Maharashtra DELTA Act: जल्द ही सामने आ सकता है क़ानून का Draft
महाराष्ट्र DELTA Act क्या है और क्यों है चर्चा में?
महाराष्ट्र सरकार Maharashtra DELTA Act (Maharashtra Digitisation and Exchange of Land Token Assets Act) नाम से एक नया कानून लाने की तैयारी कर रही है, जिसका उद्देश्य Blockchain Property Tokenisation के लिए कानूनी ढांचा तैयार करना है। यदि यह कानून लागू होता है, तो महाराष्ट्र ऐसा करने वाला भारत का पहला राज्य बन सकता है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अधिकारियों को इस प्रस्तावित कानून का मसौदा तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का मानना है कि इस पहल से भूमि और अन्य अचल संपत्तियों की छिपी हुई आर्थिक क्षमता (Latent Value) को उपयोग में लाया जा सकेगा, जिससे संपत्ति मालिकों और राज्य—दोनों को लाभ मिल सकता है।
Expert Committee तैयार करेगी DELTA Act का Draft
सह्याद्री गेस्ट हाउस में आयोजित एक उच्च-स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने Urban Development तथा Law & Judiciary विभागों को निर्देश दिया कि वे एक विशेषज्ञ समिति गठित करें।
इस समिति में निम्न संस्थानों के प्रतिनिधियों को शामिल करने का प्रस्ताव है:
Securities and Exchange Board of India (SEBI)
Bombay Stock Exchange (BSE)
National Stock Exchange (NSE)
Blockchain, कानून और वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञ
Business Standard की रिपोर्ट के अनुसार, समिति प्रस्तावित कानून का विस्तृत प्रारूप तैयार करेगी और अंतरराष्ट्रीय मॉडल, भारतीय नियमों तथा तकनीकी पहलुओं का अध्ययन करेगी।
Blockchain Property Tokenisation कैसे काम करेगा?
सरल शब्दों में समझें तो Property Tokenisation या RWA Tokenization का अर्थ किसी भूमि या संपत्ति के आर्थिक मूल्य को Blockchain पर डिजिटल टोकनों के रूप में दर्शाना है।
यदि प्रस्तावित ढांचा लागू होता है, तो किसी संपत्ति को उसकी कुल वैल्यू के आधार पर छोटे-छोटे डिजिटल हिस्सों (Tokens) में विभाजित किया जा सकता है। इन टोकनों के माध्यम से लेनदेन उसी प्रकार संभव हो सकता है जैसे शेयर बाजार में किसी कंपनी के शेयर खरीदे और बेचे जाते हैं।
हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि महाराष्ट्र सरकार का यह प्रस्ताव अभी केवल प्रारंभिक मसौदा (Draft Stage) में है और इसकी अंतिम संरचना भविष्य में बदल सकती है।
सरकार को क्या फायदे दिखाई दे रहे हैं?
मुख्यमंत्री फडणवीस के अनुसार, प्रस्तावित महाराष्ट्र DELTA Act से कई संभावित लाभ सामने आ सकते हैं।
इनमें प्रमुख हैं:
संपत्ति लेनदेन को अधिक पारदर्शी बनाना।
Ownership Records की सुरक्षा मजबूत करना।
Property Transactions की प्रक्रिया को तेज करना।
Mortgage Financing को अधिक डिजिटल और कुशल बनाना।
संपत्ति मालिकों को अपनी निष्क्रिय (Untapped) संपत्ति का आर्थिक उपयोग करने का अवसर देना।
महाराष्ट्र के 2030 तक 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को समर्थन देना।
सरकार का मानना है कि डिजिटल ढांचा बनने से प्रशासनिक प्रक्रियाओं में भी सुधार हो सकता है।
सबसे बड़ी चुनौती: Tax Rules अभी भी स्पष्ट नहीं
प्रस्तावित कानून के सामने सबसे बड़ा प्रश्न Tax Treatment को लेकर है।
भारत के Income-tax Act, 2025 में Virtual Digital Assets (VDA) की परिभाषा अपेक्षाकृत व्यापक रखी गई है, जिसमें Tokenised Assets और Web3 Assets भी शामिल हो सकते हैं।
यदि भविष्य में Property Tokens को VDA माना जाता है, तो उन पर संभावित रूप से:
Section 115BBH के तहत 30% टैक्स,
Loss Set-off की अनुमति नहीं,
तथा Section 194S के तहत 1% TDS
जैसे प्रावधान लागू हो सकते हैं।
