Crypto regulation

भारत में Crypto कंपनियों के लिए FIU-IND की नई गाइडलाइंस जारी

भारत में डिजिटल एसेट कंपनियों पर FIU-IND की नई सख्ती


भारत में वर्चुअल डिजिटल एसेट से जुड़ी कंपनियों के लिए नियम और ज्यादा सख्त कर दिए गए हैं। फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट–इंडिया यानी FIU-IND ने नई गाइडलाइंस लागू की हैं। इनका मकसद अवैध पैसों की आवाजाही रोकना और सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित बनाना है। ये नियम तुरंत लागू हो चुके हैं और देश में काम कर रही सभी Crypto कंपनियों पर लागू होंगे।

fiu india

Source: यह इमेज Ajay Kashyap की X पोस्ट से ली गई है, जिसकी लिंक यहां दी गई है।


नए दिशानिर्देशों का मुख्य उद्देश्य


FIU-IND का कहना है कि डिजिटल एसेट्स के बढ़ते इस्तेमाल के साथ जोखिम भी बढ़ा है। ऐसे में साफ नियम जरूरी हो गए थे। नए दिशानिर्देश मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग जैसी गतिविधियों को रोकने पर फोकस्ड हैं। इसके जरिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि Digital ट्रांजैक्शन ट्रांसपेरेंट रहें और गलत इस्तेमाल न हो।


हाल ही में FY 2024-25 में FIU ने क्रिप्टो नियमों का पालन न करने पर जुर्माना लगाया है। भारत में डिजिटल एसेट से जुड़े प्लेटफॉर्म्स पर अब पहले से ज्यादा कड़ी नजर रखी जा रही है। FIU ने साफ कहा है कि जो भी नियम तोड़ेगा, उस पर कार्रवाई होगी और आगे चलकर निगरानी और भी बढ़ाई जाएगी।


CERT-In ऑडिट और साइबर सुरक्षा पर जोर


नई व्यवस्था के तहत हर डिजिटल एसेट कंपनी को साल में एक बार CERT-In से साइबर सुरक्षा ऑडिट कराना होगा। इससे यह जांचा जाएगा कि यूज़र्स का डेटा कितना सुरक्षित है। सरकार का मानना है कि मजबूत टेक्निकल स्ट्रक्चर न केवल कंपनियों बल्कि आम निवेशकों के लिए भी जरूरी है। बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड को देखते हुए यह कदम अहम माना जा रहा है।


मजबूत KYC और बोर्ड लेवल जिम्मेदारी


अब केवल सामान्य आइडेंटिटी वेरिफिकेशन काफी नहीं मानी जाएगी। कंपनियों को ज्यादा सख्त KYC प्रोसेस अपनानी होगी। इसके साथ ही मनी लॉन्ड्रिंग रोकने की जिम्मेदारी सीधे कंपनी के बोर्ड तक पहुंचा दी गई है। यानी अब टॉप लेवल मैनेजमेंट को भी हर एक्टिविटी पर नजर रखनी होगी। इससे जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।


ग्लोबल स्टैण्डर्ड के अनुरूप भारत की तैयारी


FIU-IND के ये कदम इंटरनेशनल नियमों के अनुरूप माने जा रहे हैं। खासतौर पर OECD के Crypto-Asset Reporting Framework से तालमेल बैठाने की कोशिश दिख रही है। इसका उद्देश्य देशों के बीच डिजिटल ट्रांजैक्शन से जुड़ी जानकारी शेयर करना है, ताकि टैक्स चोरी और गलत गतिविधियों पर रोक लग सके। भारत भी अब इस दिशा में आगे बढ़ रहा है।


पिछली खबरों के मुताबिक़, Parliamentary Committee की Crypto Regulation पर FIU-IND के साथ चर्चा हुई है। भारत में अभी तक Crypto को लेकर साफ कानून नहीं हैं, लेकिन टैक्स और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े नियम लागू हैं। 7-8 जनवरी 2026 को संसद समिति की बैठक में FIU-IND और CBDT अधिकारियों ने इस विषय पर चर्चा की।


