Ethereum क्या है और इसके फाउंडर कौन हैं? पूरी जानकारी (2026 अपडेट)
अगर आपने Ethereum के बारे में सबसे ज्यादा यही सुना है कि यहां फीस बहुत महंगी है, तो आपकी जानकारी शायद पुरानी हो चुकी है। 2021 से 2023 के बीच एक सामान्य ट्रांसफर में कई डॉलर लग जाते थे। आज वही काम कुछ सेंट में हो जाता है, और लेयर 2 नेटवर्क पर तो अक्सर एक सेंट से भी कम में।
इस लेख में हम आसान भाषा में समझेंगे कि Ethereum क्या है, इसे किसने बनाया, यह कैसे काम करता है, पिछले कुछ सालों में क्या बदला और भारत में ETH कैसे खरीदें। इसके सभी आंकड़े 9 अक्टूबर 2026 तक के हैं।
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Ethereum क्या है?
Ethereum एक ब्लॉकचेन नेटवर्क है, यानी एक ऐसा डिजिटल बही-खाता जो हजारों कंप्यूटरों पर एक साथ रखा जाता है और जिसे कोई एक कंपनी कंट्रोल नहीं करती। Bitcoin का मुख्य काम डिजिटल पैसे की तरह चलना है। Ethereum पर पैसा भेजने के साथ-साथ प्रोग्राम भी चलाए जा सकते हैं।
इन प्रोग्रामों को स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट कहते हैं। यह एक तरह की ऑटोमैटिक शर्त है कि "अगर यह हुआ, तो वह अपने आप हो जाएगा", और इसके लिए किसी मिडलमैन की जरूरत नहीं पड़ती। आज के ज्यादातर टोकन, स्टेबलकॉइन, एनएफटी और डीफाई (DeFi) ऐप इन्हीं स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट पर चलते हैं।
ETH इस नेटवर्क की अपनी करेंसी है। इससे गैस फीस (नेटवर्क पर कोई भी काम कराने की फीस) चुकाई जाती है, और इसी को स्टेक करके लोग नेटवर्क की सुरक्षा में हिस्सा लेते हैं। Bitcoin की तरह ETH की कोई तय अधिकतम सीमा नहीं है। इसके विकास के लिए मुख्य रूप से Ethereum Foundation जिम्मेदार है।
Ethereum का फाउंडर कौन है?
Ethereum का आइडिया Vitalik Buterin का है। उनका जन्म 1994 में रूस में हुआ और वे बचपन में ही कनाडा चले गए। वे 2011 में Bitcoin Magazine के को-फाउंडर बने, और नवंबर 2013 में, करीब 19 साल की उम्र में, उन्होंने Ethereum का व्हाइटपेपर लिखा। उनका सवाल सीधा था: जब Bitcoin सिर्फ पैसे के लिए बना है, तो हर काम के लिए अलग ब्लॉकचेन क्यों बनाई जाए? क्यों न एक ऐसी ब्लॉकचेन हो जिस पर कोई भी अपना प्रोग्राम चला सके?
लेकिन Ethereum को अकेले Vitalik ने नहीं बनाया। 2014 की शुरुआत में कुछ और लोग इस प्रोजेक्ट से जुड़े, जिन्हें आमतौर पर को-फाउंडर माना जाता है। इनमें से कुछ प्रमुख नाम ये हैं:
Gavin Wood: नेटवर्क का तकनीकी डिज़ाइन (येलो पेपर) लिखा और Solidity प्रोग्रामिंग भाषा शुरू की। बाद में उन्होंने Polkadot बनाया।
Joseph Lubin: शुरुआती टीम में रहे और बाद में कंपनी ConsenSys की शुरुआत की।
Charles Hoskinson: शुरुआती दौर में जुड़े और बाद में Cardano से जुड़े।
Anthony Di Iorio: शुरुआती फंडिंग और आयोजन में मदद की।
Mihai Alisie, Amir Chetrit और Jeffrey Wilcke: शुरुआती टीम के बाकी सदस्य।
आज Ethereum को कोई एक कंपनी नहीं चलाती। इसकी रिसर्च और डेवलपमेंट में एक नॉन-प्रॉफिट संस्था Ethereum Foundation मदद करती है, लेकिन नेटवर्क के बदलाव डेवलपर्स और वैलिडेटर्स की सहमति से होते हैं।
Ethereum का इतिहास: कब क्या हुआ?
Ethereum कैसे काम करता है?
