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Stablecoin, इसके पीछे क्या रखा होता है और यह टूटा कब-कब है

Research Analyst
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Stablecoin के reserve, attestation और depeg इतिहास का चार्ट
Stablecoin के reserve, attestation और depeg इतिहास का चार्ट

भारत में क्रिप्टो का बड़ा हिस्सा असल में इसी श्रेणी से होकर गुज़रता है, खासकर वह लेनदेन जो सीधे लोगों के बीच होता है। फिर भी इस पर सबसे कम लिखा जाता है। Stablecoin के बारे में सबसे ज़रूरी सवाल यह है कि इसके पीछे असल में क्या रखा होता है।

क्योंकि जो चीज़ उसे एक डॉलर पर टिकाए रखती है, वही उसका जोखिम भी है।

Stablecoin, यह है क्या

यह ऐसा टोकन है जिसकी कीमत किसी मुद्रा से बाँधकर रखी जाती है, आम तौर पर एक डॉलर से। बाकी टोकन की तरह इसकी कीमत ऊपर-नीचे नहीं होती, इसलिए इसका उपयोग भेजने, रखने और लेनदेन में होता है।

यह स्थिरता अपने आप नहीं आती। जो कंपनी इसे जारी करती है वह दावा करती है कि हर जारी टोकन के बदले उसके पास उतनी ही रकम या संपत्ति रखी है, जिसे reserve कहते हैं। पूरा भरोसा उसी दावे पर टिका है, और इसीलिए सबसे ज़रूरी सवाल यही है कि उस reserve में क्या है।

पीछे असल में क्या रखा होता है

सबसे बड़े जारीकर्ता की हालिया रिपोर्ट के अनुसार उसके पास लगभग एक सौ इकतालीस अरब डॉलर अमेरिकी सरकारी प्रतिभूतियों और अल्पावधि साधनों में हैं, जो सबसे तरल श्रेणी मानी जाती है।

इसके अलावा लगभग पचास अरब डॉलर की संपत्ति दूसरी श्रेणियों में है, जिनमें सोना, कॉर्पोरेट बॉन्ड, बिटकॉइन, सुरक्षित ऋण और कुछ इक्विटी शामिल हैं। यह दूसरी श्रेणी ही बहस का केंद्र है, क्योंकि दबाव के समय इन्हें तुरंत बेचकर नकदी में बदलना उतना आसान नहीं होता जितना सरकारी प्रतिभूतियों को। दूसरे बड़े जारीकर्ता की व्यवस्था अलग है, जहाँ रकम मुख्यतः एक नियमित सरकारी मुद्रा बाज़ार फंड में रखी जाती है।

peg कब-कब टूटा है

कबकौन साकहाँ तक गिराकारण
अक्टूबर 2018USDTलगभग $0.92बैंकिंग संबंधी चिंता
मार्च 2020USDTलगभग $0.97वैश्विक नकदी संकट
मई 2022USDTलगभग $0.95एक अन्य टोकन के ढहने का असर
मार्च 2023USDCलगभग $0.87जिस बैंक में रकम थी वह डूबा
जून 2023USDTलगभग $0.997एक पूल का असंतुलन

हर बार कीमत कुछ ही दिनों में वापस आ गई, पर यह तालिका एक बात साफ करती है, कि एक डॉलर पर टिका रहना कोई गारंटी नहीं, एक व्यवस्था है जो दबाव में हिल सकती है।

attestation और audit का फर्क

यह हिस्सा सबसे ज़रूरी है और लगभग कहीं नहीं समझाया जाता। ज़्यादातर जारीकर्ता जो रिपोर्ट प्रकाशित करते हैं वह attestation होती है, audit नहीं, और दोनों एक चीज़ नहीं हैं।

अंतर क्या है

attestation किसी एक तय तारीख का चित्र है, जिसमें यह पुष्टि होती है कि उस दिन reserve और जारी टोकन का मिलान था। audit इससे अलग है, उसमें पूरी अवधि के रिकॉर्ड और आंतरिक नियंत्रण जाँचे जाते हैं। इसका व्यावहारिक अर्थ यह है कि attestation यह नहीं बताती कि दो तारीखों के बीच क्या हुआ। यह अपने आप में कोई आरोप नहीं है, यह केवल यह जानने की बात है कि आप जो दस्तावेज़ देख रहे हैं वह कितना और क्या बताता है।

