हाल ही में, Treasure NFT के बारे में न्यूज़ वायरल हो रही है कि इससे जुड़े प्लेटफॉर्म्स को बंद किया जा रहा है। यह खबर सोशल मीडिया और कुछ वेबसाइटों पर तेजी से फैल गई है, जिससे निवेशकों के बीच कन्फ्यूजन की स्थिति पैदा हो गई है। कई लोग अब यह सोच रहे हैं कि क्या यह सच है या केवल एक फेक न्यूज़ है।
Treasure NFT एक ऐसा प्रोजेक्ट है, जो अपने निवेशकों को हाई रिटर्न्स का वादा करता है। Treasure NFT के जरिए लोग NFTs (Non-Fungible Tokens) खरीद और बेच सकते हैं और कई निवेशकों ने इस प्रोजेक्ट में अपने पैसे भी लगाए हैं। इसके बाद अचानक Treasure NFT ने Withdrawal देना बंद कर दिया और भारत से अपना बोरिया बिस्तर समेट कर गायब हो गया। हालांकि इससे पहले इसे Bengal Police Ponzi Scheme घोषित कर दिया था, जिसके बाद से ही इसके भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे थे.
अब सवाल उठता है कि आख़िर Treasure NFT पर किस तरह के आरोप लगे हैं? चर्चा में आईं कुछ प्रमुख बातें यह हैं:
अनरियलिस्टिक रिटर्न्स का वादा: Treasure NFT पर दावा किया गया कि निवेशकों को रोज़ाना 4.3% से 6.8% तक रिटर्न दिया जाएगा—यानि महीने में लगभग 30% तक. कई विशेषज्ञों का कहना है कि इतने ऊँचे और स्थायी रिटर्न्स संभव नहीं, जिससे इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठता है।
रेफरल सिस्टम पर निर्भरता: इस प्लेटफार्म का बिज़नेस मॉडल नए निवेशकों को जोड़ने और उनसे रैवन्यू बनाने पर काफी हद तक आधारित है। ऐसे मामलों में अक्सर पिरामिड स्कीम जैसी स्थिति बन जाती है, जहाँ नया पैसा पुराने निवेशकों को लौटाने के लिए इस्तेमाल होता है।
पंजीकरण और पहचान पर संदिग्धता: Treasure NFT ने खुद को Tempe, Arizona में रजिस्टर्ड बताया, लेकिन जांच में सामने आया कि दिया गया पता किसी रूसी म्यूजिक अकादमी से जुड़ा है। साथ ही, कंपनी के कथित डायरेक्टर्स और टीम के सदस्यों के प्रोफाइल्स भी काफी हद तक मनगढ़ंत दिखाई देते हैं।
इन पॉइंट्स के चलते निवेशकों के मन में इस प्रोजेक्ट की पारदर्शिता और वास्तविकता को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।
Treasure NFT द्वारा निवेशकों को तगड़े मुनाफे का वादा किया गया जैसे कि हर दिन 4.3% से 6.8% तक का रिटर्न, जो महीने के हिसाब से करीब 30% तक पहुंच जाता है। ऐसे में एक्सपर्ट्स सवाल उठा रहे हैं क्योंकि आमतौर पर इतने ज्यादा और लगातार रिटर्न्स देना असंभव माना जाता है।
आर्थिक विशेषज्ञ और मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि इस तरह के भारी-भरकम मुनाफे वाले दावे अक्सर किसी स्कैम या पोंजी स्कीम की तरफ इशारा करते हैं, कुछ वैसा ही जैसा कि Bitconnect या Gain Bitcoin जैसे अन्य प्रोजेक्ट्स में देखा गया था। असलियत में, किसी भी गंभीर और भरोसेमंद निवेश मॉडल में इतना तेज़ और स्थायी लाभ मिलना लगभग नामुमकिन है।
इसलिए जब कोई प्लेटफॉर्म इतनी बड़ी कमाई का भरोसा देता है, तो विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सावधानी बरती जाए और अपनी रिसर्च खुद करें।
अगर हम Treasure NFT की रजिस्ट्रेशन डिटेल्स को गौर से देखें, तो कई अजीब बातें सामने आती हैं। कंपनी खुद को Tempe, Arizona में रजिस्टर्ड बताती है, लेकिन जब उसके एड्रेस को जांचा गया तो वह किसी रूसी म्यूजिक अकैडमी से जुड़ा निकला। इसके अलावा, कंपनी के जिन लोगों को पब्लिक प्रोफाइल्स में 'सीनियर एक्जीक्यूटिव' या लीडर बताया जा रहा है, उनकी जानकारी या तो ऑनलाइन उपलब्ध ही नहीं है या पूरी तरह से बनावटी लगती है।
