India Crypto Trading Volume का 95% हिस्सा ऑफशोर एक्सचेंजों पर
13 अक्टूबर 2026: सरकार ने क्रिप्टो पर टैक्स इसलिए लगाया था कि हर ट्रांज़ैक्शन पर नजर रहे। लेकिन ताजा रिपोर्ट बताती है कि कारोबार ही उस नजर के दायरे से बाहर निकल गया है। TIOL Knowledge Foundation (TKF) की रिपोर्ट का अनुमान है कि FY 2025-26 में भारत के VDA ट्रेडिंग वॉल्यूम का 95% ऑफशोर एक्सचेंजों पर हुआ। यानी India Crypto Trading Volume के हर 100 रुपये में से सिर्फ 5 रुपये के आसपास उन प्लेटफॉर्म पर गए, जो भारत में टैक्स भरते हैं और नियमों का पालन करते हैं। इस खबर में हम समझेंगे कि यह आंकड़ा क्या कहता है, India Crypto Market की इस तस्वीर के पीछे वजह क्या है और आम निवेशक पर इसका असर क्या पड़ेगा।

Source : X Post
एक नजर में: दो आंकड़े जो पूरी कहानी बयां करते हैं
आंकड़ों की तस्वीर: ऑफशोर एक्सचेंजों पर ₹9,00,100 करोड़ का वॉल्यूम रहा, जबकि घरेलू और नियमों का पालन करने वाले एक्सचेंजों पर सिर्फ ₹51,446 करोड़। यानी भारतीय ट्रेडर्स का ज्यादातर पैसा विदेशी प्लेटफॉर्म पर घूम रहा है।
सरकार का नुकसान: रिपोर्ट के मुताबिक अकेले FY 2025-26 में ऑफशोर एक्सचेंजों से करीब ₹9,001 करोड़ का TDS नहीं वसूला जा सका, जो पिछले साल के पूरे घरेलू TDS कलेक्शन का लगभग 17.6 गुना है।
अब आइए इन आंकड़ों को थोड़ा करीब से देखते हैं।
India Crypto Trading Volume के आंकड़े: ₹9 लाख करोड़ बनाम ₹51 हजार करोड़
दोनों आंकड़े जोड़ें तो कुल वॉल्यूम लगभग ₹9,51,546 करोड़ बनता है, जिसमें घरेलू एक्सचेंजों की हिस्सेदारी करीब 5.4% और ऑफशोर की करीब 94.6% है। CoinDCX से जुड़े एक अधिकारी की पोस्ट में भी बताया गया कि घरेलू और नियमों का पालन करने वाले एक्सचेंज भारतीय ट्रेडिंग वॉल्यूम का सिर्फ 5.4% संभाल रहे हैं।
स्रोत: TKF रिपोर्ट के आंकड़े और उन पर आधारित मीडिया रिपोर्ट्स। सारे आंकड़े अनुमान हैं, आधिकारिक सरकारी डेटा नहीं।
यह कोई एक साल का झटका नहीं, बल्कि लगातार बढ़ता ट्रेंड है। इस ट्रेंड की शुरुआत कहां से हुई, यह समझना जरूरी है।
India के Crypto Trading Volume में कहाँ से गिरावट शुरू हुई :
भारत में जुलाई 2022 से क्रिप्टो ट्रांज़ैक्शन पर 1% TDS लागू है और मुनाफे पर 30% टैक्स अलग से लगता है। TKF की रिपोर्ट के अनुसार TDS लागू होने के बाद ज्यादातर यूजर ऑफशोर प्लेटफॉर्म पर चले गए और भारतीय प्लेटफॉर्म का वॉल्यूम लगभग 90% तक सिकुड़ गया। इससे पहले Esya Centre की स्टडी में भी सामने आया था कि TDS लागू होने के चार महीने के भीतर घरेलू एक्सचेंजों ने अपने वॉल्यूम का 81% खो दिया।
वजह सीधी है। ऑफशोर प्लेटफॉर्म पर ट्रेड करने से 1% की कटौती नहीं लगती, और जो एक्सचेंज भारत में रजिस्टर्ड नहीं हैं, वे भारतीय टैक्स सिस्टम को डेटा भी नहीं देते। इसी का असर सीधे सरकारी राजस्व पर दिखता है।
तो सवाल है कि इस पूरे खेल में खजाने को कितना नुकसान हुआ।
India Crypto Market में टैक्स की लीकेज: कितना गया हाथ से?
