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Crypto Clarity Act News: USA में क्यों अटका है CLARITY Act?

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Crypto Clarity Act News: जाने क्यों दुनिया से पीछे रह गया USA

Crypto Clarity Act News इस समय वैश्विक क्रिप्टो इंडस्ट्री की सबसे बड़ी चर्चाओं में शामिल है। जहां जापान और दक्षिण कोरिया अपने नए क्रिप्टो नियामकीय ढांचे को तेजी से लागू कर रहे हैं, वहीं यूरोपीय संघ (EU) का MiCA Framework पूरी तरह प्रभावी हो चुका है। दूसरी ओर भारत में Crypto Ban India को लेकर बहस तेज है, जबकि अमेरिका का बहुप्रतीक्षित Digital Asset Market Clarity Act (CLARITY Act) अब भी सीनेट में अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रहा है।

यह विधेयक अमेरिकी डिजिटल एसेट उद्योग के लिए बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि इसके लागू होने के बाद पहली बार स्पष्ट होगा कि किन डिजिटल एसेट्स पर SEC का अधिकार होगा और किनका नियमन CFTC करेगी। हालांकि राजनीतिक मतभेद और संसदीय प्राथमिकताओं के कारण इसकी प्रक्रिया फिलहाल अटकी हुई है।

CLARITY Act की मौजूदा स्थिति

Crypto Clarity Act News के अनुसार यह विधेयक अमेरिकी House Of Representatives से पहले ही मजबूत द्विदलीय समर्थन के साथ पारित हो चुका है। अब इसकी अगली और सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा अमेरिकी सीनेट में होनी है।

अब तक की प्रमुख प्रगति

  • 17 जुलाई 2025: प्रतिनिधि सभा ने बिल को 294-134 मतों से पारित किया।

  • 14 मई 2026: सीनेट बैंकिंग समिति ने इसे 15-9 मतों से मंजूरी देकर आगे बढ़ाया।

  • सभी रिपब्लिकन सदस्यों के अलावा डेमोक्रेट सीनेटर Ruben Gallego और Angela Alsobrooks ने भी सशर्त समर्थन दिया।

  • 1 जून 2026: बिल को Senate General Orders (Calendar No. 423) में शामिल किया गया, जिससे अब इसे सीधे फ्लोर वोट के लिए लाया जा सकता है।

सीनेट डिजिटल एसेट्स सबकमेटी की अध्यक्ष Senator Cynthia Lummis लगातार कह रही हैं कि डिजिटल एसेट बाजार के लिए स्थायी और स्पष्ट नियामकीय ढांचा केवल कांग्रेस द्वारा पारित कानून से ही संभव है।

आखिर क्यों अटका हुआ है CLARITY Act?

हालांकि विधेयक अंतिम चरण में पहुंच चुका है, लेकिन तीन बड़े कारण इसकी राह रोक रहे हैं।

1. एथिक्स प्रावधानों पर विवाद

डेमोक्रेट सांसद चाहते हैं कि विधेयक में राष्ट्रपति Donald Trump के कथित क्रिप्टो कारोबारी हितों, विशेष रूप से $TRUMP Memecoin, से जुड़े संभावित हितों के टकराव और एथिक्स डिस्क्लोजर से संबंधित प्रावधान जोड़े जाएं।

हालिया संयुक्त सीनेट ड्राफ्ट में ऐसे प्रावधान शामिल नहीं किए गए। इसके बाद सीनेटर Chris Murphy, Chris Van Hollen और Jeff Merkley ने सार्वजनिक रूप से इसका विरोध किया।

2. 60 वोटों की चुनौती

अमेरिकी सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के पास 53 सीटें हैं, लेकिन कुछ सदस्यों के संभावित विरोध के कारण वास्तविक समर्थन लगभग 51 वोट माना जा रहा है।

फिलिबस्टर समाप्त करने के लिए कम से कम 60 वोट आवश्यक हैं। यानी बिल पारित कराने के लिए 7 से 9 डेमोक्रेट सांसदों का अतिरिक्त समर्थन जरूरी होगा।

3. सीमित संसदीय समय

सीनेट बहुमत नेता John Thune को National Defense Authorization Act (NDAA) और FISA Reauthorization जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों के लिए भी समय देना है। इसी वजह से अभी तक CLARITY Act पर फ्लोर वोट की तारीख तय नहीं हो सकी है।

अगस्त 2026 से पहले यह समय क्यों महत्वपूर्ण है?

