YMYL डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसे किसी भी तरह की इन्वेस्टमेंट या फाइनेंशियल सलाह न मानें। किसी भी कंपनी, टोकन, या क्रिप्टोकरेंसी में पैसा लगाने से पहले अपनी खुद की रिसर्च (DYOR) करें और ज़रूरत पड़ने पर किसी क्वालिफाइड फाइनेंशियल एडवाइज़र से सलाह लें।
आजकल इंटरनेट पर "Olive Crypto Systems" नाम काफी लोग सर्च कर रहे हैं, और ज़्यादातर लोगों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है — "क्या यह कोई नया क्रिप्टोकरेंसी टोकन है जिसमें इन्वेस्ट किया जा सकता है?"
इसका सीधा और साफ जवाब है — नहीं। Olive Crypto Systems का क्रिप्टोकरेंसी, ब्लॉकचेन टोकन, या डिजिटल कॉइन से कोई लेना-देना नहीं है। नाम में "Crypto" शब्द होने के बावजूद यह एक बिल्कुल अलग इंडस्ट्री की कंपनी है। चलिए इस कन्फ्यूज़न को क्लियर करते हैं।
Olive Crypto Systems एक भारतीय फिनटेक और पेमेंट सॉल्यूशंस कंपनी है, जो बैंकों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस के लिए सॉफ्टवेयर बनाती है। कंपनी की स्थापना 2005 में भारवी गडे ने की थी, जो IIT खड़गपुर के एलुमनस हैं और पेमेंट सॉल्यूशंस के जाने-माने आर्किटेक्ट माने जाते हैं।
कंपनी का हेडक्वार्टर सिकंदराबाद, तेलंगाना में है, और यह 20 साल से ज़्यादा समय से भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम का हिस्सा है।
Olive Crypto Systems का पूरा बिज़नेस NPCI (National Payments Corporation of India) और RBI की गाइडलाइंस पर बेस्ड पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के इर्द-गिर्द घूमता है। इनके की प्रोडक्ट्स इस तरह हैं:
UPI स्विच — UPI ट्रांज़ैक्शंस को प्रोसेस करने वाला कोर बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर
IMPS स्विच — रियल-टाइम फंड ट्रांसफर के लिए
ATM स्विच और RuPay/Mastercard स्विच — कार्ड-बेस्ड ट्रांज़ैक्शंस के लिए
आधार पे और आधार डेटा वॉल्ट — आधार-बेस्ड पेमेंट्स और सिक्योर डेटा स्टोरेज
eKYC सॉल्यूशंस — डिजिटल आइडेंटिटी वेरिफिकेशन के लिए
CBDC (Central Bank Digital Currency) सॉल्यूशन — RBI के डिजिटल रुपये जैसे प्रोजेक्ट्स के लिए टेक्निकल इंफ्रास्ट्रक्चर
भारत बिल पे — बिल पेमेंट सर्विसेज़ के लिए
ये सारे प्रोडक्ट्स बैंकों और फिनटेक कंपनियों को उनका डेली ऑपरेशंस चलाने में मदद करते हैं — न कि रिटेल इन्वेस्टर्स को कोई कॉइन खरीदने का मौका देते हैं।
यही सबसे बड़ी कन्फ्यूज़न की वजह है। कंपनी के नाम में "Crypto" शब्द क्रिप्टोग्राफी (यानी एन्क्रिप्शन और डेटा सिक्योरिटी) की तरफ इशारा करता है, न कि "Crypto currency" की तरफ।
बैंकिंग और पेमेंट सिस्टम्स में क्रिप्टोग्राफी एक कोर टेक्नोलॉजी है — जैसे आधार डेटा को एन्क्रिप्ट करके स्टोर करना, ट्रांज़ैक्शंस को सिक्योर करना, या सेंसिटिव फाइनेंशियल इंफॉर्मेशन को प्रोटेक्ट करना। इसी सिक्योरिटी-फोकस्ड अप्रोच की वजह से कंपनी ने अपना नाम "Olive Crypto Systems" रखा, जो उनकी बैंकिंग-ग्रेड एन्क्रिप्शन एक्सपर्टीज़ को रिफ्लेक्ट करता है।
यह कोई अकेला उदाहरण नहीं है — टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में ऐसी कई कंपनियां हैं जिनके नाम में "crypto" आता है लेकिन उनका डिजिटल करेंसीज़ से कोई संबंध नहीं होता, क्योंकि "crypto" शब्द असल में क्रिप्टोग्राफी से निकला है।
कंपनी ने अपना काम काफी बड़े स्केल पर एस्टैब्लिश किया है। इनके क्लाइंट्स में HSBC, DBS Bank, Axis Bank, और Kotak Mahindra Bank जैसे 25 से ज़्यादा मेजर बैंक्स और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस शामिल हैं, भारत के साथ-साथ इंटरनेशनल लेवल पर भी।
इसी काम की वजह से कंपनी को FY 2024-25 में भारत के वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) से "Best Technology Service Provider" अवॉर्ड भी मिल चुका है।
नहीं। Olive Crypto Systems एक प्राइवेटली हेल्ड कंपनी है — यानी इसका कोई पब्लिकली ट्रेडेड स्टॉक नहीं है, और न ही इसका कोई क्रिप्टोकरेंसी टोकन या कॉइन है जिसे एक्सचेंज पर खरीदा या बेचा जा सके। यह सिर्फ एक B2B सॉफ्टवेयर कंपनी है जो सीधे बैंकों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस के साथ काम करती है, रिटेल इन्वेस्टर्स के साथ नहीं।
अगर आपको कहीं "Olive Crypto Token" या "Olive Coin" जैसा कुछ दिखता है जो इस कंपनी से जुड़ा होने का दावा करता है, तो सतर्क रहें — ऐसी चीज़ें अक्सर स्कैम या मिसलीडिंग मार्केटिंग का हिस्सा होती हैं।
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डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जनरल जानकारी के लिए है और इसमें दिया गया कंटेंट किसी भी तरह की इन्वेस्टमेंट सलाह नहीं है। क्रिप्टोकरेंसी में इन्वेस्ट करना हाई-रिस्क माना जाता है। कृपया अपनी रिसर्च खुद करें।
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