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जम्मू-कश्मीर में Crypto फंडिंग का नया खतरा, एजेंसियां सतर्क

जम्मू-कश्मीर में Crypto गतिविधियों के लिए VPN के दुरुपयोग पर नजर


भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने एक नए और गुप्त नेटवर्क को लेकर गंभीर चेतावनी दी है, जिसे “डिजिटल हवाला” कहा जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, यह तरीका पुराने हवाला सिस्टम जैसा ही है, लेकिन इसमें अब Crypto का इस्तेमाल हो रहा है। इस माध्यम से सीमा पार से पैसा भारत के अंदर भेजा जा रहा है। एजेंसियों को शक है कि इस पैसे का इस्तेमाल अलगाववादी सोच और हिंसक गतिविधियों को फिर से बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। हालिया जानकारी के बाद सुरक्षा व्यवस्था को अलर्ट पर रखा गया है।


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Source: यह इमेज Daily Excelsior की X पोस्ट से ली गई है, जिसकी लिंक यहां दी गई है।


ट्रेडिशनल हवाला से अलग लेकिन उद्देश्य वही


Crypto जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह डिजिटल स्ट्रक्चर पुराने हवाला मॉडल की तरह ही काम करता है, जहां फॉर्मल  बैंकिंग चैनल को दरकिनार किया जाता है। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां कागजी ट्रांजैक्शन की जगह वर्चुअल करेंसी का प्रयोग हो रहा है। इस प्रोसेस में पैसे सोर्स छिपा रहता है और ट्रांजैक्शन की परतें इतनी कठिन होती हैं कि उनका पता लगाना बेहद मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से इसे नेशनल सुरक्षा के लिए उभरती चुनौती माना जा रहा है।


डिजिटल हवाला कैसे काम करता है


  • विदेश में बैठे लोग पैसा इकट्ठा करते हैं।

  • स्थानीय लोगों को डिजिटल वॉलेट बनाने को कहा जाता है।

  • पहचान जांच से बचने के तरीके अपनाए जाते हैं।

  • डिजिटल करेंसी सीधे वॉलेट में भेजी जाती है।

  • पी2पी सौदों से इसे नकद में बदला जाता है।

  • कई ट्रांजैक्शन टैक्स पैसे का सुराग मिटा दिया जाता है।


विदेश से चल रहा नेटवर्क, स्थानीय लोगों की भूमिका


शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क को विदेश में बैठे लोग चला रहे हैं। चीन, मलेशिया, म्यांमार और कंबोडिया जैसे देशों से निर्देश मिलने के संकेत हैं। ये लोग जम्मू–कश्मीर के कुछ स्थानीय लोगों को निजी डिजिटल Crypto Wallet  बनाने के लिए कहते हैं। इन Crypto Wallet में पहचान की जांच नहीं होती, जिससे इनमें पैसा लेना आसान हो जाता है। बाद में इन वॉलेट पर स्थानीय नेटवर्क का नियंत्रण हो जाता है और पैसा धीरे-धीरे बाजार में घूमने लगता है।


VPN और पहचान छुपाने की तकनीक


अधिकारियों के अनुसार, इस नेटवर्क में पहचान छुपाने के लिए Crypto VPN जैसे टूल का खूब इस्तेमाल हुआ। इससे व्यक्ति की लोकेशन और जानकारी छिप जाती है। इसी वजह से घाटी में VPN सेवाओं पर अस्थायी रोक लगाई गई है। एजेंसियों का मानना है कि ऐसे टूल जांच से बचने का आसान तरीका बन गए हैं, इसलिए इन पर नियंत्रण जरूरी है।


बड़े शहरों में नकद में बदला जाता है पैसा


जांच में यह भी पता चला है कि वॉलेट रखने वाले लोग बाद में दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में जाते हैं। वहां वे P2P Trading करने वालों से मिलते हैं और Crypto को नकद में बदल लेते हैं। ये सौदे किसी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होते। इस तरह विदेश से आया पैसा बिना किसी पहचान के देश की अर्थव्यवस्था में शामिल हो जाता है, जिससे निगरानी कमजोर पड़ती है।


म्यूल अकाउंट क्यों हैं अहम


इस पूरे सिस्टम की सबसे अहम कड़ी “म्यूल अकाउंट” हैं। ये खाते आम लोगों के नाम पर होते हैं, जिन्हें थोड़े कमीशन का लालच देकर इस्तेमाल किया जाता है। उन्हें बताया जाता है कि जोखिम बहुत कम है। लेकिन असल में इन एकाउंट्स का पूरा कंट्रोल नेटवर्क चलाने वालों के पास होता है। एक व्यक्ति के पास एक साथ कई खातों की जानकारी होती है, जिससे पैसा इधर-उधर करना आसान हो जाता है।