अमेरिकी सीनेट 7 अगस्त 2026 से ग्रीष्मकालीन अवकाश पर जाएगी।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस अवधि से पहले बिल पारित नहीं हुआ, तो नवंबर के मध्यावधि चुनावों के कारण इसकी प्रक्रिया 2027 या उससे आगे खिसक सकती है।

इसी बीच Polymarket के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 के भीतर बिल पारित होने की संभावना पिछले कुछ सप्ताहों में लगभग 74% से घटकर 43–48% के बीच पहुंच गई है।

Japan Crypto Regulatory Amendment: जापान ने किया बड़ा बदलाव

वैश्विक क्रिप्टो नियमन में सबसे बड़ा कदम जापान ने उठाया है।

15 जुलाई 2026 को जापान की संसद ने Financial Instruments And Exchange Act (FIEA) में संशोधन को अंतिम मंजूरी दे दी।

प्रमुख बदलाव

  • क्रिप्टो एसेट्स को अब केवल "पेमेंट टूल" नहीं बल्कि Financial Instrument माना जाएगा।

  • अधिकतम 55% टैक्स घटाकर 20% फ्लैट टैक्स किया जाएगा।

  • नया टैक्स ढांचा 1 जनवरी 2028 से लागू होगा।

  • Spot Crypto ETF के लिए नियामकीय रास्ता खुलेगा।

  • इनसाइडर ट्रेडिंग और डिस्क्लोजर जैसे सिक्योरिटीज नियम अब क्रिप्टो बाजार पर भी लागू होंगे।

हालांकि DeFi, Self-Custody और Staking से जुड़े अंतिम नियम अभी जारी होने बाकी हैं।

South Korea Crypto Regulation News: डिजिटल एसेट्स को मिली नई पहचान

15 जुलाई 2026 को दक्षिण कोरिया ने National Asset Basic Act की घोषणा की।

इस कानून के तहत पहली बार Virtual Assets को देश की सरकारी परिसंपत्तियों का हिस्सा माना जाएगा।

इसके अलावा लंबित Digital Asset Basic Act (DABA) के माध्यम से निम्नलिखित विषयों को अंतिम रूप दिया जाएगा—

  • एक्सचेंज लाइसेंसिंग

  • स्टेबलकॉइन नियम

  • डिजिटल एसेट वर्गीकरण

  • निवेशक सुरक्षा

प्रस्तावित ढांचे के अनुसार स्टेबलकॉइन जारी करने वाली कंपनियों के लिए न्यूनतम 500 Million KRW पूंजी अनिवार्य हो सकती है।

Crypto Ban India: RBI और सरकार के बीच अलग-अलग दृष्टिकोण

भारत में Crypto Ban India को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई है।

हालिया रिपोर्टों के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने संसद की समिति के समक्ष निजी क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध के पक्ष में अपना रुख दोहराया है।

RBI का कहना है कि निजी क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग आतंक वित्तपोषण, मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य अवैध गतिविधियों में किया जा सकता है।

हालांकि केंद्र सरकार ने अभी तक कोई अंतिम नीति घोषित नहीं की है।

वर्तमान स्थिति

  • भारत में फिलहाल क्रिप्टोकरेंसी अवैध नहीं है।

  • Section 115BBH के तहत 30% कर लागू है।

  • Section 194S के तहत 1% TDS लागू है।

  • राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध के लिए संसद द्वारा अलग कानून पारित करना आवश्यक होगा।

MiCA: यूरोप ने लागू किया पूर्ण लाइसेंसिंग सिस्टम

यूरोपीय संघ का Markets In Crypto-Assets Regulation (MiCA) अब पूरी तरह लागू हो चुका है।

1 जुलाई 2026 से सभी Crypto Asset Service Providers (CASPs) के लिए MiCA लाइसेंस अनिवार्य हो गया है।

प्रमुख तथ्य

  • पहले से पंजीकृत लगभग 1,200 संस्थानों में से केवल 210–244 कंपनियों को MiCA लाइसेंस मिला।

  • यानी लगभग 80% कंपनियां नए नियमों के अनुरूप लाइसेंस प्राप्त नहीं कर सकीं।

  • जर्मनी सबसे अधिक लाइसेंस जारी करने वाला देश बनकर उभरा।

  • ESMA ने स्पष्ट किया है कि बिना लाइसेंस संचालन यूरोपीय कानून का उल्लंघन माना जाएगा।

वैश्विक तस्वीर: हर देश अपना अलग रास्ता चुन रहा है

Crypto Clarity Act News यह दिखाता है कि वैश्विक स्तर पर क्रिप्टो नियमन अब एक समान दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है।

जहां Japan Crypto Regulatory Amendment और South Korea Crypto Regulation News डिजिटल एसेट्स को पारंपरिक वित्तीय प्रणाली में शामिल करने की दिशा दिखाते हैं, वहीं यूरोप ने MiCA के माध्यम से व्यापक लाइसेंसिंग मॉडल लागू कर दिया है।

