भारत में क्रिप्टो बाजार एक बार फिर चर्चा में है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कुछ क्रिप्टो रेमिटेंस और पेमेंट प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई की है, जिन पर USDT के जरिए कथित तौर पर बिना अधिकृत अनुमति सीमा पार फंड ट्रांसफर कराने का आरोप है। इस कार्रवाई के बाद भारतीय बाजार में USDT की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में प्रीमियम पर ट्रेड होने लगी है, जिससे ट्रेडर्स, निवेशकों और क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट करने वाले यूजर्स की लागत बढ़ गई है।
करीब 17 जून 2026 के आसपास ED ने बेंगलुरु में कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। जांच का दायरा Transak, Onramp.money, Onmeta, Carret और Xpat/Remit2Any जैसी कंपनियों तक पहुंचा।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इन प्लेटफॉर्म्स ने Foreign Exchange Management Act (FEMA) के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए ₹2,500 करोड़ से अधिक के क्रॉस-बॉर्डर लेनदेन को आसान बनाया। जांच के दौरान लगभग ₹6 करोड़ की राशि फ्रीज किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
कार्रवाई के बाद भारतीय बाजार में USDT की सप्लाई प्रभावित हुई। जिन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से बड़ी मात्रा में Stablecoin उपलब्ध होता था, वहां गतिविधियां धीमी पड़ने लगीं।
इसी वजह से:
भारत में USDT का प्रीमियम तेजी से बढ़ा।
ट्रेडर्स की लागत बढ़ गई।
आर्बिट्राज के अवसर सीमित हुए।
रेमिटेंस उपयोगकर्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
कुछ रिपोर्टों के अनुसार भारतीय बाजार में USDT लगभग ₹102.88 तक पहुंच गया, जबकि उसी समय डॉलर-रुपया विनिमय दर करीब ₹94.65 थी। यह अंतर मांग और सीमित सप्लाई का संकेत देता है।
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इस कार्रवाई का असर केवल Stablecoin तक सीमित नहीं है।
क्रिप्टो ट्रेडिंग की लागत बढ़ी।
रेमिटेंस सेवाओं की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
कुछ लिक्विडिटी प्रोवाइडर्स ने जोखिम कम करने के लिए गतिविधियां सीमित कीं।
P2P और विदेशी प्लेटफॉर्म्स की ओर रुझान बढ़ सकता है, लेकिन इनमें नियामकीय जोखिम अधिक हो सकते हैं।
भारत सरकार और नियामक संस्थाओं की मुख्य चिंता यह है कि बिना पर्याप्त निगरानी वाले Stablecoin आधारित लेनदेन से:
मनी लॉन्ड्रिंग का जोखिम बढ़ सकता है।
विदेशी मुद्रा नियमों का उल्लंघन हो सकता है।
पूंजी का अनियंत्रित बाहरी प्रवाह (Capital Flight) संभव है।
इसी कारण VDA सेवा प्रदाताओं के लिए FIU-IND पंजीकरण, 30% टैक्स और 1% TDS जैसे नियम पहले से लागू हैं।
फिलहाल ऐसी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है जिससे यह कहा जा सके कि भारत सरकार क्रिप्टोकरेंसी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने जा रही है।
मौजूदा कार्रवाई उन संस्थाओं पर केंद्रित दिखाई देती है जिन पर FEMA और अन्य वित्तीय नियमों के उल्लंघन के आरोप हैं। इसलिए इसे पूरे क्रिप्टो उद्योग पर प्रतिबंध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
केवल नियामकीय अनुपालन वाले प्लेटफॉर्म का उपयोग करें।
किसी भी अनधिकृत Cross-Border Remittance सेवा से बचें।
USDT खरीदने से पहले स्थानीय प्रीमियम अवश्य जांचें।
केवल ED, RBI और सरकार की आधिकारिक घोषणाओं पर भरोसा करें।
India Crypto Remittance Crackdown यह संकेत देता है कि भारत सरकार क्रिप्टो सेक्टर में पारदर्शिता और नियामकीय अनुपालन को मजबूत करना चाहती है। फिलहाल इसका सबसे बड़ा असर भारतीय बाजार में USDT की कीमत और उपलब्धता पर दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में ED की जांच, संभावित नियामकीय बदलाव और नए अनुपालन ढांचे यह तय करेंगे कि भारतीय क्रिप्टो बाजार किस दिशा में आगे बढ़ता है।
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Risk Disclaimer:
क्रिप्टोकरेंसी बाजार अत्यधिक अस्थिर है। यह लेख केवल शैक्षणिक और सूचना उद्देश्य के लिए है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले स्वयं शोध करें और आवश्यक होने पर वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।
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