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Ethereum Classic

Ethereum Classic Price In India

ETC / INR #58
₹815.47

( 0.95%) 24h

तक की स्थिति 04:28 PM

24H Range
₹792.86 ₹816.77
L
H
52 Week Range
₹581.44 ₹1,705.68
L
H
मार्केट कैप ₹1,237,818.49 Cr
फुली डाइल्यूटेड वैल्यूएशन ₹1,237,824.70 Cr
24H वॉल्यूम ₹445,163.83 Cr
सप्लाई सर्कुलेटिंग 158,744,453 ETC
सप्लाई टोटल 158,745,643 ETC
सप्लाई मैक्स 210,700,000 ETC
Ethereum Classic Ethereum Classic Price In India ETC / USD #58
$8.41

( 0.95%) 24h

As on 12 Oct 2026 04:28 PM

24H Range
8.29 8.54
L
H
52 Week Range
6.08 17.83
L
H
Market Cap $1,334,766,720
Fully Diluted Valuation $1,334,773,420
24H Volume $480,029,880
Circulating Supply 158,744,453 ETC
Total Supply 158,745,643 ETC
Max Supply 210,700,000 ETC
ETC Historical Price
24h बदलाव +0.95%
7d बदलाव -6.42%
1 साल का बदलाव -49.37%
All-Time High ₹15,980.49
All-Time Low ₹58.82

ETC to INR Chart

Ethereum Classic (ETC) की कीमत आज ₹815.47 है, जो पिछले 24 घंटों में 0.95% की बढ़त है और पिछले 7 दिनों में 6.42% नीचे है। पिछले 24 घंटों में Ethereum Classic का कुल ट्रेडिंग वॉल्यूम ₹4,591.01 Cr रहा। Ethereum Classic का मार्केट कैप ₹12,765.71 Cr है और मार्केट कैप के हिसाब से यह #58 पर है।

ETC ↔ INR कैलकुलेटर
INR
ETC
ETC ↔ USD कैलकुलेटर
USD
ETC

Ethereum Classic की जानकारी

कम्युनिटी forum.ethereumclassi x.comETC_Network
वेबसाइट ethereumclassic.org

Ethereum Classic न्यूज़ (etc न्यूज़)

Ethereum Classic (ETC) Price Today INR में — लाइव भाव, इतिहास और भारतीय निवेशकों के लिए पूरी जानकारी

इस पेज पर Ethereum Classic (ETC) का लाइव INR price, market cap, trading volume और chart दिया गया है। नीचे Ethereum Classic से जुड़ी जरूरी बातें आसान भाषा में समझाई गई हैं।

Ethereum Classic (ETC) प्राइस आज INR में — इतिहास, सुरक्षा और असूल की पूरी कहानी

ऊपर ETC का लाइव INR भाव दिया गया है। मई 2021 में इसका सबसे ऊँचा भाव करीब $167.09 रहा था। आज यह उस स्तर से लगभग 96% नीचे है।लेकिन ETC की असली कहानी इसके भाव की नहीं है। इसकी पहचान एक सिद्धान्त से बनी है।2016 में Ethereum पर एक बड़ी चोरी हुई थी। इसके बाद समुदाय के सामने सवाल था कि क्या चोरी को वापस करने के लिए blockchain के पुराने रिकॉर्ड को बदला जाना चाहिए। अधिकांश लोगों ने रिकॉर्ड बदलने का फैसला किया और उससे आज का Ethereum बना। एक छोटे समूह ने कहा कि blockchain के रिकॉर्ड को किसी भी कारण से बदलना सही नहीं है। उसी पुराने रिकॉर्ड वाली chain को आगे चलाकर Ethereum Classic बनाया गया।इसलिए ETC को समझने का सबसे अच्छा सवाल है: किसी सिद्धान्त पर टिके रहने की कीमत क्या होती है?

2016 में Ethereum क्यों दो हिस्सों में बँट गया?