इन सब वजहों से निवेशकों के मन में संदेह और ज्यादा गहराता जा रहा है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बारे में कोई ऑफिशियल घोषणा Treasure NFT के सोशल मीडिया अकाउंट्स या वेबसाइट पर नहीं की गई है। यह केस एक अज्ञात सोर्स से आई फेक न्यूज़ से जुड़ा हुआ हो सकता है। इसके बावजूद, इस अफवाह के चलते बहुत से निवेशक चिंता में हैं और वे इस प्रोजेक्ट से अपना पैसा निकालने का विचार कर रहे हैं।
Treasure NFT अकेला ऐसा प्रोजेक्ट नहीं है, जिसके बारे में अफवाहें या विवाद सामने आए हों। हाल ही में, फ्रांस के एक NFT प्रोजेक्ट का मामला सामने आया था, जिसमें सेलेब्रिटी एंडोर्समेंट के चलते सैकड़ों निवेशकों को भरोसा दिलाया गया कि वे किसी एनिमेटेड फिल्म के को-प्रोड्यूसर बन रहे हैं। बाद में खुलासा हुआ कि वे एक बड़े स्कैम का शिकार हो गए थे, जिससे करीब 770 निवेशकों को लगभग €1.5 मिलियन (करीब $1.66 मिलियन) का नुकसान हुआ।
इस तरह के उदाहरण दिखाते हैं कि NFT और क्रिप्टो मार्केट में अफवाहें और धोखाधड़ी दोनों ही आम हैं, और निवेशकों को हमेशा सतर्क रहना चाहिए। ऐसे मामलों में “DYOR” (Do Your Own Research) का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि बिना किसी ऑफिशियल कन्फर्मेशन के किसी भी अफवाह पर विश्वास करना जोखिमपूर्ण हो सकता है।
गौरतलब है कि हाल ही में Treasure NFT ने यूज़र्स का सारा डाटा Nova NFT पर ट्रान्सफर कर दिया है और एक कंपनी के रूप में अपने सारे ऑपरेशन रोक दिए हैं।
Treasure NFT के रिवॉर्ड और कमाई का स्ट्रक्चर खासतौर पर रेफरल मॉडल पर टिका हुआ है। यानी, मौजूदा यूजर्स को नए निवेशकों को प्लेटफॉर्म पर लाने के लिए इनाम या कमीशन दिया जाता है। जब ज्यादा से ज्यादा लोग अपने जान-पहचान वालों को जोड़ते हैं और वे भी निवेश करते हैं, तो ऊपरी लेवल के लोग बड़ा फायदा उठाते हैं।
इस मॉडल में प्रॉफिट का मुख्य सोर्स असल प्रोडक्ट या सर्विस की बिक्री नहीं बल्कि लगातार नए निवेशकों का पैसा होता है। यही वजह है कि कई लोग इसे पिरामिड स्कीम जैसा मानते हैं, जहाँ पूराने निवेशक नए आने वालों के पैसे से कमाई करते हैं।
ध्यान देने वाली बात है कि ऐसे रेफरल सिस्टम कई बार उन नेटवर्क मार्केटिंग कंपनियों की तर्ज पर चलते हैं, जिन्हें अक्सर अमेज़न या HUL जैसी बड़ी कंपनियों से न जोड़ कर, केवल हर स्तर पर नए लोगों की भरती से प्रॉफिट कमाने के लिए डिज़ाइन किया जाता है।
इसलिए, किसी भी प्रोजेक्ट में हिस्सा लेने से पहले यह देखना जरूरी है कि कमाई का आधार असली सर्विसेज है या सिर्फ नए मेंबर्स की रीक्रूटमेंट।
अभी तक Treasure NFT से जुड़े प्लेटफॉर्म्स की ओर से कोई ऑफिशियल स्टेटमेंट नहीं आया है, जिससे साफ है कि यह अफवाह पूरी तरह से अधूरी और गलत हो सकती है। निवेशकों को चाहिए कि वे सब्र रखें और ऑफिशियल स्टेटमेंट का इंतजार करें। इसके अलावा, जो लोग निवेश करने के बारे में सोच रहे हैं, उन्हें हमेशा अपनी खुद की रिसर्च करनी चाहिए और किसी भी प्रकार की गैंबलिंग से बचना चाहिए। अगर आप जानना चाहते हैं की Treasure NFT कैसे काम करती है तो दी गई इस लिंक पर जाएं।
Treasure NFT या इससे जुड़े प्लेटफॉर्म्स के बंद होने की अफवाह सिर्फ एक फेक न्यूज़ हो सकती है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना भी ठीक नहीं होगा। निवेशकों को हमेशा अपने निवेश के बारे में इन्फोर्मड डिसीजन लेने चाहिए और किसी भी प्रोजेक्ट से जुड़ी अफवाहों पर बिना कन्फर्मेशन के विश्वास नहीं करना चाहिए।
Disclaimer: यह आर्टिकल एजुकेशनल पर्पस से लिखा गया है, क्रिप्टो मार्केट वोलेटाइल है, किसी भी इन्वेस्टमेंट से पहले अपनी रिसर्च जरुर करें
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