क्रिप्टो निवेशकों को बड़ा झटका! हाईकोर्ट ने Bitbns पर खारिज की याचिका
प्राइवेट कंपनी पर रिट नहीं, संसद बनाएगी क्रिप्टो कानून-दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने 11 फरवरी 2026 को भारत में Crypto Regulation में बदलाव से जुड़ी याचिकाएँ पूरी तरह खारिज कर दीं। जिनमें निवेशकों ने Bitbns जैसे Crypto Exchanges के लिए सख्त नियम बनाने, CBI जांच करवाने और फंसे फंड वापस करवाने की मांग की थी। जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की सिंगल बेंच ने साफ कहा कि प्राइवेट कंपनी पर रिट याचिका नहीं चलती और भारत में क्रिप्टोकरेंसी पर नियम बनाने का अधिकार संसद का है, कोर्ट का नहीं। तो आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला?
क्या था मामला?
दरअसल, ये मामला Aditya Malhotra & Ors. v Union of India और Rana Handa vs Bitbns Internet से जुड़ा है। निवेशकों का आरोप था कि,
Bitbns प्लेटफॉर्म पर फंड निकासी में दिक्कतें आ रही हैं।
बिटकॉइन की वैल्यूएशन में गड़बड़ी है।
कई निवेशकों के लाखों-करोड़ों रुपये फंसे हुए हैं।
वहीं राणा हांडा ने कोर्ट में बताया कि उन्होंने 14.22 लाख रुपये निवेश किए थे, लेकिन वे अपनी रकम निकाल नहीं पा रहे हैं।
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से मांग की थी कि,
क्रिप्टो एक्सचेंजों के लिए सख्त नियम बनाए जाएँ।
CBI के तहत SIT बनाकर जांच कराई जाए।
फंसे हुए पैसे वापस दिलाए जाएँ।
क्या आया कोर्ट का फैसला?
जस्टिस कौरव ने अपने बयान में कहा कि, “Bitbns एक प्राइवेट कंपनी है, जो संविधान के Article 12 के तहत "State" नहीं है। ये कोई पब्लिक फंक्शन नहीं निभा रही, इसलिए Writ Jurisdiction में नहीं आती।” कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर क्रिप्टो सेक्टर में कानून की कमी है, तो नया कानून बनाना संसद का काम है, अदालत का नहीं। वहीं CBI जांच की मांग पर कोर्ट ने कहा कि ऐसी जांच केवल असाधारण मामलों में ही दी जाती है और इस मामले में ऐसा कोई आधार नहीं मिला।

Delhi High Court ने Crypto Investors को क्या सलाह दी?
पुलिस में FIR दर्ज कर सकते हैं
अगर पुलिस कार्रवाई न करे तो मजिस्ट्रेट के पास जा सकते हैं
मुआवजे के लिए सिविल कोर्ट में केस दायर कर सकते हैं
कोर्ट ने साफ किया कि पैसों से जुड़े विवाद तथ्यों पर आधारित होते हैं और उनका फैसला ट्रायल के बाद ही हो सकता है।
क्या है Bitbns?
बता दें, Bitbns (या BNS) भारत का एक प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज है। ये 2017 में बेंगलुरु में शुरू हुआ, जहां यूजर्स INR से Bitcoin, Ethereum समेत 500+ क्रिप्टो खरीद-बेच और ट्रेड कर सकते हैं। यह आसान इंटरफेस, कम फीस और ऐप के लिए जाना जाता है, लेकिन हाल में कुछ समस्याओं की शिकायतें आई हैं जिसके बाद से इस पर लोगों का विश्वास डगमगा रहा है।
क्या है भारत में Crypto Regulation की स्थिति?
बात करें भारत में Crypto Regulation की स्थिति के बारे में तो Cryptocurrency Transfer पर 30% टैक्स और TDS लागू है, लेकिन अभी तक कोई स्पष्ट रेगुलेटरी कानून नहीं है। किसी भी Crypto Exchange को भारत में काम करने के लिए FIU-IND के अंडर रजिस्टर होना जरुरी है। 2019 का ड्राफ्ट बिल अब तक कानून नहीं बना है। Chainalysis की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 के आखिर तक भारत में 11.9 करोड़ से ज्यादा क्रिप्टो यूजर्स थे। वहीं लगातार स्कैम में उपयोग, जानकारी में कमी और कई प्लेटफॉर्म्स की समस्याओं के बाद निवेशकों की चिंताएँ बढ़ी हैं।
खैर, ये पहली दफा नहीं है, Bitbns जैसे प्लेटफॉर्म्स पर लिक्विडिटी और कस्टमर सपोर्ट को लेकर शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। इससे पहले WazirX Hack जैसी घटनाओं में भी भारतीय क्रिप्टो इन्वेस्टर्स को बड़ा नुकसान हो चुका है। ऐसे में अब गेंद सरकार के पाले में है, यह देखने वाली बात होगी की भारत सरकार कब Crypto Regulation के मामले में ठोस कदम उठाने वाली है।
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कन्क्लूजन
Delhi High Court का यह फैसला दिखाता है कि भारत में क्रिप्टो सेक्टर अभी भी स्पष्ट नियमों के बिना चल रहा है। निवेशकों के लिए यह एक चेतावनी है कि किसी भी प्लेटफॉर्म पर निवेश करने से पहले पूरी जानकारी लें और जोखिम को समझें। सरकार कब तक स्पष्ट क्रिप्टो कानून लाएगी, यह भविष्य बताएगा। फिलहाल, निवेश में सावधानी जरूरी है।
डिस्क्लेमर
यह आर्टिकल केवल जानकारी के लिए है, निवेश या कानूनी सलाह नहीं। क्रिप्टो बाजार जोखिम भरा है, इसलिए निवेश से पहले अपनी रिसर्च करें और विशेषज्ञ से सलाह लें।