एक उल्टा तथ्य जो सोच बदल देता है

आम धारणा यह है कि जो जारीकर्ता ज़्यादा नियमन के दायरे में है और ज़्यादा पारदर्शी है, उसका टोकन ज़्यादा सुरक्षित होगा। तालिका इस धारणा को उलट देती है।

सबसे बड़ी गिरावट उसी टोकन में आई जिसे ज़्यादा नियमित और ज़्यादा पारदर्शी माना जाता है, और वह लगभग सत्तासी सेंट तक गया। कारण यह था कि उसकी रकम एक ऐसे बैंक में रखी थी जो उसी समय डूब गया। यानी उसका जोखिम reserve की गुणवत्ता का नहीं था, बल्कि उस बैंक का था जहाँ वह रखी थी। इससे सबक यह निकलता है कि ज़्यादा नियमन का मतलब कम जोखिम नहीं, अलग जोखिम होता है, और हर व्यवस्था में कोई न कोई कड़ी ऐसी होती है जिस पर सब कुछ टिका है।

भारत में इसका सबसे बड़ा उपयोग

यहाँ इसका सबसे बड़ा उपयोग सीधे लोगों के बीच होने वाले लेनदेन में है, जहाँ एक व्यक्ति रुपये देकर दूसरे से टोकन लेता है। यह पूरा ढाँचा इसी श्रेणी पर खड़ा है।

इसमें एक जोखिम ऐसा है जो टोकन से नहीं, रुपये वाले हिस्से से आता है। अगर सामने वाले के भेजे पैसे किसी जाँच के दायरे में आ जाएँ तो आपका बैंक खाता भी उसमें फँस सकता है, भले ही आपने कुछ गलत न किया हो। इसका पूरा तंत्र और बचाव के तरीके इस पेज पर विस्तार से दिए गए हैं, और वह इस विषय का सबसे व्यावहारिक हिस्सा है।

तीन अलग-अलग तरह के stablecoin

सब एक जैसे नहीं होते, और यह फर्क जोखिम तय करता है। पहली श्रेणी वह है जिसके पीछे असली रुपये-डॉलर या सरकारी प्रतिभूतियाँ रखी होती हैं, और आज चलन में जो सबसे बड़े नाम हैं वे इसी श्रेणी के हैं।

दूसरी श्रेणी वह है जिसके पीछे दूसरी क्रिप्टो संपत्ति रखी जाती है, आम तौर पर ज़रूरत से ज़्यादा मात्रा में, ताकि उसके गिरने पर भी भरपाई रहे। तीसरी वह है जिसके पीछे कुछ रखा ही नहीं होता, और स्थिरता केवल एक गणितीय व्यवस्था से बनाए रखने की कोशिश होती है। यह तीसरी श्रेणी सबसे जोखिम भरी साबित हुई है, और 2022 में इसी तरह की एक बड़ी व्यवस्था ढह गई थी, जिसका असर पूरे बाज़ार पर पड़ा और जिसकी वजह से बाकी टोकन भी दबाव में आए। इसलिए किसी भी stablecoin को देखते समय पहला सवाल यही होना चाहिए कि वह किस श्रेणी का है।

नियम अभी बदल रहे हैं

यह क्षेत्र इस समय सबसे तेज़ी से बदल रहा है। अमेरिका में जुलाई 2025 में एक कानून लागू हुआ जो वहाँ काम करने वाले जारीकर्ताओं से पूरी रकम केवल नकद या अल्पावधि सरकारी प्रतिभूतियों में रखने और हर महीने ब्यौरा प्रकाशित करने को कहता है।

इसके पालन के लिए लगभग दो साल का समय दिया गया है। सबसे बड़े जारीकर्ता ने उसी कानून के अनुरूप एक अलग टोकन शुरू किया है, जबकि उसके मुख्य टोकन को लेकर अंतिम स्थिति अभी तय नहीं हुई। यूरोप में भी अपने नियमों के चलते कुछ मंचों से यह टोकन हटाया गया है। भारतीय उपयोगकर्ता के लिए इसका सीधा अर्थ यह है कि आगे यह तय करना और ज़रूरी होगा कि आप जो टोकन रख रहे हैं वह किस व्यवस्था के अधीन है, जिसका संदर्भ नियामकीय पेज पर है।

