क्रिप्टोकरेंसी और ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी के विकास ने ट्रेडिशनल फाइनेंशियल स्ट्रक्चर को न केवल चुनौती दी है, बल्कि एक नई तरह की डिजिटल इकोनॉमी को भी जन्म दिया है। इस इकोनॉमी की जड़ें डिजिटल एसेट्स में हैं, इनमें से कुछ एसेट्स ऐसे होते हैं, जिनमें हर एसेट की वैल्यू एक जैसी रहती है, जैसे Bitcoin इन्हें Fungible Token कहा जाता है जबकि कुछ डिजिटल एसेट्स ऐसे होते हैं जो अपने आप में यूनिक होते हैं, जैसे किसी आर्ट की NFT, जिन्हें Non-Fungible Token कहा जाता है।
टोकन और डिजिटल एसेट की इन्हीं बेसिक कैरेक्टरिस्टिक को समझने के लिए एक बेहद ज़रूरी कांसेप्ट सामने आता है, जिसे Fungibility कहते हैं। इस ब्लॉग में हम जानेंगे Fungibility क्या होती है और Fungible vs Non-Fungible Tokens के बीच क्या अंतर होता है, आसान भाषा में।
Fungibility, किसी एसेट की ऐसी कैपेबिलिटी को दर्शाता है जो उसे अन्य उसी के समान दुसरे एसेट्स के साथ बिना किसी वैल्यू या पहचान में अंतर के एक्सचेंज योग्य बनाती है। इसके विपरीत, Non-Fungibility उस स्थिति को दर्शाता है जहाँ हर यूनिट की पहचान अलग होती है और उसे किसी अन्य यूनिट से बदला नहीं जा सकता।
फ़िएट करेंसी के कांसेप्ट को डिजिटल वर्ल्ड में Fungible Tokens के रूप में सामने लाया गया है। लेकिन अगर आप एक डिजिटल आर्टवर्क किसी को भेजते हैं जो सिर्फ एक ही बार बनाया गया हो, तो वह किसी और आर्ट से बदला नहीं जा सकता, तो इसे Non-Fungible Token (NFT) कहा जाता है।
ब्लॉकचेन और क्रिप्टोकरेंसी के इस बढ़ते दौर में Fungibility की समझ बेहद जरूरी है, खासकर तब जब आप Bitcoin, Ethereum, या NFT जैसे डिजिटल एसेट्स में दिलचस्पी रखते हैं। इन्हें समझने के लिए सबसे पहले यह समझना जरुरी है कि Token क्या होता है?
क्रिप्टो और ब्लॉकचेन की दुनिया में Token वह यूनिट होती है, जो किसी वैल्यू, राईट या एसेट का रिप्रेजेंट करता है। ये डिजिटल होते हैं और आमतौर पर किसी ब्लॉकचेन पर डेप्लोय किए गए स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स के ज़रिए एक्सिक्यूट होते हैं।
टोकन कई तरह के हो सकते हैं:
अब सवाल ये उठता है कि Fungible vs Non-Fungible Token का क्या मतलब होता है?
Fungible Tokens का मतलब होता है, ऐसे टोकन जिनकी हर यूनिट की वैल्यू और आइडेंटिटी समान होती है और जिन्हें आपस में बिना किसी अंतर के बदला जा सकता है।
उदाहरण के लिए 1 BTC की कीमत दुसरे BTC के समान ही होगी, चाहे वजह किसी के भी पास रहे, यह फ़िएट करेंसी की तरह ही होते है, जैसे दो 100 रुपए के किसी भी नोट की कीमत हर परिस्थिति में एक ही जैसी रहती है, उसी तरह Fungible Token भी काम करते हैं।
इन टोकन का इस्तेमाल पेमेंट्स, ट्रांज़ैक्शंस या ट्रेडिंग के लिए किया जाता है। ये स्केलेबल और डीवीसीबल होते हैं यानी आप इन्हें छोटे हिस्सों में भी बांटा जा सकता है, जैसे BTC की सबसे छोटी यूनिट Satoshi होती है और हर Satoshi की वैल्यू 0.00000001 BTC होती है।
इस तरह से Fungible Token की पहचान मायने नहीं रखती, केवल वैल्यू मायने रखती है। अब आइये जानते है की NFT या Non-Fungible Token क्या होते हैं?
