मुख्य सामग्री पर जाएँ
Crypto News
शेयर करें:

Clarity Act News: व्हाइट हाउस ने सितंबर वोट की प्रतिबद्धता दोहराई

Hindi News Writer
प्रकाशित
Clarity Act News
Clarity Act News

आज Clarity Act News को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। The Block ने White House crypto advisor Patrick Witt के हवाले से जारी रिपोर्ट में बताया कि Donald Trump प्रशासन क्लैरिटी एक्ट (Clarity Act) को सितंबर में पास कराने के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन सीनेट में जरूरी वोटों की कमी अब भी इस अमेरिकी क्रिप्टो नियामक कानून की सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।

Clarity Act News

Clarity Act पर क्या है White House का रुख

द ब्लॉक (The Block) की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन में क्रिप्टो सलाहकार पैट्रिक विट (Patrick Witt) ने कहा कि प्रशासन क्लैरिटी एक्ट को अगले महीने पास कराने के लिए "पूरी तरह प्रतिबद्ध" (fully committed) है। विट ने आगे कहा कि सितंबर में होने वाली वोटिंग तक "हमारे दरवाजे खुले हैं" और प्रशासन सद्भावना (good-faith) से बातचीत जारी रखेगा।

क्लैरिटी एक्ट अमेरिका में डिजिटल एसेट्स के लिए एक स्पष्ट रेगुलेटरी ढांचा तय करने वाला कानून है, जो SEC (Securities and Exchange Commission) और CFTC (Commodity Futures Trading Commission) के बीच क्रिप्टो बाजार की निगरानी का बंटवारा करता है। इस कानून के तहत ज्यादातर डिजिटल कमोडिटी और उनके स्पॉट मार्केट की निगरानी की जिम्मेदारी CFTC को दी जाएगी, जबकि निवेश अनुबंध जैसी सिक्योरिटीज पर SEC का अधिकार बना रहेगा। 

यह बिल पहले ही अमेरिकी संसद के निचले सदन (House of Representatives) से पास हो चुका है और अब सीनेट में लंबित है। हाल ही में August 2026 में इस पर वोटिंग की सम्भावना समाप्त हो गयी थी, जिसके बाद से इसके भविष्य पर प्रश्न चिन्ह उठने लगे थे।

Clarity Act News अपडेट: वोटिंग होना ही काफी नहीं 

यहां एक जरूरी बात समझनी जरूरी है: सितंबर में सीनेट वोटिंग करेगी, इसका मतलब यह नहीं कि क्लैरिटी एक्ट कानून बन ही जाएगा। कानून बनने के लिए बिल का सीनेट में पास होना जरूरी है, और अभी इसके लिए जरूरी वोट पूरे होते नहीं दिख रहे।

अमेरिकी सीनेट में किसी बिल पर बहस खत्म कर अंतिम वोटिंग तक पहुंचने के लिए पहले "क्लोचर" (cloture) नाम की एक प्रक्रिया पार करनी होती है, जिसके लिए 100 सदस्यों वाली सीनेट में कम से कम 60 वोट चाहिए। रिपब्लिकन पार्टी के पास सीनेट में इतनी सीटें नहीं हैं कि वह अकेले यह आंकड़ा छू सके — पार्टी को करीब 6 डेमोक्रेट सीनेटरों का साथ चाहिए, और यह कमी अभी तक दूर नहीं हुई है।

इसकी एक बड़ी वजह "एथिक्स" (ethics) से जुड़ा एक अनसुलझा विवाद है। कई डेमोक्रेट सीनेटर चाहते हैं कि सरकारी अधिकारियों और उनके परिवारों के क्रिप्टो कारोबार पर सख्त पाबंदियां लगाई जाएं — यह मांग सीधे तौर पर ट्रंप परिवार की क्रिप्टो गतिविधियों से जुड़ी है। गौरतलब की है की Donald Trump और उनका परिवार ने World Liberty Financial, USD1 Stablecoin जैसे प्रोडक्ट्स के माध्यम से साल 2025 में $1.4 Billion की कमाई की है। खुद Donald Trump अपने नाम पर Trump Memecoin जारी कर चुके हैं। 

