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नीति-संवाद: उद्योग, सांसद और नियामक के बीच असली प्रक्रिया

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नीति-संवाद: उद्योग, सांसद और नियामक के बीच असली प्रक्रिया
नीति-संवाद: उद्योग, सांसद और नियामक के बीच असली प्रक्रिया


क्या Cryptocurrency पर जल्द आ सकता है नया क़ानून, जाने डिटेल 


भारतीय सांसदों और क्रिप्टो इंडस्ट्री के दिग्गजों के बीच भारत में Cryptocurrency के भविष्य को लेकर हुई चर्चा की खबर सामने आई है। यह जानकारी CoinDCX CEO द्वारा X Post के माध्यम से दी गयी, इस चर्चा में Parliamentary Committee of Finance के सदस्य और Indian Crypto Leaders शामिल हुए।


Virtual Digital Assets का भविष्य रहा चर्चा का विषय 

Lok Sabha के Official X Handle पर दी गयी जानकारी के अनुसार “A Study on Virtual Digital Assets (VDAs) and Way Forward” इस चर्चा का केंद्र रहा। इस डिस्कशन पैनल का नेतृत्व स्टैंडिंग BJD से सांसद Sj Bharttuhari Mehtab के द्वारा किया गया। Cryptocurrency Industry की और से इसमें Bharat Web3 Association, Digital South Trust, CoinSwitch, CoinDCX, BlockOnVentures, HashtagWeb3 और KoinBX के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। 


इस पैनल के बीच हुई चर्चा की डिटेल्स तो सामने नहीं आई है, लेकिन एक्सपर्ट सांसदों और इंडस्ट्री लीडर्स के बीच हुई चर्चा Digital India Act के पहले की तैयारी मान रहे हैं। 


G20 Summit से बनी Digital India Act की भूमिका 

भारत में पिछले कुछ दिनों में सरकार Blockchain के साथ साथ VDA पर भी एक्शन मोड में दिखाई दे रही है। हाल ही में Virtual Digital Assets Rule Review करने की बात की गयी थी, इससे पहले Rupees Backed Stablecoin Launch हो चुका है।


गवर्नेंस के स्तर पर दिख रही इस एक्टिवनेस के पीछे एक्सपर्ट हाल ही में South Africa में हुई G20 Summit के बाद अपनाए गए Declaration का प्रभाव मान रहे हैं। जिसमें भारत ने कस्टमर प्रोटेक्शन और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए VDA पर स्पष्ट नियम बनाने पर सहमती प्रदान की थी।

 

Standing Committee की रिपोर्ट में होगा Crypto का भविष्य 

आम तौर पर Parliamentary Standing Committee की रिपोर्ट संसद में बनने वाले अधिकांश कानूनों के Blueprint की तरह होती है। ऐसे में “A Study on Virtual Digital Assets (VDAs) and Way Forward Report” ही आने वाले दिनों में Cryptocurrency से सम्बंधित नियमों का आधार बनने वाली है। 


यही कारण है कि इस डिस्कशन को लेकर क्रिप्टो इकोसिस्टम में इतनी चर्चा है। अब बड़ा सवाल यही है कि G20 में Cryptocurrency को Future Financial Innovation का स्तम्भ मानने के बाद अब भारत सरकार क्या नियमों को आसान बनाएगी। 


Winter Session में ही आ सकता है डिजिटल इंडिया एक्ट 

G20 2025 Declaration से भारत में Digital India Act की पृष्ठभूमि पहले ही तैयार हो चुकी है। VDA सम्बन्धी बिन्दुओं को लागू करने के लिए 2025 डेडलाइन की तरह है। इसके अलावा भारत सरकार लम्बे समय से मॉडर्न टेक्नोलॉजी जैसे Artificial Intelligence, Blockchain Technology, Quantum Computing और Cryptocurrency पर लम्बे समय से डेडिकेटेड क़ानून बनाने पर काम कर रही है। 


फिलहाल VDA, IT Act के कुछ प्रावधानों से गवर्न हो रहे हैं। लेकिन स्पष्ट कानूनों के अभाव ने  भारत में इनोवेशन की गति को धीमा किया है। 


इस तरह से देखा जाए तो डिजिटल इंडिया एक्ट को लागू करने के लिए पुल और पुश फैक्टर दोनों उपस्थित है। यही कारण है कि एक्सपर्ट Winter Session में ही इसके संसद में पेश होने का अनुमान लगा रहे हैं।


कन्क्लूज़न

क्रिप्टो मार्केट में अपने 6 वर्षों के अनुभव में मैंने देखा है कि जब भी सरकार की और से नियमों में स्पष्ट आई है Cryptocurrency Adoption बहुत तेजी से बढ़ा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण USA में Donald Trump के सत्ता में आने के बाद क्रिप्टो मार्केट के एक्सपेंशन है। 


