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विदेशी Crypto Exchange और भारत: नीति का पूरा ढांचा

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विदेशी Crypto Exchange और भारत: नीति का पूरा ढांचा
विदेशी Crypto Exchange और भारत: नीति का पूरा ढांचा

भारत की फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (FIU) दो अतिरिक्त Foreign Crypto Exchange को देश में Operate करने की अनुमति देने की योजना बना रही है। FIU, जो Anti-Money Laundering (AML) नियमों का पालन सुनिश्चित करती है, वर्तमान में चार Foreign Crypto Exchange की मांगों की जांच कर रही है। इन Exchange को पहले Anti-Money Laundering (AML) नियमों के उल्लंघन के कारण प्रतिबंधित कर दिया गया था।

FIU ने पहले Binance और KuCoin के लिए मंजूरी दी थी। अब,सूत्रों के अनुसार,“ चार और Foreign Crypto Exchange भारत में Operate करने की मांग मिली है और उम्मीद है कि इनमें से कम से कम दो को FY25 के अंत तक अनुमति मिल जाएगी। सूत्रो ने यह भी बताया कि यह मंजूरी लेन-देन की पारदर्शिता, संदिग्ध लेन-देन की रिपोर्टिंग और अन्य संबंधित मुद्दों की गहन समीक्षा के बाद ही दी जाएगी।

भारत में नौ Crypto Exchange पर प्रतिबंध

भारत की FIU ने जनवरी के पहले सप्ताह में Foreign Crypto Exchange की URLs और Mobile Applications को ब्लॉक कर दिया था, जिनमें Binance भी शामिल था। इन Exchange ने भारत के AML नियमों का पालन नहीं किया था। अब तक, KuCoin और Binance ने भारत की FIU के साथ रजिस्ट्रेशन करवा लिया है। दूसरी ओर, OKX ने पूरी तरह से अपनी गतिविधियाँ बंद कर दीं, जिसमें उसने नियामक बोझ का हवाला दिया। 15 अगस्त को, Binance ने भारत की FIU के साथ एक रिपोर्टिंग एंटिटी के रूप में रजिस्ट्रेशन की घोषणा की है।  इसके साथ ही उसने $2 मिलियन का जुर्माना भी भरा।

भविष्य की संभावनाएँ और चुनौतियाँ

भारत ब्लॉकचेन एलायंस के अनुसार दो अतिरिक्त Foreign Crypto Exchange को मंजूरी मिलने से भारत के Cryptocurrency का वातावरण पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा। यह कदम बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाएगा, भारतीय इन्वेस्टर्स को बेहतर Trading Options उपलब्ध कराएगा और Dependency कम करेगा। इससे कम फीस, बेहतर सुविधाएँ और नये उत्पादों की संभावना बढ़ेगी। इससे भारतीय Cryptocurrency मार्केट  में Liquidity भी बढ़ेगी, जिससे यह Institutional Investors के लिए अधिक आकर्षक होगा। हालांकि, बढ़ती प्रतिस्पर्धा Domestic Exchange को अपने उत्पादों में सुधार के लिए प्रेरित करेगी, जिससे Regulatory Issues उत्पन्न हो सकते हैं।

भारत का Cryptocurrency इकोसिस्टम भी बदल सकता है क्योंकि आर्थिक मामलों का विभाग (DEA) Cryptocurrency कानून पर एक महत्वपूर्ण परामर्श पत्र तैयार कर रहा है। यह पत्र अक्टूबर तक जारी होने की उम्मीद है और इसमें विभिन्न Stakeholders से फीडबैक लिया जाएगा।

यह भी पढ़ें : Binance ने की 20x लीवरेज के DOGS Perpetual Contract की घोषणा

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FAQ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले सवालों के जवाब यहाँ पाएँ और समझें कि सब कुछ कैसे काम करता है।

सही प्रश्न 'legal है या नहीं' नहीं, बल्कि 'यह platform ढांचे में कहां खड़ा है' है — यानी FIU-पंजीकरण, PMLA दायित्व और कर/प्रवर्तन की तीन परतें।

PMLA के तहत FIU-पंजीकरण और KYC/AML दायित्व; भारतीय कर-व्यवस्था (विशेषकर लेनदेन-स्तर TDS); और अनुपालना न होने पर प्रवर्तन (जुर्माना या पहुंच-रोक)।

यदि वह भारतीय users को सेवा दे रही है, तो पंजीकरण और दायित्व लागू माने जाते हैं — चाहे इकाई भारत में हो या विदेश में।

पंजीकरण का अर्थ ढांचे में शामिल होना और दायित्व निभाना है; अनुमोदन/लाइसेंस गुणवत्ता या ग्राहक-सुरक्षा की नियामकीय गारंटी होती, जो crypto-exchanges के लिए उस रूप में नहीं है।

नहीं — वह किसी विशेष सेवा-प्रदाता पर अनुपालना-आधारित कार्रवाई होती है, पूरी श्रेणी पर प्रतिबंध नहीं।

नहीं — यह स्थिति प्रतिवर्ती है; कई मामलों में platform शर्तें पूरी करके, पंजीकरण कराकर और (जहां लागू) जुर्माना चुकाकर वापस लौटे हैं।

कार्रवाई किस पर हुई (platform या पूरी श्रेणी), किस आधार पर (अनुपालना या नीति), और वापसी की शर्तें क्या हैं।

VDA-लाभ पर 30%, लागू परिस्थितियों में 1% TDS, घाटे के set-off की सख्त सीमाएं, और platform-शुल्क पर GST — यह परत platform की स्थिति से नहीं बदलती।

जब कटौती/रिपोर्टिंग platform-स्तर पर न हो, तो अनुपालना का बोझ पूरी तरह user पर आ जाता है — इसलिए हर लेनदेन का अपना record रखना अनिवार्य है।

Withdrawal कठिन हो जाना — इसका व्यावहारिक उत्तर custody-अलगाव है: trading जितना जरूरी हो उतना ही platform पर, बाकी self-custody में।

अनुपालना-स्थिति — fees या features से पहले यह देखें कि platform किस ढांचे में काम करता है और उसके भारत-विशेष नियम क्या हैं।

यह पृष्ठ किसी वैध रोक को दरकिनार करने का कोई तरीका नहीं सुझाता — ऐसा करना कानूनी और व्यावहारिक दोनों दृष्टि से जोखिम भरा है, और विवाद में कोई शिकायत-मार्ग नहीं बचता।

नहीं — पंजीकरण न बीमा है, न solvency की गारंटी; custody और परिचालन-जोखिम यथावत रहते हैं।

पंजीकृत platforms पर KYC/AML मानक, record-keeping और शिकायत-मार्ग स्पष्ट होते हैं, कर-रिपोर्टिंग आसान होती है, और घरेलू-विदेशी दोनों पर समान दायित्व आते हैं।

चार — FIU-पंजीकरण/अनुपालना स्थिति, TDS-प्रक्रिया के अपडेट, platform की पहुंच/सेवा-सूची में बदलाव, और व्यापक नीति-दिशा।