भारत में क्रिप्टो फ्यूचर्स का जलवा, 80% ट्रेडिंग वॉल्यूम डेरिवेटिव में

Published at
भारत में क्रिप्टो फ्यूचर्स का दबदबा

क्रिप्टो ट्रेडिंग का बदल रहा स्वरुप, 80% Volume अब फ्यूचर्स में 

भारत में क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब घरेलू क्रिप्टो एक्सचेंजों पर कुल ट्रेडिंग वॉल्यूम का लगभग 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा फ्यूचर्स (डेरिवेटिव) ट्रेडिंग से आ रहा है, जबकि स्पॉट ट्रेडिंग की हिस्सेदारी लगातार घट रही है।

उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह भारत का सख्त Crypto Tax ढांचा है। कई ट्रेडर्स टैक्स बोझ कम करने की उम्मीद में स्पॉट ट्रेडिंग की बजाय फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स का विकल्प चुन रहे हैं।

रिपोर्ट में क्या सामने आया?

Moneycontrol Report के अनुसार CoinDCX, Mudrex, CoinSwitch और Giottus जैसे प्रमुख भारतीय क्रिप्टो एक्सचेंजों ने पिछले एक वर्ष में क्रिप्टो परपेचुअल फ्यूचर्स लॉन्च किए हैं। इन प्लेटफॉर्म्स पर फ्यूचर्स ट्रेडिंग का वॉल्यूम स्पॉट मार्केट की तुलना में कहीं अधिक तेजी से बढ़ा है।

Mudrex के सह-संस्थापक और सीईओ एडुल पटेल के अनुसार, उनके प्लेटफॉर्म पर फ्यूचर्स ट्रेडिंग का वॉल्यूम स्पॉट ट्रेडिंग की तुलना में चार से पांच गुना अधिक है।

वहीं CoinDCX के सीईओ सुमित गुप्ता ने भी स्वीकार किया कि उनके एक्सचेंज के कुल ट्रेडिंग वॉल्यूम का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अब डेरिवेटिव ट्रेडिंग से आता है।

शेयर बाजार के F&O ट्रेडर्स भी बढ़ा रहे हैं मांग

क्रिप्टो एजुकेशन प्लेटफॉर्म Bitinning के संस्थापक काशिफ रज़ा के अनुसार, इस तेजी के पीछे केवल टैक्स कारण नहीं हैं।

उनका कहना है कि शेयर बाजार में पहले से F&O (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) ट्रेडिंग करने वाले निवेशक और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स अब उसी अनुभव के साथ क्रिप्टो डेरिवेटिव मार्केट में भी सक्रिय हो रहे हैं। वे पहले से लीवरेज और जोखिम-रिवॉर्ड रणनीति से परिचित हैं, जिससे फ्यूचर्स ट्रेडिंग को तेजी से अपनाया जा रहा है।

टैक्स आर्बिट्राज क्यों बन रहा है बड़ा कारण?

भारत में वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) पर आयकर अधिनियम की धारा 115BBH के तहत क्रिप्टो मुनाफे पर 30 प्रतिशत फ्लैट टैक्स लगाया जाता है।

इस व्यवस्था में:

  • नुकसान को अन्य आय से समायोजित (Set-Off) नहीं किया जा सकता।

  • नुकसान को अगले वर्षों में Carry Forward करने की अनुमति नहीं है।

  • धारा 194S के तहत निर्धारित सीमा से ऊपर प्रत्येक स्पॉट ट्रांजैक्शन पर 1 प्रतिशत TDS भी लागू होता है।

इसी वजह से कई ट्रेडर्स ऐसे विकल्प तलाश रहे हैं जिनमें टैक्स बोझ अपेक्षाकृत कम हो।

फ्यूचर्स ट्रेडिंग को लेकर बना हुआ है कानूनी ग्रे एरिया

उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि क्रिप्टो फ्यूचर्स और अन्य डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स को अभी तक VDA के "ट्रांसफर" की परिभाषा में स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया गया है।

इसी आधार पर कुछ ट्रेडर्स इन्हें Business Income मानकर अपनी आयकर स्लैब दर के अनुसार रिपोर्ट कर रहे हैं। इससे उन्हें 30 प्रतिशत फ्लैट टैक्स और 1 प्रतिशत TDS दोनों से राहत मिलने की उम्मीद रहती है।