इसके विपरीत अमेरिका अब भी राजनीतिक गतिरोध में फंसा हुआ है, जबकि भारत में Crypto Ban India को लेकर नीति-निर्माण की प्रक्रिया जारी है।

ऐसे में निवेशकों, एक्सचेंजों और क्रिप्टो उद्योग के लिए यह समझना पहले से अधिक जरूरी हो गया है कि भविष्य में वैश्विक क्रिप्टो नियम किसी एक मॉडल पर आधारित नहीं होंगे, बल्कि हर देश अपनी आर्थिक और नियामकीय प्राथमिकताओं के अनुसार अलग रणनीति अपनाएगा।

कन्क्लूजन

दुनिया के प्रमुख देश तेजी से अपने-अपने क्रिप्टो नियामकीय ढांचे को अंतिम रूप दे रहे हैं। जापान और दक्षिण कोरिया सुधारों को लागू कर चुके हैं, यूरोप ने MiCA के जरिए स्पष्ट नियम बना दिए हैं, जबकि अमेरिका का CLARITY Act अभी भी राजनीतिक सहमति का इंतजार कर रहा है। आने वाले महीनों में यह तय होगा कि वैश्विक क्रिप्टो उद्योग का नेतृत्व किस देश के नियामकीय मॉडल के हाथ में होगा।

अस्वीकरण: यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों, आधिकारिक घोषणाओं और विश्वसनीय मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना है। यह निवेश, कानूनी या कर संबंधी सलाह नहीं है। क्रिप्टो परिसंपत्तियों से जुड़े नियम समय-समय पर बदल सकते हैं। किसी भी निवेश या वित्तीय निर्णय से पहले योग्य वित्तीय, कर या कानूनी विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

लेखक परिचय
Ronak Ghatiya Hindi News Writer

Ronak Ghatiya एक उभरते हुए क्रिप्टो कंटेंट राइटर हैं, जिनका एजुकेशन और टेक्नोलॉजी में मजबूत बैकग्राउंड रहा है। उन्होंने पिछले 6 वर्ष में फाइनेंस, ब्लॉकचेन, Web3 और डिजिटल एसेट्स जैसे विषयों पर डेटा-ड्रिवन और SEO-अनुकूल कंटेंट लिखा है, जो नए और प्रोफेशनल रीडर्स दोनों के लिए उपयोगी साबित हुआ है। रोनक की लेखनी का फोकस जटिल तकनीकी टॉपिक्स को आसान भाषा में समझाना है, जिससे क्रिप्टो स्पेस में ट्रस्ट और क्लैरिटी बनी रहे। उन्होंने CoinGabbar.com, Medium और अन्य क्रिप्टो प्लेटफ़ॉर्म्स के लिए ब्लॉग्स और न्यूज़ स्टोरीज़ लिखी हैं, जिनमें क्रिएटिविटी और रिसर्च का संतुलन होता है। रोनक की स्टाइल डिटेल-ओरिएंटेड और रिस्पॉन्सिव है, और वह तेजी से बदलते क्रिप्टो परिदृश्य में एक विश्वसनीय आवाज़ बनने की ओर अग्रसर हैं। LinkedIn पर प्रोफ़ाइल देखें या उनके आर्टिकल्स यहाँ पढ़ें।

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CLARITY Act अमेरिका का एक प्रस्तावित कानून है, जिसका उद्देश्य डिजिटल एसेट्स के लिए स्पष्ट नियामकीय ढांचा तैयार करना और SEC (Securities and Exchange Commission) तथा CFTC (Commodity Futures Trading Commission) की जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना है। इसका लक्ष्य क्रिप्टो उद्योग के लिए नियामकीय अनिश्चितता को कम करना है।
नहीं। CLARITY Act अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) से पारित हो चुका है, लेकिन इसे कानून बनने के लिए अभी अमेरिकी सीनेट की मंजूरी और उसके बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की आवश्यकता है।
नहीं। भारत में फिलहाल क्रिप्टोकरेंसी पर कोई राष्ट्रीय प्रतिबंध नहीं है। हालांकि, क्रिप्टो लेनदेन पर लागू कर नियमों के तहत वर्तमान में 30% टैक्स और कुछ लेनदेन पर 1% TDS लागू है। निवेश से पहले नवीनतम नियामकीय और कर नियमों की जानकारी अवश्य प्राप्त करें।
MiCA (Markets in Crypto-Assets) यूरोपीय संघ का व्यापक क्रिप्टो नियामकीय ढांचा है। इसके तहत Crypto Asset Service Providers (CASPs) के लिए लाइसेंस प्राप्त करना, निवेशक सुरक्षा सुनिश्चित करना और पूरे यूरोपीय संघ में एक समान नियमों का पालन करना अनिवार्य किया गया है।