मुख्य सामग्री पर जाएँ
Crypto News
शेयर करें:

CBDC का 'Supplementary' Stablecoin: मॉडल और असली शर्तें

Hindi News Writer
प्रकाशित
CBDC का 'Supplementary' Stablecoin: मॉडल और असली शर्तें
CBDC का 'Supplementary' Stablecoin: मॉडल और असली शर्तें

पहले Rupee Backed Stablecoin ARC Deposit Token पर इसके डेवलपिंग टीम के मेम्बर द्वारा बड़े खुलासे किये गए हैं। जिसके बाद इसे लेकर और भी स्पष्टता आई है। आइये जानते हैं इस खुलासे में क्या सामने आया है। 

Source: X Post

 

Indian CBDC की यूटिलिटी बढ़ाएगा ARC Stablecoin

 

Polygon Team के मेम्बर द्वारा डिटेल जानकारी शेयर करते हुए बताया कि वे लम्बे समय से ARC Stablecoin की डिजाईन पर काम कर रहे हैं। इसे डिजाईन करते समय यह पक्का किया गया है कि यह लॉन्च के समय 

 

  • भारत सरकार के सभी रूल्स और रेगुलेशन के अनुसार हो।
  • Indian CBDC की यूटिलिटी को मजबूत करे।
  • यह रियल प्रॉब्लम को सोल्व करे न कि स्पेकुलेटिव एसेट की तरह हो।

 

गौरतलब है कि भारत सरकार पहले ही CBDC को अपने एजेंडा में शामिल कर चुकी है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि इस Rupee Backed Stalecoin की क्या जरुरत है।

 

Dollar Backed Stablecoins का डोमिनेन्स कम होगा 

 

ARC Stablecoin का प्राइमरी यूज़ उन लोगों के लिए होगा जो अपनी सेविंग या क्रिप्टो ट्रांज़ैक्शन के लिए USDT या USDC जैसे डॉलर आधारित Stablecoin का उपयोग करते हैं। इस रुपए आधारित स्टेबलकॉइन की लॉन्चिंग के बाद भारतीय इन्वेस्टर्स इसका उपयोग अपने क्रिप्टो ट्रांज़ैक्शन्स के लिए कर सकते हैं। इसका फायदा यह होगा कि 

 

  • भारतीय कैपिटल का फ्लो Tether या इसके जैसे दुसरे प्राइवेट स्टेबलकॉइन की तरफ रुकेगा।
  • इंडिया बेस्ड करेंसी होने के कारण इस पर ज्यादा सरकारी कण्ट्रोल होगा जो प्राइस Depag होने की स्थिति में इन्वेस्टर्स का बचाव करेगा।
  • छोटे क्रॉस बॉर्डर डिजिटल ट्रांज़ैक्शन्स के लिए CBDC पर दबाव कम करेगा। 

 

इस तरह से यह भारतीय क्रिप्टो इकोसिस्टम और क्रॉस बॉर्डर पेमेंट के क्षेत्र में एक बड़ा डेवलपमेंट है। अगर यह प्रयोग सफल रहता है तो बहुत से मामलों में डॉलर पर निर्भरता को कम कर सकता है। 

 

भारतीय वित्त मंत्री कर चुकी हैं Stablecoin का समर्थन 

 

October 2025 में Indian Finance Minister Nirmala Sitharaman द्वारा दिए गए अपने बयान में देश को Stablecoin Integration के लिए तैयार रहने की बात कही थी। तभी से लगातार इस तरह के कयास लगाये जा रहे थे कि जल्द ही भारत इस दिशा में कदम उठा सकता है। हालांकि उनके द्वारा इससे जुड़े रिस्क को लेकर भी आगाह किया गया था। लेकिन अब जब इस इंडिया के पहले प्राइवेट स्टेबलकॉइन पर डेवलपमेंट तेज हो चुका है, तो यह स्पष्ट है कि भारत सरकार का रुख भी इसे लेकर पॉजिटिव है।

 

ARC Stablecoin के बारे में 

 

यह 1:1 में भारतीय रुपए से जुड़ा स्टेबलकॉइन होगा, जिसे सरकार द्वारा समर्थन प्राप्त है। यह बेंगलुरु आधारित कंपनी Anq के द्वारा बनाया जा रहा है और Polygon इसे इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध करवाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य CBDC के साथ काम करते हुए डिजिटल पेमेंट को तेज करना, रुपए में लिक्विडिटी प्रोवाइड करना और डॉलर बेस्ड स्टेबलकॉइन के उपयोग के कारण होने वाले कैपिटल आउटफ्लो को रोकना है। 

 

इंडियन क्रिप्टो इकोसिस्टम के लिए यह एक बड़ा डेवलपमेंट होने वाला है, जो क्रिप्टो एडॉप्शन को और तेज कर सकता है।

 

क्रिप्टो स्केम का जवाब हो सकता है यह डेवलपमेंट 

 

हाल ही में भारत में कई बड़े क्रिप्टो स्केम में USDT का उपयोग किया गया है। हालांकि दिक्कत यह है कि क्रिप्टो एक्सचेंज से प्राप्त डाटा के अलावा इन पर मॉनिटरिंग नहीं की जा सकती है । भारत का यह पहला Rupee Backed Stablecoin इस परेशानी का भी हल हो सकता है। 

चूँकि यह पूरी तरह से इंडिया बेस्ड होगा इस पर होने वाले ट्रांज़ैक्शन्स की मोनेटरिंग करना भी सरकार के लिए आसान हो सकता है। यह देखने वाली बात होगी कि भविष्य में इसे लेकर सरकार का क्या रुख होने वाला है।

