NFTs का क्रेज़ पिछले कुछ समय में बहुत तेजी से बढ़ा है। लोग अब सिर्फ डिजिटल आर्ट नहीं खरीद रहे, बल्कि म्यूजिक, विडियो, गेम एसेट्स, यहाँ तक की अपनी सोशल मीडिया पोस्ट को भी NFT के रूप में कलेक्ट कर रहे हैं। लेकिन जितनी तेजी से ये इकोसिस्टम बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से Fake NFTs और स्कैम का खतरा भी बढ़ रहा है। ऐसे में NFT Verification एक जरूरी स्किल बन गई है, ताकि खरीदार और क्रिएटर्स दोनों सुरक्षित ट्रेड कर सकें।
इस ब्लॉग में हम Step-by-Step समझेंगे कि NFT Verification क्यों जरूरी है, इसे कैसे किया जाता है और Fake NFTs से कैसे बचा जा सकता है।
मान लीजिए आपने एक Digital Art NFT खरीदी, जो दिखने में शानदार है। लेकिन बाद में पता चलता है कि वह किसी और आर्टिस्ट के द्वारा बनाई गयी है जिसे किसी अननोन यूजर ने मिंट कर दिया। ऐसे मामलों में ना सिर्फ आपकी क्रेडिबिलिटी पर सवाल उठता है, बल्कि आपका पैसा भी डूब सकता है।
NFT Verification का उद्देश्य ही यह सुनिश्चित करना कि NFT असली है, उसके ओरिजिनल क्रिएटर के द्वारा ही मिंट की गयी है और उसकी ओनरशिप उसी व्यक्ति के पास है जो उसे बेच रहा है
जब भी आप कोई NFT खरीदें, तो उसे वेरीफाई करना आपकी जिम्मेदारी बनती है, यह ना सिर्फ आपके एसेट की सिक्योरिटी के लिए जरुरी है, बल्कि NFT Marketplace में ट्रस्ट को भी स्थापित करता है। यह समझने से पहले की NFT Verification कैसे किया जाता है, यह जानना जरुरी है कि यह होता क्या है।
NFT Verification एक ऐसी प्रोसेस है जिससे हम यह तय करते हैं कि जिस डिजिटल असेट को आप खरीद रहे हैं, वह वैलिड है, वह किसी सही ब्लॉकचेन पर मौजूद है और उसका स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट व मेटाडाटा सही तरीके से डेप्लोय किया गया है।
इस NFT Verification प्रोसेस में स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट एड्रेस, Token ID, ट्रांज़ैक्शन हिस्ट्री और मेटाडाटा एनालिसिस जैसे एलिमेंट शामिल होते हैं। यह पूरी प्रोसेस ब्लॉकचेन पर आधारित होती है और इसमें ट्रांसपेरेंसी को प्रायोरिटी दी जाती है। अब आइये जानते है वो कौन-कौन से तरीके हैं जिनसे NFT को वेरीफाई किया जा सकता है।
NFT को वेरीफाई करने के लिए जरुरी कुछ सबसे जरूरी स्टेप्स नीचे दिए गए हैं:
Blockchain आइडेंटिफिकेशन
NFT किस ब्लॉकचेन पर है, यह जानना सबसे पहले ज़रूरी है। यह जानकारी आपको NFT Marketplace पर एसेट डिटेल्स वाले सेक्शन में मिलेगी।
Contract Address और Token ID Verify करें
हर NFT का एक यूनिक स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट एड्रेस और Token ID होता है। इन दोनों को Etherscan या Polygonscan जैसे Blockchain Explorer में डालकर ऑथेंटिसिटी वेरीफाई की जा सकती है।
Transaction History चेक करें
NFT कब बना, अब तक कितनी बार ट्रांसफर हुआ और किन वॉलेट के बीच ट्रान्सफर हुआ, ये सब डिटेल्स देखने से आपको पता चल सकता है कि यह NFT क्या सच में सही ट्रान्सफर हो रही है या मैनीपुलेशन के द्वारा उसके दाम बढ़ाये जा रहे हैं।
Metadata और Digital Signature Analyze करें
NFT के Metadata में क्रिएटर का नाम, एसेट का प्रकार, क्रिएशन डेट और अन्य जानकारी होती है।
साथ ही, Smart Contract में किए गए डिजिटल सिग्नेचर से यह पता चलता है कि NFT ओरिजिनल क्रिएटर द्वारा ही मिंट किया गया है।
Platform Verification Badge देखें
कुछ NFT Marketplaces वेरीफायड क्रिएटर्स या कलेक्शन को बैज देते हैं, जो ट्रस्ट की एक एक्स्ट्रा लेयर प्रदान करता है, यह उसी तरह काम करता है जैसे हम किसी सोशल मीडिया साईट पर वेरिफायड प्रोफाइल देखते हैं।
Reverse Image Search करें