उसी रिपोर्ट पर आधारित पोस्ट के मुताबिक जुलाई 2022 से अब तक कुल बिना वसूला TDS ₹19,049 करोड़ तक पहुंच गया है, और कैपिटल गेंस जोड़ने पर अनुमानित बिना वसूला टैक्स ₹57,147 करोड़ बैठता है। इसकी तुलना में नवंबर 2025 की पिछली TIOL-TKF रिपोर्ट में यह अनुमान लगभग ₹36,000 करोड़ का था, यानी कुछ ही महीनों में अनुमानित नुकसान काफी ऊपर गया है।
अगर ट्रेंड नहीं बदला तो आगे और बड़ा नुकसान होगा। पिछली रिपोर्ट का अनुमान था कि अगले पांच साल में ऑफशोर ट्रेडिंग लगभग ₹39.9 लाख करोड़ तक पहुंच सकती है और बिना वसूला TDS ₹39,971 करोड़ बन सकता है।
नुकसान सिर्फ सरकार का नहीं है, घरेलू इंडस्ट्री पर भी इसकी सीधी मार पड़ी है।
घरेलू क्रिप्टो एक्सचेंजों पर दोहरी मार
जब ट्रेडर्स का वॉल्यूम घटता है, तो एक्सचेंज की कमाई और लिक्विडिटी दोनों घटती हैं, और बचे-खुचे यूजर भी बेहतर लिक्विडिटी की तलाश में बाहर चले जाते हैं। यह एक तरह का दुष्चक्र है। CoinDCX के सीईओ ने पहले ही कहा था कि टैक्स की वजह से मार्केट मेकर्स भी भारतीय एक्सचेंजों से निकल गए और लिक्विडिटी घटी। ऊपर से भारत में क्रिप्टो के नुकसान को मुनाफे से सेट-ऑफ करने की इजाजत नहीं है, इसलिए बार-बार ट्रेड करने वालों पर बोझ और बढ़ जाता है। KoinX की एक स्टडी में सामने आया था कि FY25 में लगभग आधे सक्रिय ट्रेडर्स ने नुकसान होने के बावजूद टैक्स भरा।
सवाल यह है कि सरकार इस पर क्या कर रही है।
ऑफशोर क्रिप्टो एक्सचेंजों पर शिकंजा: Schedule VDA से CARF तक
सरकार ऑफशोर एक्सचेंजों तक पहुंचने के लिए कई मोर्चों पर काम कर रही है:
Schedule VDA: FY 2025-26 से ITR में एक अलग Schedule VDA है, जिसमें क्रिप्टो से हुई कमाई घोषित करनी होती है। मतलब ऑफशोर पर ट्रेड किया हो, तब भी कमाई ITR में दिखानी है।
एक्सचेंजों की रिपोर्टिंग: Section 509 के तहत अप्रैल 2026 से क्रिप्टो रिपोर्टिंग शुरू हो चुकी है।
CARF (2027): मई 2026 तक 52 देश 2027 से CARF के तहत डेटा एक्सचेंज के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिनमें कई वे जगहें हैं जहां बड़े ऑफशोर एक्सचेंज रजिस्टर्ड हैं। यानी विदेशी प्लेटफॉर्म पर ट्रेड करने वाले भारतीयों का डेटा टैक्स विभाग तक पहुंचने का रास्ता खुल रहा है।
यानी "ऑफशोर है तो सुरक्षित है" वाली सोच ज्यादा समय नहीं चलेगी। इंडस्ट्री की तरफ से समाधान का एक अलग प्रस्ताव भी सामने है।
क्या क्रिप्टो टैक्स कम करने से तस्वीर बदलेगी :
TKF रिपोर्ट का तर्क है कि क्रिप्टो टैक्स में TDS घटाकर 0.01% करने से ट्रांज़ैक्शन की जानकारी भी बनी रहेगी और घरेलू प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग की लागत भी काफी घट जाएगी, जिससे यूजर वापस लौट सकते हैं। Esya Centre ने भी 1% से घटाकर 0.01% करने की सिफारिश की थी और ऑफशोर प्लेटफॉर्म को भी TDS का जिम्मेदार बनाने का सुझाव दिया था। हालांकि अभी तक सरकार की तरफ से इस मांग पर कोई बदलाव सामने नहीं आया है।
इस बहस के बीच एक आम निवेशक के लिए सबसे काम की बात यह है कि उसे क्या ध्यान रखना चाहिए।
आम निवेशक के लिए क्या मायने
टैक्स की जिम्मेदारी बरकरार: ऑफशोर एक्सचेंज की कमाई पर भी 30% टैक्स लगेगा। उदाहरण के लिए, अगर विदेशी प्लेटफॉर्म पर ₹1 लाख का मुनाफा हुआ, तो उसे ITR के Schedule VDA में दिखाना जरूरी है।
नोटिस का जोखिम: डेटा शेयरिंग बढ़ने के साथ बिना घोषित कमाई पर टैक्स विभाग के नोटिस, ब्याज और जुर्माने का खतरा बढ़ता है।
प्लेटफॉर्म का जोखिम: अगर कोई ऑफशोर प्लेटफॉर्म फ्रीज या बंद हो जाए, तो भारतीय नियमों के तहत यूजर के पास राहत के रास्ते सीमित होते हैं।
रजिस्ट्रेशन की जांच: कोई भी एक्सचेंज चुनने से पहले देखें कि वह FIU-IND में रजिस्टर्ड है या नहीं।
आगे की राह: क्या लौटेगा घरेलू क्रिप्टो मार्केट का भरोसा?
आने वाले महीनों में तीन बातों पर नजर रहेगी। पहला, क्या सरकार TDS घटाने की मांग पर विचार करती है। दूसरा, CARF के तहत डेटा शेयरिंग 2027 में कितनी असरदार साबित होती है। तीसरा, क्या घरेलू एक्सचेंजों में वॉल्यूम वापस लौटता है। जब तक इन तीनों में साफ बदलाव नहीं दिखता, India Crypto Market में ऑफशोर का दबदबा बने रहने की संभावना ज्यादा है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ जानकारी के लिए है। इसे निवेश, टैक्स या कानूनी सलाह न समझें। क्रिप्टोकरेंसी में निवेश जोखिम भरा है, इसलिए निवेश या टैक्स फाइलिंग से पहले अपने टैक्स सलाहकार से परामर्श करें।