ऐसे में अगर सरकार इस आने वाली रिपोर्ट पर ठोस कदम उठाती है तो वर्ष 2026 भारत में डिजिटल एसेट इनोवेशन का गोल्डन इयर भी बन सकता है। 


Disclaimer: यह आर्टिकल एजुकेशनल पर्पस से लिखा गया है। क्रिप्टो मार्केट वोलेटाइल है, किसी भी इन्वेस्टमेंट से पहले अपनी रिसर्च जरुर करें। 

लेखक परिचय
Ronak Ghatiya Hindi News Writer

Ronak Ghatiya एक उभरते हुए क्रिप्टो कंटेंट राइटर हैं, जिनका एजुकेशन और टेक्नोलॉजी में मजबूत बैकग्राउंड रहा है। उन्होंने पिछले 6 वर्ष में फाइनेंस, ब्लॉकचेन, Web3 और डिजिटल एसेट्स जैसे विषयों पर डेटा-ड्रिवन और SEO-अनुकूल कंटेंट लिखा है, जो नए और प्रोफेशनल रीडर्स दोनों के लिए उपयोगी साबित हुआ है। रोनक की लेखनी का फोकस जटिल तकनीकी टॉपिक्स को आसान भाषा में समझाना है, जिससे क्रिप्टो स्पेस में ट्रस्ट और क्लैरिटी बनी रहे। उन्होंने CoinGabbar.com, Medium और अन्य क्रिप्टो प्लेटफ़ॉर्म्स के लिए ब्लॉग्स और न्यूज़ स्टोरीज़ लिखी हैं, जिनमें क्रिएटिविटी और रिसर्च का संतुलन होता है। रोनक की स्टाइल डिटेल-ओरिएंटेड और रिस्पॉन्सिव है, और वह तेजी से बदलते क्रिप्टो परिदृश्य में एक विश्वसनीय आवाज़ बनने की ओर अग्रसर हैं। LinkedIn पर प्रोफ़ाइल देखें या उनके आर्टिकल्स यहाँ पढ़ें।

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FAQ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले सवालों के जवाब यहाँ पाएँ और समझें कि सब कुछ कैसे काम करता है।

नहीं — वे नीति-निर्माण के लिए इनपुट का एक चरण होते हैं; कानून संसद बनाती है और नियम कार्यपालिका/नियामक जारी करते हैं।

उद्योग सम्मेलन/गोलमेज, संसदीय समिति के समक्ष प्रस्तुति, औपचारिक परामर्श (चर्चा-पत्र), और अंतर-मंत्रालयी प्रक्रिया।

संसदीय समिति और औपचारिक परामर्श — क्योंकि वहां इनपुट दस्तावेजी रूप से दर्ज होता है और सार्वजनिक रिकॉर्ड बनता है।

यह किस स्तर का मंच था, और क्या इसका कोई सार्वजनिक दस्तावेज बना।

उसके पास तकनीकी और परिचालन जानकारी होती है (custody कैसे काम करती है, अनुपालना-लागत कितनी) जो नीति-निर्माताओं के पास नहीं होती।

उद्योग का हित उसका अपना है — वह प्रायः उपयोगकर्ता-हित से मेल खाता है, पर हमेशा नहीं (जैसे कड़े custody-मानक users के लिए अच्छे, platforms के लिए महंगे)।

उपभोक्ता-समूह, कर-विशेषज्ञ, शिक्षाविद और स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञ — केवल उद्योग नहीं।

तीन रास्ते — सार्वजनिक परामर्श में लिखित टिप्पणी, उपभोक्ता/निवेशक संगठनों के जरिये, और निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से।

सार्वजनिक परामर्श — जब कोई चर्चा-पत्र टिप्पणी के लिए खुलता है, तब कोई भी नागरिक या समूह इनपुट दे सकता है।

प्रमाण-सहित — 'इस प्रावधान से यह व्यावहारिक कठिनाई आती है और यह उसका डेटा है' किसी सामान्य राय से कहीं अधिक वजनदार है।

यदि कोई असर हो, तो महीनों-वर्षों बाद और अन्य चरणों से होकर — तत्काल कुछ नहीं बदलता।

Custody-मानक और शिकायत-निवारण — क्योंकि आज सबसे बड़ा जोखिम इन्हीं की अनुपस्थिति है।

नहीं — वे विषय को औपचारिक चर्चा में लाती हैं और तकनीकी जानकारी नीति-निर्माताओं तक पहुंचाती हैं; किसी नए क्षेत्र में नीति इसी तरह परिपक्व होती है।

यदि किसी संवाद की रिपोर्ट/प्रस्तुति सार्वजनिक हुई हो, तो वह किसी सुर्खी से कहीं बेहतर स्रोत है।

नहीं — यह पूरी तरह तटस्थ है और किसी दल, व्यक्ति, संस्था या नीति-स्थिति पर कोई राय नहीं देता।