RBI On Crypto: संसदीय पैनल में क्रिप्टो पर सख्त रुख, बैन अब भी विकल्प

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RBI ने कहा निजी क्रिप्टो पर बैन का विकल्प अब भी बरकरार

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने एक बार फिर निजी क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अपना कड़ा रुख दोहराया है।

2 जुलाई 2026 को संसद की स्टैंडिंग कमेटी ऑन फाइनेंस के सामने RBI ने साफ कहा कि वह निजी क्रिप्टोकरेंसी को करेंसी का दर्जा देने के पक्ष में नहीं है। साथ ही, जरूरत पड़ने पर बैन (Ban) का विकल्प भी अब तक खुला है।

हालांकि, क्रिप्टो को सिक्योरिटी माना जाए या नहीं, इस पर RBI बाद में लिखित जवाब देगा।

संसदीय समिति की बैठक में क्या हुआ?

यह बैठक "A Study On Virtual Digital Assets (VDAs) And Way Forward" विषय पर आयोजित की गई थी।

Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार, बैठक को तीन हिस्सों में बांटा गया।

पहले सत्र में RBI अधिकारियों ने समिति के सवालों के जवाब दिए। इसके बाद Institute Of Chartered Accountants Of India (ICAI) ने टैक्स और अकाउंटिंग से जुड़े सुझाव पेश किए।

बैठक के बाद समिति के चेयरमैन भर्तृहरि महताब ने स्पष्ट कहा कि RBI ने निजी क्रिप्टोकरेंसी को कानूनी दर्जा देने की कोई सिफारिश नहीं की है।

RBI ने क्यों जताई चिंता?

बैठक के दौरान कुछ सांसदों ने पूछा कि जब इंडोनेशियाहांगकांग और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देश क्रिप्टो को रेगुलेट कर रहे हैं, तब भारत स्पष्ट नीति क्यों नहीं बना रहा।

इस पर RBI का जवाब था कि "पॉलिसी न होना भी एक पॉलिसी है।"

RBI का कहना है कि निजी क्रिप्टोकरेंसी से कई तरह के जोखिम जुड़े हैं।

इनमें शामिल हैं:

  • मनी लॉन्ड्रिंग

  • ड्रग तस्करी

  • आतंकी फंडिंग

  • वित्तीय स्थिरता पर संभावित असर

यही वजह है कि केंद्रीय बैंक लगातार सावधानी बरतने की सलाह देता रहा है।

क्या भारत MiCA जैसा कानून ला सकता है?

बैठक के दौरान कुछ सदस्यों ने यूरोपीय संघ के MiCA (Markets In Crypto-Assets) फ्रेमवर्क का भी जिक्र किया।

उनका मानना था कि भारत भी पूरे क्रिप्टो सेक्टर के लिए एक व्यापक कानून बना सकता है, ताकि अलग-अलग नियमों की जगह एक स्पष्ट नियामकीय ढांचा तैयार हो।

हालांकि, इस पर फिलहाल सरकार की ओर से कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है। 

डिजिटल रुपया भी चर्चा में रहा

बैठक में RBI की Central Bank Digital Currency (CBDC) यानी ई-रुपी पर भी सवाल उठे।

समिति के चेयरमैन ने कहा कि डिजिटल रुपया अभी अपेक्षित स्तर तक लोकप्रिय नहीं हो पाया है।

अब तक:

  • 15 करोड़ से अधिक ट्रांजैक्शन

  • ₹34,000 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन वैल्यू

  • लगभग 1 करोड़ यूजर्स

इसके मुकाबले UPI हर दिन 30 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन प्रोसेस करता है।

2018 से अब तक क्या बदला?

RBI लंबे समय से निजी क्रिप्टोकरेंसी का विरोध करता रहा है।

मुख्य घटनाक्रम इस प्रकार हैं:

  • 6 अप्रैल 2018: RBI ने बैंकों और NBFCs को क्रिप्टो कारोबार से जुड़ी सेवाएं देने से रोक दिया।

  • कई भारतीय एक्सचेंजों को बैंकिंग सेवाओं में दिक्कत आई।

  • मार्च 2020: सुप्रीम कोर्ट ने यह प्रतिबंध रद्द कर दिया।

  • फिलहाल FIU Registered Crypto Exchange बैंकिंग सेवाएं ले सकते हैं, लेकिन बैंक खुद क्रिप्टो होल्ड नहीं कर सकते।

यानी बैंकिंग बैन हट चुका है, लेकिन RBI का वैचारिक विरोध अब भी कायम है।

क्या निवेशकों को चिंता करनी चाहिए?

फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है।

2 जुलाई की यह बैठक केवल एक स्टडी और कंसल्टेशन प्रोसेस का हिस्सा थी।

इस बैठक के बाद:

  • कोई नया कानून लागू नहीं हुआ।

  • किसी तरह का तत्काल बैन नहीं लगाया गया।

  • मौजूदा क्रिप्टो होल्डिंग्स पर कोई सीधा असर नहीं पड़ा।

अब समिति अपनी रिपोर्ट संसद के आगामी मानसून सत्र में पेश करेगी। इसके बाद ही सरकार आगे का फैसला ले सकती है।

भारत में मौजूदा क्रिप्टो टैक्स नियम

वर्तमान में निवेशकों पर ये नियम लागू हैं।

30% टैक्स

क्रिप्टो से होने वाले मुनाफे पर 30% फ्लैट टैक्स लागू है।

1% TDS

हर ट्रांसफर पर 1% TDS लागू होता है।

लॉस सेट-ऑफ नहीं

क्रिप्टो में हुए नुकसान को दूसरी आय से एडजस्ट नहीं किया जा सकता।

नए रिपोर्टिंग नियम

1 अप्रैल 2026 से:

  • ट्रांजैक्शन रिपोर्ट नहीं करने पर ₹200 प्रतिदिन जुर्माना।

  • गलत जानकारी देने पर ₹50,000 तक का जुर्माना।

इससे टैक्स विभाग के पास क्रिप्टो ट्रेडिंग का पहले से ज्यादा डेटा पहुंच रहा है।

आगे क्या हो सकता है?

