क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म MEXC ने भारत से जुड़े अपने ऑपरेशंस में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने घोषणा की है कि 15 जनवरी 2026 के बाद नए भारतीय अकाउंट नहीं बनाए जाएंगे। वहीं, पहले से मौजूद यूज़र्स के लिए 28 फरवरी 2026 से सेवाएं धीरे-धीरे रोकी जाएंगी। यह कदम FIU-IND के नियमों का पालन करने के लिए उठाया गया है, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग पर नियंत्रण मजबूत किया जा सके। इस फैसले से लाखों भारतीय निवेशकों पर सीधा असर पड़ सकता है।
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FIU के तहत रजिस्ट्रेशन का मतलब है कि एक्सचेंज को यूज़र डेटा सरकारी एजेंसियों के साथ शेयर करना होगा। इसमें ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड, आइडेंटिफिकेशन डिटेल्स और अन्य फाइनेंशियल जानकारियां शामिल रहती हैं। टैक्स डिपार्टमेंट को इस डेटा के ज़रिए ITR ट्रैकिंग आसान हो जाती है। कई ट्रेडर्स मानते हैं कि इससे प्राइवेसी कम होगी और एक्स्ट्रा टैक्स जांच का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए यह मुद्दा चर्चा में है।
भारत में डिजिटल एसेट्स पर निगरानी लगातार बढ़ रही है। शुरुआती 2026 तक करीब 49 एक्सचेंज FIU के साथ रजिस्टर्ड हो चुके हैं। जो प्लेटफॉर्म नियमों का पालन नहीं कर रहे, उन पर ब्लॉक या सीमित एक्सेस जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार का मकसद टैक्स चोरी रोकना और अवैध एक्टिविटीज पर लगाम लगाना है। इसी पॉलिसी के चलते MEXC जैसे इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म्स को अपने बिज़नेस मॉडल में बदलाव करना पड़ रहा है।
हाल ही में खबर आयी थी की, भारत में Crypto Relugation पर FIU ने नए KYC Rules जारी किए है। इन नियमों का मकसद क्रिप्टो के ज़रिए होने वाले गलत कामों को रोकना, काले धन की आवाजाही पर लगाम लगाना और टैक्स चोरी को कम करना बताया जा रहा है।
नए भारतीय MEXC अकाउंट अब स्वीकार नहीं होंगे।
मौजूदा प्रोफाइल पर सेवाएं सीमित होंगी।
समय रहते फंड निकालना जरूरी होगा।
ट्रेडिंग एक्सेस बंद होने का खतरा हो सकता है।
नियम उल्लंघन पर अकाउंट फ्रीज़ संभव हो जाएगा।
टैक्स रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी बढ़ेगी।
कुछ ट्रेडर्स ऐसे एक्सचेंज तलाश रहे हैं जहां फिलहाल भारतीय नियमों का दबाव कम है। इसी संदर्भ में BloFin और BingX के नाम सामने आ रहे हैं। ये प्लेटफॉर्म अभी भारत में सीधे FIU रजिस्ट्रेशन के तहत नहीं आते, इसलिए यूज़र्स को तुरंत KYC या एक्स्ट्रा टैक्स रिपोर्टिंग की चिंता नहीं रहती। हालांकि, निवेशकों को हमेशा जोखिम समझकर ही फैसला लेना चाहिए।
साइनअप प्रोसेस आसान और जल्दी पूरी होने वाली।
ट्रेडिंग फीस कम होने का दावा किया जाता है।
कई इंटरनेशनल क्रिप्टो मार्केट्स में ट्रेड करने की सुविधा।
नए यूज़र्स के लिए वेलकम बोनस और प्रमोशनल ऑफर।
अलग-अलग तरह के ट्रेडिंग टूल्स उपलब्ध।
मोबाइल ऐप और वेब दोनों पर प्लेटफॉर्म का सपोर्ट।
दुनिया भर के यूज़र्स के साथ जुड़ने का मौका।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि MEXC यूज़र्स को घबराने के बजाय स्थिति को समझना चाहिए। जिन लोगों के फंड MEXC प्लेटफॉर्म पर हैं, उन्हें समय रहते सुरक्षित ट्रांसफर या विड्रॉल की योजना बनानी चाहिए। साथ ही, किसी भी नए एक्सचेंज पर जाने से पहले उसकी रिलायबिलिटी, सुरक्षा और नियमों की जानकारी लेना जरूरी है। भारत में क्रिप्टो इकोसिस्टम तेजी से बदल रहा है, इसलिए जागरूक रहना ही सबसे सुरक्षित रास्ता माना जा रहा है।
पिछले 7 वर्षों में मैंने देखा है कि भारत में क्रिप्टो रेगुलेशन हर साल सख्त हुआ है। FIU जैसे कदम ट्रेडिंग से ज्यादा टैक्स ट्रैकिंग पर फोकस दिखाते हैं। अब निवेशकों के लिए जागरूकता और सही प्लेटफॉर्म चुनना सबसे जरूरी हो गया है।
MEXC का यह फैसला भारत में क्रिप्टो इंडस्ट्री के बदलते माहौल को साफ दिखाता है। FIU नियमों के कारण ट्रांसपेरेंसी तो बढ़ेगी, लेकिन प्राइवेसी और फ्री ट्रेडिंग पर असर भी पड़ेगा। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी के बजाय समझदारी से कदम उठाने होंगे। फंड की सुरक्षा, नियमों की जानकारी और प्लेटफॉर्म की रिलायबिलिटी को प्राथमिकता देना जरूरी है। आने वाले समय में भारतीय क्रिप्टो मार्केट और अधिक रेगुलेटेड होने की संभावना है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल सूचना और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी निवेश सलाह नहीं है। क्रिप्टो में निवेश जोखिम भरा हो सकता है। किसी भी प्लेटफॉर्म पर ट्रेड करने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह अवश्य लें। राइटर या प्लेटफार्म किसी लाभ या हानि के लिए जिम्मेदार नहीं होगा।
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