2022 तक Ethereum भी Bitcoin (BTC) की तरह माइनिंग से चलता था। द मर्ज के बाद यह प्रूफ ऑफ स्टेक पर आ गया। अब वैलिडेटर्स नेटवर्क की सुरक्षा संभालते हैं। एक वैलिडेटर बनने के लिए कम से कम 32 ETH स्टेक करने होते हैं। जो वैलिडेटर ईमानदारी से काम करता है, उसे इनाम मिलता है, और जो गड़बड़ी करता है, उसका स्टेक काटा जा सकता है।
इस बदलाव के दो बड़े असर हुए। नेटवर्क की बिजली की खपत करीब 99.9% घट गई, और नए ETH बनने की रफ्तार करीब 88% कम हो गई। यहीं से आज की पूरी कहानी शुरू होती है।
नेटवर्क पर हर काम के लिए गैस फीस लगती है। इसका एक हिस्सा (बेस फीस) हमेशा के लिए जला दिया जाता है, यानी बर्न हो जाता है, और बाकी हिस्सा (टिप) वैलिडेटर को मिलता है।
आज की तस्वीर: क्या-क्या बदल चुका है
9 अक्टूबर 2026 को ETH की कीमत करीब $2,500 (लगभग ₹2.4 लाख) के आसपास चल रही है, मार्केट कैप करीब $300 billion है और यह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी है। कीमत अपने सबसे ऊंचे स्तर $4,946 से करीब आधी है। इसलिए लंबी अवधि की तस्वीर और आज की कीमत को अलग-अलग देखना जरूरी है।
फीस वाली धारणा अब पुरानी क्यों है?
यह इस लेख का सबसे जरूरी सुधार है। Ethereum की अपनी आधिकारिक साइट भी कहती है कि अगर किसी की समझ 2021 से 2023 के बीच बनी थी, तो वह अब पुरानी हो चुकी है। 8 अक्टूबर की शाम Etherscan पर बेस फीस करीब 1.3 gwei थी, और उस पर एक सामान्य ETH ट्रांसफर की लागत करीब $0.07 (लगभग ₹6 से ₹7) बैठती थी।
यानी "एक सेंट से कम" वाली बात मेननेट पर शांत दिनों में ही सच है। फीस भीड़ के हिसाब से ऊपर-नीचे होती रहती है। लेकिन कुछ साल पहले के कई डॉलर के मुकाबले यह फर्क बहुत बड़ा है, और आप किसी भी गैस ट्रैकर पर मौजूदा फीस खुद जांच सकते हैं। Ethereum के पुराने अपग्रेड्स का पूरा ब्योरा आप Ethereum अपग्रेड्स वाले पेज पर पढ़ सकते हैं।
लेयर 2 (L2) ने असल में क्या किया?
लेयर 2 वे सहायक नेटवर्क हैं जो ट्रांज़ैक्शन अपने यहां निपटाते हैं और फिर उनका सार मुख्य Ethereum नेटवर्क पर दर्ज कर देते हैं। Base, Arbitrum और Optimism इसके जाने-माने उदाहरण हैं।
पहले इन्हें अपना डेटा उसी जगह भेजना पड़ता था जहां आम यूज़र्स के ट्रांज़ैक्शन होते थे, यानी वे यूज़र्स से जगह के लिए मुकाबला करते थे। मार्च 2024 के Dencun अपग्रेड में उनके लिए डेटा भेजने का एक अलग और सस्ता रास्ता (ब्लॉब्स) बना दिया गया। इससे उनकी लागत 90% से ज्यादा गिर गई, और मुख्य नेटवर्क पर भीड़ भी घटी। इसीलिए एक ही बदलाव ने दोनों जगह फीस कम कर दी।
स्टेकिंग: कितना ETH जमा है और कितना रिटर्न मिलता है?
अक्टूबर 2026 में करीब 43.7 million ETH स्टेक किया जा चुका है, जो कुल सप्लाई का करीब 35.8% है। यह इस साल की शुरुआत के करीब 36.3 million ETH से काफी ज्यादा है। स्टेक करने वालों को आज सालाना करीब 2.6% रिटर्न मिल रहा है, यानी जो रिटर्न पहले कई जगह 3% से 4.5% बताया जाता था, वह अब कम है।
स्टेक किया गया ETH बाजार में बिकने के लिए उपलब्ध नहीं होता, इसलिए इससे उपलब्ध सप्लाई कम हो जाती है। लेकिन इसे सिर्फ अच्छी बात न मानें, क्योंकि यही रकम वापस भी आ सकती है। फिलहाल एग्जिट क्यू में करीब 8 लाख ETH हैं और निकलने का इंतजार करीब दो हफ्ते का है। वहीं एंट्री क्यू में करीब 14 लाख ETH हैं, जहां इंतजार तीन हफ्ते से ज्यादा है। यानी अभी स्टेकिंग में आने वाले ETH ज्यादा हैं, निकलने वाले कम।
सप्लाई का गणित: क्या ETH की सप्लाई घट रही है?
