Pakistan ने क्रिप्टोकरेंसी को कानूनी रूप से वैध बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है, जो उसे इस क्षेत्र में India से पहले एक प्रमुख स्थान दिला सकता है। पाकिस्तान का यह कदम डिजिटल असेट्स के भविष्य को लेकर उसके प्रोफेशनल एप्रोच को स्पष्ट करता है। पाकिस्तान क्रिप्टो और ब्लॉकचेन की ओर रुख करते हुए ग्लोबल इन्वेस्टर्स को आकर्षित करने के लिए लीगल फ्रेमवर्क स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है, जबकि भारत में इस मामले में अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
भारत सरकार ने बीते साल G20 Summit में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर एक लीगल फ्रेमवर्क तैयार करने की दिशा में विचार करने का संकेत दिया था, लेकिन इसके बाद इस मामले में कोई महत्वपूर्ण अपडेट नहीं आया है। वहीं रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने कई बार क्रिप्टोकरेंसी पर बैन लगाने की बात कही है। RB के गवर्नर ने यह तक कहा है कि क्रिप्टो को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे फाइनेंशियल स्टेबिलिटी पर नेगेटिव इम्पैक्ट पड़ सकता है।
वहीँ भारत सरकार भी इस मुद्दे पर पूरी तरह से सीरियस नजर नहीं आती। क्रिप्टोकरेंसी के खिलाफ RBI का रुख और सरकार की चुप्पी दर्शाती है कि यह मुद्दा भारत में प्राथमिकता पर नहीं है। उदाहरण के तौर पर, हाल ही में एक लिस्ट में यह सामने आया था कि North Korea 3rd Largest Bitcoin Holder बना है, जबकि भारत सरकार के पास Bitcoin या किसी अन्य क्रिप्टोकरेंसी का कोई होल्डिंग नहीं है। यह स्थिति भारत की Crypto Policy को लेकर, सरकार के इंडिसिसिव स्टेटस को स्पष्ट करती है।
Pakistan ने इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं, जिसके तहत हाल ही में Pakistan ने Crypto Council लॉन्च की हैं। Pakistan Crypto Council के CEO, Bilal Bin Saqib ने हाल ही में कहा कि पाकिस्तान अब क्रिप्टो के मामले में पीछे नहीं रह सकता। "हम पाकिस्तान को ब्लॉकचेन-पावर्ड फाइनेंस का लीडर बनाना चाहते हैं और हम अंतरराष्ट्रीय निवेश को आकर्षित करने के लिए एक मजबूत लीगल फ्रेमवर्क चाहते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान में 60 प्रतिशत से अधिक युवा आबादी है, जो डिजिटल और Web3 टेक्नोलॉजी से परिचित है। साकिब का मानना है कि क्रिप्टोकरेंसी और ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से पाकिस्तान को अपनी अर्थव्यवस्था में बड़ा फायदा हो सकता है, खासकर रेमिटेंस और बिजनेस के क्षेत्र में। पाकिस्तान का यह कदम उसे भारत से आगे रख सकता है, क्योंकि भारत में क्रिप्टो को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है और सरकार की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिप्टो के लिए लीगल फ्रेमवर्क को लेकर जो अंतर दिख रहा है, वह भारत को इस क्षेत्र में पीछे छोड़ सकता है। Pakistan ने इस दिशा में जो कदम उठाए हैं, उससे यह साफ है कि वह क्रिप्टोकरेंसी के मामले में India से पहले एक मजबूत और आकर्षक कानूनी ढांचा स्थापित करने की योजना बना रहा है। वहीं, भारत में क्रिप्टोकरेंसी पर अभी भी अस्पष्टता और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। अगर पाकिस्तान इस दिशा में आगे बढ़ता है, तो वह भारत से आगे निकल सकता है और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर सकता है।
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