Non-Fungible Tokens (NFTs) का मतलब है, ऐसे टोकन जो एक्सक्लूसिव और यूनिक होते हैं। इन्हें आपस में बदला नहीं जा सकता, क्योंकि हर NFT की एक खास पहचान होती है।
उदाहरण के लिए एक डिजिटल आर्टवर्क जिसे केवल एक बार NFT के रूप में मिंट किया गया हो, यह हर स्थिति में किसी दुसरे NFT से अलग होगा।
NFTs को अक्सर Ethereum जैसे नेटवर्क पर ERC-721 या ERC-1155 स्टैंडर्ड के ज़रिए डिप्लॉय किया जाता है। इनमें हर टोकन का Metadata अलग होता है, जो उन्हें अलग पहचान देता है और यूनिक बनाता है।
अब जब हम समझ चुके हैं कि Fungible और Non-Fungible Tokens क्या हैं, तो आइये जानते हैं टोकन के इन दो प्रकारों में मूलभूत अंतर क्या होता है:
| विशेषता | फंज़िबल टोकन | नॉन-फंज़िबल टोकन (NFT) |
| पहचान | एक जैसी और बदली नहीं जा सकती | यूनिक और इंडिविजुअल आइडेंटिटी |
| वैल्यू | सभी टोकन की वैल्यू समान | हर टोकन की वैल्यू अलग हो सकती है |
| उपयोग | करेंसी, ट्रेडिंग, पेमेंट | डिजिटल आर्ट, म्यूजिक, वर्चुअल एसेट्स |
| स्टैंडर्ड | ERC-20, BEP-20 | ERC-721, ERC-1155 |
| एक्साम्प्ल | Bitcoin, Ethereum, USDT | CryptoPunks, Bored Ape Yacht Club |
Fungible vs Non-Fungible Tokens के बारे में तो हम जान चुके लेकिन क्या इन दोनों ही टोकन में कुछ समानताएं भी हैं, जी हाँ, क्योंकि इन दोनों प्रकार के टोकन को बनाने की बेसिक टेक्नोलॉजी एक समान हैं। आइये इसके बारे में जानते हैं।
अपने करैक्टर और उपयोग में अलग होने के बावजूद Fungible और Non-Fungible दोनों प्रकार के टोकन Blockchain Technology पर आधारित होते हैं और इन दोनों को स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स के ज़रिए एक्सिक्यूट और वेरिफ़ाई किया जाता है। मतलब इन दोनों की नींव में एक ही प्रकार की टेक्नोलॉजी है, तब फिर ऐसे कौन-से टेक्निकल आस्पेक्ट्स हैं, जो इनके गुणों में इतना अंतर पैदा करते हैं, तो इसका उत्तर है Token Standards, इसका मतलब होता है ऐसे रूल्स जो यह तय करते हैं की किसी टोकन का नेचर कैसा होगा, वह कैसे ट्रान्सफर होगा, कैसे पहचाना जाएगा और थर्ड पार्टी dApps उसे कैसे काम में ले सकेंगे।
Fungible Token सामान्यतः ERC-20 स्टैंडर्ड पर बनाए जाते हैं, जबकि Non Fungible Tokens के लिए ERC-721 और ERC-1155 स्टैंडर्ड्स का उपयोग किया जाता है।
ब्लॉकचेन इस पूरी प्रोसेस को ट्रस्टलेस, वेरीफाई करने योग्य और टैम्पर प्रूफ बनाता है, यही वजह है कि लोग डिजिटल एसेट्स में Ownership और Provenance को लेकर अब ज्यादा गंभीर हो रहे हैं।
जब हम Fungible vs Non-Fungible Tokens कहते हैं तो इसके बारे में इन्वेस्टमेंट पॉइंट ऑफ़ व्यू से भी जानना जरुरी है। अब अगर आप इन्वेस्टर हैं तो आपके मन में यह सवाल जरुर होगा की इन दोनों प्रकार के टोकन में से किनमें इन्वेस्ट करना आपके लिए सही होगा? आइये जानते हैं,
यह सवाल पूरी तरह आपके लक्ष्य पर निर्भर करता है। यदि आपका उद्देश्य किसी ऐसे टोकन में इन्वेस्ट करने का है, जिन्हें आप आसानी से ट्रेड कर सकें और उनका उपयोग पेमेंट में भी कर पाएं तो Fungible Token जैसे Bitcoin, Ethereum, या Tether बेहतर विकल्प हैं। इनकी वैल्यू पूरी तरह से मार्केट में इनकी डिमांड और सप्लाई पर डिपेंड करती है।
दूसरी और अगर आपके इन्वेस्टमेंट का उद्देश्य लॉन्गटर्म है तो आप किसी डिजिटल कलेक्टिबल्स, आर्ट या एक्सक्लूसिव आइटम्स में इन्वेस्ट करना चाहते हैं, तो NFT आपको एक अच्छा अवसर प्रदान करते हैं। इनकी वैल्यू सामान्यतः उस आर्ट की क्वालिटी और रेयरिटी पर डिपेंड करता है।
NFTs में हाई पॉसिबिलिटी होती है लेकिन जोखिम भी उतना ही अधिक होता है, क्योंकि इनकी वैल्यू अक्सर मार्केट ट्रेंड और क्रिएटर की प्रतिष्ठा पर निर्भर करती है।
जब भी आप क्रिप्टो ट्रेडिंग की दुनिया में कदम रखें, तो सबसे पहले यह जानना जरुरी है कि:
इन सवालों के जवाब आपको ये तय करने में मदद करेंगे कि आपके लिए Fungible Token उपयुक्त हैं या Non-Fungible Token।
Fungible और Non-Fungible Token दोनों ही डिजिटल इकॉनोमी के इंटीग्रल पार्ट है, जिनके अपने-अपने उपयोग, उद्देश्य और वैल्यू सिस्टम हैं। जैसे-जैसे Web3, मेटावर्स और डिजिटल एसेट्स की दुनिया विकसित हो रही है, इन दोनों टोकन की भूमिका और भी स्पष्ट और व्यापक होती जा रही है। हालांकि Fungible vs Non-Fungible Token कहा जाना इन दोनों को एक दुसरे का विरोधी बताता है, लेकिन अब हम जान चुके हैं की इन दोनों की Web3 इकोसिस्टम में अपनी पहचान और यूटिलिटी है और इन Web3 के भविष्य में यह दोनों प्रकार के टोकन महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हैं।
अगर आप एक इवेस्टर, डेवलपर या डिजिटल क्रिएटर हैं, तो इन दोनों के बीच का यह अंतर समझना न केवल ज़रूरी है बल्कि अनिवार्य है।
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