India में अभी तक कोई क्लियर Crypto Regulation नहीं है, लेकिन टैक्स और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े नियम पहले से लागू हैं। Cryptocurrency और Virtual Digital Assets (VDAs) को लेकर लंबे समय से चल रही असमंजस की स्थिति अब नए मोड़ पर पहुंचती दिख रही है।
7 और 8 January 2026 को संसद की Parliamentary Standing Committee on Finance ने इस मुद्दे पर अहम बैठक की। इस बैठक में FIU-IND (Financial Intelligence Unit- India) और Central Board of Direct Taxes (CBDT) के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी राय और जानकारी साझा की।
Source- Loksabha
बैठक का मुख्य उद्देश्य Virtual Digital Assets (VDAs) का अध्ययन और आगे का रास्ता रखा गया। इससे पहले भी Parliamentary Standing Committee भारत के Crypto Leaders से Cryptocurrency को लेकर चर्चा कर चुकी है।
इस बैठक की अध्यक्षता Lok Sabha सांसद Bhratruhari Mahtab ने की। करीब 3 घंटे चली इस चर्चा में Crypto की मौजूदा स्थिति, इसके रिस्क और संभावित नियमन पर बात हुई। समिति के सामने FIU-IND और CBDT ने यह साफ किया कि मोदी सरकार क्रिप्टो से जुड़े ट्रांजैक्शन पर कड़ी नजर रख रही है।
Lok Sabha सांसद Bhratruhari Mahtab ने मीडिया को बताया कि मीटिंग में यह चर्चा हुई कि क्रिप्टो के जरिए किस तरह से इनकम और एसेट्स को विदेशों में रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि धोखाधड़ी से ट्रांसफर किए गए पैसे को ट्रैक किया जा रहा है, चाहे वह भारत में हो या विदेश में।
समिति के कुछ सदस्यों ने यह भी माना कि अलग-अलग देशों में Crypto को लेकर अलग-अलग नीति अपनाई जा रही है कहीं पूरी बैन, कहीं सख्त नियम और कहीं सीमित आज़ादी।
CBDT ने Parliamentary Standing Committee को बताया कि वह Cryptocurrency से जुड़े ट्रांजैक्शन पर लगातार नजर बनाए हुए है। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक ₹888 करोड़ से ज्यादा की अघोषित आय की पहचान Virtual Digital Assets से जुड़ी गतिविधियों में की जा चुकी है।
CBDT का कहना है कि क्रिप्टो की तेज ट्रांसफर स्पीड और पहचान छुपाने की संभावना इसे धोखाधड़ी के लिए आसान बना देती है। इसी वजह से टैक्स विभाग डेटा एनालिटिक्स और इंटरनेशनल कोऑपरेशन के जरिए ऐसे मामलों को पकड़ने की कोशिश कर रहा है।
अगर कोई व्यक्ति Cryptocurrency के जरिए अपनी इनकम छुपाता है या उसे विदेश में रखता है, तो उस पर कार्रवाई की जा सकती है। यह संकेत साफ है कि मोदी सरकार अब क्रिप्टो को लेकर पहले से ज्यादा एक्टिव हो चुकी है।
Financial Intelligence Unit- India (FIU-IND) भारत में Money Laundering रोकने वाली प्रमुख एजेंसी है। बैठक में FIU-IND ने बताया कि Crypto Exchange और VDA Service Providers को PMLA (Prevention of Money Laundering Act) के तहत लाया गया है।
Indian Crypto Exchange को FIU-IND में रजिस्टर होना जरूरी है। January 2026 तक FIU-IND ने 49 Crypto Exchange रजिस्टर किए हैं, जिनमें 45 भारतीय और 4 विदेशी प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
FIU-IND का कहना है कि क्रिप्टो फंड्स का गलत इस्तेमाल हवाला, Crypto Scam, ऑनलाइन जुआ और Fraud में हो रहा था। इसी वजह से एक्सचेंजों से बड़े ट्रांजेक्शन की रिपोर्ट मंगाई जाती है, ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।
भारत में Cryptocurrency को पूरी तरह कानूनी मान्यता नहीं मिली है, लेकिन उस पर टैक्स सिस्टम साफ है। साल 2022 से लागू नियमों के अनुसार
क्रिप्टो से होने वाली कमाई पर 30% Tax लगता है।
हर क्रिप्टो ट्रांजेक्शन पर 1% TDS कटता है।
क्रिप्टो में हुए नुकसान को टैक्स में एडजस्ट नहीं किया जा सकता।
मोदी सरकार का कहना है कि यह टैक्स चोरी रोकने के लिए जरूरी है। हालांकि इंडस्ट्री का मानना है कि ज्यादा टैक्स और TDS की वजह से ट्रेडिंग कम हो रही है और कई यूजर्स विदेशी प्लेटफॉर्म्स की ओर जा रहे हैं।
Chairperson Bhratruhari Mahtab ने कहा कि अलग-अलग देश इसको अलग तरीके से संभाल रहे हैं। कहीं पर बैन है, कहीं पर रेगुलेशन।
उनका मानना है कि भारत के लिए Crypto Regulation ज्यादा बेहतर रास्ता हो सकता है, बजाय पूरी तरह Ban लगाने के। समिति का उद्देश्य है कि क्रिप्टो से जुड़े जोखिमों को कम किया जाए, लेकिन इनोवेशन को पूरी तरह रोका न जाए।
हालांकि, समिति ने यह भी माना कि अभी चर्चा शुरुआती दौर में है और आने वाली बैठकों में इस मुद्दे पर और गहराई से बात होगी।
Parliamentary Committee अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी और Lok Sabha में पेश करेगी। इसके बाद सरकार तय करेगी कि नए Crypto Regulation की जरूरत है या मौजूदा नियमों को ही मजबूत किया जाए।
Crypto Market में 4 साल के अनुभव से मेरा मानना है कि मोदी सरकार सख्त कानून लेकिन संतुलित नीति ला सकती है। यह बैठक उसी दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
भारत में Crypto Regulation को लेकर FIU-IND के साथ Parliamentary Standing Committee की यह चर्चा साफ दिखाती है कि मोदी सरकार अब इस सेक्टर को गंभीरता से ले रही है। धोखाधड़ी रोकने, टैक्स वसूली और निवेशकों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना सरकार की प्राथमिकता है।
आने वाले समय में इसको लेकर नियमों पर बड़े फैसले देखने को मिल सकते हैं, जो भारत के डिजिटल फाइनेंस के भविष्य को तय करेंगे।
डिस्क्लेमर- यह आर्टिकल केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। क्रिप्टो मार्केट काफ़ी वोलेटाइल है, इसलिए निवेश करने से पहले अपनी रिसर्च जरूर करें।
Explore Our FAQs
Find quick answers to commonly asked questions and understand how things work around here.
Copyright 2026 All rights reserved