क्रिप्टो एनालिस्ट्स के अनुसार Coinbase का स्टॉक $310 तक पहुंच सकता है, जो वर्तमान में $182 पर है। इसका मतलब 68% की वृद्धि हो सकती है। ऐसा इसलिए संभव हो सकता है क्योंकि अमेरिका अब क्रिप्टोकरेंसी को अधिक सपोर्ट दे रहा है और Donald Trump का उद्देश्य ब्लॉकचेन इनोवेशन में अमेरिका को लीडिंग बनाना है। वहीं Coinbase को "यूनिवर्सल बैंक" के रूप में देखा जा रहा है, जो डिजिटल करेंसी के लिए बड़े लेवल पर फाईनेंशियल सर्विस प्रदान करता है। इसलिए यह माना जा रहा है, कि Trump की Crypto Policy से Coinbase को बड़ा फायदा हो सकता है।
Donald Trump की क्रिप्टो पॉलिसी US Crypto Industry के लिए माइलस्टोन साबित हो सकती है। 7 March 2025 को, ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में पहला क्रिप्टो समिट आयोजित किया था, जो US Government के क्रिप्टो के प्रति पॉजिटिव एटीट्यूड को दर्शाता है। इसके तुरंत बाद, ट्रम्प ने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए, जिसमें क्रिप्टो को लेकर एक Bitcoin Reserve बनाने की बात कही गई, जो Bitcoin गवर्नमेंट ने क्रिमिनल केस से प्राप्त किये थे। इससे कई एनालिस्ट यह मानते हैं कि Bitcoin को ट्रेडिशनल फाइनेंशियल सिस्टम में एक सॉलिड प्लेस मिलने का रास्ता खुल सकता है।
यह कदम ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन के द्वारा क्रिप्टो के प्रति बदलती पॉलिसी को दर्शाता है और इससे कई क्रिप्टो कंपनियों को नई अपॉर्चुनिटी मिल सकती हैं। खासकर Coinbase, जो पहले से ही वैरियस क्रिप्टो रिलेटेड सर्विस प्रोवाइड कर रहा है, वह इस बदलाव से काफी लाभ उठा सकता है। हाल ही में Coinbase के CEO Brian Armstrong ने टिप्पणी करते हुए यह भी कहा था कि US Bitcoin Reserve के बाद सरकारों की क्रिप्टो में रूचि बढ़ी है।
वहीं कई क्रिप्टो एनालिस्ट ने Coinbase को "Outperform" रेटिंग दी है, जिसका मतलब है कि वे मानते हैं कि यह स्टॉक बाकी स्टॉक्स से बेहतर परफॉर्म करेगा। इसके अलावा, Coinbase को सिर्फ एक क्रिप्टो एक्सचेंज नहीं बल्कि "Blockchain पर बेस्ड फाइनेंशियल सर्विस के लिए एक यूनिवर्सल बैंक" के रूप में भी देख रहे है।
अमेरिका के क्रिप्टो के प्रति बढ़ते सपोर्ट का Coinbase के बिजनेस पर पॉजिटिव इम्पैक्ट पड़ सकता है। ट्रम्प की पॉलिसी और उनके एग्जीक्यूटिव ऑर्डर से, क्रिप्टो कंपनियों को एक लीगल और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क मिल सकता है, जो उनके ऑपरेशन को आसान और सेफ बनाएगा। अगर अमेरिका के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को क्रिप्टो-फ्रेंडली बना दिया जाता है, तो Coinbase जैसी कंपनियां और अधिक बढ़ सकती हैं, क्योंकि उनके पास पहले से ही क्रिप्टो सर्विसेस का एक बड़ा पोर्टफोलियो है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि Coinbase की पोज़ीशन आने वाले समय में बहुत स्ट्रांग हो सकती है। जैसे Amazon ने ऑनलाइन शॉपिंग की फील्ड में अपनी जगह बनाई है, वैसे ही Coinbase भी "Amazon for crypto financial services" बन सकता है। इससे कंपनी का स्टॉक भी बढ़ सकता है, जैसा कि क्रिप्टो एनालिस्ट्स ने प्रेडिक्ट किया है कि Coinbase का स्टॉक $310 तक पहुंच सकता है।
जिस तरह भारत में क्रिप्टो ट्रेडिंग का मार्केट तेजी से बढ़ रहा है इसी के चलते ग्लोबल क्रिप्टो एक्सचेंज Coinbase 2025 के अंत तक भारत में वापसी करेगा और अपनी सर्विसेस फिर से शुरू करेगा। इससे पहले, Coinbase ने 2022 में भारत में अपनी शुरुआत की थी, लेकिन रेगुलेटरी चैलेंजेस के कारण उसे अपना ऑपरेशन बंद करना पड़ा था। अब कंपनी नए विज़न और स्ट्रेटेजी के साथ भारतीय क्रिप्टो मार्केट में वापस आ रही है और इसका उद्देश्य इंडियन मार्केट के डेवलपमेंट से लाभ उठाना है।
Donald Trump की क्रिप्टो पॉलिसी और उनकी एडमिनिस्ट्रेशन की दिशा से Coinbase और अन्य क्रिप्टो कंपनियों को काफी लाभ हो सकता है। हाल ही में होने वाले इवेंट्स, जैसे व्हाइट हाउस क्रिप्टो समिट और एग्जीक्यूटिव ऑर्डर, ये संकेत दे रहे हैं कि अमेरिका का क्रिप्टो को लेकर रवैया बदल रहा है। इससे Coinbase जैसी कंपनियों को नए मौके मिल सकते हैं और उनका स्टॉक फ्यूचर में काफी बढ़ सकता है। हालांकि, यह बदलाव एक दिन में नहीं होगा और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को स्ट्रांग होने में समय लगेगा, लेकिन संकेत मिलते हैं कि क्रिप्टो की दिशा में एक बड़ा बदलाव हो सकता है।
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