मुख्य सामग्री पर जाएँ
Crypto News
शेयर करें:

HPZ Token Scam, यह कैसे चला और इससे क्या सीखा जा सकता है

Hindi News Writer
प्रकाशित
HPZ Token Scam के ढाँचे और जाँच की स्थिति का चार्ट
HPZ Token Scam के ढाँचे और जाँच की स्थिति का चार्ट

भारत में क्रिप्टो के नाम पर हुई सबसे बड़ी जाँचों में से एक अभी भी चल रही है, और उसका ब्यौरा सार्वजनिक रिकॉर्ड में दर्ज है। HPZ Token Scam इसलिए पढ़ने लायक है कि इसमें वह पूरा ढाँचा दिखता है जो बाद में कई और मामलों में दोहराया गया।

यह आर्टिकल केवल घटना नहीं बताता, बल्कि यह दिखाता है कि इस तरह के प्रस्ताव को पहले दिन ही कैसे पकड़ा जा सकता था।

HPZ Token Scam, मामला क्या था

यह एक ऐप आधारित योजना थी जिसमें लोगों से कहा गया कि वे बिटकॉइन माइनिंग मशीनों में निवेश कर रहे हैं और उस पर उन्हें नियमित कमाई मिलेगी। पैसा UPI और विभिन्न भुगतान माध्यमों से लिया जाता था।

जाँच की शुरुआत अक्टूबर 2021 में नागालैंड के कोहिमा साइबर क्राइम थाने में दर्ज एक प्राथमिकी से हुई। बाद में गुवाहाटी और दिल्ली में भी संबंधित मामले दर्ज हुए, और अप्रैल 2022 में प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जाँच शुरू की।

वादा किया क्या गया था

यहाँ वह विवरण है जो पूरे मामले का सार है। जाँच में दर्ज है कि सत्तावन हज़ार रुपये के निवेश पर तीन महीने तक चार हज़ार रुपये प्रतिदिन देने का वादा किया गया था।

इस वादे का गणित

तीन महीने यानी लगभग नब्बे दिन। चार हज़ार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से यह लगभग तीन लाख साठ हज़ार रुपये बनता है, वह भी सत्तावन हज़ार के निवेश पर। यानी तीन महीने में मूल राशि का लगभग छह गुना। यह गणना किसी विशेषज्ञ की राय नहीं माँगती, केवल एक गुणा माँगती है, और वही गुणा उस दिन कर लिया जाता तो आगे कुछ पूछने की ज़रूरत ही नहीं थी। माइनिंग की असली अर्थव्यवस्था कैसी होती है, यह इस पेज पर विस्तार से दिया गया है।

जाँच की अब तक की स्थिति

चरणतारीखकार्रवाईराशि
पहली प्राथमिकीअक्टूबर 2021कोहिमा साइबर थाना
जाँच शुरूअप्रैल 2022मनी लॉन्ड्रिंग के तहत
संपत्ति कुर्कीनवंबर 2024भारत और दुबई मेंलगभग 106 करोड़
खाते फ्रीज़मार्च 2026बैंक खाते व merchant IDलगभग 500 करोड़
दूसरी पूरक शिकायतअप्रैल 2026विशेष अदालत, दीमापुरकुल कुर्की 662 करोड़ से अधिक

जाँच में अपराध से अर्जित कुल राशि लगभग बाईस सौ करोड़ रुपये आँकी गई है, और अब तक उसमें से छह सौ बासठ करोड़ से अधिक कुर्क या फ्रीज़ किया जा चुका है।

पैसा कहाँ और कैसे गया

जाँच के अनुसार रकम को छिपाने के लिए एक बहुस्तरीय ढाँचा बनाया गया था। इसमें दो सौ अस्सी से अधिक कागज़ी कंपनियाँ शामिल थीं, जो बीस राज्यों में फैली हुई थीं।

इसके अलावा बड़ी संख्या में ऐसे बैंक खाते इस्तेमाल हुए जो किसी और के नाम पर थे, कागज़ी निदेशक बनाए गए, और अंत में रकम देश से बाहर भेजी गई। इसी वजह से वसूली इतनी धीमी और कठिन है, क्योंकि हर परत को अलग से खोलना पड़ता है।

