भारत के पूंजी बाजार नियामक Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने Tokenized Corporate Bonds को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। SEBI चेयरमैन Tuhin Kanta Pandey ने मुंबई में आयोजित CareEdge Debt Market Summit के दौरान घोषणा की कि रेगुलेटर अब Corporate Bond Tokenization के लिए Distributed Ledger Technology (DLT) आधारित पायलट प्रोजेक्ट शुरू करेगा।
यह पायलट अगले 6 से 9 महीनों के भीतर शुरू हो सकता है। इसका उद्देश्य यह जांचना है कि क्या Blockchain Technology के जरिए Corporate Bond Market को अधिक पारदर्शी, तेज और निवेशकों के लिए सुलभ बनाया जा सकता है। इस पहल को भारत में Blockchain Bonds India और Real World Assets (RWA India) सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण विकास माना जा रहा है।

Tokenized Corporate Bonds ऐसे पारंपरिक कॉर्पोरेट बॉन्ड होते हैं जिन्हें Blockchain पर Digital Tokens के रूप में जारी किया जाता है। प्रत्येक Token किसी Bond में Ownership का प्रतिनिधित्व करता है।
सामान्य तौर पर कंपनियां पूंजी जुटाने के लिए Bonds जारी करती हैं, जिन पर निवेशकों को निश्चित ब्याज मिलता है। लेकिन Tokenization के बाद यही Bonds Blockchain नेटवर्क पर Digital रूप में उपलब्ध हो जाते हैं, जिससे Ownership Tracking, Settlement और Trading अधिक Efficient बन सकती है।
यह मॉडल Smart Contract Bonds की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि Interest Payment और Maturity Settlement जैसे कार्य Automation के जरिए किए जा सकते हैं।
SEBI के अनुसार यह पायलट मुख्य रूप से चार महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित होगा:
तेज Settlement प्रक्रिया
अधिक Transparency
बेहतर Transaction Tracking
Secondary Market Liquidity में सुधार
भारत का Corporate Bond Market FY15 में लगभग ₹17.5 लाख करोड़ था, जो अब बढ़कर करीब ₹59 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है। हालांकि इसके बावजूद Secondary Market Trading अभी भी सीमित बनी हुई है।
SEBI का मानना है कि DLT Corporate Bonds मॉडल Market Efficiency को बढ़ा सकता है और Retail Investors की भागीदारी को आसान बना सकता है।
SEBI ने यह भी स्वीकार किया कि भारत के Bond Market में Liquidity अभी भी एक बड़ी समस्या है। लगभग 85-90% Bond Issuances केवल AA और AAA-Rated Issuers तक सीमित हैं। इसके अलावा करीब 6,000 Listed कंपनियों में से केवल 776 कंपनियों के पास Listed Debt Securities मौजूद हैं।
अधिकांश निवेशक Bonds को Maturity तक Hold करते हैं, जिसके कारण Secondary Market Trading कम होती है और Price Discovery कमजोर रहती है। ऐसे में Corporate Bond Tokenization मॉडल Fractional Ownership और आसान Trading के जरिए Liquidity बढ़ाने में मदद कर सकता है।
Tokenized Securities India मॉडल का एक बड़ा लाभ यह है कि इसमें Fractional Bond Ownership संभव हो सकती है। इसका मतलब यह है कि निवेशकों को पूरा Bond खरीदने की आवश्यकता नहीं होगी।
उदाहरण के लिए यदि किसी Corporate Bond की कीमत ₹1 लाख है, तो Tokenization के बाद उसे छोटे हिस्सों में विभाजित किया जा सकता है। इससे Retail Investors भी कम राशि के साथ Digital Corporate Bonds में निवेश कर पाएंगे।
यह मॉडल Traditional Finance और Blockchain Finance India के बीच एक महत्वपूर्ण Bridge के रूप में देखा जा रहा है।
SEBI का यह पायलट Smart Contract Bonds के Practical उपयोग को भी परखेगा। Smart Contracts Blockchain पर चलने वाले Automated Digital Agreements होते हैं, जो Predefined Conditions पूरी होने पर अपने आप Execute हो जाते हैं।
यदि Corporate Bonds में Smart Contracts का उपयोग होता है, तो:
ब्याज भुगतान Automation से हो सकता है
Maturity Settlement तेज हो सकती है
Compliance Tracking बेहतर बन सकती है
Intermediary Costs कम हो सकती हैं
हालांकि SEBI ने स्पष्ट किया है कि Regulatory Risks और Investor Protection को ध्यान में रखते हुए हर पहलू का सावधानीपूर्वक परीक्षण किया जाएगा।
SEBI केवल Tokenization तक सीमित नहीं है। रेगुलेटर RBI, वित्त मंत्रालय और Market Participants के साथ मिलकर Bond Market Liquidity बढ़ाने के लिए अन्य उपायों पर भी काम कर रहा है।
इनमें शामिल हैं:
Bond Exchange-Traded Funds (ETFs)
Corporate Bond Derivatives
Market-Making Framework
Debt Market Awareness Programs
इसके अलावा Project Jagruk के तहत Retail Investors को Listed Bonds और Debt Products के बारे में जागरूक करने की योजना भी बनाई जा रही है।
SEBI Debt Brokers के लिए अलग Compliance Classification पर भी विचार कर रहा है ताकि Fixed-Income Market में Specialized Intermediaries को बढ़ावा दिया जा सके।
रेगुलेटर यह भी समीक्षा कर रहा है कि केवल Debt-Listed Entities को क्या Equity-Listed कंपनियों जैसे Disclosure नियमों का पालन करना चाहिए या नहीं। इससे Compliance Costs कम हो सकती हैं।
दुनिया भर में Tokenized Assets तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। कई वैश्विक संस्थान पहले ही Blockchain आधारित Bond Issuances का परीक्षण कर चुके हैं।
अब भारत का यह कदम संकेत देता है कि देश भी Real World Assets (RWA) और Blockchain-Based Financial Infrastructure की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ रहा है।
यदि SEBI का यह पायलट सफल रहता है, तो भविष्य में भारत में Digital Corporate Bonds और Blockchain आधारित Securities Ecosystem तेजी से विकसित हो सकता है।
SEBI द्वारा शुरू किया गया Tokenized Corporate Bonds पायलट भारत के Bond Market Modernization की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यह परियोजना Transparency, Faster Settlement, Liquidity और Retail Participation जैसे मुद्दों को Address करने का प्रयास करेगी।
हालांकि यह अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन Blockchain Finance India और Tokenized Securities India के भविष्य के लिए यह कदम काफी अहम साबित हो सकता है। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि DLT आधारित Bond Infrastructure भारतीय वित्तीय बाजार में कितना प्रभावी साबित होता है।
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अस्वीकरण: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। इसमें दी गई जानकारी निवेश सलाह नहीं है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।
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