 

कन्क्लूज़न

 

जैसे जैसे ARC Stablecoin को लेकर जानकारियाँ सामने आ रही हैं, इनका Indian Crypto Ecosystem में इसे लेकर उत्साह तेजी से बढ़ रहा है। आने वाले समय में यह Rupee Backed Stablecoin किस तरह से क्रॉस बॉर्डर पेमेंट को आसान बनाता है यह देखने वाली बात होगी। 

 

हमें जल्द ही USDT और USDC की बजाए ARC Stablecoin भारत में क्रिप्टो पेमेंट के माध्यम के रूप में देखने को मिल सकता है। 

 

Disclaimer: यह आर्टिकल एजुकेशनल पर्पस से लिखा गया है। क्रिप्टो मार्केट वोलेटाइल है, किसी भी इन्वेस्टमेंट से पहले अपनी रिसर्च जरुर करें।

 

लेखक परिचय
Ronak Ghatiya Hindi News Writer

Ronak Ghatiya एक उभरते हुए क्रिप्टो कंटेंट राइटर हैं, जिनका एजुकेशन और टेक्नोलॉजी में मजबूत बैकग्राउंड रहा है। उन्होंने पिछले 6 वर्ष में फाइनेंस, ब्लॉकचेन, Web3 और डिजिटल एसेट्स जैसे विषयों पर डेटा-ड्रिवन और SEO-अनुकूल कंटेंट लिखा है, जो नए और प्रोफेशनल रीडर्स दोनों के लिए उपयोगी साबित हुआ है। रोनक की लेखनी का फोकस जटिल तकनीकी टॉपिक्स को आसान भाषा में समझाना है, जिससे क्रिप्टो स्पेस में ट्रस्ट और क्लैरिटी बनी रहे। उन्होंने CoinGabbar.com, Medium और अन्य क्रिप्टो प्लेटफ़ॉर्म्स के लिए ब्लॉग्स और न्यूज़ स्टोरीज़ लिखी हैं, जिनमें क्रिएटिविटी और रिसर्च का संतुलन होता है। रोनक की स्टाइल डिटेल-ओरिएंटेड और रिस्पॉन्सिव है, और वह तेजी से बदलते क्रिप्टो परिदृश्य में एक विश्वसनीय आवाज़ बनने की ओर अग्रसर हैं। LinkedIn पर प्रोफ़ाइल देखें या उनके आर्टिकल्स यहाँ पढ़ें।

Leave a comment
लेटेस्ट
FAQ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले सवालों के जवाब यहाँ पाएँ और समझें कि सब कुछ कैसे काम करता है।

यह एक प्रस्तावित तकनीकी व्यवस्था है जिसमें आधार/निपटान परत केंद्रीय बैंक की मुद्रा में रहती है और खुदरा/अनुप्रयोग परत पर निजी टोकन की भूमिका प्रस्तावित होती है।

नहीं — 'पूरक भूमिका' एक प्रस्ताव है, जबकि 'मान्यता' एक नियामकीय स्थिति है जो केवल संबंधित प्राधिकरण की official घोषणा से आती है।

कि केंद्रीय बैंक हर खुदरा नवाचार खुद न करे, पर आधार-परत उसके नियंत्रण में रहे — पारंपरिक बैंकिंग में भी यही संरचना है।

Reserve की गुणवत्ता, redemption का अधिकार, नियमित खुलासे और पर्यवेक्षण — इनके बिना 'पूरक' शब्द का कोई अर्थ नहीं।

Project की घोषणा (एक पक्ष की योजना), पायलट में भागीदारी की official पुष्टि (सीमित दर्जा), और नियामकीय स्वीकृति/ढांचा (केवल यही मान्यता है)।

क्या संबंधित प्राधिकरण की ओर से कोई official पुष्टि है, और वह किस स्तर की है।

नहीं — जब तक कोई औपचारिक ढांचा लागू न हो, वह एक निजी इकाई का दायित्व ही रहता है और issuer/reserve/redemption जोखिम वैसे ही रहते हैं।

क्योंकि वह संस्थागत भरोसे का आभास देता है — इसलिए इसे सुनते ही सत्यापन का मानक बढ़ाना चाहिए, घटाना नहीं।

सीमित परीक्षण — इसका अर्थ व्यापक अनुमति नहीं, और पायलट से आम उपयोग तक वर्षों का अंतर सामान्य है।

e-rupee पायलट का दायरा और भागीदार official रूप से घोषित होते हैं — किसी निजी दावे की जांच वहीं से करनी चाहिए।

CBDC (केंद्रीय बैंक का दायित्व), बैंक-जमा का डिजिटल रूप, और निजी stablecoin — तीनों के जोखिम, नियमन और कर-treatment अलग हैं।

नहीं — निजी stablecoin में लेनदेन VDA-ढांचे में आता है (लागू परिस्थितियों में 1% TDS, लाभ पर 30%, set-off नहीं), चाहे कोई भी दावा हो।

हां — यदि स्पष्ट शर्तों के साथ बने, तो उपयोगकर्ता को दोनों का लाभ मिल सकता है: भरोसे की परत और उपयोग की परत।

Official दस्तावेज, न कि घोषणा — यही हर नियामकीय दावे पर लागू होने वाला मानक है।

प्राधिकरण की official पुष्टि और उसका स्तर, पायलट का दायरा, reserve/redemption की घोषित शर्तें, और व्यापक उपयोग तक की समय-रेखा।