भुगतान माध्यमों की भूमिका

यह हिस्सा आम पाठक के लिए सबसे उपयोगी है। जाँच में यह सामने आया कि रकम को इधर-उधर करने के लिए भुगतान सेवाओं का उपयोग किया गया, और 2022 की एक कार्रवाई में विभिन्न भुगतान कंपनियों के पास पड़ी लगभग साढ़े छियालीस करोड़ रुपये की राशि फ्रीज़ की गई।

बाद की जाँच में एक ऐसी कंपनी भी सामने आई जो भुगतान समुच्चयकर्ता का काम कर रही थी और जिसके पास इसके लिए आवश्यक नियामकीय अनुमति नहीं थी। इसका सीधा सबक यह है कि पैसा UPI से जाने का मतलब यह नहीं होता कि सामने वाला अधिकृत है, क्योंकि UPI केवल रास्ता है, प्रमाण नहीं।

इस ढाँचे की पहचान कैसे हो

चार संकेत इस मामले में मौजूद थे और लगभग हर ऐसे मामले में मिलते हैं। पहला, तय दैनिक कमाई का वादा, जो असली माइनिंग या किसी भी बाज़ार आधारित गतिविधि में संभव नहीं है।

दूसरा, शुरुआत में कुछ भुगतान वास्तव में किया जाना, ताकि भरोसा बने और लोग और बड़ी राशि लगाएँ। तीसरा, ऐप के अलावा कोई सत्यापन-योग्य पहचान न होना, न कंपनी का पता, न जवाबदेह व्यक्ति। चौथा, पैसा किसी व्यक्तिगत या असंबंधित खाते में जाना। इनमें से पहला अकेला ही पर्याप्त है, और उसकी जाँच केवल एक गुणा से हो जाती है। इसी ढाँचे का मनोवैज्ञानिक पक्ष इस विश्लेषण में खोला गया है।

शुरुआती भुगतान का असली उद्देश्य

जाँच में यह भी दर्ज है कि निवेशकों को शुरुआत में कुछ रकम वास्तव में वापस दी जाती थी, और बाकी दूसरी जगह भेज दी जाती थी। यह कोई चूक नहीं थी, यह ढाँचे का हिस्सा था।

उस छोटी वापसी की लागत उन्हें बहुत कम पड़ती है, पर उससे मिलने वाली चीज़ बहुत बड़ी होती है, आपका अपना अनुभव। उसके बाद जो भी चेतावनी आपके सामने आएगी वह आपके निजी अनुभव से टकराएगी, और अक्सर हार जाएगी। इसीलिए किसी मंच से पहली छोटी निकासी मिल जाना उसके भरोसेमंद होने का प्रमाण नहीं है, बल्कि इस ढाँचे में वह एक अपेक्षित चरण है।

इससे क्या सीखा जा सकता है

सबसे बड़ा सबक समय का है। यह मामला 2021 में दर्ज हुआ था और 2026 में भी जाँच जारी है। यानी शिकायत दर्ज होने से लेकर पैसा वापस आने तक का रास्ता वर्षों लंबा होता है, और उसमें भी पूरी वसूली की कोई गारंटी नहीं।

दूसरा सबक यह कि कार्रवाई हो रही है और गंभीरता से हो रही है, इसलिए शिकायत दर्ज कराना बेकार नहीं है। कुर्की और फ्रीज़ की गई राशि उन्हीं शिकायतों के आधार पर बनी प्रक्रिया से आती है। शिकायत का पूरा क्रम इस कार्य-योजना पर, भारत में चल रहे अन्य तरीके इस पेज पर, मुफ्त रिवॉर्ड वाले जाल यहाँ, नियामकीय स्थिति इस पेज पर और समग्र परिदृश्य India हब पर उपलब्ध है।

माइनिंग वाला दावा क्यों चुना जाता है

इस मामले में जो कहानी बताई गई थी वह संयोग से नहीं चुनी गई। माइनिंग एक ऐसा विषय है जिसके बारे में लोगों ने सुना होता है पर जिसका तकनीकी विवरण अधिकांश को नहीं पता होता।