बिल के मौजूदा ड्राफ्ट में वरिष्ठ अधिकारियों के डिजिटल एसेट जारी करने पर 2029 तक की अस्थायी रोक का प्रावधान है, लेकिन इसे अभी व्हाइट हाउस का समर्थन नहीं मिला है। सीनेटर थॉम टिलिस (Thom Tillis) ने भी स्वीकार किया है कि इस मुद्दे पर अभी सहमति नहीं बन पाई है।

Clarity Act Voting पर प्रेडिक्शन मार्केट का रुख

क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म काल्शी (Kalshi) पर "सीनेट क्लैरिटी एक्ट पर कब वोट करेगी" सवाल पर चल रहे बेटिंग मार्केट में भी यही अनिश्चितता झलकती है। 11 अगस्त तक के आंकड़ों के मुताबिक, 1 अक्टूबर 2026 से पहले वोट होने की संभावना करीब 87% आंकी जा रही है, जबकि 1 जनवरी 2027 से पहले वोट होने की संभावना 88% है। यानी बाजार को लगभग पूरा भरोसा है कि सितंबर में वोटिंग तो होगी ही — लेकिन यह आंकड़ा सिर्फ वोटिंग की टाइमिंग को दर्शाता है, बिल के पास होने या न होने की गारंटी नहीं देता।

सीनेट पहले ही अगस्त रीसेस (recess) से पहले वोटिंग टालकर सितंबर 15 के लिए क्लोचर की प्रारंभिक प्रक्रिया शुरू कर चुकी है, ताकि बिल पूरी तरह ठंडे बस्ते में न चला जाए।

भारतीय क्रिप्टो निवेशकों के लिए इस Clarity Act News का मतलब

भारतीय निवेशकों के लिए अभी सबसे जरूरी बात यह समझना है कि अमेरिका में क्रिप्टो को लेकर नियामक स्पष्टता का इंतजार सितंबर के बाद भी जारी रह सकता है। व्हाइट हाउस की प्रतिबद्धता भरोसा तो बढ़ाती है, लेकिन 60 वोटों का आंकड़ा और एथिक्स से जुड़ा विवाद अभी सुलझा नहीं है — यानी बिल के सितंबर में ही पास हो जाने को पक्का मानकर निवेश के फैसले लेना जल्दबाजी होगी। 

अगले कुछ हफ्तों में सीनेट में डेमोक्रेट-रिपब्लिकन बातचीत की प्रगति पर नजर बनाए रखना जरूरी रहेगा, क्योंकि इसी से बड़े एक्सचेंजों और स्टेबलकॉइन जारीकर्ताओं पर असर तय होगा। इस विषय पर आगे भी ताजा Clarity Act News के लिए अपडेट फॉलो करते रहें।

इसी तरह की Latest Crypto News पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए। 

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है और इसे निवेश सलाह न समझा जाए। क्रिप्टोकरेंसी में निवेश जोखिमपूर्ण है, कृपया अपने स्तर पर शोध करें।

लेखक परिचय
Ronak Ghatiya Hindi News Writer

Ronak Ghatiya एक उभरते हुए क्रिप्टो कंटेंट राइटर हैं, जिनका एजुकेशन और टेक्नोलॉजी में मजबूत बैकग्राउंड रहा है। उन्होंने पिछले 6 वर्ष में फाइनेंस, ब्लॉकचेन, Web3 और डिजिटल एसेट्स जैसे विषयों पर डेटा-ड्रिवन और SEO-अनुकूल कंटेंट लिखा है, जो नए और प्रोफेशनल रीडर्स दोनों के लिए उपयोगी साबित हुआ है। रोनक की लेखनी का फोकस जटिल तकनीकी टॉपिक्स को आसान भाषा में समझाना है, जिससे क्रिप्टो स्पेस में ट्रस्ट और क्लैरिटी बनी रहे। उन्होंने CoinGabbar.com, Medium और अन्य क्रिप्टो प्लेटफ़ॉर्म्स के लिए ब्लॉग्स और न्यूज़ स्टोरीज़ लिखी हैं, जिनमें क्रिएटिविटी और रिसर्च का संतुलन होता है। रोनक की स्टाइल डिटेल-ओरिएंटेड और रिस्पॉन्सिव है, और वह तेजी से बदलते क्रिप्टो परिदृश्य में एक विश्वसनीय आवाज़ बनने की ओर अग्रसर हैं। LinkedIn पर प्रोफ़ाइल देखें या उनके आर्टिकल्स यहाँ पढ़ें।