कुछ साल पहले यह कहा जाता था कि Ethereum पर जितना ETH बनता है उससे ज्यादा जल जाता है, इसलिए सप्लाई घटती जाएगी। इसी को "अल्ट्रासाउंड मनी" कहा गया। वह बात उस समय सही थी, लेकिन अब वैसी नहीं रही।
वजह वही लेयर 2 है। ज्यादातर गतिविधि वहां चली गई, इसलिए मेननेट पर मिलने वाली फीस घटी, और उसी फीस से ETH जलता है। नतीजा यह है कि अब रोज जितना ETH स्टेकर्स को मिलता है, उससे कम जलता है। अलग-अलग अनुमानों के मुताबिक सप्लाई अब करीब 0.2% से 0.8% सालाना की धीमी रफ्तार से बढ़ रही है। यह दर मापने की अवधि पर निर्भर करती है।
यह हालत हमेशा के लिए नहीं है। जब मेननेट पर भीड़ बढ़ती है, तो जलने वाला ETH बढ़ जाता है और सप्लाई फिर घटने लगती है। यानी ETH की सप्लाई स्थिर नहीं है, वह नेटवर्क की गतिविधि के साथ बदलती रहती है।
आगे क्या? Glamsterdam अपग्रेड
Ethereum का अगला बड़ा अपग्रेड Glamsterdam है। यह 6 अक्टूबर 2026 को Sepolia टेस्टनेट पर चालू हो चुका है। इसके दो मुख्य बदलाव हैं: ePBS, जो ब्लॉक बनाने की व्यवस्था को बदलता है, और ब्लॉक-लेवल एक्सेस लिस्ट्स, जो ट्रांज़ैक्शन को एक साथ प्रोसेस करने में मदद करती हैं। टेस्टनेट पर ब्लॉक की गैस लिमिट करीब 200 million तक गई, जबकि मेननेट पर यह अभी 60 million है।
लेकिन मेननेट के लिए अभी कोई तारीख तय नहीं हुई है। Ethereum Foundation सिर्फ चौथी तिमाही यानी 2026 के आखिर तक का लक्ष्य बताती है। टेस्टनेट की घोषणा में ETH होल्डर्स के लिए कुछ करने की जरूरत भी नहीं बताई गई है। यानी तारीख टल भी सकती है, और अभी इसे पक्का मान लेना ठीक नहीं होगा।
Ethereum और Bitcoin में क्या फर्क है?
Bitcoin का मकसद मुख्य रूप से डिजिटल पैसे और "डिजिटल गोल्ड" की तरह काम करना है। उसकी सप्लाई 21 million पर तय है और वह माइनिंग से चलता है। Ethereum एक प्लेटफॉर्म है, जिस पर ऐप और टोकन बनते हैं। उसकी सप्लाई की कोई तय सीमा नहीं है और वह प्रूफ ऑफ स्टेक पर चलता है। दोनों एक-दूसरे के मुकाबले में नहीं, बल्कि अलग-अलग काम के लिए बने हैं।
भारत में Ethereum (ETH) कैसे खरीदें?
CoinDCX जैसे भारत में रजिस्टर्ड क्रिप्टो एक्सचेंज पर अकाउंट बनाएं और KYC पूरा करें।
UPI या बैंक ट्रांसफर से अपने INR वॉलेट में पैसे जोड़ें।
ETH/INR जोड़ी चुनें और तय रकम का ऑर्डर लगाएं। लिमिट ऑर्डर से आप अपनी पसंद की कीमत तय कर सकते हैं।
अगर आप ETH लंबे समय के लिए रखना चाहते हैं, तो उसे अपने पर्सनल वॉलेट में भेजने के बारे में सोचें। इससे आपका ETH एक्सचेंज के भरोसे नहीं रहता। इसके बारे में आप सेल्फ-कस्टडी वाली खबर और Ethereum Wallet गाइड में पढ़ सकते हैं।
एक गलती सबसे आम है। लेयर 2 का अपना अलग पता और अलग नेटवर्क होता है, और वहां भेजा गया टोकन उसी नेटवर्क पर रहता है। इसलिए पैसे भेजने से पहले नेटवर्क और पता दोनों दोबारा जांच लें।
भारत में क्रिप्टो से हुए मुनाफे पर 30% फ्लैट टैक्स लगता है और नुकसान को दूसरे मुनाफे से घटाया नहीं जा सकता। इसके अलावा तय सीमा से ऊपर के ट्रांज़ैक्शन पर 1% TDS भी कटता है। ये नियम ETH पर भी वैसे ही लागू होते हैं जैसे किसी दूसरे टोकन पर।
Ethereum में अब भी क्या जोखिम हैं?