यही अंतर उसे उपयोगी बनाता है। एक ऐसा दावा जो पूरी तरह अपरिचित हो, वह संदेह पैदा करता है, और जो पूरी तरह परिचित हो, उसे लोग खुद जाँच लेते हैं। बीच वाला दावा सबसे असरदार होता है, जहाँ नाम जाना-पहचाना हो पर तंत्र नहीं। इसीलिए ऐसे प्रस्तावों में अक्सर कोई तकनीकी शब्द केंद्र में रखा जाता है, और सही जवाब यही है कि उस शब्द से मत उलझिए, केवल वादा की गई संख्या को गुणा कर लीजिए।

Glossary

Proceeds of Crime
अपराध से अर्जित राशि, जिसे जाँच एजेंसी कुर्क या फ्रीज़ कर सकती है।
Shell Company
कागज़ी कंपनी, जिसका कोई वास्तविक कारोबार नहीं होता और जो केवल रकम घुमाने के लिए बनाई जाती है।
Mule Account
किसी और के नाम पर खुला खाता, जिसका उपयोग रकम गुज़ारने के लिए किया जाता है।
Layering
रकम को कई परतों से गुज़ारना ताकि उसका स्रोत छिप जाए।
Payment Aggregator
भुगतान इकट्ठा करने वाली सेवा, जिसके लिए नियामकीय अनुमति आवश्यक होती है।

अगर आप या कोई परिचित इसमें शामिल थे

ऐसे बड़े मामलों में एक व्यावहारिक सवाल बार-बार आता है, क्या अब कुछ हो सकता है। इसका जवाब पूरी तरह निराशाजनक नहीं है, पर यथार्थवादी होना ज़रूरी है।

चूँकि यह मामला औपचारिक जाँच में है और अदालत में विचाराधीन है, इसलिए यहाँ प्रक्रिया मौजूद है। जिन लोगों ने शिकायत दर्ज कराई है, उनका दावा उसी प्रक्रिया का हिस्सा बनता है, और कुर्क की गई संपत्ति का वितरण अंततः न्यायालय के आदेश से तय होता है। इसलिए अगर आपने अब तक शिकायत दर्ज नहीं कराई है तो वह पहला काम है, भले ही घटना पुरानी हो। और दूसरा काम यह कि अपने सारे रिकॉर्ड, भुगतान विवरण और ऐप से जुड़ी जानकारी सुरक्षित रखिए, क्योंकि ऐसे मामलों में दावे की पुष्टि उन्हीं दस्तावेज़ों से होती है।

निष्कर्ष

इस पूरे मामले की सबसे उपयोगी बात एक पंक्ति में है। सत्तावन हज़ार पर तीन महीने तक चार हज़ार रोज़ का वादा किया गया था, और उस एक वाक्य को एक गुणा से परखा जा सकता था। इसलिए HPZ Token Scam से निकलने वाला सबक कोई नई सावधानी नहीं, बल्कि वही पुरानी आदत है, किसी भी तय दैनिक रिटर्न के वादे को कैलकुलेटर पर ले जाइए, वहीं जवाब मिल जाएगा।

अस्वीकरण

यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जाँच संबंधी सूचनाओं पर आधारित है। मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है और आरोप सिद्ध होने तक सभी पक्ष निर्दोष माने जाते हैं। यह लेख किसी व्यक्ति या इकाई पर निर्णय नहीं देता।

लेखक परिचय
Shubham Sharma Hindi News Writer
Shubham Sharma पिछले 4 वर्षों से Web3, ब्लॉकचेन, NFT और क्रिप्टोकरेंसी पर गहराई से लेखन कर रहे हैं। वे मार्केट ट्रेंड्स को जल्दी पहचानने, तकनीकी अपडेट्स को सरल भाषा में समझाने और भारतीय क्रिप्टो निवेशकों को विश्वसनीय जानकारी प्रदान करने के लिए जाने जाते हैं। Shubham ने कई प्रमुख क्रिप्टो मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स के लिए योगदान दिया है और उनका उद्देश्य पाठकों को तेजी से बदलती Web3 दुनिया में सटीक, निष्पक्ष और इनसाइटफुल कंटेंट देना है।
Leave a comment
FAQ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले सवालों के जवाब यहाँ पाएँ और समझें कि सब कुछ कैसे काम करता है।