Leave a comment
FAQ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले सवालों के जवाब यहाँ पाएँ और समझें कि सब कुछ कैसे काम करता है।

Clarity Act अमेरिका का प्रस्तावित क्रिप्टो नियामक कानून है, जिसका उद्देश्य डिजिटल एसेट्स के लिए स्पष्ट रेगुलेटरी ढांचा तैयार करना है। इसके तहत SEC और CFTC के बीच क्रिप्टो बाजार की निगरानी की जिम्मेदारियां तय की जाएंगी, जिससे उद्योग में नियामकीय स्पष्टता बढ़ सके।

White House के क्रिप्टो सलाहकार Patrick Witt के अनुसार Donald Trump प्रशासन Clarity Act को सितंबर 2026 में पास कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रशासन ने कहा है कि सीनेट वोटिंग तक सभी पक्षों के साथ बातचीत जारी रहेगी ताकि बिल को आगे बढ़ाया जा सके।

नहीं। सितंबर में सीनेट में वोटिंग होने की संभावना मजबूत मानी जा रही है, लेकिन केवल वोटिंग होना कानून बनने की गारंटी नहीं है। बिल को पास होने के लिए पर्याप्त समर्थन और आवश्यक संसदीय प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।

सबसे बड़ी चुनौती अमेरिकी सीनेट में पर्याप्त समर्थन जुटाना है। क्लोचर प्रक्रिया के लिए 100 सदस्यीय सीनेट में 60 वोटों की जरूरत होती है, जबकि रिपब्लिकन पार्टी को इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए कुछ डेमोक्रेट सीनेटरों का समर्थन भी चाहिए।

कई डेमोक्रेट सीनेटर चाहते हैं कि सरकारी अधिकारियों और उनके परिवारों की क्रिप्टो गतिविधियों पर सख्त नियम लागू किए जाएं। यह विवाद ट्रंप परिवार की क्रिप्टो परियोजनाओं और संभावित हितों के टकराव को लेकर उठी चिंताओं से जुड़ा हुआ है।

प्रस्तावित कानून के अनुसार अधिकांश डिजिटल कमोडिटी और उनके स्पॉट मार्केट की निगरानी CFTC करेगी। वहीं, निवेश अनुबंध (Investment Contracts) जैसी डिजिटल सिक्योरिटीज पर SEC का अधिकार बना रहेगा।

Kalshi के प्रेडिक्शन मार्केट के अनुसार 1 अक्टूबर 2026 से पहले सीनेट में Clarity Act पर वोटिंग होने की संभावना काफी अधिक मानी जा रही है। हालांकि यह केवल वोटिंग की संभावित तारीख का अनुमान है, बिल के पास होने की पुष्टि नहीं।

अमेरिका में क्रिप्टो रेगुलेशन से जुड़े बड़े फैसलों का प्रभाव वैश्विक क्रिप्टो बाजार, एक्सचेंजों और स्टेबलकॉइन सेक्टर पर पड़ सकता है। इसलिए भारतीय निवेशकों को Clarity Act की प्रगति पर नजर रखनी चाहिए, लेकिन केवल इस खबर के आधार पर निवेश निर्णय लेना उचित नहीं होगा।

हां। Clarity Act अमेरिकी संसद के निचले सदन (House of Representatives) से पहले ही पास हो चुका है। अब इसे कानून बनने के लिए अमेरिकी सीनेट की मंजूरी और आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

निवेशकों को सितंबर में होने वाली सीनेट वोटिंग, क्लोचर प्रक्रिया, डेमोक्रेट और रिपब्लिकन के बीच बातचीत तथा एथिक्स संशोधनों से जुड़ी प्रगति पर नजर रखनी चाहिए। यही कारक तय करेंगे कि Clarity Act आगे बढ़ता है या फिर इसमें और देरी होती है।