तस्वीर एकतरफा न रहे, इसलिए जोखिम भी जान लीजिए।
पहला, कीमत का जोखिम। ETH अपने सबसे ऊंचे स्तर से करीब आधा है और हाल में कीमत $2,500 के आसपास आकर कमजोर पड़ी है। FXStreet के मुताबिक ETH ईटीएफ से लगातार सात कारोबारी दिनों में करीब $565 million बाहर निकले हैं।
दूसरा, स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट का जोखिम। Ethereum पर चलने वाले प्रोग्राम इंसान लिखते हैं और उनमें खामी रह सकती है, जिससे उन पर रखा पैसा जा सकता है। यह जोखिम नेटवर्क का नहीं, उस खास ऐप का होता है।
तीसरा, लेयर 2 का जोखिम। इनमें से कई अब भी कुछ हद तक केंद्रीय नियंत्रण रखते हैं, इसलिए इन्हें मुख्य Ethereum नेटवर्क जितना सुरक्षित मान लेना गलत होगा।
चौथा, स्टेकिंग में पैसा फंसने का जोखिम। स्टेक किया हुआ ETH तुरंत नहीं निकलता, और ऊपर बताई गई कतारों की वजह से इंतजार हफ्तों का हो सकता है, जो जरूरत के समय मायने रखता है।
आपके लिए इसका क्या मतलब है?
अगर आपने फीस के डर से Ethereum से दूरी बनाई थी, तो वह वजह अब काफी हद तक खत्म हो चुकी है, और आप खुद किसी एक्सप्लोरर पर मौजूदा फीस देखकर इसे जांच सकते हैं। लेकिन फीस कम होने का मतलब यह नहीं कि कीमत बढ़ेगी, क्योंकि ETH अभी भी बहुत उतार-चढ़ाव वाली एसेट है।
अगर आप निवेश करने की सोच रहे हैं, तो एक साथ बड़ी रकम लगाने से बचें और सिर्फ वही पैसा लगाएं जिसे खोने का नुकसान आप झेल सकें। Glamsterdam जैसे अपग्रेड की खबरों पर नजर रखें, पर उनकी तारीख पर भरोसा तभी करें जब वह आधिकारिक रूप से तय हो। ETH की कीमत के अनुमान के लिए आप हमारा Ethereum Price Prediction पेज भी देख सकते हैं।
Glossary
स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट (Smart Contract) नेटवर्क पर चलने वाला ऑटोमैटिक प्रोग्राम, जिस पर टोकन और ऐप खड़े होते हैं।
गैस फीस (Gas) नेटवर्क पर कोई भी काम कराने के लिए दी जाने वाली फीस।
लेयर 2 (Layer 2) सहायक नेटवर्क, जो ट्रांज़ैक्शन अपने यहां निपटाकर उनका सार मुख्य नेटवर्क पर दर्ज करता है।
स्टेकिंग (Staking) नेटवर्क की सुरक्षा के लिए ETH जमा करना, जिस पर रिटर्न मिलता है।
वैलिडेटर (Validator) स्टेक किए गए ETH के बदले ब्लॉक की जांच और पुष्टि करने वाला नेटवर्क पार्टिसिपेंट।
बर्न (Burn) फीस का वह हिस्सा जो हमेशा के लिए हटा दिया जाता है।
निष्कर्ष
इस विषय पर सबसे काम की बात यही है कि Ethereum की जानकारी जल्दी पुरानी हो जाती है। इसके फाउंडर Vitalik Buterin ने जो आइडिया 2013 में लिखा था, वह आज स्टेबलकॉइन, डीफाई और टोकनाइजेशन की बुनियाद बन चुका है। दो-तीन साल में फीस कई गुना घटी, ज्यादातर गतिविधि लेयर 2 पर चली गई और सप्लाई का गणित भी बदल गया। इसलिए Ethereum के बारे में कुछ भी पढ़ते समय सबसे पहले उसकी तारीख देखें। इसकी बुनियादी समझ के लिए क्रिप्टोकरेंसी क्या है और कैसे काम करती है वाला लेख भी काम आएगा।
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अस्वीकरण
यह लेख एजुकेशनल पर्पस से लिखा गया है और किसी टोकन की खरीद-बिक्री की सिफारिश नहीं करता। यहां दिए आंकड़े 9 अक्टूबर 2026 तक की स्थिति दिखाते हैं, और यह क्षेत्र तेजी से बदलता है, इसलिए इस्तेमाल से पहले मौजूदा स्थिति खुद जांच लें।