NFT अगर इमेज है, तो उसका Reverse Image Search करके देखा जा सकता है कि कहीं वही इमेज इंटरनेट पर पहले से मौजूद तो नहीं है।
इस तरह से आप खुद भी किसी NFT को खरीदने से पहले उसे वेरीफाई कर सकते है, अगर आप रेगुलर NFT ट्रेडर है तो किसी भी NFT को खरीदने से पहले इन स्टेप्स को जरुर फॉलो करें।
अब हम NFT Verification के बारे में तो जान गए लेकिन आपके दिमाग में यह प्रश्न जरुर होगा की आखिर Fake NFT बनाए कैसे जाते हैं, आइये जानते हैं।
Fake NFTs बनाना आज की डिजिटल दुनिया में बहुत ही आसान हो गया है। कुछ कॉमन तरीके जिनसे नकली NFTs बनाए जाते हैं:
ये सारे तरीके नए खरीदार को आसानी से कंफ्यूज कर सकते हैं, खासकर अगर वो NFT Verification की ऊपर बताई गयी स्टेप्स को फॉलो नहीं करता है तो। अब आइये जानते हैं की ऐसी स्थिति में Fake NFT की पहचान कैसे की जा सकती है।
Fake NFTs को पकड़ना आसान नहीं है, लेकिन कुछ बातें हैं जिनसे आप सतर्क हो सकते हैं:
इस तरह से की गयी थोड़ी सी एक्स्ट्रा मेहनत आपको एक बड़े फाइनेंशियल नुकसान से भी बचा सकती है।
जैसे-जैसे NFT मार्केट बड़ रहा है, वैसे-वैसे NFT Platforms भी वेरिफिकेशन को लेकर सख्त हो रहे हैं:
इस तरह से सभी प्रमुख NFT Marketplace का NFT Verification का अपना मैकेनिज्म है, लेकिन फिर भी इसे इसमें ट्रस्ट क्रिएट करने के लिए सारा डाटा ब्लॉकचेन पर रखा जाता है, जिसकी NFT और इससे जुड़ी सभी प्रोसेस में महत्वपूर्ण भूमिका होती है, आइये जानते हैं एनएफटी को वेरीफाई करने में ब्लॉकचेन क्या भूमिका निभाती है।
ब्लॉकचेन NFT Verification का आधार है। इसकी मदद से ही किसी यूजर को NFT Metadata रियल टाइम में देखना संभव होता है, इसके साथ ही ब्लॉकचेन पर रखे गए डाटा में मैनीपुलेशन संभव नहीं होता है, ब्लॉकचेन पर डाटा रखने के कारण कोई भी यूजर यह देख सकता है कि:
क्योंकि ब्लॉकचेन पर रखा गया डाटा एक बार जुड़ने के बाद बदला नहीं जा सकता है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं हो सकती, जिससे NFT Verification की प्रोसेस में ट्रस्ट बनता है। अभी तक हमने NFT Verification से जुड़ी जो प्रोसेस देखी वे सभी यूजर के द्वारा मैन्युअली की जाती है, लेकिन मैन्युअल प्रोसेस थोड़ी काम्प्लेक्स होती है और इसमें गलती होने की सम्भावना भी होती है, इसलिए इसके सॉल्यूशन के लिए कुछ टूल भी विकसित किए गए हैं। आइये जानते हैं की कौन-से NFT Verification टूल मार्केट में अवेलेबल है, जिनकी मदद से आप वेरिफिकेशन की इस प्रोसेस को आसान बना सकते हैं।
ऐसे कई थर्ड पार्टी टूल्स हैं जो यह जानने में आपकी मदद कर सकते है कि जो NFT ओरिजिनल और लिजिटीमेट है या नहीं यह जांचने में मदद कर सकते हैं:
इन टूल्स का इस्तेमाल करके आप NFTs को खरीदने से पहले उनका वेरिफिकेशन कर सकते हैं। इस पुरे ब्लॉग में हमने NFT Verification और उससे जुड़े सभी आस्पेक्ट्स को कवर किया है, अब हम जानते हैं की एक NFT खरीदार के रूप में वो कौन सी सावधानियां हैं जो आपको रखनी जरुरी है।
NFT खरीदते समय खुद को सुरक्षित रखने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स को जरुर फॉलो करें:
इस तरह से थोड़ी सी सावधानी और सही टूल्स का उपयोग करके आप आसानी से Fake NFTs से बच सकते हैं।
NFTs एक नयी और लगातार विकसित हो रही टेक्नोलॉजी हैं, लेकिन इसमें एंट्री करने से पहले सही जानकारी और सतर्कता जरूरी है। अगर आप NFT को वेरीफाई करना जानते हैं, तो ना सिर्फ आप खुद को किसी स्कैम से बचा सकते हैं, बल्कि पूरे इकोसिस्टम को ज़्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने में योगदान देते हैं। याद रखिए डिजिटल वर्ल्ड में रिसर्च और एनालिसिस ही सिक्योरिटी का सबसे बड़ा आधार है।
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