FIU-IND के नए नियमों की प्रमुख बातें


  • हर डिजिटल एसेट कंपनी को FIU-IND में रजिस्ट्रेशन जरूरी।

  • सालाना CERT-In साइबर सुरक्षा जांच अनिवार्य।

  • यूज़र्स के लिए सख्त आइडेंटिफिकेशन प्रोसेस लागू।

  • संदिग्ध ट्रांजैक्शन की रिपोर्ट देना जरूरी।

  • बोर्ड लेवल पर निगरानी की व्यवस्था।

  • नियमों का पालन न करने पर कार्रवाई संभव।


सोशल मीडिया पर फैल रही गलत जानकारी


कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स में इन बदलावों को “क्रैकडाउन” बताया जा रहा है। वहीं कुछ ग्राफिक्स में कहा गया है कि नियम 1 जनवरी 2026 से लागू होंगे। जबकि हकीकत यह है कि ये दिशानिर्देश अभी से लागू हो चुके हैं। सरकार का उद्देश्य किसी को रोकना नहीं, बल्कि व्यवस्था को बेहतर बनाना है।


बढ़ते Crypto यूज़र बेस के बीच जरूरी कदम


भारत में डिजिटल एसेट यूज़र्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में बिना सख्त नियमों के जोखिम भी बढ़ सकता है। FIU-IND का यह फैसला निवेशकों की सुरक्षा और मार्केट की स्थिरता के लिए जरूरी माना जा रहा है। इससे भविष्य में एक बेहतर और भरोसेमंद माहौल बन सकता है।


कंपनियों और निवेशकों पर संभावित असर


  • ऑपरेशन का खर्च बढ़ सकता है।

  • छोटे प्लेटफॉर्म्स पर ज्यादा प्रेशर पड़ेगा।

  • यूज़र्स को ज्यादा सुरक्षित माहौल मिलेगा।

  • मार्केट में भरोसा बढ़ने की संभावना।

  • लंबे समय में सिस्टम मजबूत होगा।

  • नियमों से ट्रांसपेरेंसी में सुधार होगा।


कन्क्लूजन 


FIU-IND की नई गाइडलाइंस भारत के डिजिटल एसेट सेक्टर के लिए बड़ा बदलाव हैं। शुरुआत में कंपनियों को दिक्कत हो सकती है, लेकिन लंबे समय में इससे सिस्टम ज्यादा सिक्योर और ट्रांसपेरेंट बनेगा। यह कदम भारत को ग्लोबल डिजिटल नियमों के करीब ले जाता है और निवेशकों का भरोसा बढ़ा सकता है।


पिछले 7 साल से Crypto सेक्टर को करीब से देखने के बाद साफ है कि बिना नियमों के यह मार्केट टिक नहीं सकता। FIU-IND की सख्ती शुरुआती मुश्किल लाएगी, लेकिन लॉन्ग टर्म के लिए भरोसा बढ़ाएगी। रेगुलेशन से ही भारत में Crypto का स्थिर और सुरक्षित भविष्य बन सकता है।


डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी निवेश सलाह नहीं है। Crypto और डिजिटल एसेट्स में निवेश जोखिम भरा हो सकता है। कोई भी डिसीजन लेने से पहले अपनी रिसर्च करें या एडवाइजर से सलाह लें।

आकांक्षा व्यास एक स्किल्ड क्रिप्टो राइटर हैं, जिनके पास 7 वर्षों का अनुभव है और वे ब्लॉकचेन और Web3 के कॉम्पलेक्स टॉपिक्स को सरल और समझने योग्य बनाने में एक्सपर्ट हैं। वे डीप रिसर्च के साथ आर्टिकल्स, ब्लॉग और न्यूज़ लिखती हैं, जिनमें SEO पर विशेष ध्यान दिया जाता है ताकि रीडर्स का जुड़ाव बढ़ सके। आकांक्षा की राइटिंग क्रिएटिव एक्सप्रेशन और एनालिटिकल अप्रोच का एक बेहतरीन मिश्रण है, जो रीडर्स को जटिल विषयों को स्पष्टता के साथ समझने में मदद करता है। क्रिप्टो स्पेस के प्रति उनकी गहरी रुचि उन्हें इस उद्योग में एक अच्छे राइटर के रूप में स्थापित कर रही है। अपने कंटेंट के माध्यम से, उनका उद्देश्य रीडर्स को क्रिप्टो की तेजी से बदलती दुनिया में गाइड करना है।

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FIU-IND भारत की सरकारी एजेंसी है जो वित्तीय लेनदेन पर नजर रखती है।
ये नियम भारत में काम कर रही सभी डिजिटल एसेट और क्रिप्टो कंपनियों पर लागू होंगे।
यह यूज़र्स के डेटा और सिस्टम की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है।
हाँ, अब पहचान जांच की प्रक्रिया पहले से ज्यादा मजबूत होगी।
कंपनी के टॉप मैनेजमेंट को AML और CFT नियमों की जिम्मेदारी लेनी होगी।