दूसरी ओर, पारंपरिक रियल एस्टेट लेनदेन पहले से Capital Gains Tax Framework के अंतर्गत आते हैं, जहां Holding Period, LTCG/STCG और कुछ मामलों में Indexation जैसे प्रावधान लागू होते हैं।
फिलहाल सरकार या किसी आधिकारिक दस्तावेज में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि Tokenised Property पर भविष्य में कौन-सा Tax Regime लागू होगा।
राज्य और केंद्र के अधिकारों का भी है सवाल
भूमि और संपत्ति भारत के संविधान की State List के अंतर्गत आते हैं, इसलिए महाराष्ट्र सरकार इस विषय पर राज्य कानून बना सकती है।
लेकिन Income Tax पूरी तरह Union List का विषय है। इसका अर्थ है कि महाराष्ट्र सरकार अपने राज्य कानून के माध्यम से केंद्र के Tax Rules में बदलाव नहीं कर सकती।
यदि Property Tokens के Tax Treatment में कोई विशेष व्यवस्था करनी होगी, तो उसके लिए केंद्र सरकार को अलग से कानूनी संशोधन करना पड़ सकता है।
Regulatory Overlap भी बन सकता है चुनौती
प्रस्तावित Expert Committee में SEBI, BSE और NSE को शामिल करने से यह संकेत मिलता है कि Property Tokens को भविष्य में किसी वित्तीय साधन (Financial Instrument) के रूप में भी देखा जा सकता है।
हालांकि, रियल एस्टेट क्षेत्र पहले से RERA जैसे नियामकों के अंतर्गत आता है। ऐसे में भविष्य में विभिन्न नियामक संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) को लेकर स्पष्ट व्यवस्था आवश्यक हो सकती है।
फिलहाल इस विषय पर कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
अंतरराष्ट्रीय मॉडल का भी होगा अध्ययन
मुख्यमंत्री फडणवीस ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि Draft तैयार करने से पहले दुनिया के विभिन्न देशों में लागू Asset Tokenisation Frameworks, कानूनों और नियामकीय व्यवस्थाओं का अध्ययन किया जाए।
यह संकेत देता है कि वैश्विक स्तर पर भी Property Tokenisation के लिए अभी तक कोई एक समान और व्यापक रूप से स्वीकार किया गया मॉडल उपलब्ध नहीं है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल महाराष्ट्र DELTA Act केवल Draft Stage में है।
आगे की संभावित प्रक्रिया में शामिल होंगे:
Expert Committee का गठन
कानून का प्रारूप तैयार होना
संबंधित विभागों द्वारा समीक्षा
महाराष्ट्र विधानसभा में विधेयक पेश होना
विधेयक पारित होने के बाद ही कानून लागू होना
इस पूरी प्रक्रिया में कई महीने लग सकते हैं और अंतिम कानून वर्तमान प्रस्ताव से अलग भी हो सकता है।
कन्क्लूजन
महाराष्ट्र DELTA Act भारत में Blockchain आधारित Property Tokenisation की दिशा में एक महत्वपूर्ण नीति पहल हो सकती है। यदि यह कानून लागू होता है, तो राज्य डिजिटल रियल एस्टेट ढांचे के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा सकता है। हालांकि, Tax Treatment, Regulatory Coordination और केंद्रीय कानूनों के साथ तालमेल जैसे कई महत्वपूर्ण प्रश्न अभी अनसुलझे हैं। इसलिए इस प्रस्ताव को अंतिम कानून बनने तक एक प्रारंभिक नीति पहल के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
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अस्वीकरण: यह समाचार लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सरकारी बयानों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। DELTA Act फिलहाल केवल मसौदा (Draft) चरण में है और इसके अंतिम प्रावधान समय के साथ बदल सकते हैं। यह सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से है और इसे निवेश, कानूनी या कर संबंधी सलाह नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी वित्तीय या कानूनी निर्णय से पहले योग्य वित्तीय सलाहकार, कर विशेषज्ञ या विधिक सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।
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