2016 में Ethereum पर एक बड़ा निवेश प्रोजेक्ट चल रहा था, जिसमें बहुत पैसा जमा हुआ था। उसके code में एक कमजोरी थी। किसी व्यक्ति ने उस कमजोरी का फायदा उठाकर बड़ी मात्रा में पैसा अपने नियंत्रण में ले लिया।यहाँ महत्वपूर्ण बात यह थी कि उसने blockchain के नियमों को सीधे नहीं तोड़ा था। उसने code में मौजूद तरीके का ही इस्तेमाल किया था, लेकिन ऐसे तरीके से जिसकी कल्पना developers ने नहीं की थी।इसके बाद Ethereum समुदाय में बड़ी बहस हुई।एक पक्ष ने कहा कि हजारों लोगों का पैसा चला गया है, इसलिए इसे वापस करना चाहिए। जब तकनीकी रूप से ऐसा करना संभव है, तो ऐसा न करना गलत होगा।दूसरे पक्ष ने कहा कि blockchain का सबसे बड़ा वादा ही यही है कि पुराने रिकॉर्ड को किसी की इच्छा से बदला नहीं जा सकता। अगर एक बार रिकॉर्ड बदल दिया गया, तो भविष्य में भी दबाव पड़ने पर उसे बदला जा सकता है।आखिरकार बहुमत ने रिकॉर्ड बदलने का फैसला किया। यही chain आगे चलकर आज का Ethereum (ETH) बनी। कुछ लोगों ने पुराने रिकॉर्ड को स्वीकार किया और उसी chain को चलाते रहे। वही chain आगे चलकर Ethereum Classic (ETC) कहलायी।दोनों पक्षों के अपने तर्क थे। लेकिन इसका एक बड़ा व्यावहारिक परिणाम हुआ: Ethereum को ज्यादा developers, पैसा, users और applications मिले, जबकि Ethereum Classic के पास मुख्य रूप से उसका मूल सिद्धान्त बचा।

51% हमला: छोटी Proof-of-Work chain का बड़ा खतरा

ETC को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि Proof-of-Work blockchain की सुरक्षा कैसे काम करती है।ऐसी chain की सुरक्षा केवल उसके code से नहीं आती। उसकी सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि उस पर हमला करना कितना महँगा है।Mining में miners अपनी computing power लगाते हैं। बदले में उन्हें token मिलता है। इसलिए token का भाव mining की कमाई को प्रभावित करता है।

अगर token का भाव बहुत गिर जाए, तो mining कम आकर्षक हो सकती है। इससे network की computing power घट सकती है और किसी हमलावर के लिए पर्याप्त computing power जुटाना आसान हो सकता है।इसे सरल रूप में ऐसे समझें:कम भाव → कम mining incentive → कम सुरक्षा → हमला अपेक्षाकृत आसान → भरोसा कम → भाव पर दबाव।

ETC पर 2019 और 2020 में ऐसे हमले हुए थे। हमलावरों ने पर्याप्त computing power हासिल करके blockchain के हाल के रिकॉर्ड में बदलाव किया और double-spending जैसी स्थिति पैदा की।इससे तीन बातें समझ आती हैं।पहली, बड़ी blockchain के मुकाबले छोटी Proof-of-Work chain का सुरक्षा बजट कम हो सकता है।दूसरी, सुरक्षा और token price एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।तीसरी, केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि किसी blockchain का code अच्छा है। यह भी देखना जरूरी है कि उसके network को सुरक्षित रखने के लिए कितनी वास्तविक computing power मौजूद है।

2022 के बाद ETC को क्या फायदा हुआ?

सितम्बर 2022 में Ethereum ने अपनी mining व्यवस्था बंद करके Proof-of-Stake अपना लिया।इस बदलाव के बाद Ethereum mining करने वाले बहुत से miners को दूसरे विकल्प तलाशने पड़े। ETC उनकी प्रमुख विकल्पों में से एक था, क्योंकि उसकी mining तकनीक Ethereum की पुरानी व्यवस्था से काफी मिलती-जुलती थी।इसके परिणामस्वरूप ETC की mining और computing power में बढ़ोतरी हुई। यानी ETC की network security पहले की तुलना में बेहतर हुई।लेकिन यहाँ एक महत्वपूर्ण अंतर समझना चाहिए:सुरक्षा बढ़ना और उपयोग बढ़ना एक ही बात नहीं है।किसी blockchain की computing power बढ़ सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उस पर ज्यादा users, applications या developers भी आ गए।ETC में यही स्थिति दिखाई देती है। Ethereum के मुकाबले इसके developers, applications और ecosystem का आकार काफी छोटा रहा है।इसलिए 2022 के बाद ETC में सबसे बड़ा सुधार security side पर हुआ, जरूरी नहीं कि usage side पर भी हुआ हो।

ETC की कीमत आखिर किस चीज़ पर टिकी है?

