भारत में एक बड़े Crypto Investment Scam का खुलासा हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के बेंगलुरु जोनल ऑफिस ने Prevention of Money-Laundering Act (PMLA), 2002 के तहत कर्नाटक, महाराष्ट्र और दिल्ली में फैले 21 ठिकानों पर एक साथ सर्च ऑपरेशन चलाया। यह कार्रवाई 4th Bloc Consultants और उससे जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ की गई है।
शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने संगठित तरीके से भारत और विदेशों के निवेशकों को निशाना बनाकर डिजिटल एसेट आधारित निवेश योजनाओं के जरिए Crypto Investment Scam को अंजाम दिया। हाल ही में ED ने Punjab और Haryana में भी इसी तरह की Cryptocurrency से जुड़े Ponzi Scheme का खुलासा किया था।
ED के द्वारा जारी Press Release के अनुसार, जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने ऐसे नकली डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म बनाए, जो दिखने में पूरी तरह असली और भरोसेमंद लगते थे। इन वेबसाइट्स पर असामान्य रूप से ऊंचे रिटर्न का लालच दिया जाता था, जिससे लोग जल्दी निवेश करने के लिए आकर्षित हो जाएं।
जांच एजेंसी के अनुसार, इन प्लेटफॉर्म्स पर बिना अनुमति के जाने-माने क्रिप्टो विशेषज्ञों और प्रसिद्ध हस्तियों की तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया। शुरुआती निवेशकों को कुछ समय तक रिटर्न देकर भरोसा जीता गया, ताकि वे और लोगों को जोड़ें। यह तरीका काफी हद तक मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) जैसा था, जिससे इस Crypto Investment Scam का दायरा तेजी से बढ़ता चला गया।
इस Cryptocurrency Fraud को बड़े पैमाने पर फैलाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का जमकर इस्तेमाल किया गया। Facebook, Instagram, WhatsApp और Telegram जैसे माध्यमों से रेफरल बोनस और जल्दी मुनाफे के दावे किए गए।
ED की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपियों ने कई डिजिटल वॉलेट, विदेशी बैंक खाते और शेल कंपनियां बनाईं, ताकि अपराध से अर्जित धन को छिपाया जा सके। यह पैसा कभी हवाला के जरिए, तो कभी Peer-to-Peer डिजिटल ट्रांसफर के माध्यम से भारत और अन्य देशों में भेजा गया। इस नेटवर्क के जरिए फंड्स को कई स्तरों पर घुमाकर असली स्रोत छिपाने की कोशिश की गई।
जांच में यह भी सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क साल 2015 से सक्रिय था। इस दौरान डिजिटल एसेट्स के रूप में जुटाई गई रकम को सीधे लेन-देन में इस्तेमाल किया गया या फिर P2P माध्यम से नकद और बैंक बैलेंस में बदला गया।
सर्च ऑपरेशन के दौरान ED ने इस Crypto Investment Scam से जुड़े कुछ ऐसे मूवेबल और इम्मूवेबल एसेट्स की पहचान की है, जिन्हें भारत और विदेशों में इस अवैध कमाई से खरीदा गया था। इसके अलावा, कई संदिग्ध डिजिटल वॉलेट एड्रेस भी सामने आए हैं, जिनका इस्तेमाल अपराध की आय को प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने में किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, कई आरोपी अघोषित विदेशी बैंक खातों और विदेशी संस्थाओं के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग कर रहे थे।
ED की यह कार्रवाई एक बार फिर यह दिखाती है कि कैसे संगठित Cryptocurrency Scam के जरिए आम निवेशकों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया जा रहा है। यह मामला न सिर्फ भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते Cryptocurrency Scam और फाइनेंशियल फ्रॉड के खतरों को उजागर करता है।
निवेशकों के लिए यह एक स्पष्ट चेतावनी है कि किसी भी डिजिटल इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म में पैसा लगाने से पहले उसकी वैधता, टीम और रेगुलेटरी स्थिति की पूरी जांच जरूरी है। साथ ही, सरकारी एजेंसियों की यह कार्रवाई बताती है कि ऐसे मामलों में कानून प्रवर्तन एजेंसियां लगातार सख्त कदम उठा रही हैं, ताकि Cryptocurrency के जरिए होने वाले आर्थिक अपराधों पर लगाम लगाई जा सके।
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Disclaimer: यह आर्टिकल एजुकेशनल पर्पस से लिखा गया है, इसमें किसी भी तरह की वित्तीय सलाह नहीं है। क्रिप्टो मार्केट वोलेटाइल है, किसी भी इन्वेस्टमेंट से पहले अपनी रिसर्च जरुर करें।
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