हालांकि टैक्स विशेषज्ञ इसे स्पष्ट कानूनी प्रावधान नहीं बल्कि एक ग्रे एरिया मानते हैं। भविष्य में नियमों की व्याख्या या संशोधन के आधार पर इसकी स्थिति बदल सकती है। इसलिए इस रणनीति को अपनाने से पहले योग्य टैक्स सलाहकार से परामर्श लेना आवश्यक है।

सिर्फ टैक्स नहीं, भारी लीवरेज भी है बड़ी वजह

Mudrex के एडुल पटेल के अनुसार, ट्रेडर्स के लिए केवल टैक्स बचत ही आकर्षण नहीं है।

फ्यूचर्स ट्रेडिंग में कई एक्सचेंज 25X से 100X तक लीवरेज उपलब्ध करा रहे हैं। इसके अलावा सैकड़ों क्रिप्टो टोकनों में Long और Short दोनों प्रकार की पोजीशन लेने की सुविधा मिलती है, जिससे कम पूंजी में बड़े दांव लगाए जा सकते हैं।

हालांकि अधिक लीवरेज संभावित लाभ बढ़ाने के साथ-साथ नुकसान का जोखिम भी कई गुना बढ़ा देता है।

नितिन कामथ ने भी जताई चिंता

जेरोधा के सह-संस्थापक नितिन कामथ ने भी इस ट्रेंड पर चिंता व्यक्त की है।

उन्होंने अपनी LinkedIn पोस्ट में लिखा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि भारत में क्रिप्टो F&O इतनी तेजी से लोकप्रिय हो जाएगा। उनके अनुसार भारी लीवरेज और संभावित टैक्स बचत का यह संयोजन निवेशकों के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।

कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि कुछ ट्रेडर्स कम आय वाले परिवारजनों के नाम पर ट्रेडिंग कर टैक्स देनदारी कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

CBDT की बढ़ी निगरानी

फिलहाल भारतीय क्रिप्टो एक्सचेंज किसी समर्पित क्रिप्टो नियामक ढांचे के अंतर्गत नहीं आते और उन्हें अपने ट्रेडिंग डेटा को सार्वजनिक करना अनिवार्य नहीं है।

रिपोर्टों के अनुसार केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने अब क्रिप्टो डेरिवेटिव सेक्टर की जांच शुरू कर दी है। बोर्ड VDA की व्यापक परिभाषा को लेकर स्पष्टता तलाश रहा है। माना जा रहा है कि यह भविष्य में सख्त नियामकीय व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

इसके अलावा पिछले वर्ष जुलाई से एक्सचेंज ट्रेडिंग फीस पर 18 प्रतिशत GST भी लागू किया जा चुका है, जिससे ट्रेडिंग लागत और बढ़ गई है।

घरेलू एक्सचेंज सरकार से क्या मांग कर रहे हैं?

CoinDCX, Mudrex और CoinSwitch सहित कई Indian Crypto Exchange सरकार से टैक्स नियमों में बदलाव की मांग कर रहे हैं।

उनकी प्रमुख मांगें हैं:

  • 1 प्रतिशत TDS को घटाकर 0.01 प्रतिशत किया जाए।

  • ट्रेडिंग नुकसान को Set-Off और Carry Forward करने की अनुमति मिले।

  • VDA को अन्य पूंजीगत परिसंपत्तियों के समान टैक्स व्यवस्था में शामिल किया जाए।

उद्योग का तर्क है कि मौजूदा टैक्स ढांचा निवेशकों को स्पॉट मार्केट से दूर कर अपेक्षाकृत अधिक जोखिम वाले डेरिवेटिव और विदेशी प्लेटफॉर्म्स की ओर धकेल रहा है।

कन्क्लूज़न

भारत में क्रिप्टो फ्यूचर्स ट्रेडिंग तेजी से मुख्यधारा बनती जा रही है। टैक्स नियमों, ऊंचे लीवरेज और डेरिवेटिव उत्पादों की बढ़ती उपलब्धता ने ट्रेडर्स की प्राथमिकताओं को बदल दिया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्स से जुड़े ग्रे एरिया और अत्यधिक लीवरेज को देखते हुए निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि भविष्य में नियामकीय और कर संबंधी नियमों में बदलाव संभव है।

