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ED का BTC Fund Scam पर बड़ा एक्शन: ₹8.54 करोड़ की संपत्ति कुर्क

Hindi News Writer
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BTC Fund Scam ED action
BTC Fund Scam ED action

BTC Fund Scam: 856 Bitcoin और ₹200 करोड़ की ठगी का आरोप 

देहरादून। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने BTC Fund Scam मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी हेमंत ईश्वर शर्मा से जुड़ी करीब ₹8.54 करोड़ की अतिरिक्त संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। मामले में अब तक provisionally attached संपत्तियों की कुल कीमत करीब ₹13.10 करोड़ हो गई है। ED का आरोप है कि Bitcoin निवेश के नाम पर देशभर के लोगों से बड़ी रकम जुटाई गई और अपराध से प्राप्त धन को संपत्तियों तथा दूसरे खर्चों में लगाया गया।

मामले की जानकारी ED के द्वारा जारी की गयी Press Release के माध्यम से दी गयी है।

Live Bitcoin Market Snapshot

4 अगस्त 2026 को उपलब्ध CoinGecko डेटा के अनुसार:

Bitcoin Data

स्थिति

BTC Price

₹61,04,477

24 घंटे बदलाव

+2.21%

Market Cap

₹122.48 लाख करोड़

24H Volume

₹2.53 लाख करोड़

Market Context: Bitcoin फिलहाल 24 घंटे के आधार पर बढ़त में है। BTC Fund Scam एक enforcement और alleged fraud case है; उपलब्ध डेटा इस खबर और Bitcoin की वैश्विक कीमत के बीच कोई सीधा प्रभाव साबित नहीं करता।

BTC Fund Scam में ED ने क्या कार्रवाई की?

ED ने हेमंत ईश्वर शर्मा से जुड़ी करीब ₹8.54 करोड़ की अतिरिक्त movable और immovable assets को Prevention of Money Laundering Act (PMLA), 2002 के तहत provisionally attach किया है।

इससे पहले करीब ₹4.56 करोड़ की संपत्तियां भी मामले में attach की गई थीं। इसके बाद कुल provisional attachment लगभग ₹13.10 करोड़ तक पहुंच गया है।

यहां यह समझना जरूरी है कि provisional attachment किसी आरोपी को दोषी घोषित करना नहीं है। आरोपों का अंतिम फैसला अदालत में होता है।

856.23 BTC और करीब ₹200 करोड़ का मामला क्या है?

ED की जांच के अनुसार कथित अपराध से प्राप्त रकम का एक बड़ा हिस्सा Bitcoin से जुड़ा था। जांच में करीब 856.23 BTC को proceeds of crime के रूप में चिन्हित किए जाने की बात सामने आई है, जिसका मूल्य लगभग ₹200 करोड़ आंका गया।

ED का आरोप है कि इस धन को crypto exchanges के जरिए आगे बढ़ाया गया और इससे real estate, vehicles तथा अन्य निजी खर्च किए गए।

इस मामले में जांच अभी जारी है।

BTCFUND.IS के जरिए कैसे चलती थी कथित स्कीम?

ED के अनुसार हेमंत ईश्वर शर्मा के नियंत्रण में BTCFUND.IS नाम की वेबसाइट थी। आरोप है कि इस प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को Bitcoin में निवेश पर ऊंचे रिटर्न का लालच दिया जाता था।

जांच एजेंसी का आरोप है कि निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए यह दावा भी किया गया कि कंपनी से कई विदेशी नागरिक जुड़े हैं। इससे प्लेटफॉर्म को अंतरराष्ट्रीय और भरोसेमंद investment operation की तरह पेश करने की कोशिश की गई।

इन्हीं दावों के आधार पर देश के अलग-अलग हिस्सों से लोगों ने कथित रूप से पैसा लगाया।

ED ने अप्रैल 2026 की अपनी आधिकारिक प्रेस रिलीज में कहा था कि शर्मा ने कथित तौर पर ऊंचे रिटर्न का लालच दिया और विदेशी नागरिकों की भागीदारी का दावा कर स्कीम को credible तथा internationally backed दिखाया।

BTC Fund Scam की जांच कैसे शुरू हुई?

