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मार्केट की दिशा तय करने वाले Bitcoin और Ethereum दोनों में कमजोरी दिखी। बिटकॉइन के अहम सपोर्ट लेवल के नीचे जाने से ट्रेडर्स में डर बढ़ा, वहीं एथेरियम में नेटवर्क-एक्टिविटी और डिमांड को लेकर शॉर्ट-टर्म प्रेशर देखा गया। बड़े कॉइन्स के गिरते ही ऑल्टकॉइन्स में भी तेज़ सेल-ऑफ शुरू हो गया।
आज की गिरावट का एक बड़ा कारण फ्यूचर्स मार्केट में लिक्विडेशन रहा। जब कीमतें अचानक नीचे आती हैं, तो हाई-लेवरेज पोज़िशन अपने-आप कट जाती हैं। इससे सेल-प्रेशर और बढ़ता है और गिरावट तेज़ हो जाती है। यही वजह है कि कुछ घंटों में ही कई टोकन्स 5-10% तक टूटते दिखे।
ग्लोबल मैक्रो फैक्टर्स भी क्रिप्टो पर असर डाल रहे हैं। Federal Reserve की पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता, बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव और डॉलर की मजबूती जैसे संकेत रिस्क-ऑन एसेट्स पर दबाव बनाते हैं। ऐसे माहौल में निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर शिफ्ट करते हैं, जिससे क्रिप्टो जैसे वोलाटाइल एसेट्स में गिरावट आती है।
ऑल्टकॉइन्स आमतौर पर बिटकॉइन से ज्यादा वोलाटाइल होते हैं। जैसे ही BTC कमजोर पड़ता है, लिक्विडिटी सबसे पहले ऑल्टकॉइन्स से निकलती है। कम मार्केट-कैप वाले टोकन्स में यह असर और तेज़ दिखता है, क्योंकि वहां खरीदारी का सपोर्ट कम होता है।
शॉर्ट-टर्म में मार्केट वोलाटाइल रह सकता है, खासकर जब तक मैक्रो संकेत साफ़ नहीं होते। लेकिन लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए ऐसी गिरावटें accumulation के मौके भी देती हैं - बशर्ते प्रोजेक्ट्स के fundamentals मजबूत हों। सही रणनीति यही है कि panic selling से बचें, risk management रखें और डेटा-आधारित फैसले लें।
Why Crypto Market Down Today का जवाब एक ही वजह में नहीं छुपा है। यह गिरावट मैक्रो प्रेशर, लिक्विडेशन और सेंटिमेंट का कॉम्बिनेशन है। मार्केट में ऐसे फेज़ आते-जाते रहते हैं। समझदारी इसी में है कि ट्रेंड्स को समझकर, बिना भावनाओं के निवेश किया जाए।
Disclaimer: यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य से है, निवेश सलाह नहीं। क्रिप्टो मार्केट हाई-रिस्क है। निवेश से पहले खुद रिसर्च करें (DYOR)।
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