क्रिप्टो मार्केट में Vesting Policy कोई नई बात नहीं है। कई प्रोजेक्ट्स अपने टोकन को एक निश्चित समय तक लॉक रखते हैं। ताकि मार्केट में अचानक बड़ी मात्रा में टोकन न आएं और कीमत पर दबाव न बने। लेकिन जब यही नियम आम इन्वेस्टर्स पर लागू होता है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि इसका फायदा किसे मिल रहा है, निवेशक को या प्रोजेक्ट को।
Mr Mint (MNT) भी ऐसा ही एक प्रोजेक्ट है, जिसकी 9-महीने की Vesting Policy काफी चर्चा में है। प्रोजेक्ट इसे इन्वेस्टर्स की सुरक्षा के लिए जरूरी बताता है, जबकि आलोचकों का मानना है कि, इससे इन्वेस्टर्स की स्वतंत्रता सीमित हो जाती है। आइए समझते हैं कि यह नीति वास्तव में कैसे काम करती है और इससे जुड़े रिस्क क्या हैं।

Source: Official Website
Mr Mint के अनुसार, जब कोई इन्वेस्टर्स $MRMINT Token खरीदता है, तो वे टोकन खरीद की तारीख से 9 महीने तक लॉक रहते हैं। इस अवधि के दौरान इन्वेस्टर्स अपने टोकन को बेच या ट्रांसफर नहीं कर सकता। हालांकि प्रोजेक्ट यह सुविधा देता है कि, इन्वेस्टर्स लॉक किए गए टोकन को स्टेक कर सकते हैं और उनसे मिलने वाले Staking Rewards को हर महीने निकाल सकते हैं।
प्रोजेक्ट के अनुसार, यह मॉडल इन्वेस्टर्स को मार्केट की अस्थिरता से बचाता है और लंबे समय के लिए होल्डिंग को प्रोत्साहित करता है। पहली नजर में यह व्यवस्था आकर्षक लग सकती है, लेकिन इसकी वास्तविक उपयोगिता तब समझ आती है जब मार्केट में कीमत गिरने लगती है।
किसी भी इन्वेस्टर्स के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज होती है उसकी Exit Freedom, यानी जरूरत पड़ने पर निवेश से बाहर निकलने की क्षमता। यदि कोई टोकन लगातार गिर रहा हो और इन्वेस्टर्स अपने टोकन बेच ही न सके, तो Vesting Policy उसके लिए समस्या बन सकती है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, MNT का All-Time High लगभग $0.89 रहा, जबकि बाद में इसकी कीमत लगभग $0.02 तक पहुंच गई। यह करीब 93% की गिरावट को दर्शाता है। ऐसी स्थिति में जिन इन्वेस्टर्स ने ऊंची कीमत टोकन खरीदी होगी, उनके पास नुकसान कम करने का कोई विकल्प नहीं रहा होगा क्योंकि उनके टोकन लॉक थे। यही कारण है कि कई विशेषज्ञ Vesting Policy को Investor Protection के बजाय Price Stabilization Tool मानते हैं।
Mint से जुड़े उपलब्ध आंकड़े कुछ महत्वपूर्ण सवाल खड़े करते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार टोकन की कीमत लंबे समय से दबाव में है और कई प्लेटफॉर्म पर Market Cap का डेटा स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा 24 घंटे का Trading Volume भी काफी कम है। कम ट्रेडिंग वॉल्यूम आमतौर पर कमजोर Liquidity का संकेत माना जाता है। ऐसी स्थिति में बड़े इन्वेस्टर्स के लिए खरीद और बिक्री करना कठिन हो सकता है।
एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि प्रोजेक्ट की टीम सार्वजनिक रूप से अपनी पहचान साझा नहीं करती। Crypto Industry में कई सफल प्रोजेक्ट्स ने pseudonymous मॉडल अपनाया है, लेकिन जब टीम की पहचान अज्ञात हो, Liquidity सीमित हो और इन्वेस्टर्स के टोकन लंबे समय तक लॉक हों, तब रिस्क का स्तर बढ़ जाता है। यही कारण है कि संभावित इन्वेस्टर्स को केवल मार्केटिंग दावों के आधार पर निर्णय लेने के बजाय उपलब्ध डेटा और रिस्क का भी मूल्यांकन करना चाहिए।
हर Vesting Policy खराब नहीं होती। कई अच्छे crypto projects अपनी टीम और founders के tokens को कुछ समय के लिए lock रखते हैं, ताकि वे लॉन्च के बाद अचानक token बेचकर price पर दबाव न डालें। लेकिन अगर आम इन्वेस्टर्स के tokens लंबे समय तक lock हों, टीम की पहचान सार्वजनिक न हो और project की liquidity भी कमजोर हो, तो यह रिस्क बढ़ा सकता है। इसलिए किसी भी Vesting Policy को देखकर यह समझना जरूरी है कि उसका फायदा वास्तव में निवेशकों को मिल रहा है या सिर्फ project को।
Mr Mint की 9-महीने Vesting Policy अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन इसका मूल्यांकन केवल इसके दावे के आधार पर नहीं किया जा सकता। जब इसे सीमित Liquidity, अस्पष्ट Market Data, Anonymous Team और कीमत में भारी गिरावट जैसे कारकों के साथ देखा जाता है, तो रिस्क बढ़ जाता है। किसी भी क्रिप्टो प्रोजेक्ट में इन्वेस्ट करने से पहले Vesting Terms, Team Transparency, Liquidity और Market Performance को समझना भुत जरूरी है। आखिरकार सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है, टोकन लॉक होने से फायदा वास्तव में किसे हो रहा है, निवेशक को या प्रोजेक्ट को।
Disclaimer: यह आर्टिकल केवल सूचना और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी प्रकार की कानूनी, Financial investment advice नहीं है। Crypto investment में हाई रिस्क होता है, इसलिए कोई भी निर्णय लेने से पहले किसी योग्य financial advisor से परामर्श अवश्य लें। लेखक या प्रकाशक किसी भी नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।
Copyright 2026 All rights reserved