प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate/ED) ने हिमाचल प्रदेश और पंजाब के हजारों निवेशकों को करोड़ों रुपये का चूना लगाने वाले एक बड़े क्रिप्टोकरेंसी घोटाले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ED के शिमला सब-जोनल ऑफिस ने शुक्रवार को मिलान गर्ग (Milan Garg), सुखदेव ठाकुर (Sukhdev Thakur) और अभिषेक शर्मा (Abhishek Sharma) को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 19(1) के तहत गिरफ्तार किया।
तीनों आरोपियों को शिमला की एक विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें आगे की पूछताछ के लिए 12 दिन की ED रिमांड पर भेज दिया गया है।
ED के एक अधिकारी के अनुसार, आरोपियों ने निवेशकों को असाधारण रूप से ऊंचे और निश्चित रिटर्न का लालच देकर करीब 2.48 लाख लोगों को धोखा दिया, जिससे उन्हें कुल मिलाकर करीब 500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने Korvio (Voscrow), DGT, Hypenext और A-Global जैसे कई फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म चलाए, जिनके जरिए जनता से पैसा जुटाया गया।
ED की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि पीड़ितों को 'Korvio Coin' (KRO) नाम के टोकन में पैसा लगाने पर तय और ऊंचे मुनाफे का भरोसा दिलाया जाता था। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए प्रमोशनल इवेंट आयोजित किए जाते थे, टोकन की कीमतों में जानबूझकर हेरफेर की जाती थी, और नए निवेशकों से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल पुराने निवेशकों को भुगतान करने के लिए किया जाता था — यानी यह पूरा खेल क्लासिक पोंजी स्कीम की तर्ज पर चलाया जा रहा था।
यह उसी तरह का मामला है, जैसा कि Nova NFT में हम देख चुके हैं।
ED की जांच के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क की जड़ें 2018 से जुड़ी हैं, जब मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा (Subhash Sharma) ने अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर इन फर्जी क्रिप्टो स्कीमों की नींव रखी थी। घोटाला उजागर होने के बाद फर्जी गतिविधियों को छिपाने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड और डोमेन डेटा तक डिलीट कर दिए गए थे। हालांकि जांच एजेंसियों ने डिजिटल सबूत बरामद कर लिए, जिनसे पता चला कि 2.48 लाख से ज्यादा यूजर्स इस फ्रॉड का शिकार बने और कुल लेन-देन 21.9 करोड़ डॉलर (करीब 219 मिलियन डॉलर) से ज्यादा का हुआ।
ED का कहना है कि आरोपियों ने पैसों की लेयरिंग करने के लिए रकम को कई बैंक खातों, फर्जी कंपनियों और बिचौलियों के जरिए घुमाया, साथ ही एक हिस्से को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर ऑडिट ट्रेल को छिपाने की कोशिश की।
ED की जांच में मिलान गर्ग की भूमिका सबसे अहम बताई जा रही है। एजेंसी के मुताबिक, गर्ग Korvio/Voscrow, Hypenext और A-Global जैसी फर्जी क्रिप्टो स्कीमों का प्रमुख मास्टरमाइंड और तकनीकी आर्किटेक्ट था। उसने ही ये प्लेटफॉर्म विकसित किए और उन्हें नियंत्रित किया, क्रिप्टो वॉलेट मैनेज किए, निवेशकों को एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट कराने की निगरानी की, निवेशकों के फंड को रूट किया, नकदी को क्रिप्टोकरेंसी में बदलवाया और पूरे तकनीकी ढांचे पर नियंत्रण रखा।
यह मामला केवल एक दिन की कार्रवाई नहीं है, बल्कि दो साल से ज्यादा समय से चल रही जांच का हिस्सा है:
2018: सुभाष शर्मा और सह-आरोपियों द्वारा फर्जी क्रिप्टो निवेश स्कीमों की शुरुआत।
मार्च 2024: हिमाचल प्रदेश और पंजाब पुलिस में दर्ज कई FIR के आधार पर ED ने PMLA के तहत मामले का संज्ञान लिया और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।
