चर्चा में आए Karnataka Bitcoin Scam मामले ने, एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। इस मामले की जांच ईडी के नेतृत्व में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) कर रही है। राज्य सरकार के गृह मंत्री Priyank Kharge ने कहा है कि, सरकार मौजूदा कैबिनेट सब-कमेटी के पुनर्गठन की आवश्यकता पर विचार करेगी। दरअसल यह मामला 2017 के Unocoin Bitcoin चोरी और उसके बाद हुए कथित अवैध लेन-देन से जुड़ा हुआ है, जिसमें करोड़ों रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग और डिजिटल एसेट्स के दुरुपयोग के आरोप सामने आए हैं।
Karnataka के गृह मंत्री Priyank Kharge ने बयान दिया कि, ईडी से जुड़ा मामला राज्य सरकार के प्रत्यक्ष अधिकार क्षेत्र में नहीं आता, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर पहले बनाई गई कैबिनेट सब-कमेटी की भूमिका की समीक्षा की जाएगी।
Kharge ने कहा कि यह देखा जाएगा कि, क्या मौजूदा स्थिति में इस समिति को फिर से गठित करने या पुनर्गठित करने की आवश्यकता है। सरकार का मानना है कि जांच एजेंसियों के साथ समन्वय और प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने के लिए समिति की संरचना महत्वपूर्ण हो सकती है। यह निर्णय आगे कैबिनेट बैठक में चर्चा के बाद लिया जाएगा।
यह मामला मुख्य रूप से 2017 के Unocoin Bitcoin घोटाले से जुड़ा है, जो अब व्यापक रूप से Karnataka Bitcoin Scam के नाम से चर्चा में आया है। जिसमें आरोप है कि क्रिप्टोकरेंसी को अवैध तरीके से Indian Currency में बदला गया और करोड़ों रुपये का हेरफेर किया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार अंतरराष्ट्रीय हैकर Srikrishna Ramesh उर्फ “श्रीकी” इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड है। उसके साथ अकाउंटेंट Robin Khandelwal का भी नाम सामने आया है।
स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने अपनी चार्जशीट में कांग्रेस नेता Mohammed Haris Nalapad का नाम भी दर्ज किया है, जो शांतिनगर से विधायक N A Haris के बेटे हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि, कई संदिग्ध ट्रांजेक्शन के माध्यम से Bitcoin को कैश में बदलने की प्रक्रिया में, इन नामों की भूमिका सामने आई है। ईडी द्वारा कई बार समन जारी किए गए हैं और डिजिटल सबूत भी जब्त किए गए हैं।
Unocoin Bitcoin भारत के शुरुआती क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों में से एक है, जिसे 2013 में लॉन्च किया गया था। इसे “शुरुआती Crypto Exchange इसलिए कहा जाता है, क्योंकि उस समय भारत में बहुत कम प्लेटफॉर्म थे जो Bitcoin जैसी डिजिटल करेंसी की खरीद-बिक्री की सुविधा देते थे। Unocoin के माध्यम से लोग आसानी से रुपये में Bitcoin Blockchain खरीद सकते थे, बेच सकते थे और उसे डिजिटल वॉलेट में स्टोर भी कर सकते थे। यह भारत में क्रिप्टो निवेश को लोकप्रिय बनाने वाले शुरुआती प्लेटफॉर्म्स में शामिल रहा।
इस मामले के साथ-साथ कर्नाटक की राजनीति भी गरमा गई है, खासकर Karnataka Bitcoin Scam को लेकर विपक्ष और सरकार आमने-सामने हैं। गृह मंत्री Priyank Kharge ने यह भी कहा कि, सरकार जनता के हितों और प्रशासनिक पारदर्शिता के आधार पर निर्णय लेगी।
वहीं Bidadi Township Project को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी जारी है। इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने विपक्षी नेता H D Kumaraswamy पर निशाना साधा और कहा कि किसी भी प्रोजेक्ट का विरोध या समर्थन राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं बल्कि जनहित के आधार पर होना चाहिए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि, यदि स्थानीय जनता किसी परियोजना का विरोध करती है, तो सरकार उस पर पुनर्विचार कर सकती है। साथ ही पुलिस कर्मियों की साप्ताहिक छुट्टी और कार्य-तनाव जैसे मुद्दों पर भी सरकार संवेदनशील रवैया अपनाने की बात कही गई है।
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Karnataka Bitcoin Scam मामला केवल, एक आर्थिक अपराध तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक समीक्षा और राजनीतिक बहस का भी केंद्र बन चुका है। सरकार अब इस मामले में जांच एजेंसियों के साथ तालमेल और आंतरिक समितियों की भूमिका को फिर से परखने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
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