मनी लॉन्ड्रिंग जांच की शुरुआत उत्तराखंड में दर्ज FIRs से हुई।

एक FIR देहरादून के राजपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज हुई थी। दूसरी संबंधित FIR दिनेशपुर पुलिस स्टेशन, जिला उधम सिंह नगर में दर्ज की गई।

इसके बाद ED ने PMLA के तहत money laundering angle की जांच शुरू की। ED की अप्रैल 2026 की आधिकारिक प्रेस रिलीज भी इन दोनों FIRs को जांच का आधार बताती है।

दिसंबर 2024: ₹4.56 करोड़ की पहली कुर्की

इस मामले की टाइमलाइन में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि करीब ₹4.56 करोड़ की पहली provisional attachment अप्रैल 2026 में नहीं, बल्कि दिसंबर 2024 में सामने आई थी।

उस कार्रवाई में चार immovable properties और bank balances को attach किए जाने की रिपोर्ट थी।

यह अंतर महत्वपूर्ण है क्योंकि अप्रैल 2026 में ED ने अलग search और arrest operation किया था।

अप्रैल 2026: चार ठिकानों पर ED की तलाशी

25 अप्रैल 2026 की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक ED के Dehradun Sub-Zonal Office ने BTC Fund Scam से जुड़े चार ठिकानों पर PMLA के तहत search operations किए।

कार्रवाई के दौरान जांच एजेंसी ने कथित रूप से महत्वपूर्ण documents और electronic devices जब्त किए।

इसके बाद हेमंत ईश्वर शर्मा को गिरफ्तार किया गया और Special Court (PMLA), Dehradun के सामने पेश किया गया, जहां अदालत ने चार दिन की ED custody दी।

ठगी की रकम कहां इस्तेमाल होने का आरोप है?

ED का आरोप है कि निवेशकों से जुटाए गए कथित proceeds of crime को आरोपी के personal bank accounts में divert किया गया और बाद में immovable properties में लगाया गया। अप्रैल की आधिकारिक ED रिलीज ने personal bank accounts और immovable properties में धन लगाने के आरोप की पुष्टि की थी।

नई कार्रवाई से जुड़ी रिपोर्ट्स में real estate और vehicles सहित अन्य महंगी संपत्तियों का भी जिक्र सामने आया है।

यानी जांच अब केवल यह पता लगाने तक सीमित नहीं है कि निवेशकों से कितना पैसा आया, बल्कि एजेंसी कथित money trail और उससे खरीदी गई संपत्तियों को भी trace कर रही है।

BTC Fund Scam और पुराना ₹485 करोड़ Bitcoin Scam अलग हैं

इस मामले में एक और जरूरी clarification है।

देहरादून में सामने आया BTCFUND.IS मामला उस पुराने crypto fraud case से अलग है जिसमें 2019 में BITZEX और BTC BITZ COIN SHUKKOR नाम सामने आए थे।

पुराने मामले की रकम करीब ₹485 करोड़ बताई गई थी और उसमें कथित mastermind की हत्या तथा कई आरोपियों की गिरफ्तारी की खबरें भी सामने आई थीं। दिसंबर 2024 की रिपोर्टिंग में भी इस पुराने मामले को अलग scam के रूप में दर्ज किया गया था।

इसलिए दोनों मामलों को एक ही Bitcoin scam समझना गलत होगा।

Crypto Investors के लिए यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

BTC Fund Scam का सबसे महत्वपूर्ण पहलू Bitcoin की तकनीक नहीं, बल्कि उसके नाम का इस्तेमाल कर निवेशकों का भरोसा जीतने का कथित तरीका है।

ऐसी स्कीमों में अक्सर high return, international connection और sophisticated crypto platform जैसे दावों का इस्तेमाल credibility बनाने के लिए किया जा सकता है।

