भारत Crypto Industry के लिए तेजी से उभरता हुआ बाजार बनता जा रहा है और अब Coinbase ने भी इस पर बड़ा दांव लगाया है। अमेरिकी Crypto Exchange Coinbase ने भारत को अपनी अंतरराष्ट्रीय ग्रोथ का सबसे अहम केंद्र बताते हुए अगले 12 महीनों में बड़े निवेश और विस्तार की योजना का खुलासा किया है। यह पूरा कदम Coinbase India Expansion की स्ट्रैटेजी का हिस्सा माना जा रहा है।
कंपनी भारत में अपना Everything Exchange Model लाने की तैयारी कर रही है, जिसके तहत यूजर्स को क्रिप्टो, Tokenized Shares, DeFi सेवाएं और DEX ट्रेडिंग जैसी सुविधाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर मिल सकेंगी। Coinbase का मानना है कि भारत की युवा आबादी और बढ़ता डिजिटल इकोसिस्टम इसे भविष्य का प्रमुख Crypto Hub बना सकते हैं।
Source: X Account
2022 से 2026 तक, Coinbase की भारत में Comeback Story
Coinbase का भारत से रिश्ता उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। 2022 में Coinbase ने भारत में एंट्री की थी, लेकिन कुछ ही दिनों में रेगुलेटरी दबाव के चलते उसे INR Payment Support बंद करना पड़ा और कई यूजर्स को ऑफबोर्ड भी करना पड़ा। यह कंपनी के लिए एक बड़ा झटका था।
लेकिन Coinbase ने हार नहीं मानी। समय के साथ कंपनी ने FIU-IND के साथ रजिस्ट्रेशन किया, AML कंप्लायंस मजबूत किया और भारत के रेगुलेटरी ढांचे को समझकर अपनी इंडिया स्ट्रैटेजी को पूरी तरह से रीबिल्ड किया। अब 2026 में Coinbase की यह वापसी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और रणनीतिक दिखाई देती है।
Everything Exchange क्या है और भारत के लिए क्यों है खास
Coinbase का Everything Exchange Model ट्रेडिशनल फाइनेंस और क्रिप्टो की दुनिया को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की कोशिश है। इस रणनीति का जिक्र कंपनी के CEO Brian Armstrong ने 2026 के लिए अपनी प्रमुख योजनाओं में किया था। इसके तहत यूजर्स क्रिप्टोकरेंसी के साथ-साथ Tokenized Equities (ब्लॉकचेन आधारित शेयर), commodities, prediction markets और DeFi प्रोडक्ट्स का उपयोग कर सकेंगे।
John O'Loghlen का कहना है कि भारत के युवा इन्वेस्टर्स सिर्फ डिजिटल एसेट्स खरीदकर रखने तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि वे उन्हें collateral के रूप में इस्तेमाल कर लोन लेना, leverage बनाना और DeFi पर आधारित Financial Services का लाभ उठाना चाहते हैं।
इसी वजह से Coinbase भारत में DeFi Lending & Borrowing, DEX Access और Tokenized Stocks जैसी सुविधाओं पर जोर दे रहा है। यदि यह मॉडल सफल होता है, तो भारतीय इन्वेस्टर्स को विदेशी शेयरों और डिजिटल एसेट्स तक पहले से कहीं आसान पहुंच मिल सकती है। हालांकि, Tokenized Stocks और DeFi Services को लेकर भारत में नियामकीय स्पष्टता अभी भी एक बड़ा सवाल है।
INR सपोर्ट, FIU-IND कंप्लायंस और आगे की चुनौतियां
Coinbase ने 1 जून 2026 से भारतीय कस्टमर के लिए IMPS के माध्यम से सीधे INR जमा और विथड्रावल की सुविधा शुरू कर दी है। इससे पहले कई International Exchanges पर भारतीय यूजर्स को P2P या थर्ड-पार्टी माध्यमों का सहारा लेना पड़ता था। अब Coinbase के यूजर्स सीधे बैंक खाते से फंड जमा कर सकते हैं और स्पॉट ट्रेडिंग के साथ-साथ Perpetual Futures ट्रेडिंग का भी लाभ उठा सकते हैं। यह अपडेट भी सीधे तौर पर Coinbase India Expansion को मजबूत करता है।
Coinbase फिलहाल भारत की Financial Intelligence Unit के साथ भी रजिस्टर्ड है और एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग नियमों का पालन कर रही है। कंपनी पहले से भारतीय एक्सचेंज CoinDCX में इन्वेस्टर्स भी है। हालांकि भारत में क्रिप्टो पर 30% टैक्स और 1% TDS जैसी सख्त Tax Policies अभी लागू हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार भविष्य में स्पष्ट Crypto Regulations लागू करती है, तो Coinbase का Everything Exchange मॉडल भारतीय मार्केट में एक बड़ा बदलाव ला सकता है और देश को Global Digital Finance Hub बनाने में मदद कर सकता है।
कन्क्लूजन
कुल मिलाकर, Coinbase का भारत पर बढ़ता फोकस देश के क्रिप्टो और डिजिटल फाइनेंस सेक्टर के लिए एक बड़ा संकेत है। Everything Exchange Model इन्वेस्टर्स को ट्रेडिशनल और डिजिटल एसेट्स तक एकीकृत पहुंच देने का वादा करता है। हालांकि नियामकीय चुनौतियां अभी मौजूद हैं, लेकिन स्पष्ट नियमों के साथ भारत ग्लोबल डिजिटल एसेट्स इकोसिस्टम का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
Disclaimer: यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। यह किसी भी प्रकार की निवेश सलाह नहीं है। क्रिप्टोकरेंसी में निवेश उच्च जोखिम वाला होता है। कोई भी निर्णय लेने से पहले स्वतंत्र वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।
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