BRICS देशों के बीच Shared Digital Payment Network बनाने की दिशा में नई पहल सामने आई है। इसी संदर्भ में BRICS CBDC Bridge को लेकर चर्चा तेज हो गई है। रूस अपने Digital रूबल को BRICS देशों की अन्य CBDCs से जोड़ने की योजना पर काम कर रहा है। जिसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच व्यापार को आसान बनाना, ट्रांजेक्शन कॉस्ट कम करना और अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता घटाना है। यह प्रस्ताव किसी नई करेंसी बनाने का नहीं, बल्कि मौजूदा Digital Currencies को आपस में जोड़ने का है ताकि ब्रिक्स देशों के बीच पेमेंट सिस्टम अधिक स्वतंत्र और तेज हो सके।
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जनवरी 2026 में Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, RBI ने सरकार को औपचारिक रूप से सुझाव दिया कि BRICS देशों की डिजिटल करेंसी को जोड़ने का प्रस्ताव 2026 समिट के एजेंडे में शामिल किया जाए। इस वर्ष BRICS समिट की मेजबानी New Delhi में हो रही है।
अगर यह प्रस्ताव पारित होता है, तो इसके लेवल पर CBDCs को आधिकारिक रूप से जोड़ने की दिशा में यह पहला बड़ा कदम होगा। RBI का मानना है कि BRICS CBDC Bridge से क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड और टूरिज्म पेमेंट्स फ़ास्ट होंगे, सेटलमेंट समय घटेगा और Intermediary Banking लागत कम होगी।
हाल ही में RBI नेBRICS देशों की CBDC को लिंक करने का प्रस्ताव सरकार को सौपा है, अधिक जानकारी के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें।
CBDCs यानी Central Bank Digital Currencies, किसी देश के Central Bank द्वारा जारी की गई आधिकारिक डिजिटल करेंसी होती हैं। यह उस देश की फिजिकल करेंसी का डिजिटल रूप है और पूरी तरह सरकार के कंट्रोल में रहता है। इसका उद्देश्य तेज, सुरक्षित और Transparent Digital Payments को बढ़ावा देना है।
यह पहल किसी एक Joint Currency की नहीं है। बल्कि मौजूदा नेशनल CBDCs को इंटरऑपरेबल बनाया जाएगा। इसमें शामिल हैं:
रिपोर्ट्स में इस पोटेंशियल नेटवर्क को “BRICS CBDC Bridge” या “BRICS Pay” भी कहा जाता है। इसे चीन-लीड प्रोजेक्ट mBridge से इंस्पायर्ड माना जाता है, जहां मल्टी-CBDC प्लेटफॉर्म के माध्यम से सीमा-पार पेमेंट किए जाते हैं। शेयरड इंफ्रास्ट्रक्चर और यूनिफाइड रेगुलेटरी स्टैंडर्ड्स के माध्यम से ब्रिक्स देश लोकल करेंसी में सीधे सेटलमेंट कर सकेंगे, बिना डॉलर या SWIFT के।
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ब्रिक्स अब नए सदस्यों, Egypt, Ethiopia, Iran, अर्जेंटीना, मिस्र और UAE को शामिल कर चुका है। यह पहल डी-डॉलराइजेशन स्ट्रेटेजी का हिस्सा मानी जा रही है, जिसके तहत ग्लोबल ट्रेड में डॉलर की हिस्सेदारी कम करने का प्रयास है।
हालांकि, BRICS CBDC Bridge प्रस्ताव अभी अर्ली फेज में है। टेक्निकल इंटरऑपरेबिलिटी, साइबर सिक्योरिटी, डेटा गवर्नेंस और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क जैसी चुनौतियां मौजूद हैं, हालांकि, यह प्रस्ताव अभी प्रारंभिक स्तर पर है और Technology, Regulatory तथा सदस्य देशों की सहमति पर निर्भर करता है। किसी भी नीति के प्रभाव का आकलन उसके औपचारिक क्रियान्वयन के बाद ही किया जा सकेगा।
यदि 2026 ब्रिक्स समिट में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो BRICS CBDC Bridge इंटरनेशनल पेमेंट व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है। इससे सदस्य देश अपनी Digital Currencies के माध्यम से सीधे एक्सचेंज कर पाएंगे और डॉलर पर निर्भरता घट सकती है। भारत की पहल और रूस की डिजिटल रूबल स्ट्रेटेजी इस प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल सूचना के उद्देश्य से लिखा गया है। यह Investment Advice नहीं है। क्रिप्टोकरेंसी हाई रिस्क और मूल्य अस्थिरता से जुड़ी होती हैं। इन्वेस्टमेंट करने से पहले स्वयं रिसर्च करें।
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