एजेंसियों की चिंता और आगे की तैयारी


  • बिना रजिस्ट्रेशन वाले बिज़नेस पर नजर।

  • संदिग्ध ट्रेडिंग चैनलों की पहचान।

  • शक वाले खातों की जांच।

  • टेक्निकल एक्सपर्ट्स की मदद।

  • लोगों को जागरूक करने की कोशिश।

  • अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल।


अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भी जोर


अधिकारियों का कहना है कि यह पूरा सिस्टम कानून की कमियों का फायदा उठाता है। ग्रे मार्केट में चलने की वजह से यह मनी लॉन्ड्रिंग रोकने वाले नियमों से बाहर रहता है। सुरक्षा एजेंसियों को डर है कि अगर समय रहते सख्ती नहीं की गई, तो यह तरीका दूसरे संवेदनशील इलाकों में भी फैल सकता है। इसलिए आने वाले समय में डिजिटल ट्रांजैक्शन पर निगरानी, टेक्निकल कंट्रोल और लोगों की मदद को सबसे ज्यादा अहम माना जा रहा है।


पिछले 7 वर्षों में मैंने देखा है कि अवैध फंडिंग के तरीके लगातार टेक्निकल होते जा रहे हैं। Crypto और VPN का गलत इस्तेमाल कानून से आगे निकलने की कोशिश है। समाधान सिर्फ सख्ती नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी और जागरूकता दोनों का बैलेंस है।


कन्क्लूजन 


डिजिटल हवाला नेटवर्क यह दिखाता है कि अवैध फंडिंग अब ट्रेडिशनल तरीकों तक सीमित नहीं रही। Crypto, VPN और P2P जैसे साधनों ने जांच को कठिन बना दिया है। अगर समय रहते निगरानी, टेक्निकल कंट्रोल और इंटरनेशनल सहयोग नहीं बढ़ाया गया, तो यह मॉडल अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में भी फैल सकता है। मजबूत कानून, बेहतर टेक्नोलॉजी और आम लोगों की समझ ही इस खतरे से निपटने का रास्ता है।


डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल सूचना और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी पब्लिक रिपोर्ट्स और सामान्य एनालिसिस पर बेस्ड है। इसे किसी भी प्रकार की कानूनी, निवेश या टेक्निकल सलाह के रूप में न लें।

आकांक्षा व्यास एक स्किल्ड क्रिप्टो राइटर हैं, जिनके पास 7 वर्षों का अनुभव है और वे ब्लॉकचेन और Web3 के कॉम्पलेक्स टॉपिक्स को सरल और समझने योग्य बनाने में एक्सपर्ट हैं। वे डीप रिसर्च के साथ आर्टिकल्स, ब्लॉग और न्यूज़ लिखती हैं, जिनमें SEO पर विशेष ध्यान दिया जाता है ताकि रीडर्स का जुड़ाव बढ़ सके। आकांक्षा की राइटिंग क्रिएटिव एक्सप्रेशन और एनालिटिकल अप्रोच का एक बेहतरीन मिश्रण है, जो रीडर्स को जटिल विषयों को स्पष्टता के साथ समझने में मदद करता है। क्रिप्टो स्पेस के प्रति उनकी गहरी रुचि उन्हें इस उद्योग में एक अच्छे राइटर के रूप में स्थापित कर रही है। अपने कंटेंट के माध्यम से, उनका उद्देश्य रीडर्स को क्रिप्टो की तेजी से बदलती दुनिया में गाइड करना है।

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डिजिटल हवाला अवैध धन भेजने का तरीका है जिसमें Crypto और अनियमित चैनलों का उपयोग होता है।
Crypto का उपयोग पहचान छुपाकर सीमा पार से धन भेजने में किया जा रहा है।
VPN यूजर की लोकेशन और पहचान छुपाने में मदद करता है, जिससे जांच मुश्किल हो जाती है।
म्यूल अकाउंट आम लोगों के नाम पर खोले गए खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल अवैध लेनदेन के लिए होता है।
P2P ट्रेडिंग से Crypto को नकद में बदला जाता है बिना आधिकारिक रिकॉर्ड के।