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BitChat Ban India: सरकार का Jack Dorsey के मैसेजिंग ऐप पर टेकडाउन

Hindi News Writer
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BitChat Ban India

आज 24 जुलाई 2026 को BitChat Ban India से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। भारत सरकार ने पूर्व Twitter (अब X) प्रमुख Jack Dorsey द्वारा विकसित Bitcoin-प्रेरित डिसेंट्रलाइज़्ड मैसेजिंग ऐप BitChat के खिलाफ टेकडाउन ऑर्डर जारी किया है। गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) ने 23 जुलाई 2026 की देर रात GitHub को नोटिस (संख्या 11072601011432) भेजकर BitChat की Android कोड रिपॉज़िटरी और रिलीज़ हटाने का निर्देश दिया। इसके लिए GitHub को केवल तीन घंटे का समय दिया गया।

सरकारी आदेश Information Technology Act, 2000 की धारा 79(3)(b) के तहत जारी किया गया। इस प्रावधान के अनुसार, यदि GitHub जैसे इंटरमीडियरी सरकार की सूचना के बाद कार्रवाई नहीं करते हैं, तो उन्हें मिलने वाली "सेफ हार्बर" सुरक्षा समाप्त हो सकती है और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। यह आदेश सार्वजनिक रूप से जारी नहीं किया गया था और इसकी जानकारी डेवलपर्स द्वारा साझा किए गए दस्तावेज़ों के बाद सामने आई।

BitChat Ban India

Source: Jack Dorsey X Post 

BitChat Ban India: क्या है BitChat और सरकार ने क्यों उठाया कदम?

Jack Dorsey ने BitChat को जुलाई 2025 में लॉन्च किया था। यह एक पूरी तरह डिसेंट्रलाइज़्ड और एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप है, जो Bluetooth Mesh Networking पर काम करता है। इसमें किसी सेंट्रल सर्वर, मोबाइल नंबर या यूज़र रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं होती। इसकी डिज़ाइन Bitcoin के Peer-to-Peer सिद्धांतों से प्रेरित है और इसे भविष्य में ऑफलाइन Bitcoin (BTC) पेमेंट्स जैसी संभावनाओं से भी जोड़ा गया है।

सरकारी नोटिस में किसी विशेष गैरकानूनी कंटेंट का उल्लेख नहीं किया गया। इसके बजाय आपत्ति इस बात पर जताई गई कि BitChat इंटरनेट शटडाउन या नेटवर्क प्रतिबंधों के दौरान भी डिवाइस-टू-डिवाइस संचार को संभव बना सकता है।

NEET 2026 प्रदर्शन से कैसे जुड़ा BitChat?

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब नई दिल्ली के जंतर-मंतर क्षेत्र में NEET 2026 परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर जून 2026 से छात्रों का प्रदर्शन जारी है। इस दौरान कई बार मोबाइल इंटरनेट सेवाएं भी बंद की गईं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारी इंटरनेट शटडाउन और सिग्नल जैमिंग के दौरान आपसी संपर्क बनाए रखने के लिए Bluetooth-आधारित ऐप्स, जिनमें BitChat भी शामिल है, का उपयोग कर रहे थे। हालांकि, सरकार ने अपने आदेश में इस संबंध में कोई प्रत्यक्ष आरोप नहीं लगाया है।

BitChat Ban India पर Jack Dorsey की प्रतिक्रिया

सरकारी कार्रवाई के बाद Jack Dorsey ने अपने X अकाउंट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत सरकार BitChat जैसी डिसेंट्रलाइज़्ड तकनीकों को लेकर असहज है और इसी वजह से ऐप को हटाने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल सरकार की ओर से Dorsey की टिप्पणी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

Internet Freedom Foundation ने क्यों उठाए सवाल?

डिजिटल अधिकार संगठन Internet Freedom Foundation (IFF) ने टेकडाउन ऑर्डर का विरोध करते हुए इसे कानूनी और संवैधानिक दृष्टि से चुनौती दी है।

IFF का कहना है कि धारा 79(3)(b) स्वयं कोई स्वतंत्र ब्लॉकिंग पावर नहीं देती। संगठन ने सुप्रीम कोर्ट के Shreya Singhal (2015) फैसले का हवाला देते हुए कहा कि कंटेंट ब्लॉकिंग के लिए सामान्यतः धारा 69A के तहत निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, जिसमें सुनवाई और लिखित कारण जैसे सुरक्षा प्रावधान मौजूद हैं।

संगठन ने यह भी कहा कि आदेश किसी विशेष गैरकानूनी कंटेंट के बजाय संभावित दुरुपयोग की आशंका पर आधारित है। इसके अलावा आधी रात को केवल तीन घंटे की समयसीमा देना उचित प्रक्रिया (Due Process) के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

