनिटी व व्यापक यूजर बेस है। ऐसे में इसे पूरी तरह खत्म मान लेना जल्दबाजी होगा। हालांकि Hoskinson की बातों को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। Ethereum को समय के साथ खुद में जरूरी बदलाव भी जरूर करना होंगे। 



लेखक परिचय
chainwire English Blog Writer
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FAQ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले सवालों के जवाब यहाँ पाएँ और समझें कि सब कुछ कैसे काम करता है।

तीन — प्रायः पक्षकार स्रोत का बयान, चयनित metrics, और यह गलत धारणा कि यह zero-sum खेल है।

क्योंकि वह प्रायः सैद्धांतिक/परीक्षण-स्थिति की होती है और उसमें finality तथा तनाव-काल का प्रदर्शन शामिल नहीं होता।

बहुत कम — नए पते बनाना लगभग मुफ्त है; सार्थक संस्करण सक्रिय पते हैं, वह भी bot-गतिविधि अलग करके।

उसकी बनावट देखकर — कितना हिस्सा incentive-चालित है, क्योंकि rewards घटते ही वह पूंजी निकल जाती है।

तीन — fees/नेटवर्क-राजस्व (कोई भुगतान क्यों कर रहा है), developer-गतिविधि, और वास्तविक उपयोग वाले applications।

पांच — प्रदर्शन (throughput/finality/तनाव), विकेंद्रीकरण की कीमत, अर्थशा???्त्र (issuance/fees/सिंक), ecosystem के dated आंकड़े, और ecosystem lock-in।

संख्याएं एक ही परिभाषा और एक ही अवधि की हों — वरना वह तुलना नहीं, विज्ञापन बन जाती है।

यह प्रश्न अधूरा है — 'सबसे अच्छा' हमेशा 'किस काम के लिए' के साथ अर्थ रखता है; trading, छोटे भुगतान और संस्थागत settlement के लिए 'अच्छा' अलग होता है।

क्योंकि बाजार बड़ा भी हो सकता है, interoperability से users/assets बंधे नहीं रहते, और अलग chains अलग उपयोगों में विशेषज्ञ हो रही हैं।

प्रायः अस्थायी प्रवाह — bridges और cross-chain मानकों के कारण पूंजी आती-जाती रहती है, और एक तिमाही का रुझान दीर्घकालिक निष्कर्ष नहीं होता।

'कौन जीतेगा' नहीं, बल्कि 'यह chain किस काम के लिए बेहतर होती जा रही है, और उसके dated प्रमाण क्या हैं'।

क्योंकि tooling, audits, liquidity और डेवलपर-अनुभव की परत सबसे टिकाऊ होती है — और वह किसी एक metric में नहीं दिखती।

Fees और विश्वसनीयता — छोटे लेनदेन कहां व्यावहारिक हैं और तनाव-काल में क्या होता है; न कि किसी सुर्खी का दावा।

नहीं — भारतीय VDA-नियम chain-निरपेक्ष हैं; बल्कि सस्ती fees लेनदेन-संख्या बढ़ाकर record-keeping का बोझ बढ़ा देती हैं।

जरूरी नहीं — तकनीकी गुणवत्ता और token-मूल्य के बीच कोई यांत्रिक कड़ी नहीं होती; मांग-सिंक अलग से देखना पड़ता है।