भारत में Cryptocurrency बीते कुछ सालों में काफी सुर्ख़ियों में आई है, हालांकि इसका Regulatory Framework अभी भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। 2026 तक भारत में क्रिप्टो लीगल है, लेकिन इसे लीगल टेंडर का दर्जा नहीं मिला है। सरकार इसे Virtual Digital Assets (VDAs) के रूप में मानती है और इस पर टैक्स और एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग नियम लागू करती है। तो चलिए जानते हैं ‘भारत में Crypto Regulation की स्थिति’ क्या है?
भारत में Crypto Regulation की शुरुआत उतार-चढ़ाव से भरी रही है। 2018 में Reserve Bank of India (RBI) ने बैंकों को क्रिप्टो से जुड़े लेन-देन की सुविधा देने से रोक दिया था। इससे मार्केट में अनिश्चितता फैल गई थी। लेकिन 2020 में Supreme Court of India ने इस Restrictions को Unconstitutional बताते हुए हटा दिया, जिसके बाद क्रिप्टो ट्रेडिंग दोबारा तेज हुई।
2022 में सरकार ने Finance Bill के माध्यम से क्रिप्टो को आधिकारिक रूप से VDA की Category में रखा और इस पर टैक्स लागू किया। इसके बाद 2023 में Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के दायरे में क्रिप्टो एक्सचेंजों को शामिल किया गया। इससे KYC और AML नियम जरुरी हो गए। अब सभी एक्सचेंजों को Financial Intelligence Unit-India में रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है और वर्तमान में 49 एक्सचेंज रजिस्टर्ड हैं।
2026 तक Crypto tax rules में कोई बदलाव नहीं हुआ है। यूनियन बजट 2026-27 में भी वही नियम लागू हैं, क्रिप्टो से कमाए गए मुनाफे पर 30% फ्लैट टैक्स देना होगा, इसके ऊपर 4% सेस और लागू सरचार्ज अलग से लगेगा। हर ट्रांजेक्शन पर 1% TDS भी कटेगा, चाहे आपको फायदा हो या नुकसान। इतना ही नही बल्कि अब सरकार ने रिपोर्टिंग को लेकर भी सख्ती बढ़ा दी है। अगर कोई व्यक्ति या एक्सचेंज सही जानकारी फाइल नहीं करता, तो रोजाना जुर्माना (डेली फाइन) लग सकता है, और Crypto Regulation पर गलत जानकारी देने पर Fixed Penalty भी देनी पड़ सकती है।
हाल की अदालतों की कार्रवाई से भी स्थिति कुछ हद तक साफ हुई है। फरवरी 2026 में Delhi High Court ने Crypto Regulation की एक याचिका खारिज कर दी। इस याचिका में एक्सचेंजों के लिए सख्त Crypto Regulation और Bitbns पर CBI जांच की मांग की गई थी। कोर्ट ने साफ कहा कि कानून बनाना सरकार का काम है, अदालत सरकार को मजबूर नहीं कर सकती। वहीं Orissa High Court ने सरकार से पूछा है कि क्रिप्टो का लीगल स्टेटस पूरी तरह स्पष्ट क्यों नहीं किया जा रहा।
वहीं जनवरी 2026 में Financial Intelligence Unit-India ने AML नियम और सख्त कर दिए। अब हर ट्रांजेक्शन में सेंडर और रिसीवर की जानकारी दर्ज करना जरुरी है। एक्सचेंजों को AML ऑफिसर नियुक्त करना होता है और CERT-In के तहत साइबर सिक्योरिटी ऑडिट भी जरूरी है। Global Exchange जैसे Binance और Coinbase भारत में काम कर सकते हैं, लेकिन उन्हें भारतीय नियमों के अनुसार रजिस्ट्रेशन कराना होता है।
अगर आंकड़ों की बात करें तो भारत में करीब 12 करोड़ लोग क्रिप्टो में निवेश कर चुके हैं। लेकिन हाई टैक्स और Crypto Regulation सख्त नियमों की वजह से लगभग 75% ट्रेडिंग, जिसकी अनुमानित वैल्यू 51,252 करोड़ रुपये बताई जा रही है, विदेशी (ऑफशोर) प्लेटफॉर्म्स पर चली गई है। अगर यह ट्रेडिंग वापस भारतीय एक्सचेंजों पर आए, तो सरकार को सालाना 15,000 से 20,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त टैक्स मिल सकता है।
भविष्य को लेकर भी चर्चा जारी है। 2025 में Supreme Court of India ने सरकार से पूछा था कि क्रिप्टो पर स्पष्ट कानून कब आएगा। माना जा रहा है कि G20 Level की चर्चाओं और अंतरराष्ट्रीय नियमों को ध्यान में रखते हुए 2026-27 में नया व्यापक कानून आ सकता है। इसमें सैंडबॉक्स मॉडल, ज्यादा मजबूत AML नियम और TDS में बदलाव या लॉस सेट-ऑफ जैसे मुद्दों पर विचार किया जा सकता है।
कुल मिलाकर, भारत में क्रिप्टो बैन नहीं है, लेकिन पूरी तरह से (Crypto Regulation) रेगुलेटेड भी नहीं है। टैक्स काफी सख्त है और नियमों का पालन करना जरूरी है। इसलिए निवेश करने से पहले टैक्स, जोखिम और कानूनी स्थिति को अच्छी तरह समझ लेना ही समझदारी है।
यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। क्रिप्टोकरेंसी में निवेश बाजार जोखिमों से भरी है। निवेश करने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें और आवश्यक हो तो किसी वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।
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