इसी तरह की Latest Crypto News पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए। 

अस्वीकरण

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। इसे निवेश, वित्तीय या टैक्स सलाह न माना जाए। क्रिप्टोकरेंसी तथा फ्यूचर्स/डेरिवेटिव ट्रेडिंग अत्यधिक जोखिमपूर्ण और अस्थिर हो सकती है। किसी भी निवेश या टैक्स संबंधी निर्णय से पहले सेबी-पंजीकृत निवेश सलाहकार, योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट या संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

लेखक परिचय
Ronak Ghatiya Hindi News Writer

Ronak Ghatiya एक उभरते हुए क्रिप्टो कंटेंट राइटर हैं, जिनका एजुकेशन और टेक्नोलॉजी में मजबूत बैकग्राउंड रहा है। उन्होंने पिछले 6 वर्ष में फाइनेंस, ब्लॉकचेन, Web3 और डिजिटल एसेट्स जैसे विषयों पर डेटा-ड्रिवन और SEO-अनुकूल कंटेंट लिखा है, जो नए और प्रोफेशनल रीडर्स दोनों के लिए उपयोगी साबित हुआ है। रोनक की लेखनी का फोकस जटिल तकनीकी टॉपिक्स को आसान भाषा में समझाना है, जिससे क्रिप्टो स्पेस में ट्रस्ट और क्लैरिटी बनी रहे। उन्होंने CoinGabbar.com, Medium और अन्य क्रिप्टो प्लेटफ़ॉर्म्स के लिए ब्लॉग्स और न्यूज़ स्टोरीज़ लिखी हैं, जिनमें क्रिएटिविटी और रिसर्च का संतुलन होता है। रोनक की स्टाइल डिटेल-ओरिएंटेड और रिस्पॉन्सिव है, और वह तेजी से बदलते क्रिप्टो परिदृश्य में एक विश्वसनीय आवाज़ बनने की ओर अग्रसर हैं। LinkedIn पर प्रोफ़ाइल देखें या उनके आर्टिकल्स यहाँ पढ़ें।

Leave a comment
faq Explore Our FAQs

Find quick answers to commonly asked questions and understand how things work around here.

भारत में Crypto Futures Trading तेजी से लोकप्रिय हो रही है क्योंकि कई ट्रेडर्स इसे स्पॉट ट्रेडिंग की तुलना में अधिक लचीला और संभावित रूप से टैक्स-कुशल विकल्प मानते हैं। इसके अलावा, हाई लीवरेज, Long और Short दोनों पोजीशन लेने की सुविधा तथा नए डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स की उपलब्धता भी इसकी मांग बढ़ा रही है।
उद्योग रिपोर्टों के अनुसार, भारत के प्रमुख Crypto Exchanges पर कुल ट्रेडिंग वॉल्यूम का लगभग 70% से 80% हिस्सा अब Futures (Derivatives) Trading से आता है। वहीं Spot Trading की हिस्सेदारी लगातार कम होती जा रही है।
भारत में क्रिप्टो मुनाफे पर 30% फ्लैट टैक्स और स्पॉट ट्रांजैक्शन पर लागू 1% TDS के कारण कई ट्रेडर्स Futures Contracts की ओर रुख कर रहे हैं। हालांकि Futures Trading की टैक्स स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, इसलिए इससे जुड़े किसी भी निर्णय से पहले टैक्स विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।
Crypto Futures और अन्य Derivative Contracts की टैक्स व्यवस्था को लेकर फिलहाल कानूनी स्पष्टता नहीं है। कुछ ट्रेडर्स इन्हें Business Income के रूप में रिपोर्ट करते हैं, लेकिन टैक्स विशेषज्ञ इसे एक कानूनी 'ग्रे एरिया' मानते हैं और भविष्य में नियम बदल सकते हैं।
Futures Trading में कम पूंजी के साथ High Leverage, Long और Short दोनों प्रकार की ट्रेडिंग तथा कई टोकनों में ट्रेड करने की सुविधा मिलती है। वहीं Spot Trading पर लागू टैक्स और TDS के कारण कई निवेशक Futures को अधिक आकर्षक विकल्प मान रहे हैं।