ETC की कीमत को समझने के लिए तीन चीजों को अलग-अलग देखना चाहिए।

पहली — सीमित आपूर्ति। ETC ने अपनी supply को सीमित करने की दिशा में बदलाव किया और लगभग 21 करोड़ 10 लाख ETC की अधिकतम सीमा तय की। साथ ही समय के साथ नए ETC का उत्पादन भी कम होता है।

दूसरी — mining ecosystem। ETC अभी भी Proof-of-Work blockchain है। जब तक miners के लिए इसे mine करना आर्थिक रूप से उपयोगी रहता है, तब तक mining इसका एक वास्तविक उपयोग और पहचान बनी रहती है।

तीसरी — वास्तविक उपयोग। यही सबसे कमजोर हिस्सा है। Ethereum की तुलना में ETC पर वास्तविक applications, users और भुगतान करने वाली गतिविधि काफी कम रही है।

इसलिए ETC का मूल्य मुख्य रूप से किसी तेजी से बढ़ते business से नहीं आता। इसका बड़ा हिस्सा एक विचार, इतिहास और समुदाय की पहचान से आता है।इसका मतलब यह नहीं कि ETC बेकार है। लेकिन इसे किसी तेजी से बढ़ती technology company की तरह समझना सही नहीं होगा।

ETC में किन तीन चीजों पर नजर रखें?

ETC को देखते समय केवल price chart देखना पर्याप्त नहीं है। तीन चीजें नियमित रूप से देखनी चाहिए।

पहली — Network की computing power। यह ETC की security का सबसे महत्वपूर्ण संकेत है। अगर इसमें लगातार गिरावट आए तो यह चिंता का विषय हो सकता है।

दूसरी — सुरक्षा से जुड़ी घटनाएँ। कोई नया 51% हमला, blockchain reorganization या बड़ा security incident हो तो उसे गंभीरता से देखना चाहिए।

तीसरी — वास्तविक network activity। केवल कुल transactions जैसी संख्या देखने के बजाय यह देखना ज्यादा उपयोगी है कि network पर वास्तव में कितने users, applications और आर्थिक गतिविधियाँ हो रही हैं।

ETC के मामले में पहली चीज़ यानी network security विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

भारत में ETC: खरीद, भेजने और रखने से जुड़ी बातें

भारतीय प्लेटफॉर्म पर ETC की उपलब्धता

ETC भारतीय crypto platforms पर आम तौर पर उपलब्ध रहा है। किसी खास exchange की सिफारिश करना इस लेख का उद्देश्य नहीं है। किसी भी platform का इस्तेमाल करने से पहले उसका registration और वर्तमान स्थिति स्वयं जाँचें।ETC भेजते समय network का ध्यान रखें। Ethereum (ETH) और Ethereum Classic (ETC) एक ही blockchain नहीं हैं।भेजने से पहले sender और receiver दोनों तरफ network और address की पुष्टि करें। बड़ी रकम भेजने से पहले छोटी test transaction करना बेहतर है।गलत network पर भेजी गई cryptocurrency कई बार वापस नहीं मिलती।

भारत में ETC mining का सवाल

ETC Proof-of-Work blockchain है, इसलिए mining की संभावना का सवाल स्वाभाविक है।लेकिन mining को केवल इस तरह नहीं देखना चाहिए कि:बिजली का खर्च बनाम mining से मिलने वाले coins।इसके साथ hardware की कीमत, बिजली की दर, मशीन से निकलने वाली गर्मी, maintenance और hardware की value कम होने का खर्च भी जोड़ना पड़ता है।भारत में बिजली की लागत कई mining setups के लिए चुनौती बन सकती है।इसके अलावा mining से होने वाली आय का tax treatment सामान्य crypto खरीद-बिक्री से अलग हो सकता है। इसलिए वास्तविक mining शुरू करने से पहले योग्य tax professional से सलाह लेना उचित है।

ETC पर भारत में tax

भारत में crypto assets को Virtual Digital Assets यानी VDA के रूप में tax किया जाता है।सामान्य VDA taxation में:

  • लाभ पर 30% tax लागू होता है।
  • लागू surcharge और cess अलग से हो सकते हैं।
  • बिक्री पर 1% TDS लागू हो सकता है, जहाँ संबंधित नियम लागू हों।
  • VDA के नुकसान को सामान्यतः दूसरी आय के साथ set-off नहीं किया जा सकता और आगे carry forward भी नहीं किया जा सकता।
  • एक crypto को दूसरे crypto से बदलना भी tax के लिए transfer माना जा सकता है।

