झारखंड से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने कई सवाल खड़े हो गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार Maxizone Touch Pvt Ltd घोटाला देश के बड़े पोंजी/एमएलएम स्कैम्स में शामिल हो चुका है। इस मामले में कंपनी के निदेशक Chandrabhushan Singh और उनकी पत्नी Priyanka Singh पर आरोप है कि उन्होंने हजारों निवेशकों को शेयर मार्केट और क्रिप्टोकरेंसी में निवेश का झांसा देकर सैकड़ों करोड़ रुपये की ठगी की। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और झारखंड पुलिस की जांच में इस घोटाले की परतें खुलती जा रही हैं। हाल ही में यह भी सामने आया है कि इस दौरान भी आरोपियों ने अपने रिश्तेदारों तक को नहीं छोड़ा और उन्हें भी Crypto Investment के नाम पर ठगा।
वहीं देखा जाए तो भारत में Crypto का गलत उपयोग लगातार बढ़ रहा है। पैसे कमाने के लालच में लोग यहां तक कि अपने रिश्तेदारों को भी नहीं छोड़ रहे हैं। 100x प्रॉफिट का झांसा लालच निवेशकों को बेवकूफ बनाकर ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। हाल ही में कुछ रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया कि Harish Ali ने सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी नामों से ग्रुप चलाकर युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रभावित करने की कोशिश की, जिसमें Crypto का गलत इस्तेमाल भी किया गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार,Chandrabhushan Singh और Priyanka Singh ने एक मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) बेस्ड स्कीम चलाई, जिसमें इन्वेस्टर्स को 15% तक मासिक रिटर्न का लालच दिया गया। शुरुआत में आरोपियों ने कुछ लोगों को पेमेंट देकर भरोसा जीता, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोगों ने Crypto में इन्वेस्टमेंट किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस घोटाले की कुल राशि 300 करोड़ से लेकर 500 करोड़ रुपये से अधिक तक आंकी गई है, जबकि प्रभावित Crypto इन्वेस्टर्स की संख्या हज़ारों में है।
इस दौरान Crypto इन्वेस्टर्स का पैसा 20 से अधिक बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। जब इन्वेस्टर्स ने रिटर्न की मांग शुरू की, तो पेमेंट बंद हो गया और आरोपी फरार हो गए। सितंबर 2025 में झारखंड पुलिस ने दोनों को गोमो रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया। इसके बाद दिसंबर 2025 में ED ने मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें अपनी हिरासत में लिया।
ED की छापेमारी में Cryptocurrency (USDT), नकदी, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और कई गलत तरीके से प्राप्त किये गए संपत्तियों के दस्तावेज बरामद हुए। जांच में यह भी सामने आया कि Chandrabhushan Singh फरारी के दौरान अपना नाम बदलकर नोएडा में रह रहा था। फरवरी 2026 में ED ने Crypto मामले में चार्जशीट भी दाखिल है, जिससे केस और मजबूत हुआ है।
Crypto से जुड़े इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि, फरार रहने के दौरान भी Chandrabhushan Singh ने ठगी का सिलसिला जारी रखा। जांच में सामने आया कि उसने अपनी ही चचेरी सास सहित करीबी लोगों को Crypto में इन्वेस्टमेंट के नाम पर फंसाया। एक मामले में उसने अपनी चचेरी सास को लगभग 9,000 USDT इन्वेस्टमेंट करने के लिए राजी किया। इसके बदले हर महीने 20% मुनाफे देने का वादा किया गया। भरोसा दिलाने के लिए आरोपी ने 15 महीनों के लिए पोस्ट-डेटेड चेक भी दिए। ED को इस Crypto इन्वेस्टमेंट से जुड़ा एक लिखित समझौता भी मिला है, जिससे इस धोखाधड़ी की पुष्टि होती है।
इसी तरह एक अन्य महिला से भी समान शर्तों पर इन्वेस्टमेंट कराया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी ने अपने करीबी रिश्तों का फायदा उठाकर उन्हें भी जाल में फंसाया। इसके अलावा, उसके परिजनों के पास से Crypto App और डिजिटल एसेट्स भी जब्त किए गए हैं। यह मामला दर्शाता है कि किस तरह Ponzi Scheme चलाने वाले आरोपी भरोसे और लालच का इस्तेमाल से लोगों को ठगते हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि Crypto में इन्वेस्टमेंट करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें और असामान्य रूप से अधिक रिटर्न देने वाले ऑफर्स से सतर्क रहें।
एक Crypto राइटर और फिल्ड रिसर्चर के तौर पर मेरा मानना है कि, Maxizone घोटाला यह दर्शाता है कि हाई रिटर्न का लालच किस तरह से लोगों को बड़े वित्तीय जाल में फंसा सकता है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई से सच्चाई सामने आ रही है, लेकिन इन्वेस्टर्स को सतर्क रहना जरूरी है। बिना सत्यापन के किसी भी स्कीम में निवेश करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल Informational Purpose के लिए लिखा गया है और इसे Financial Advice नहीं माना जाना चाहिए। क्रिप्टोकरेंसी अत्यधिक वोलैटाइल और जोखिमपूर्ण एसेट्स होते हैं। इन्वेस्टमेंट करने से पहले खुद रिसर्च करें।
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