Financial Intelligence Unit (FIU-IND) ने वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान क्रिप्टो इंडस्ट्री से जुड़ी अहम जानकारी शेयर की है। रिपोर्ट के अनुसार, कुल 49 वर्चुअल डिजिटल एसेट सर्विस प्रोवाइडर (VASP) को एंटी मनी लॉन्ड्रिंग लॉ (PMLA) के तहत रजिस्टर्ड किया गया। इस आंकड़े से साफ़ होता है कि भारत में डिजिटल एसेट सेक्टर की निगरानी पहले से अधिक सख्त हो गई है। रजिस्टर्ड प्रोसेस 2023 में शुरू हुई थी, जिसका उद्देश्य इलीगल फाइनेंशियल एक्टिविटीज और अनियमित ट्रांजैक्शन पर लगाम लगाना था।
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एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह कदम निवेशकों और सरकार दोनों के लिए भरोसेमंद वातावरण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि देश में ऑपरेटेड प्लेटफॉर्म्स ने नियमों का पालन करने की दिशा में तेजी दिखाई है। विदेशी प्लेटफॉर्म्स के लिए यह संदेश है कि भारत में ऑपरेशन के लिए स्थानीय कानूनों का पालन जरुरी है। FIU ने संकेत दिया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी प्लेटफॉर्म को बख्शा नहीं जाएगा और भविष्य में निगरानी और सख्त होगी।
FIU के आंकड़ों के अनुसार, फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में कुल 49 प्लेटफॉर्म रजिस्टर्ड हुए। इसमें से 45 भारत बेस्ड हैं और केवल 4 विदेशी कंपनियां शामिल हैं। यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि भारतीय क्रिप्टो इंडस्ट्री ने नियमों का पालन करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं।
FY 2024-25 में कुल 49 क्रिप्टो प्लेटफॉर्म रजिस्टर्ड हुए।
इनमें से 45 एक्सचेंज भारत में काम कर रहे हैं।
केवल 4 प्लेटफॉर्म विदेशी हैं।
2023 में रजिस्टर करना अनिवार्य हुआ था।
भारतीय एक्सचेंज नियमों का पालन करने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
कानूनों का पालन निवेशकों का भरोसा बढ़ा रहा है।
रजिस्ट्रेशन से अवैध और संदिग्ध ट्रांजैक्शन पर नजर रखना आसान हुआ।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह संकेत है कि भारत की क्रिप्टो इंडस्ट्री अब ट्रांसपेरेंसी की दिशा में बढ़ रही है। इन्वेस्टर्स और बिज़नेस दोनों को ही इससे अच्छा लाभ मिल रहा हैं।
फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के दौरान FIU ने नियमों का पालन न करने वाले प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई की। कुल ₹28 करोड़ का जुर्माना लगाया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि इलीगल एक्टिविटीज पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
कुल ₹28 करोड़ का आर्थिक दंड लगाया गया।
उल्लंघन करने वाले प्लेटफॉर्म्स की पहचान की गई।
अवैध पैसे के ट्रांजैक्शन और इलीगल एक्टिविटीज की जांच हुई।
कुछ संस्थाओं का संबंध गैरकानूनी नेटवर्क से मिला।
नियम तोड़ने वालों को चेतावनी देने के बाद दंड लगाया गया।
नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए सख्ती बढ़ाई गई।
इस प्रकार, FIU ने यह स्पष्ट कर दिया कि नियमों का पालन न करने वाले प्लेटफॉर्म्स को फाइनेंशियल और लीगल एक्शन का सामना करना पड़ेगा।
रिपोर्ट में डिजिटल एसेट्स से जुड़े जोखिमों का भी एनालिसिस किया गया। FIU ने पाया कि कुछ प्लेटफॉर्म्स अवैध लेनदेन में शामिल थे, जिनमें मनी लॉन्ड्रिंग, टेररिस्ट फाइनेंसिंग और अन्य गैरकानूनी गतिविधियां शामिल थीं। अधिकारियों ने कहा कि ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई आवश्यक है।
ट्रांजैक्शन की निगरानी के लिए एक्सचेंजों को अपने कस्टमर्स की पहचान और लेनदेन का पूरा रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है। यह कदम निवेशकों और सरकार दोनों के लिए सुरक्षा के नजरिये से बेहतर होगा। FIU ने बैंकों और पेमेंट प्लेटफॉर्म्स के साथ कोआर्डिनेशन बढ़ाया ताकि संदिग्ध गतिविधियों को समय रहते रोका जा सके।
मैंने पिछले 7 सालों में क्रिप्टो मार्केट में उतार-चढ़ाव देखा है। FIU का यह कदम निवेशकों और इंडस्ट्री दोनों के लिए भरोसेमंद है। नियमों का पालन करना अब अनिवार्य और जरूरी है।
FY 2024-25 में FIU की रिपोर्ट यह दर्शाती है कि भारत में क्रिप्टो इंडस्ट्री अब ज्यादा ट्रांसपेरेंट और कण्ट्रोल हो रही है। 49 प्लेटफॉर्म्स का रजिस्ट्रेशन और ₹28 करोड़ का जुर्माना यह संकेत देता है कि अवैध गतिविधियों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। नियमों का सख्ती से पालन निवेशकों का भरोसा बढ़ाता है और इंडस्ट्री की रिलायबिलिटी मजबूत करता है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें दी गई जानकारी फाइनेंशियल या निवेश सलाह नहीं है। निवेश से पहले हमेशा एक्सपर्ट्स की राय लें। FIU या किसी अन्य आर्गेनाइजेशन की वेबसाइट और ऑफिशियल रिपोर्ट से सर्टिफाइड जानकारी सही होती है।
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