23 फरवरी 2026 को भारत सरकार ने ईरान में मौजूद अपने नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने की सलाह दी है। जी हां.. भारतीय दूतावास तेहरान ने एक एडवाइजरी जारी की जिसमें छात्रों, तीर्थयात्रियों, व्यापारियों और पर्यटकों सहित सभी भारतीयों से कहा गया है कि वे उपलब्ध किसी भी परिवहन साधन, जैसे Commercial Flights से ईरान छोड़ दें। इसके कारण Iran US Crisis के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में Iran US Crisis का क्रिप्टो मार्केट पर क्या प्रभाव हो सकता है। तो चलिए जानते हैं आखिर इसके पीछे की वजह क्या है और क्यों क्रिप्टो मार्केट पर भी इसका असर देखने को मिलेगा?
दरअसल, ईरान में पिछले कुछ महीनों से सरकार विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं, जिसमें हिंसा, गिरफ्तारियां और इंटरनेट ब्लैकआउट की घटनाएं आम हैं। जनवरी 2026 से ही भारत ने गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी थी, लेकिन अब स्थिति और गंभीर हो गई है। कई देशों जैसे अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने भी अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने की चेतावनी दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सब अमेरिका-ईरान परमाणु समझौते की विफलता से जुड़ा है।
आज हुए Crypto Market Crash के पीछे भी कुछ निवेशक Iran US Crisis को कारण मान रहे हैं।
रिपोर्ट की माने तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 10-15 दिनों का अल्टीमेटम दिया है या तो परमाणु कार्यक्रम पर "अर्थपूर्ण Agreement" करें, वरना "बहुत बुरा" होगा। ट्रंप ने कहा है कि, अगर बातचीत फेल हुई तो सैन्य कार्रवाई हो सकती है। इतना ही नही बल्कि अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य ताकत बढ़ा दी है, जिसमें सैकड़ों लड़ाकू विमान, नौसेना जहाज और मिसाइल सिस्टम शामिल हैं। इजरायल और सऊदी अरब जैसे सहयोगी भी ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए हैं।

कुछ स्रोतों के अनुसार, Iran US Crisis की संभावना 90% तक पहुंच गई है, हालांकि वियना और जेनेवा में चल रही वार्ताओं में कुछ सकारात्मक संकेत भी हैं। ईरान ने कुछ लचीलापन दिखाया है, लेकिन जीरो यूरेनियम संवर्धन जैसी अमेरिकी मांगों पर असहमति बनी हुई है। अगर युद्ध हुआ तो बड़ा संकट पैदा हो सकता है, तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और Global Economy प्रभावित हो सकती है।
ऐसे में भारत की यह एडवाइजरी अपने नागरिकों की सुरक्षा का मजबूत संकेत है। सरकार ने दूतावास से संपर्क करने और स्थानीय मीडिया पर नजर रखने की सलाह दी है। वहीं क्रिप्टो निवेशकों, खासकर भारत में, को सतर्क रहना चाहिए क्योंकि वैश्विक घटनाएं बाजार को हिला सकती हैं।
इस राजनीतिक तनाव का सीधा असर क्रिप्टोकरेंसी मार्केट पर पड़ सकता है। अनिश्चितता के समय निवेशक रिस्की एसेट्स से दूर होकर सुरक्षित विकल्पों जैसे सोना या अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स की ओर भागते हैं। हाल की रिपोर्ट्स बताती हैं कि Iran US Crisis और ट्रंप की टैरिफ नीतियों से बिटकॉइन की कीमत 5% से ज्यादा गिरकर 65,000 डॉलर के आसपास आ गई है। टोटल क्रिप्टो मार्केट कैप में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
यानि अगर Iran US Crisis हुआ तो और बड़ा सेल-ऑफ हो सकता है, जहां बिटकॉइन 53,000-60,000 डॉलर तक गिर सकता है। ईथेरियम और अन्य ऑल्टकॉइन्स भी इससे बुरी तरह प्रभावित होंगे। विशेषज्ञ कहते हैं कि क्रिप्टो अभी "डिजिटल गोल्ड" की तरह सुरक्षित नहीं माना जा रहा, बल्कि रिस्क एसेट की तरह व्यवहार कर रहा है। हालांकि, अगर तनाव कम हुआ और डिप्लोमेसी कामयाब रही तो मार्केट रिकवर कर सकता है।
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कुल मिलाकर, Iran US Crisis सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं है, इसका असर ग्लोबल इकॉनमी और क्रिप्टो मार्केट पर भी पड़ सकता है। ऐसे समय में निवेशकों को घबराने की बजाय सतर्क और समझदारी से फैसले लेने चाहिए।
यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। क्रिप्टो निवेश जोखिम भरा होता है, इसलिए निवेश से पहले अपनी रिसर्च जरूर करें।
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