इसलिए ETC खरीदने, बेचने या mining करने वाले व्यक्ति को अपने सभी transactions का रिकॉर्ड रखना चाहिए।

ETC से जुड़ी आम ठगी

ETC जैसे पुराने और पहचाने जाने वाले नामों का इस्तेमाल ठग भी कर सकते हैं।कुछ आम तरीके हैं:Cloud mining के नाम पर निश्चित कमाई: असली mining की कमाई market price, mining difficulty और electricity cost पर निर्भर करती है। इसलिए रोजाना या महीने की पक्की कमाई का दावा सावधानी से देखें।Fake wallet या website: कोई भरोसेमंद wallet या service आपकी secret recovery phrase/seed phrase नहीं मांगती। इसे कभी किसी के साथ साझा न करें।Fake ETC token: केवल नाम देखकर token को असली न मानें। सही contract address और network की पुष्टि करें।अगर धोखाधड़ी हो जाए तो तुरंत 1930 पर साइबर सहायता लें और राष्ट्रीय cybercrime portal पर शिकायत दर्ज करें। अपनी बैंक या payment service को भी तुरंत सूचित करें और सभी screenshots, transaction IDs और दूसरे प्रमाण सुरक्षित रखें।जो लोग पैसे लेकर 'आपका crypto वापस दिलाने' की गारंटी देते हैं, उनसे भी सावधान रहें।

ETC की यात्रा: 2016 से आज तक

जून–जुलाई 2016: Ethereum पर बड़ी चोरी के बाद blockchain दो रास्तों में बँट गई। एक रास्ता आज का Ethereum बना और दूसरा Ethereum Classic।

2017–18: ETC को पहचान मिली, लेकिन developers और बड़ी पूँजी का बड़ा हिस्सा Ethereum की तरफ चला गया।

2019–20: ETC पर गंभीर network attacks हुए। इससे छोटी Proof-of-Work chains की security को लेकर चिंता बढ़ी।

मई 2021: ETC ने लगभग $167.09 का सर्वकालिक उच्चतम भाव दर्ज किया।

सितम्बर 2022: Ethereum ने mining बंद की। इसके बाद ETC में mining activity और computing power बढ़ी।

2023–26: Security side पर स्थिति पहले से बेहतर हुई, लेकिन Ethereum की तुलना में वास्तविक उपयोग और developer activity अभी भी काफी छोटी रही। भाव अपने 2021 के शिखर से लगभग 96% नीचे रहा।

ETC के फायदे और नुकसान

फायदे

  • यह लगभग एक दशक से लगातार चल रही blockchain है।
  • इसने कई market cycles देखे हैं।
  • इसकी maximum supply सीमित है।
  • समय के साथ नए ETC का उत्पादन कम होता है।
  • 2022 के बाद इसकी mining और network security में सुधार हुआ।
  • इसकी पहचान और मूल विचार बहुत स्पष्ट है।

नुकसान

  • 2016 के बाद developers और capital का बड़ा हिस्सा Ethereum की तरफ चला गया।
  • 2019 और 2020 में security attacks का इतिहास मौजूद है।
  • Ethereum की तुलना में इसका ecosystem छोटा है।
  • वास्तविक, भुगतान करने वाला उपयोग सीमित है।
  • इसकी कीमत का बड़ा हिस्सा community identity और पुराने सिद्धान्त से जुड़ा है।
  • Proof-of-Work security अभी भी mining economics और token price से जुड़ी है।

इसलिए ETC को सही तरीके से 'सिद्धान्त-आधारित crypto asset' समझना बेहतर है।यह एक बढ़ता हुआ business नहीं है, लेकिन इसे केवल इसलिए मृत भी नहीं कहा जा सकता क्योंकि इसका अपना network, mining ecosystem और समुदाय आज भी मौजूद है।