सरकार का क्रिप्टो रेगुलेशन डिस्कशन पेपर अभी ड्राफ्टिंग चरण में है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, RBI की आपत्तियों के कारण इसे कई बार टाला जा चुका है।

इसके बावजूद Chainalysis की रिपोर्ट के अनुसार, भारत लगातार तीसरे साल दुनिया में सबसे ज्यादा क्रिप्टो अपनाने वाले देशों में शामिल है। अनुमान है कि देश में 11.9 करोड़ से अधिक लोग किसी न किसी रूप में क्रिप्टो का उपयोग कर रहे हैं।

फाइनल वर्डिक्ट

RBI ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि वह निजी क्रिप्टोकरेंसी को आधिकारिक मुद्रा के रूप में स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि निजी क्रिप्टो से वित्तीय और नियामकीय जोखिम जुड़े हैं, इसलिए बैन का विकल्प अब भी उसके विचार में शामिल है।

हालांकि, फिलहाल कोई नया प्रतिबंध लागू नहीं हुआ है। मौजूदा नियम और टैक्स व्यवस्था पहले की तरह जारी हैं। अब निवेशकों की नजर संसदीय समिति की रिपोर्ट और सरकार के अगले कदम पर रहेगी, क्योंकि वही भारत में क्रिप्टो रेगुलेशन की दिशा तय करेंगे।

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निवेश जोखिम अस्वीकरण: क्रिप्टोकरेंसी एक अत्यधिक अस्थिर (highly volatile) एसेट क्लास है और इसमें निवेश करने पर आपकी पूरी पूंजी डूबने का जोखिम रहता है। यह लेख केवल सूचना और शिक्षा के उद्देश्य से है, इसे निवेश सलाह न समझें। किसी भी क्रिप्टो एसेट में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।

नियामक अस्वीकरण: भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर नियामक ढांचा अभी विकसित हो रहा है और भविष्य में इसमें बदलाव संभव है। इस लेख में दी गई जानकारी लेख प्रकाशित होने की तारीख (3 जुलाई 2026) तक सही है। कृपया नवीनतम नियमों के लिए आधिकारिक सरकारी स्रोतों की जांच करें।

लेखक परिचय
Ronak Ghatiya Hindi News Writer

Ronak Ghatiya एक उभरते हुए क्रिप्टो कंटेंट राइटर हैं, जिनका एजुकेशन और टेक्नोलॉजी में मजबूत बैकग्राउंड रहा है। उन्होंने पिछले 6 वर्ष में फाइनेंस, ब्लॉकचेन, Web3 और डिजिटल एसेट्स जैसे विषयों पर डेटा-ड्रिवन और SEO-अनुकूल कंटेंट लिखा है, जो नए और प्रोफेशनल रीडर्स दोनों के लिए उपयोगी साबित हुआ है। रोनक की लेखनी का फोकस जटिल तकनीकी टॉपिक्स को आसान भाषा में समझाना है, जिससे क्रिप्टो स्पेस में ट्रस्ट और क्लैरिटी बनी रहे। उन्होंने CoinGabbar.com, Medium और अन्य क्रिप्टो प्लेटफ़ॉर्म्स के लिए ब्लॉग्स और न्यूज़ स्टोरीज़ लिखी हैं, जिनमें क्रिएटिविटी और रिसर्च का संतुलन होता है। रोनक की स्टाइल डिटेल-ओरिएंटेड और रिस्पॉन्सिव है, और वह तेजी से बदलते क्रिप्टो परिदृश्य में एक विश्वसनीय आवाज़ बनने की ओर अग्रसर हैं। LinkedIn पर प्रोफ़ाइल देखें या उनके आर्टिकल्स यहाँ पढ़ें।

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नहीं। फिलहाल भारत में क्रिप्टोकरेंसी पर कोई नया बैन लागू नहीं किया गया है। यह केवल एक संसदीय स्टडी बैठक थी, कोई नया कानून या प्रतिबंध नहीं। RBI ने क्रिप्टो पर बैन की सिफारिश जरूर की है, लेकिन अंतिम फैसला केंद्र सरकार और संसद द्वारा कानून पारित होने के बाद ही होगा।
फिलहाल आपकी मौजूदा क्रिप्टो होल्डिंग्स पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। जब तक कोई नया कानून लागू नहीं होता, तब तक मौजूदा नियम, जिनमें क्रिप्टो आय पर 30% टैक्स और लेनदेन पर 1% TDS शामिल है, पहले की तरह लागू रहेंगे।
RBI का मानना है कि निजी क्रिप्टोकरेंसी देश की मॉनेटरी पॉलिसी, वित्तीय स्थिरता और पेमेंट सिस्टम की अखंडता के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। इसके अलावा, केंद्रीय बैंक का कहना है कि क्रिप्टो का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य अवैध गतिविधियों में होने की आशंका भी रहती है।
स्टैंडिंग कमेटी अपनी रिपोर्ट आगामी मानसून सत्र में संसद के समक्ष पेश करने की योजना बना रही है। रिपोर्ट पेश होने के बाद सरकार आगे की नीति या किसी संभावित कानून पर निर्णय ले सकती है।