अपने स्तर पर क्या जाँच सकते हैं

यह पूरा विषय तकनीकी लगता है, पर उपयोगकर्ता के स्तर पर तीन चीज़ें आसानी से देखी जा सकती हैं। पहली, जारीकर्ता की पारदर्शिता वाला पन्ना खोलिए और देखिए कि reserve का ब्यौरा कितनी बार प्रकाशित होता है, हर महीने या हर तिमाही।

दूसरी, यह देखिए कि उसमें कितना हिस्सा सबसे तरल श्रेणी में है और कितना दूसरी श्रेणियों में, क्योंकि यही अनुपात दबाव के समय मायने रखता है। तीसरी, अपनी ज़रूरत देखिए, यानी अगर आप केवल कुछ दिनों के लिए रकम रोक रहे हैं तो जोखिम की अवधि कम है, और अगर महीनों तक बड़ी रकम इसी में रख रहे हैं तो वह एक अलग फैसला है जिसे सोच-समझकर लेना चाहिए। इनमें से कोई भी जाँच किसी विशेषज्ञता की माँग नहीं करती।

Glossary

Peg
वह तय मूल्य जिससे टोकन को बाँधा जाता है, आम तौर पर एक डॉलर।
Reserve
जारी टोकन के बदले रखी गई रकम या संपत्ति।
Attestation
किसी एक तय तारीख की पुष्टि, जो दो तारीखों के बीच की स्थिति नहीं बताती।
Audit
पूरी अवधि के रिकॉर्ड और आंतरिक नियंत्रण की जाँच, जो attestation से अलग है।
Depeg
तय मूल्य से हट जाना, जो दबाव की स्थिति में हुआ है।

निष्कर्ष

इस श्रेणी की सबसे उपयोगी समझ यह है कि स्थिरता कोई गुण नहीं, एक व्यवस्था है, और हर व्यवस्था की एक कमज़ोर कड़ी होती है। कहीं वह reserve की बनावट है, कहीं वह बैंक जहाँ रकम रखी है, और कहीं नियम जो बदल रहे हैं। इसलिए Stablecoin रखते समय यह मत पूछिए कि यह सुरक्षित है या नहीं, यह पूछिए कि इसकी स्थिरता किस चीज़ पर टिकी है, क्योंकि वही चीज़ आगे चलकर सबसे पहले टूटती है। बुनियादी समझ यहाँ, मंच चुनाव इस पेज पर, custody का पक्ष यहाँ, कर की स्थिति इस पेज पर और समग्र परिदृश्य India हब पर उपलब्ध है।

अस्वीकरण

यह लेख शैक्षिक उद्देश्य से है और किसी टोकन या जारीकर्ता की सिफारिश या आलोचना नहीं करता। यहाँ दिए आँकड़े जारीकर्ताओं की प्रकाशित रिपोर्टों और सार्वजनिक विश्लेषणों पर आधारित हैं और बदलते रहते हैं।

लेखक परिचय
Niharika Singh Research Analyst

Niharika Singh एक अनुभवी क्रिप्टो और ब्लॉकचेन जर्नलिस्ट हैं, जो वर्तमान में CryptoHindiNews.in से जुड़ी हुई हैं। उन्हें मीडिया और कम्युनिकेशन के क्षेत्र में 5 से अधिक वर्षों का अनुभव है, जिसमें उन्होंने दूरदर्शन और आकाशवाणी जैसे देश के प्रतिष्ठित प्लेटफॉर्म्स पर एंकर और कंटेंट प्रेजेंटर के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं। इस व्यापक अनुभव ने उन्हें जटिल से जटिल विषयों को भी सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद अंदाज़ में प्रस्तुत करने की गहरी समझ प्रदान की है।