Bitcoin या किसी cryptocurrency का नाम जुड़ा होना अपने आप किसी investment scheme को भरोसेमंद नहीं बनाता।

निवेशकों के लिए खास तौर पर ऐसे प्लेटफॉर्म जोखिम का संकेत हो सकते हैं जो असामान्य या guaranteed returns का दावा करें, कंपनी और operators के बारे में पर्याप्त जानकारी न दें, withdrawal में परेशानी पैदा करें या सिर्फ referral तथा तेजी से पैसा बढ़ने के दावों पर जोर दें।

Bitcoin Price की वर्तमान स्थिति?

अभी उपलब्ध CoinGecko लाइव डेटा में Bitcoin लगभग ₹61.04 लाख पर है और पिछले 24 घंटों में करीब 2.21% ऊपर है।

निवेशकों को किन Red Flags से सावधान रहना चाहिए?

Crypto investment platform चुनते समय कुछ संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:

  • “Guaranteed” या असामान्य रूप से ऊंचे returns का दावा

  • कंपनी के operators की अस्पष्ट पहचान

  • सिर्फ विदेशी connection बताकर credibility बनाने की कोशिश

  • withdrawal में लगातार समस्या

  • पैसे जल्दी जमा कराने का दबाव

  • अस्पष्ट business model

  • unverifiable investment records

  • केवल referral income पर जोर

Crypto में ऊंचा return हमेशा ऊंचे risk के साथ आ सकता है। कोई भी genuine market investment निश्चित profit की गारंटी नहीं दे सकता।

ED की कार्रवाई का बड़ा संदेश

BTC Fund Scam की जांच दिखाती है कि crypto से जुड़े fraud मामलों में enforcement agencies अब traditional bank records के साथ digital transactions और crypto-linked money trail पर भी ध्यान दे रही हैं।

ED का अप्रैल 2026 का आधिकारिक बयान बताता है कि जांच के दौरान electronic devices और incriminating documents भी जब्त किए गए थे।

इसलिए crypto ecosystem में transparency, transaction records और source of funds की भूमिका आगे और महत्वपूर्ण हो सकती है।

आगे क्या होगा?

मामले में आगे ED की जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर नजर रहेगी। Provisionally attached assets से संबंधित प्रक्रिया PMLA के तहत आगे बढ़ेगी, जबकि आरोपी के खिलाफ आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत करेगी।

निवेशकों के लिए इस मामले से सबसे महत्वपूर्ण सीख यह है कि Bitcoin के नाम पर मिलने वाला हर investment product Bitcoin में सुरक्षित निवेश नहीं होता।

किसी भी crypto scheme में पैसा लगाने से पहले platform, operator, custody arrangement, withdrawal mechanism और return claims की स्वतंत्र जांच जरूरी है।

Final Remark

BTC Fund Scam में ₹8.54 करोड़ की नई provisional attachment के बाद मामले में कुर्क संपत्तियों का कुल आंकड़ा करीब ₹13.10 करोड़ पहुंचना जांच का महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

मामला भारतीय crypto investors के लिए एक अहम चेतावनी भी है: Bitcoin और Bitcoin के नाम पर बेची जा रही investment scheme में फर्क समझना जरूरी है।

ऊंचे या guaranteed returns, अस्पष्ट operators और केवल international connections के दावे किसी platform की विश्वसनीयता साबित नहीं करते। किसी भी crypto investment से पहले स्वतंत्र verification और risk assessment जरूरी है।

इसी तरह की Latest Crypto News पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए। 

कानूनी नोट: लेख में हेमंत ईश्वर शर्मा से संबंधित fraud और money-laundering के विवरण ED द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित हैं। Provisional attachment या गिरफ्तारी दोषसिद्धि नहीं है। आरोपी को अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने तक निर्दोष माना जाता है।

Risk Disclaimer: क्रिप्टोकरेंसी बाजार अत्यधिक अस्थिर है। यह लेख केवल शैक्षणिक और सूचना उद्देश्य के लिए है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले स्वयं शोध करें और आवश्यक होने पर वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।

