क्रिप्टो ट्रेडिंग में Spot और Futures दो अलग-अलग तरीके होते हैं। Spot ट्रेडिंग में आप असली क्रिप्टो कॉइन खरीदते हैं और उसके मालिक बन जाते हैं, जबकि Futures ट्रेडिंग में आप कॉइन नहीं खरीदते बल्कि उसकी कीमत ऊपर-नीचे होने पर ट्रेड करते हैं। इसलिए दोनों का तरीका, जोखिम और मुनाफा कमाने का तरीका भी अलग होता है। आइए आसान तरीके से समझते हैं कि इन दोनों में क्या अंतर है।
Spot Trading vs Futures Trading: 12 प्रमुख अंतर
भारत में Crytpo Trading अब पूरी तरह सरकार और FIU (Financial Intelligence Unit) की नजर में है। वहीं बड़े विदेशी एक्सचेंज जैसे Binance पर ट्रेड करते समय कुछ मामलों में Foreign Exchange Management Act के नियम लागू हो सकते हैं। ऐसे में आपको इन नियमों का ख़ास ख्याल रखना होगा।
30% Flat Tax: Spot हो या Futures, किसी भी प्रॉफिट पर आपको 30% + 4% Cess टैक्स देना होगा।
No Loss Set-off: यह सबसे बड़ा झटका है। अगर आपको Spot में ₹10,000 का फायदा और Futures में ₹10,000 का नुकसान हुआ, तो आपको फायदे वाले ₹10,000 पर पूरा टैक्स देना होगा। नुकसान को फायदे से घटा (Minus) नहीं सकते।
1% TDS: भारतीय एक्सचेंज पर हर 'Sell' ट्रांजैक्शन पर 1% TDS कटता है। कुछ मामलों में Futures ट्रेडिंग में TDS का calculation एक्सचेंज की settlement policy के आधार पर किया जा सकता है।
Mandatory KYC & Geotagging: 2026 के नए FIU नियमों के अनुसार, अब अकाउंट खोलते समय Live Selfie और Geo-tagging (लोकेशन शेयरिंग) अनिवार्य है।
FEMA Regulations: अगर आप Binance जैसे विदेशी एक्सचेंज पर Futures ट्रेड कर रहे हैं, तो बड़े ट्रांजैक्शंस पर FEMA (Foreign Exchange Management Act) के नियम लागू हो सकते हैं। ₹7 लाख से ऊपर के रेमिटेंस पर TCS भी लग सकता है।
Schedule VDA: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते समय 'Schedule VDA' में हर एक ट्रेड की जानकारी देना अब कानूनी रूप से अनिवार्य है।
Spot: अगर आप क्रिप्टो में नए हैं, सुरक्षित ट्रेडिंग के साथ-साथ कॉइन्स को सालों तक संभाल कर रखना चाहते हैं।
Futures: अगर आप प्रोफेशनल ट्रेडर हैं, मार्केट गिरने पर भी कमाना चाहते हैं और आपके पास रिस्क लेने के लिए एक्स्ट्रा कैपिटल है।
कुल मिलाकर, Spot और Futures दोनों ही क्रिप्टो ट्रेडिंग के अलग-अलग तरीके हैं और इनका उपयोग आपके अनुभव, लक्ष्य और जोखिम लेने की क्षमता पर निर्भर करता है। स्पॉट Trading सुरक्षित मानी जाती है क्योंकि इसमें आप असली कॉइन खरीदते हैं और उसे लंबे समय तक होल्ड कर सकते हैं, जबकि Futures Trading में लेवरेज और लिक्विडेशन का जोखिम ज्यादा होता है।
भारत में 30% टैक्स, 1% Crypto TDS और FIU जैसे नियमों के कारण किसी भी ट्रेड से पहले सही जानकारी और जोखिम को समझना बहुत जरूरी है। इसलिए नए निवेशकों के लिए Spot से शुरुआत करना बेहतर माना जाता है, जबकि Futures ट्रेडिंग केवल अनुभवी ट्रेडर्स के लिए ज्यादा उपयुक्त होती है।
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