भारत में क्रिप्टोकरेंसी सेक्टर अब तेजी से रेगुलेटेड फाइनेंशियल सिस्टम का हिस्सा बनता जा रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए Financial Intelligence Unit-India ने Virtual Digital Asset Service Providers के लिए नई AML और CFT (Counter Financing of Terrorism) FIU Guidelines जारी की हैं।
इन नियमों के तहत अब Crypto Exchanges को वही Compliance Standards अपनाने होंगे, जो बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों पर लागू होते हैं। नई गाइडलाइन्स का मकसद मनी लॉन्ड्रिंग, धोखाधड़ी और अवैध फंड ट्रांसफर पर रोक लगाना है। इसके चलते भारतीय क्रिप्टो यूजर्स को KYC, ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग और Account Verification से जुड़े कई बदलाव भी देखने को मिलेंगे।
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नई FIU Guidelines में सबसे बड़ा बदलाव Travel Rule को लेकर है। इसके तहत किसी भी Virtual Digital Asset (VDA) ट्रांसफर के दौरान भेजने वाले (Originator) और प्राप्त करने वाले (Beneficiary) की जानकारी संबंधित प्लेटफॉर्म्स के बीच साझा करनी होगी। एक्सचेंजों को यूजर्स का नाम, PAN, वॉलेट एड्रेस, जन्म तिथि और अन्य पहचान संबंधी जानकारी सुरक्षित रखनी होगी और ट्रांसफर के समय उपलब्ध करानी होगी।
FIU-IND ने स्पष्ट किया है कि, यह जानकारी ट्रांजैक्शन से पहले या उसी समय साझा की जानी चाहिए, बाद में नहीं। इससे क्रिप्टो ट्रांसफर की Traceability बढ़ेगी और Suspicious Activities की पहचान करना आसान होगा। साथ ही unhosted wallets और कुछ P2P लेनदेन भी निगरानी रखा जाएगा। कुल मिलाकर, यह नया FIU Guidelines जारी का उद्देश्य क्रिप्टो ट्रांजैक्शन को ज्यादा ट्रांसपेरेंट और Traceable बनाना है।
FIU Guidelines 2026 के तहत KYC Process को पहले से कहीं अधिक सख्त बनाया गया है। अब एक्सचेंजों को यूजर्स का लाइव सेल्फी वेरिफिकेशन (Liveness Detection) करना होगा, ताकि फोटो या डीपफेक के माध्यम से फर्जी अकाउंट न बनाया जा सकें।
वहीं रिपोर्ट्स के अनुसार ऑनबोर्डिंग के समय यूजर की लोकेशन के Geo-Coordinates, IP Address, मोबाइल नंबर और ईमेल वेरिफिकेशन जैसी जानकारियां भी रिकॉर्ड की जाएंगी। नियमों के अनुसार हाई-रिस्क ग्राहकों का KYC कम से कम हर 6 महीने में और अन्य ग्राहकों का साल में एक बार अपडेट करना होगा।
यदि किसी यूजर की जानकारी में बदलाव नहीं हुआ है, तब भी Self-Declaration देना पड़ सकता है। PAN और KYC रिकॉर्ड में किसी तरह की गड़बड़ी होने पर अकाउंट पर प्रतिबंध लगने की भी संभावना बढ़ सकती है। यह पूरा ढांचा FIU Guidelines को एक मजबूत Compliance Framework बनाता है, जिससे फ्रॉड और Identity Misuse को रोका जा सके।
नई FIU Guidelines के तहत सभी क्रिप्टो एक्सचेंजों को Suspicious Transaction Reports (STRs) दाखिल करना, ग्राहकों का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखना और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी करना अनिवार्य है।
FIU-IND के साथ Registration के बिना भारत से जुड़े VDA कारोबार संचालित करना PMLA के तहत गंभीर उल्लंघन माना जा सकता है। इसके अलावा प्रत्येक प्लेटफॉर्म को एक Principal Officer और Designated Director नियुक्त करना होगा, जो AML Compliance के लिए सीधे तौर पर जवाबदेह होंगे।
एक्सचेंजों को कस्टमर और ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड कम से कम पांच वर्षों तक सुरक्षित रखने होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि, इन FIU Guidelines से क्रिप्टो इंडस्ट्री में ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी, लेकिन साथ ही यूजर्स के लिए Compliance सख्त हो जाएगा।
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FIU-IND की AML एवं CFT Guidelines 2026 भारत के क्रिप्टो सेक्टर को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा हैं। इन FIU Guidelines का असर सिर्फ एक्सचेंजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हर क्रिप्टो इन्वेस्टर्स और ट्रेडर पर भी पड़ेगा। ऐसे में यूजर्स को अपने KYC Document अपडेट रखने, PAN Description सही रखने और एक्सचेंज द्वारा भेजे गए किसी भी compliance notification को गंभीरता से लेने की जरूरत है। आने वाले समय में भारतीय क्रिप्टो मार्केट में नियमों का पालन करना उतना ही महत्वपूर्ण होगा, जितना सही निवेश निर्णय लेना।
Disclaimer: यह ब्लॉग आर्टिकल केवल सूचना और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए लिखा गया है। इसे किसी भी प्रकार की वित्तीय, निवेश या कानूनी सलाह न समझें।
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