लेखक परिचय
Ronak Ghatiya Hindi News Writer

Ronak Ghatiya एक उभरते हुए क्रिप्टो कंटेंट राइटर हैं, जिनका एजुकेशन और टेक्नोलॉजी में मजबूत बैकग्राउंड रहा है। उन्होंने पिछले 6 वर्ष में फाइनेंस, ब्लॉकचेन, Web3 और डिजिटल एसेट्स जैसे विषयों पर डेटा-ड्रिवन और SEO-अनुकूल कंटेंट लिखा है, जो नए और प्रोफेशनल रीडर्स दोनों के लिए उपयोगी साबित हुआ है। रोनक की लेखनी का फोकस जटिल तकनीकी टॉपिक्स को आसान भाषा में समझाना है, जिससे क्रिप्टो स्पेस में ट्रस्ट और क्लैरिटी बनी रहे। उन्होंने CoinGabbar.com, Medium और अन्य क्रिप्टो प्लेटफ़ॉर्म्स के लिए ब्लॉग्स और न्यूज़ स्टोरीज़ लिखी हैं, जिनमें क्रिएटिविटी और रिसर्च का संतुलन होता है। रोनक की स्टाइल डिटेल-ओरिएंटेड और रिस्पॉन्सिव है, और वह तेजी से बदलते क्रिप्टो परिदृश्य में एक विश्वसनीय आवाज़ बनने की ओर अग्रसर हैं। LinkedIn पर प्रोफ़ाइल देखें या उनके आर्टिकल्स यहाँ पढ़ें।

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FAQ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले सवालों के जवाब यहाँ पाएँ और समझें कि सब कुछ कैसे काम करता है।

ताजा कार्रवाई में करीब ₹8.54 करोड़ की अतिरिक्त संपत्तियों को provisionally attach किया गया है। इसके बाद BTC Fund Scam मामले में कुल attachment लगभग ₹13.10 करोड़ तक पहुंच गया है।

ED की जांच में हेमंत ईश्वर शर्मा प्रमुख आरोपी हैं। उन पर BTCFUND.IS के जरिए निवेशकों को कथित रूप से धोखा देने और proceeds of crime की money laundering करने के आरोप हैं। ये आरोप अभी अदालत में सिद्ध होना बाकी हैं।

जांच में करीब 856.23 BTC को कथित proceeds of crime से जोड़े जाने की बात सामने आई है। इन Bitcoin की वैल्यू लगभग ₹200 करोड़ बताई गई है।

ED के मुताबिक BTCFUND.IS हेमंत ईश्वर शर्मा के नियंत्रण वाला एक platform था। आरोप है कि इसके जरिए लोगों से Bitcoin investment के नाम पर धन जुटाया गया और निवेशकों को ऊंचे returns देने का वादा किया गया।

हां। ED की 25 अप्रैल 2026 की आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार हेमंत ईश्वर शर्मा को गिरफ्तार किया गया था। Special PMLA Court, Dehradun ने उन्हें चार दिन की ED custody दी थी।

किसी fraud या scam में Bitcoin का इस्तेमाल होने से Bitcoin अपने आप गैरकानूनी या fraud नहीं हो जाता। निवेशकों को भारत में लागू crypto tax, regulatory और compliance requirements को समझना चाहिए और असामान्य या guaranteed returns का दावा करने वाली संदिग्ध investment schemes से सावधान रहना चाहिए।

इस मामले में ED की कार्रवाई और Bitcoin की global price के बीच सीधा संबंध साबित करने वाला पर्याप्त evidence फिलहाल उपलब्ध नहीं है। दिए गए CoinGecko डेटा के अनुसार BTC पिछले 24 घंटों में लगभग 2.21% बढ़त में है, जबकि इसकी कीमत global demand, liquidity, macroeconomic conditions और market sentiment जैसे कई factors से प्रभावित होती है।