Updated Date: November 18, 2025
Web3 की दुनिया में NFT अब केवल डिजिटल आर्ट तक सीमित नहीं रहे, बल्कि अब इनका उपयोग गेमिंग, सोशल मीडिया, वर्चुअल आइटम्स और ब्रांडिंग के अहम टूल के रूप में ज्यादा हो रहा है। लेकिन जैसे-जैसे इनका उपयोग बढ़ रहा है, इनकी मिंटिंग कॉस्ट और ऑन-चेन डेटा का भार भी बढ़ने लगा।
ट्रेडिशनल NFT से जुड़ी इन्हीं समस्याओं के समाधान के रूप में Compressed NFTs (cNFTs) का कॉन्सेप्ट सामने आया है, ये ऐसे NFT होते हैं जिन्हें कम स्टोरेज स्पेस और बेहद कम कॉस्ट में मिंट किया जा सकता है। ये Solana Ecosystem का हिस्सा हैं और बड़े पैमाने पर डिजिटल एसेट्स को स्केलेबल बनाने में मदद करते हैं।
दूसरे शब्दों में, अगर आपको लाखों NFT एक साथ बनानी हैं, जैसे कि एक बड़ा गेमिंग इन्वेंटरी, इवेंट टिकट्स या सोशल मीडिया अवतार तो Compressed NFTs एक कॉस्ट-एफिशिएंट और स्केलेबल सॉल्यूशन हैं।
आइये देखते हैं कि इसके पीछे का टेक्निकल आधार क्या है?
Compressed NFTs के कांसेप्ट को मूर्त रूप देने में एक रिवॉल्यूशनरी टेक्नोलॉजी का योगदान है, जिसे Merkle Trees कहा जाता है।
Merkle Tree एक तरह का डेटा स्ट्रक्चर है जो डेटा को नोड्स के रूप में स्टोर करता है और हर नोड का एक क्रिप्टोग्राफिक हैश होता है। इससे Solana को ये फायदा होता है कि:
Solana का State Compression Framework, जो Solana Foundation और Metaplex द्वारा विकसित किया गया है, इसी Merkle Tree बेस्ड कम्प्रेशन पर काम करता है।
अब सवाल उठता है, इसकी ज़रूरत ही क्यों पड़ी?
Solana के पहले, Ethereum जैसे नेटवर्क पर एक-एक एनएफटी की मिंटिंग फीस कई डॉलर तक पहुँच जाती थी। ऐसी स्थिति में अगर किसी गेमिंग प्लेटफार्म को 10 लाख एनएफटी मिंट करना हो तो उसे लाखों डॉलर की फीस देनी पड़ेगी। ऐसी स्थिति में Web3 गेमिंग को अफोर्डेबल बनाना लगभग असंभव था, इसी असंभव को संभव बनता है Compressed NFT।
Compressed NFTs की ज़रूरत इन कारणों से महसूस हुई:
यानी यह बदलाव केवल डेवलपर्स के लिए नहीं, बल्कि Web3 के भविष्य के लिए जरूरी था।
अब एक सीधा सवाल, अगर पहले से Standard NFTs मौजूद हैं, तो Compressed NFTs क्या नया लाते हैं?
| विशेषता | Standard NFTs | Compressed NFTs |
| स्टोरेज | ऑन-चेन | ऑफ-चेन (Merkle Tree में) |
| मिंटिंग कॉस्ट | हाई | बेहद कम |
| स्केलेबिलिटी | लिमिटेड | हाई-वॉल्यूम |
| अपग्रेडेबिलिटी | डायनामिक | स्टैटिक (कुछ हद तक) |
| ट्रांज़ैक्शन टाइम | फ़ास्ट | एक्सट्रीमली फ़ास्ट |
cNFTs कॉस्ट और स्केलेबिलिटी को टारगेट करते हैं, जबकि Standard NFTs डायनामिक फ़ीचर्स और फुल-ऑनचेन स्टोरेज को प्रायोरिटी देते हैं।
Solana पर cNFTs को मिंट करने का तरीका थोड़ा अलग होता है:
इसके लिए Helius, Metaplex और Solana RPC Providers जैसे टूल्स का इस्तेमाल किया जाता है।
आइए अब जानते हैं कि इन Compressed NFTs कहाँ कहाँ काम आती हैं?
cNFTs ने ऐसे नए यूज़ केस के रास्ते खोले हैं जो पहले बहुत अधिक कास्टिंग की वजह से संभव नहीं थे:
हर यूज़ केस ये दर्शाता है कि cNFTs केवल एक टेक्निकल इनोवेशन नहीं, बल्कि Web3 के विस्तार का इंजन बन सकते हैं।
Web3 Scalability केवल ट्रांज़ैक्शन की गति या ब्लॉकचेन की थ्रूपुट तक सीमित नहीं है। इसकी असली परीक्षा तब होती है जब करोड़ों यूज़र्स को बिना फ्रिक्शन Web3 से जोड़ा जाए।
Compressed NFTs इस दिशा में बड़े बदलाव ला रहे हैं:
इस तरह, cNFTs Web3 के मास एडॉप्शन को सस्टेनेबल और अफोर्डेबल तरीके से संभव बनाने का प्रयास करते हैं।
अब सवाल ये नहीं है कि Compressed NFTs का उपयोग होगा या नहीं, बल्कि ये है कि इसका उपयोग किन किन क्षेत्रों में हो सकता है?
वर्तमान में उपयोग कर रहे प्रोजेक्ट्स:
भविष्य की संभावनाएँ:
Compressed NFTs अभी अपनी शुरूआती स्टेज में हैं लेकिन इनका स्कोप बेहद व्यापक है।
Compressed NFTs सिर्फ NFT का एक नया प्रकार नहीं हैं, ये Web3 के मास अडॉप्शन को संभव बनाने वाला कांसेप्ट है। Solana जैसे हाई-परफॉर्मेंस प्लेटफ़ॉर्म पर इनका इस्तेमाल गेमिंग, सोशल मीडिया और डिजिटल आइडेंटिटी के फ्यूचर को री-इमेजिन कर रहा है। अगर Web3 को अरबों यूज़र्स तक पहुंचाना है, तो Compressed NFTs जैसी इनोवेशन ही इसे संभव बना सकते हैं।
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