यह एक ऐप आधारित योजना थी जिसमें लोगों से कहा गया कि वे बिटकॉइन माइनिंग मशीनों में निवेश कर रहे हैं और उस पर नियमित कमाई मिलेगी। पैसा UPI और अन्य भुगतान माध्यमों से लिया जाता था।

अक्टूबर 2021 में नागालैंड के कोहिमा साइबर क्राइम थाने में दर्ज प्राथमिकी से। बाद में गुवाहाटी और दिल्ली में भी मामले दर्ज हुए और अप्रैल 2022 में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जाँच शुरू हुई।

जाँच में दर्ज है कि सत्तावन हज़ार रुपये के निवेश पर तीन महीने तक चार हज़ार रुपये प्रतिदिन देने का वादा किया गया था।

लगभग नब्बे दिन में चार हज़ार रोज़ के हिसाब से करीब तीन लाख साठ हज़ार रुपये, वह भी सत्तावन हज़ार के निवेश पर। यानी तीन महीने में मूल राशि का लगभग छह गुना।

हाँ। इस गणना में किसी विशेषज्ञ की राय नहीं चाहिए, केवल एक गुणा चाहिए, और वही गुणा उस दिन कर लिया जाता तो आगे कुछ पूछने की ज़रूरत नहीं थी।

जाँच में अपराध से अर्जित कुल राशि लगभग बाईस सौ करोड़ रुपये आँकी गई है।

नवंबर 2024 में भारत और दुबई में लगभग 106 करोड़ की संपत्ति कुर्क, मार्च 2026 में लगभग 500 करोड़ के खाते फ्रीज़, और अप्रैल 2026 में दूसरी पूरक शिकायत दाखिल। कुल कुर्की छह सौ बासठ करोड़ से अधिक।

दो सौ अस्सी से अधिक कागज़ी कंपनियों के ज़रिए, जो बीस राज्यों में फैली थीं, साथ ही किसी और के नाम के खातों और कागज़ी निदेशकों का उपयोग करके, और अंत में रकम देश से बाहर भेजी गई।

रकम घुमाने के लिए भुगतान सेवाओं का उपयोग हुआ। 2022 की एक कार्रवाई में विभिन्न भुगतान कंपनियों के पास पड़ी लगभग साढ़े छियालीस करोड़ रुपये की राशि फ्रीज़ की गई।

नहीं। UPI केवल रास्ता है, प्रमाण नहीं। जाँच में एक ऐसी कंपनी भी सामने आई जो भुगतान समुच्चयकर्ता का काम कर रही थी पर उसके पास आवश्यक नियामकीय अनुमति नहीं थी।

तय दैनिक कमाई का वादा, शुरुआत में कुछ भुगतान वास्तव में किया जाना, ऐप के अलावा कोई सत्यापन-योग्य पहचान न होना, और पैसा किसी व्यक्तिगत या असंबंधित खाते में जाना।

पहला, यानी तय दैनिक कमाई का वादा। यह असली माइनिंग या किसी भी बाज़ार आधारित गतिविधि में संभव नहीं है, और उसकी जाँच केवल एक गुणा से हो जाती है।

ताकि भरोसा बने और लोग और बड़ी राशि लगाएँ। यह लागत नहीं, निवेश माना जाता है, क्योंकि उसके बाद व्यक्ति का अपना अनुभव उसके पक्ष में काम करने लगता है।

क्योंकि रकम कई परतों से गुज़ारी गई थी और हर परत को अलग से खोलना पड़ता है। यह मामला 2021 में दर्ज हुआ और 2026 में भी जाँच जारी है।

हाँ। कुर्की और फ्रीज़ की गई राशि उन्हीं शिकायतों के आधार पर बनी प्रक्रिया से आती है। कार्रवाई हो रही है, बस उसका रास्ता लंबा है।