ETC को समझने के सात आसान सूत्र

  1. ETC की शुरुआत 2016 के blockchain विभाजन से हुई।
  2. Ethereum ने इतिहास बदला, जबकि ETC ने पुराना इतिहास बनाए रखा।
  3. दोनों पक्षों के अपने तर्क थे; यह केवल तकनीकी फैसला नहीं बल्कि सिद्धान्त का सवाल था।
  4. Proof-of-Work blockchain की security उसकी computing power और attack की लागत पर निर्भर करती है।
  5. ETC पर 2019 और 2020 में हुए हमलों ने इस जोखिम को वास्तविक रूप में दिखाया।
  6. 2022 के बाद ETC की security बेहतर हुई, लेकिन security बढ़ने का मतलब usage बढ़ना नहीं है।
  7. ETC की कीमत मुख्य रूप से उसके इतिहास, विचार, सीमित supply और community identity पर निर्भर करती है।

ETC के बारे में पाँच आम सवाल

ETC और ETH में सबसे बड़ा अंतर क्या है?
दोनों की तकनीकी जड़ें बहुत हद तक एक जैसी हैं, लेकिन 2016 के बाद दोनों ने अलग रास्ता अपनाया। Ethereum ने चोरी से जुड़ा रिकॉर्ड बदला, जबकि ETC ने पुराने रिकॉर्ड को बनाए रखा।

51% attack क्या होता है?
जब कोई व्यक्ति या समूह network की बहुत बड़ी computing power पर नियंत्रण हासिल कर ले और blockchain के हाल के records को प्रभावित या बदल सके। इससे double-spending जैसी समस्या पैदा हो सकती है।

क्या ETC अब पूरी तरह सुरक्षित है?
नहीं। 2022 के बाद इसकी computing power बढ़ी है, इसलिए security पहले से बेहतर हुई है। लेकिन Proof-of-Work network की security स्थायी रूप से guaranteed नहीं होती।

क्या भारत में ETC mining करना फायदेमंद है?
इसका कोई एक जवाब नहीं है। बिजली की कीमत, hardware, mining difficulty, ETC का भाव, maintenance और tax — सभी को साथ रखकर calculation करनी होगी।

क्या भारत में ETC रखना कानूनी है?
भारत में crypto assets पर सामान्यतः पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन ETC को भारतीय मुद्रा का दर्जा नहीं मिला है। VDA से जुड़े tax और compliance नियम लागू होते हैं।

अन्तिम सीख: असूल और बाजार दोनों अलग चीजें हैं

ETC की कहानी केवल cryptocurrency की कहानी नहीं है। यह एक पुराने सवाल की कहानी है:क्या नियम तब भी लागू रहने चाहिए जब उनका पालन करना मुश्किल हो?2016 में Ethereum समुदाय ने दो अलग जवाब दिए।एक पक्ष ने कहा कि लोगों का पैसा बचाना ज्यादा जरूरी है। दूसरा पक्ष मानता रहा कि blockchain के नियम किसी परिस्थिति के अनुसार नहीं बदलने चाहिए।दोनों फैसलों की अपनी कीमत थी।Ethereum को developers, users, capital और applications का बड़ा ecosystem मिला और वह आगे बढ़ा। ETC ने अपना मूल सिद्धान्त बचाए रखा, लेकिन इसके बदले उसे लंबे समय तक कम उपयोग और कम ecosystem growth का सामना करना पड़ा।निवेशक के लिए सबसे बड़ा सबक यह नहीं है कि दोनों में से कौन सही था।सबक यह है कि बाजार किसी विचार के लिए जरूरी नहीं कि पैसा दे; बाजार अक्सर वास्तविक उपयोग और मांग के लिए पैसा देता है।अगर कोई व्यक्ति ETC को उसके सिद्धान्त और इतिहास के कारण रखना चाहता है, तो यह उसका निर्णय है। लेकिन उसे यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि बाजार भी उसी कारण से इसकी कीमत बढ़ाएगा।विचार का मूल्य और बाजार का मूल्य — दोनों अलग चीजें हैं।

शब्दावली: आसान भाषा में

Hard Fork: Blockchain के नियम बदलने के कारण उसका दो अलग chains में बँट जाना।

सुरक्षा-बजट: Blockchain पर हमला करने में हमलावर को जितनी computing power और लागत लगानी पड़े, उससे जुड़ी सुरक्षा।

51% Attack: जब कोई हमलावर network की बहुत बड़ी computing power पर नियंत्रण लेकर हाल के transactions को प्रभावित या बदलने की कोशिश करता है।

Deep Reorganization: Blockchain के कई पुराने blocks या records का दोबारा बदल जाना।

प्रतिवर्ती चक्र: कम price से mining कम होना, फिर security कम होना, फिर भरोसा और price दोनों पर दबाव आना।