क्रिप्टो इंडस्ट्री में निहारिका ने खुद को एक विश्वसनीय लेखक के रूप में स्थापित किया है। वे Web3, DeFi, NFTs और ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी जैसे तकनीकी विषयों को आम पाठकों की भाषा में सहजता से पहुंचाती हैं। उनकी लेखन शैली में SEO ऑप्टिमाइज़ेशन, रिसर्च-बेस्ड एनालिसिस और क्रिएटिव अप्रोच का बेहतरीन संतुलन देखने को मिलता है, जिसके चलते उनका कंटेंट न केवल सूचनाप्रद और प्रासंगिक होता है, बल्कि Google Discover सहित अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी शानदार प्रदर्शन करता है। निहारिका से LinkedIn के माध्यम से सीधे संपर्क किया जा सकता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले सवालों के जवाब यहाँ पाएँ और समझें कि सब कुछ कैसे काम करता है।

ऐसा टोकन जिसकी कीमत किसी मुद्रा से बाँधकर रखी जाती है, आम तौर पर एक डॉलर से, ताकि उसका उपयोग भेजने, रखने और लेनदेन में हो सके।

जारी करने वाली कंपनी दावा करती है कि हर जारी टोकन के बदले उसके पास उतनी ही रकम या संपत्ति रखी है, जिसे reserve कहते हैं। पूरा भरोसा उसी दावे पर टिका है।

सबसे बड़े जारीकर्ता की हालिया रिपोर्ट के अनुसार बड़ा हिस्सा अमेरिकी सरकारी प्रतिभूतियों और अल्पावधि साधनों में है, और लगभग पचास अरब डॉलर सोना, बॉन्ड, बिटकॉइन और सुरक्षित ऋण जैसी श्रेणियों में।

क्योंकि दबाव के समय उन्हें तुरंत बेचकर नकदी में बदलना उतना आसान नहीं होता जितना सरकारी प्रतिभूतियों को।

हाँ, कई बार। अक्टूबर 2018 में लगभग बानवे सेंट, मार्च 2020 में सत्तानबे, मई 2022 में लगभग पंचानबे, और जून 2023 में मामूली रूप से।

मार्च 2023 में USDC में, जो लगभग सत्तासी सेंट तक गया। कारण यह था कि उसकी रकम एक ऐसे बैंक में रखी थी जो उसी समय डूब गया।

क्योंकि आम धारणा है कि ज़्यादा नियमित और पारदर्शी टोकन ज़्यादा सुरक्षित होगा। पर उसका जोखिम reserve की गुणवत्ता का नहीं, उस बैंक का था जहाँ रकम रखी थी।

कि ज़्यादा नियमन का मतलब कम जोखिम नहीं, अलग जोखिम होता है, और हर व्यवस्था में कोई न कोई कड़ी ऐसी होती है जिस पर सब कुछ टिका है।

किसी एक तय तारीख का चित्र, जिसमें पुष्टि होती है कि उस दिन reserve और जारी टोकन का मिलान था।

audit में पूरी अवधि के रिकॉर्ड और आंतरिक नियंत्रण जाँचे जाते हैं, जबकि attestation केवल एक दिन की स्थिति बताती है।

कि attestation यह नहीं बताती कि दो तारीखों के बीच क्या हुआ। यह कोई आरोप नहीं, बस यह जानने की बात है कि दस्तावेज़ कितना बताता है।

सीधे लोगों के बीच होने वाले लेनदेन में, जहाँ एक व्यक्ति रुपये देकर दूसरे से टोकन लेता है। यह पूरा ढाँचा इसी श्रेणी पर खड़ा है।

वह टोकन से नहीं, रुपये वाले हिस्से से आता है। अगर सामने वाले के भेजे पैसे किसी जाँच के दायरे में आ जाएँ तो आपका बैंक खाता भी फँस सकता है।

अमेरिका में जुलाई 2025 का एक कानून जारीकर्ताओं से पूरी रकम केवल नकद या अल्पावधि सरकारी प्रतिभूतियों में रखने और हर महीने ब्यौरा प्रकाशित करने को कहता है।

यह मत पूछिए कि यह सुरक्षित है या नहीं, यह पूछिए कि इसकी स्थिरता किस चीज़ पर टिकी है, क्योंकि वही चीज़ आगे चलकर सबसे पहले टूटती है।