भारत में क्रिप्टो रेगुलेशन: संसदीय समिति ने SRO मॉडल का दिया प्रस्ताव
भारत में क्रिप्टो रेगुलेशन की दिशा में बड़ा कदम: संसद में रिपोर्ट पेश
भारत में क्रिप्टोकरेंसी और वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) के नियमन को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। संसदीय वित्त संबंधी स्थायी समिति (Parliamentary Standing Committee On Finance) ने अंतरिम रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तौर पर सेल्फ-रेगुलेटरी ऑर्गनाइज़ेशन (SRO) मॉडल अपनाने की सिफारिश की है। यह सिफारिश समिति की 36वीं रिपोर्ट में शामिल है, जो प्रस्तावित Securities Markets Code, 2025 पर आधारित है और 23 जुलाई 2026 को संसद में पेश की गई।
समिति का मानना है कि फिलहाल क्रिप्टो एसेट्स को सीधे प्रस्तावित सिक्योरिटीज़ कानून के दायरे में लाना समय से पहले (Premature) होगा। इसके बजाय, रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) या भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) जैसे किसी नामित रेगुलेटर की निगरानी में एक मान्यता-प्राप्त SRO स्थापित किया जाए, जो उद्योग के लिए न्यूनतम मानकों का पालन सुनिश्चित करे।
SRO मॉडल में क्या प्रस्तावित है?
SRO (Self-Regulatory Organization) ऐसा ढांचा होता है जिसमें उद्योग स्वयं तय नियमों का पालन करता है, जबकि उसकी निगरानी किसी सरकारी रेगुलेटर के पास रहती है। समिति के अनुसार, इस मॉडल में मज़बूत गवर्नेंस, पारदर्शिता, नियमित डिस्क्लोज़र, निवेशक सुरक्षा, प्रभावी शिकायत निवारण प्रणाली, कम्प्लायंस और आचार संहिता जैसे न्यूनतम मानक शामिल होने चाहिए। इसका उद्देश्य बाज़ार में अनुशासन बनाए रखना, निवेशकों का विश्वास बढ़ाना और संभावित जोखिमों को कम करना है।
VDA की स्पष्ट कानूनी परिभाषा की ज़रूरत
रिपोर्ट में वित्त मंत्रालय से Virtual Digital Assets (VDA) की स्पष्ट कानूनी परिभाषा तय करने का आग्रह किया गया है। समिति का कहना है कि सभी क्रिप्टो एसेट्स मौजूदा कानूनी श्रेणियों—जैसे सिक्योरिटीज़ या डेरिवेटिव्स—में आसानी से फिट नहीं बैठते। इसलिए यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि क्रिप्टो इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स और टोकनाइज़्ड सिक्योरिटीज़ प्रस्तावित Securities Markets Code के दायरे में आएंगे या नहीं।
यह रिपोर्ट कई महीनों तक चली सलाह-मशविरा प्रक्रिया का परिणाम है। इस दौरान समिति ने Binance, WazirX, ZebPay, IFSCA, RBI और ICAI सहित विभिन्न नियामकों, उद्योग प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों से चर्चा की।
सरकार का मौजूदा रुख नहीं बदला
समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार की आधिकारिक नीति फिलहाल अपरिवर्तित है। वर्तमान में VDA केवल टैक्सेशन, एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (AML) और रिपोर्टिंग जैसे सीमित उद्देश्यों के लिए ही रेगुलेटेड हैं। यानी भारत में अभी भी क्रिप्टोकरेंसी के लिए कोई समर्पित कानून लागू नहीं है।
भारत में Crypto Tax में भी किसी बदलाव की सिफारिश नहीं की गई है। फिलहाल:
Section 115BBH के तहत क्रिप्टो आय पर 30% फ्लैट टैक्स लागू है।
Section 194S के तहत प्रत्येक पात्र लेनदेन पर 1% TDS लागू रहता है।
भारत का क्रिप्टो बाज़ार कितना बड़ा है?
OECD की Asia Capital Markets Report 2026, जो Chainalysis के आँकड़ों पर आधारित है, बताती है कि जून 2024 से जून 2025 के बीच भारत में लगभग 340 बिलियन डॉलर का क्रिप्टो एसेट इनफ्लो दर्ज किया गया। यह देश की GDP का लगभग 9% है और एशिया में सबसे अधिक माना गया है।
इसी रिपोर्ट के अनुसार, इसी अवधि में भारत में लगभग 119 मिलियन क्रिप्टो यूज़र्स थे, जिससे यूज़र बेस के लिहाज़ से भारत दुनिया का सबसे बड़ा क्रिप्टो बाज़ार बन गया।
आगे की राह
समिति का मानना है कि किसी भी व्यापक क्रिप्टो रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के लिए केवल घरेलू समन्वय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी आवश्यक होगा। रिपोर्ट में विशेष रूप से FATF मानकों के अनुरूप नियामकीय ढांचा विकसित करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया है।
फिलहाल संसद का रुख यह संकेत देता है कि सरकार तत्काल कोई अलग क्रिप्टो कानून लाने के बजाय पहले SRO के माध्यम से इंडस्ट्री-लेड निगरानी व्यवस्था विकसित करना चाहती है। इसके साथ-साथ व्यापक नीतिगत चर्चा और नियामकीय स्पष्टता की प्रक्रिया जारी रहने की संभावना है।
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?
इस सिफारिश से फिलहाल निवेशकों की कानूनी स्थिति में कोई तत्काल बदलाव नहीं हुआ है। हालांकि, यह रिपोर्ट इस बात का स्पष्ट संकेत देती है कि भारत में क्रिप्टो सेक्टर के लिए औपचारिक निगरानी, निवेशक सुरक्षा और स्पष्ट नियमों की दिशा में नीतिगत काम तेज़ हो रहा है। यदि भविष्य में SRO मॉडल लागू होता है, तो इससे उद्योग में पारदर्शिता बढ़ने और निवेशकों का भरोसा मजबूत होने की संभावना है।
निष्कर्ष
संसदीय वित्त संबंधी स्थायी समिति की यह सिफारिश भारत के क्रिप्टो इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत संकेत है। हालांकि अभी कोई नया कानून लागू नहीं हुआ है, लेकिन SRO मॉडल को अंतरिम व्यवस्था के रूप में अपनाने का प्रस्ताव यह दर्शाता है कि सरकार और नीति-निर्माता क्रिप्टो बाज़ार के लिए अधिक स्पष्ट, संतुलित और व्यवस्थित रेगुलेटरी ढांचा तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। इसे निवेश, कानूनी या वित्तीय सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। क्रिप्टो एसेट्स में निवेश जोखिम भरा हो सकता है और बाज़ार में उतार-चढ़ाव की संभावना रहती है। निवेश का कोई भी निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।