भारत में सामने आए सबसे बड़े क्रिप्टो फ्रॉड मामलों में से एक GainBitcoin Scam में केंद्रीय जांच एजेंसी CBI ने पहली गिरफ्तारी की है। एजेंसी ने Ayush Varshney नाम के आरोपी को उस समय पकड़ लिया, जब वह श्रीलंका के कोलंबो भागने की कोशिश कर रहा था। जानकारी के मुताबिक, Look Out Circular (LOC) के आधार पर उसे एयरपोर्ट पर रोका गया और वहीं से हिरासत में ले लिया गया। Ayush Varshney, Darwin Labs कंपनी के को-फाउंडर बताए जाते हैं, जिस पर आरोप है कि उसने GainBitcoin प्लेटफॉर्म को तकनीकी और कंसल्टिंग सपोर्ट दिया था। आइए जानते हैं इससे जुड़ा पूरा मामला क्या है?
दरअसल, GainBitcoin Scam एक कथित पोंजी स्कीम थी, जिसे 2015 में अमित भारद्वाज ने अपने भाई Ajay Bhardwaj और अन्य एजेंटों के साथ शुरू किया था। यह स्कीम कई वेबसाइटों के माध्यम से चलाई गई और इसे Variable Tech Pte. Ltd. नाम की कंपनी के तहत पेश किया गया था।
इस प्लान में निवेशकों को 18 महीनों तक हर महीने 10% Bitcoin रिटर्न देने का वादा किया गया। लोगों को सलाह दी जाती थी कि वे एक्सचेंज से बिटकॉइन खरीदकर उसे “क्लाउड माइनिंग कॉन्ट्रैक्ट” के जरिए GainBitcoin में निवेश करें।
जांच एजेंसियों के अनुसार यह GainBitcoin Scam, MLM (मल्टी-लेवल मार्केटिंग) मॉडल पर आधारित थी। इसमें पुराने निवेशकों को भुगतान तभी मिलता था जब वे नए निवेशक जोड़ते थे। इसी वजह से इसे पिरामिड आधारित पोंजी स्कीम माना जा रहा है। शुरुआत में निवेशकों को बिटकॉइन में भुगतान मिला, लेकिन 2017 के बाद भुगतान कम होने लगा। बाद में कंपनी ने भुगतान को अपनी कथित क्रिप्टोकरेंसी MCAP में बदल दिया, जिसकी कीमत बिटकॉइन से बहुत कम थी। इससे निवेशकों को भारी नुकसान हुआ।
GainBitcoin Scam के मुख्य आरोपी अजय भारद्वाज और महेंद्र भारद्वाज अभी भी फरार बताए जा रहे हैं। ED ने अब तक करीब ₹166 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति अटैच की है और विदेशी एजेंसियों से भी सहयोग मांगा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि GainBitcoin Scam मामला भारत के सबसे बड़े क्रिप्टो निवेश घोटालों में से एक हो सकता है, जिसमें हजारों निवेशकों का पैसा फंसा हुआ है।
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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, इस GainBitcoin Scam की जांच अब पूरे देश में चल रही है। फरवरी 2024 में जांच एजेंसियों ने दिल्ली-एनसीआर, पुणे, चंडीगढ़, नांदेड़, कोल्हापुर और बेंगलुरु समेत 60 से ज्यादा जगहों पर छापेमारी की थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद 2023 में अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों को CBI को ट्रांसफर कर दिया गया था। वहीं ED भी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहा है।
ED ने इस मामले में भारत और विदेशों में कई संपत्तियां अटैच की हैं, जिनमें दुबई में 6 ऑफिस भी शामिल हैं। इसके अलावा मर्सिडीज और ऑडी Q3 जैसी लग्जरी कारें भी जब्त की गई हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने Bitcoin, Ethereum, USDT और Tron जैसी क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल हवाला ट्रांजैक्शन के लिए किया।
GainBitcoin Scam मामला भारत के सबसे बड़े क्रिप्टो घोटालों में से एक माना जा रहा है। CBI की पहली गिरफ्तारी के बाद जांच तेज हो गई है और आगे और खुलासे होने की संभावना है। यह घटना निवेशकों के लिए भी चेतावनी है कि किसी भी योजना में निवेश से पहले पूरी जानकारी और जोखिम जरूर समझें।
यह खबर अलग अलग आधिकारिक एजेंसियों और मीडिया रिपोर्ट्स में उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम निर्णय संबंधित अदालत द्वारा ही किया जाएगा।
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