IFF का यह भी तर्क है कि GitHub से रिपॉज़िटरी हटाने से पहले से डाउनलोड किए जा चुके ऐप या उसकी ऑफलाइन Mesh Networking क्षमता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इससे केवल ओपन-सोर्स कोड की उपलब्धता और आगे का विकास प्रभावित होगा।

BitChat Ban India विवाद का व्यापक असर

यह मामला भारत में इंटरमीडियरी जवाबदेही और ऑनलाइन कंटेंट रेगुलेशन को लेकर चल रही बड़ी कानूनी बहस का हिस्सा बन गया है। X Corp पहले ही धारा 79(3)(b) और I4C के Sahyog Portal के इस्तेमाल को अदालत में चुनौती दे चुका है। इस मामले में Digipub News India Foundation जैसे संगठन भी शामिल होने की इच्छा जता चुके हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद डिजिटल अधिकारों, राष्ट्रीय सुरक्षा, इंटरनेट स्वतंत्रता और ओपन-सोर्स इनोवेशन के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को फिर सामने लाता है। जहां समर्थक इसे सार्वजनिक सुरक्षा के लिए जरूरी कदम मानते हैं, वहीं आलोचकों का कहना है कि इससे भविष्य में रेज़िलिएंट और डिसेंट्रलाइज़्ड टेक्नोलॉजी के विकास पर असर पड़ सकता है।

निष्कर्ष

BitChat Ban India विवाद केवल एक मैसेजिंग ऐप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत में डिजिटल अधिकारों, इंटरनेट प्रतिबंधों और इंटरमीडियरी नियमों को लेकर चल रही व्यापक बहस का हिस्सा बन चुका है। आने वाले समय में अदालतों का रुख और सरकार की अगली कार्रवाई यह तय करेगी कि डिसेंट्रलाइज़्ड कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म्स के लिए भारत में नियामकीय ढांचा किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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डिस्क्लेमर: यह लेख केवल समाचार और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। इसमें वर्णित कानूनी दावे सार्वजनिक बयानों और उपलब्ध दस्तावेज़ों पर आधारित हैं। संबंधित मामले न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हो सकते हैं। इसे कानूनी सलाह के रूप में न लें।

लेखक परिचय
Ronak Ghatiya Hindi News Writer

Ronak Ghatiya एक उभरते हुए क्रिप्टो कंटेंट राइटर हैं, जिनका एजुकेशन और टेक्नोलॉजी में मजबूत बैकग्राउंड रहा है। उन्होंने पिछले 6 वर्ष में फाइनेंस, ब्लॉकचेन, Web3 और डिजिटल एसेट्स जैसे विषयों पर डेटा-ड्रिवन और SEO-अनुकूल कंटेंट लिखा है, जो नए और प्रोफेशनल रीडर्स दोनों के लिए उपयोगी साबित हुआ है। रोनक की लेखनी का फोकस जटिल तकनीकी टॉपिक्स को आसान भाषा में समझाना है, जिससे क्रिप्टो स्पेस में ट्रस्ट और क्लैरिटी बनी रहे। उन्होंने CoinGabbar.com, Medium और अन्य क्रिप्टो प्लेटफ़ॉर्म्स के लिए ब्लॉग्स और न्यूज़ स्टोरीज़ लिखी हैं, जिनमें क्रिएटिविटी और रिसर्च का संतुलन होता है। रोनक की स्टाइल डिटेल-ओरिएंटेड और रिस्पॉन्सिव है, और वह तेजी से बदलते क्रिप्टो परिदृश्य में एक विश्वसनीय आवाज़ बनने की ओर अग्रसर हैं। LinkedIn पर प्रोफ़ाइल देखें या उनके आर्टिकल्स यहाँ पढ़ें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले सवालों के जवाब यहाँ पाएँ और समझें कि सब कुछ कैसे काम करता है।

भारत सरकार ने Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) के माध्यम से GitHub को BitChat की Android रिपॉज़िटरी और रिलीज़ हटाने के लिए टेकडाउन नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई Information Technology Act, 2000 की धारा 79(3)(b) के तहत की गई है।

BitChat Jack Dorsey द्वारा विकसित एक डिसेंट्रलाइज़्ड, एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप है, जो Bluetooth Mesh Networking पर काम करता है। इसे बिना इंटरनेट, बिना सेंट्रल सर्वर और बिना यूज़र रजिस्ट्रेशन के भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

Internet Freedom Foundation (IFF) का कहना है कि यह आदेश गलत कानूनी प्रावधान के तहत जारी किया गया है और इसमें उचित कानूनी प्रक्रिया (Due Process) तथा पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया। संगठन का तर्क है कि कंटेंट ब्लॉकिंग के लिए सामान्यतः Information Technology Act की धारा 69A के तहत निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।