शुरुआती जांच में: ED ने हेमराज (Hem Raj/Hemraj Thakur) और मासूम जुनेजा (Masoom Juneja) को पहले ही गिरफ्तार किया था। मासूम जुनेजा को 15 जून 2026 को मोहाली, पंजाब से गिरफ्तार किया गया था, जबकि उनके पिता विजय जुनेजा पहले से ही राज्य पुलिस की हिरासत में हैं।
17 जुलाई 2026: ED के शिमला सब-जोनल ऑफिस ने मिलान गर्ग, सुखदेव ठाकुर और अभिषेक शर्मा को गिरफ्तार किया। चूंकि तीनों आरोपी पहले से ही मूल अपराध (predicate offence) के मामले में न्यायिक हिरासत में थे, इसलिए ED ने पहले प्रोडक्शन वारंट हासिल किए और फिर उन्हें औपचारिक रूप से PMLA के तहत गिरफ्तार किया। विशेष अदालत ने ED को 12 दिन की हिरासत में पूछताछ की अनुमति दी है, ताकि फंड के प्रवाह की गहराई से जांच की जा सके, अपराध की अतिरिक्त कमाई का पता लगाया जा सके और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की पूरी सीमा तय की जा सके।
इस पूरे घोटाले का कथित मास्टरमाइंड सुभाष शर्मा अब तक जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर है। घोटाला उजागर होने के बाद शर्मा कथित तौर पर दुबई भाग गया था और माना जा रहा है कि वह अब भी वहीं है। जांच एजेंसियां उसके प्रत्यर्पण और आगे की कार्रवाई पर काम कर रही हैं।
इस मामले की एक बड़ी पीड़ादायक हकीकत यह है कि घोटाला सामने आने के करीब दो साल बाद भी जांच पूरी होने से कोसों दूर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस व्यापक क्रिप्टो-MLM घोटाले में अब तक कुल 76 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें से 69 को जमानत मिल चुकी है, जबकि किसी भी आरोपी के खिलाफ ट्रायल अभी तक शुरू नहीं हो पाया है।
इस पूरे नेटवर्क से जुड़े मामलों में करीब 1,740 करोड़ रुपये के निवेश और लगभग 2.5 लाख प्रभावित लोगों के आंकड़े सामने आए हैं। हालिया गिरफ्तारी से पहले, बीते दो साल में ED ने PMLA के तहत सिर्फ दो ही गिरफ्तारियां की थीं।
यह गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है जब ED देशभर में क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े वित्तीय अपराधों पर अपनी जांच का दायरा बढ़ा रही है। पिछले कुछ दिनों में एजेंसी ने डिजिटल एसेट से जुड़े कई बड़े मामलों में कार्रवाई की है। इनमें से एक 303 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड सिंडिकेट से जुड़ा मामला भी शामिल है, जिसमें ED USDT, Ethereum और Solana जैसी स्टेबलकॉइन और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है, जिसकी कड़ियां कथित तौर पर दुबई तक जुड़ी हुई हैं।
इसके अलावा, हाल ही में उत्तर प्रदेश में भी एक अलग क्रिप्टो घोटाले से जुड़ी 50 करोड़ रुपये की FIR दर्ज की गई है, जो दिखाता है कि देश में फर्जी क्रिप्टो निवेश स्कीमों के जरिए ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि ऊंचे और "गारंटीड" रिटर्न का वादा करने वाली किसी भी क्रिप्टो या MLM स्कीम में निवेश करने से पहले सतर्कता बेहद जरूरी है। भारत में किसी भी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म में पैसा लगाने से पहले उसकी वैधता, रेगुलेटरी स्थिति और वास्तविक ऑपरेशनल पारदर्शिता की जांच करना निवेशकों के हित में है।
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अस्वीकरण: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है और इसे निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए। क्रिप्टोकरेंसी में निवेश जोखिमपूर्ण है और बाजार में उतार-चढ़ाव के अधीन है। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।
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