भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में लाखों लोगों तक पहुंचे दो नाम, Treasure NFT और Nova NFT, अक्सर एक ही सांस में लिए जाते हैं। कोई इन्हें प्रतिद्वंद्वी समझता है, कोई एक को दूसरे का 'सुधरा हुआ' वर्ज़न बताता है। लेकिन जब दोनों के मॉडल, वादों और नतीजों को आमने-सामने रखा जाए, तो तस्वीर बिल्कुल अलग दिखती है: यह दो अलग प्रोजेक्ट नहीं, एक ही पटकथा के दो मंचन हैं। इस तुलनात्मक गाइड में हम दोनों को कसौटी-दर-कसौटी परखेंगे।
Treasure NFT ने खुद को AI-आधारित NFT 'flipping' प्लेटफॉर्म बताया, जहां एल्गोरिथम सस्ते NFT खरीदकर महंगे बेचता है और यूज़र को रोज़ाना तयशुदा मुनाफा मिलता है। Nova NFT की कहानी भी लगभग शब्दश: यही रही, NFT ट्रेडिंग से रोज़ का फिक्स रिटर्न। अब बुनियादी सवाल: असली NFT बाजार में कीमतें बेहद अस्थिर होती हैं और खुले मार्केटप्लेस पर हर सौदा सार्वजनिक ब्लॉकचेन पर दर्ज होता है। रोज़ाना गारंटीड रिटर्न और गुप्त ट्रेडिंग, ये दोनों चीज़ें असली NFT कारोबार में संभव ही नहीं हैं। यानी पहली कसौटी पर ही दोनों का दावा एक जैसा और एक जैसा खोखला निकलता है।
दोनों प्लेटफॉर्म की असली ताकत तकनीक नहीं, रेफरल चेन रही। मल्टी-लेवल कमीशन, टीम बनाने पर बोनस, ऑफलाइन मीटिंग्स और WhatsApp ग्रुप्स का प्रचार तंत्र, यह ढांचा NFT का नहीं, चेन-मार्केटिंग का है। पश्चिम बंगाल पुलिस ने तो Treasure NFT को लेकर सार्वजनिक चेतावनी तक जारी की थी कि यह संभावित पोंज़ी स्कीम है। Nova NFT उसी रास्ते पर चला, जिसकी शिकायतों और सबूतों की पूरी फाइल हम Nova NFT Scam जांच रिपोर्ट में दर्ज कर चुके हैं।
पटकथा का तीसरा अंक भी दोनों जगह एक जैसा चला: पहले छोटे withdrawal आसानी से होते रहे, भरोसा बना, बड़ी रकम आई, और फिर निकासी पर शर्तें, फीस और बार-बार बढ़ती तारीखें शुरू हो गईं। Treasure NFT के withdrawal संकट की मौजूदा स्थिति Treasure NFT Withdrawal की हकीकत वाले लेख में विस्तार से पढ़ी जा सकती है। साथ में TUFT जैसे टोकन और BlackRock अधिग्रहण जैसी अफवाहें भी आईं, जो डूबते भरोसे को थामने के हथकंडे साबित हुईं। TUFT की असलियत TUFT Token की पूरी जानकारी में दी गई है।
इन दोनों मामलों से एक सार्वभौमिक चेकलिस्ट निकलती है। पहली, रोज़ाना या साप्ताहिक गारंटीड रिटर्न का वादा। दूसरी, कमाई का मुख्य ज़रिया नए लोगों की भर्ती। तीसरी, गुमनाम टीम और अपंजीकृत कंपनी। चौथी, सिर्फ प्लेटफॉर्म के डैशबोर्ड में दिखने वाली 'होल्डिंग' जो किसी सार्वजनिक ब्लॉकचेन पर दर्ज नहीं। पांचवीं, निकासी में शर्तों और फीस की एंट्री। इनमें से दो भी दिखें, तो समझ लीजिए कि अगली पटकथा शुरू हो चुकी है, नाम चाहे कुछ भी हो।
दोनों प्लेटफॉर्म के प्रभावित निवेशकों के लिए रास्ता एक ही है: नया पैसा या 'unlock fee' बिल्कुल न दें, सारे ट्रांजैक्शन प्रूफ और चैट सुरक्षित करें, और National Cyber Crime Portal या 1930 हेल्पलाइन पर जल्द से जल्द शिकायत दर्ज करें। साथ ही अनियमित जमा योजनाओं पर RBI की चेतावनियों को पढ़कर परिवार को भी जागरूक करें, क्योंकि ऐसी स्कीमें सबसे पहले करीबी रिश्तों के भरोसे में सेंध लगाती हैं।
हर पुराने प्लेटफॉर्म के डूबने के बाद उसका प्रमोटर नेटवर्क एक 'नया और सुधरा' विकल्प लेकर आता है, क्योंकि उनका असली प्रोडक्ट NFT नहीं, आपका भरोसा है। नाम बदलने से मॉडल नहीं बदलता, और मॉडल ही समस्या है।
NFT Flipping: NFT को सस्ते में खरीदकर महंगे बेचने का दावा।
Ponzi Scheme: नए निवेशकों के पैसे से पुराने को रिटर्न देने वाली स्कीम।
MLM Structure: मल्टी-लेवल भर्ती आधारित कमीशन ढांचा।
Dashboard Balance: सिर्फ प्लेटफॉर्म के भीतर दिखने वाली रकम।
Public Blockchain: सार्वजनिक रूप से सत्यापित होने वाला लेजर।
Exit Scam: ऑपरेटर का फंड समेटकर गायब होना।
यह तुलनात्मक लेख सार्वजनिक शिकायतों, पुलिस चेतावनियों और यूज़र अनुभवों पर आधारित जागरूकता सामग्री है, अदालती निष्कर्ष नहीं। निवेश निर्णय अपनी जांच के आधार पर लें और ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 पर संपर्क करें।
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