निर्गम-कटौती: समय के साथ नए coins बनने की दर कम होना।

सिद्धान्त-आधारित asset: ऐसी crypto asset जिसकी पहचान केवल उपयोगिता से नहीं, बल्कि किसी विचार या सामुदायिक विश्वास से भी बनी हो।

अनिवार्य सूचना

यह लेख केवल शिक्षा के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसका किसी crypto project, community या trading platform से कोई जुड़ाव या आर्थिक हित नहीं है। इसे खरीद-बिक्री की सलाह, tax advice या कानूनी सलाह न समझें।2016 में Ethereum के विभाजन को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग तर्क थे। यह लेख किसी पक्ष को सही या गलत घोषित नहीं करता।ETC एक बहुत अस्थिर crypto asset है। मई 2021 के लगभग $167.09 के शिखर से इसका भाव करीब 96% नीचे रहा है और पूरी पूँजी खोने का जोखिम भी मौजूद है।ETC पर 2019 और 2020 में गंभीर security attacks हुए थे। 2022 के बाद इसकी mining और computing power बढ़ी है, लेकिन इससे भविष्य के सभी security risks समाप्त नहीं हो जाते।ETC की computing power, supply, mining rewards और वास्तविक network activity को आधिकारिक और विश्वसनीय स्रोतों से स्वयं जाँचें।Ethereum और Ethereum Classic अलग networks हैं। किसी transaction से पहले network और address की पुष्टि करें। बड़ी राशि भेजने से पहले छोटी test transaction करना सुरक्षित आदत है।Mining शुरू करने से पहले बिजली की लागत, hardware, maintenance, depreciation और tax treatment को शामिल करके पूरा हिसाब करें। Cloud mining या निश्चित रोजाना कमाई के वादों से सावधान रहें।भारत में VDA taxation के नियम लागू होते हैं, जिनमें 30% tax, लागू surcharge/cess, 1% TDS और losses के set-off/carry-forward से जुड़ी पाबंदियाँ शामिल हैं। Crypto-to-crypto transactions भी tax implications पैदा कर सकते हैं। अपनी स्थिति के अनुसार योग्य tax professional से सलाह लें।किसी platform का इस्तेमाल करने से पहले उसकी वर्तमान registration और compliance स्थिति जाँचें।धोखाधड़ी होने पर बिना देरी 1930 पर साइबर सहायता लें और राष्ट्रीय cybercrime portal पर शिकायत करें। अपनी transaction details और सभी प्रमाण सुरक्षित रखें। पैसे लेकर crypto वापस दिलाने की गारंटी देने वाले लोगों से भी सावधान रहें।अगर चाहें तो मैं इसी लेख का SEO-friendly version भी बना सकता हूँ, जिसमें headings को Google search intent के हिसाब से और मजबूत किया जाए और भाषा और भी सरल रखी जाए।


 

faq अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले सवालों के जवाब यहाँ पाएँ और समझें कि सब कुछ कैसे काम करता है।

ETC, 2016 के DAO hack विवाद के बाद बनी मूल Ethereum blockchain है, जो Proof of Work पर चलती है।
मौजूदा रेट ऊपर लाइव चार्ट में दिखाया गया है।
global demand-supply और USD exchange rate के आधार पर।
CoinDCX और WazirX जैसे रजिस्टर्ड एक्सचेंज पर ETC उपलब्ध है।
हाँ, KYC पूरा करके रजिस्टर्ड एक्सचेंज पर ETC खरीदना कानूनी है।
लगभग 210.7 million तय है।
ETH ने DAO hack को उलटा और PoS में शिफ्ट हुआ; ETC मूल, बिना बदलाव वाली PoW chain है।
2016 में एक smart contract से लाखों ETH चोरी हुए, जिसके जवाब में Ethereum community बंट गई।
Peer-to-peer payments और immutable blockchain के vision को support करने में।
ऊपर stats table में ताज़ा आंकड़ा दिखाया गया है।
exchange wallet या Ledger जैसे hardware wallet में।
इतिहास में कई बार हुई घटनाएं, जहां किसी समूह ने majority mining power से double-spending की।
यह सिद्धांत कि blockchain के इतिहास से कभी छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए, चाहे कुछ भी हो।
एक्सचेंज trading fee और लागू टैक्स नियम लागू होते हैं।