Crypto TDS

Section 194s में 1% Crypto TDS कब कटता है? 12 आसान उदाहरण

Bitcoin और Crypto पर 1% TDS कैसे लगता है? जानें पूरी जानकारी

अगर आप Bitcoin, Ethereum या किसी में भी ट्रेड करते हैं, तो सिर्फ प्रॉफिट और लॉस समझना ही काफी नहीं होता, बल्कि Crypto Tax India नियमों को समझना भी उतना ही ज़रूरी है। भारत में 1 जुलाई 2022 से Virtual Digital Assets (VDA) पर सेक्शन 194S के तहत 1% Crypto TDS लागू किया गया है, जिसका मकसद क्रिप्टो ट्रांजैक्शन को ट्रैक करना और टैक्स सिस्टम में ट्रांसपेरेंसी लाना है।

हालांकि कई निवेशकों को अब भी यह स्पष्ट नहीं होता कि 194S के अधीन Crypto TDS वास्तव में कब कटता है, किस पर लागू होता है और किन मामलों में नहीं। इसलिए आगे हम इसके नियम और 12 रियल लाइफ उदाहरणों के जरिए इसे सरल तरीके से समझेंगे।

सेक्शन 194S के तहत 1% Crypto TDS कब कटता है?

भारत में VDA tax के नियम के अनुसार जब कोई व्यक्ति किसी Virtual Digital Asset (जैसे Bitcoin, Ethereum या NFT) को ट्रांसफर करता है और बदले में भुगतान प्राप्त करता है, तब 1% Crypto TDS काटा जाता है।

ध्यान देने वाली महत्वपूर्ण बातें:

  • ट्रांजेक्शन वैल्यू पर: यह प्रॉफिट पर नहीं बल्कि पूरी ट्रांजेक्शन वैल्यू पर कटता है। उदाहरण: अगर ₹1,00,000 का Bitcoin बेचा गया, तो ₹1,000 टीडीएस कटेगा, चाहे प्रॉफिट हुआ हो या लॉस।

  • थ्रेशोल्ड लिमिट लागू होती है

    • Specified Person (जैसे Salary-based Individual) → ₹50,000 से ऊपर

    • अन्य व्यक्ति (कंपनी, फर्म आदि) → ₹10,000 से ऊपर

  • थ्रेशोल्ड पार होने पर सभी ट्रांजेक्शन कवर होते हैं, सिर्फ अतिरिक्त राशि पर नहीं बल्कि पूरे ट्रांजेक्शन वैल्यू पर लागू हो जाता है।

  • एक्सचेंज पर ट्रेडिंग: WazirX या CoinSwitch जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर ट्रेड होने पर एक्सचेंज खुद टीडीएस काटकर सरकार को जमा करता है।

  • P2P या OTC डील: इस स्थिति में खरीदार को टीडीएस काटकर सरकार को जमा करना होता है, जिसे P2P Crypto Tax के रूप में समझा जाता है।

इन नियमों को समझने के बाद अब देखते हैं कि वास्तविक स्थितियों में यह कैसे लागू होता है।

12 असली उदाहरणों से समझें 

नीचे दिए गए उदाहरण निवेशकों को यह समझने में मदद करेंगे कि 194S के तहत Crypto TDS व्यवहार में कब लागू होता है:

  • ₹40,000 की क्रिप्टोकरेंसी खरीदी (salary-based व्यक्ति), यह ₹50,000 से कम है, इसलिए नहीं कटेगा।

  • ₹60,000 का क्रिप्टो खरीदा, थ्रेशोल्ड पार होने पर ₹600 (1%) Crypto TDS कटेगा।

  • कंपनी ने ₹8,000 की क्रिप्टोकरेंसी खरीदी, ₹10,000 से कम होने के कारण लागू नहीं होगा।

  • कंपनी ने ₹15,000 का Cryptocurrency खरीदा, ₹150 TDS कटेगा।

  • WazirX पर ₹2,00,000 का Bitcoin खरीदा, एक्सचेंज ₹2,000 काटकर सेलर को ₹1,98,000 देगा।

  • P2P में ₹1,50,000 का USDT ट्रांजेक्शन, खरीदार ₹1,500 काटकर सरकार को जमा करेगा।

  • ₹75,000 का क्रिप्टो लॉस में बेचा, लॉस होने के बावजूद ₹750 टीडीएस कटेगा।

  • कई छोटे ट्रेड, कुल ₹55,000, थ्रेशोल्ड पार होने के कारण सभी ट्रेड पर लागू।

  • ₹9,000 का क्रिप्टो खरीदा, थ्रेशोल्ड से नीचे, इसलिए नहीं।

  • ₹1,20,000 का NFT खरीदा, ₹1,200 Crypto TDS कटेगा क्योंकि NFT भी VDA है।

  • Crypto-to-crypto ट्रेड (BTC से ETH), ₹3,00,000 वैल्यू होने पर ₹3,000 लागू होगा।

  • पूरे साल में ₹4,000 के छोटे ट्रेड, थ्रेशोल्ड से बहुत कम होने के कारण नहीं कटेगा।

अब सवाल आता है कि टीडीएस कटने के बाद टैक्स फाइलिंग पर इसका क्या असर पड़ता है।

टैक्स फाइलिंग कैसे होती है

जब TDS कट जाता है, तो वह सीधे आपके Form 26AS या AIS में दिखाई देता है। इसका मतलब यह है कि जब आप ITR filing करते हैं, तो इस कटे हुए टीडीएस को टैक्स क्रेडिट के रूप में क्लेम किया जा सकता है।

अगर साल के अंत में आपकी कुल टैक्स देनदारी कम निकलती है, तो आप इसका Refund भी क्लेम कर सकते हैं। साथ ही ध्यान रखें कि इसके अलावा क्रिप्टो प्रॉफिट पर अलग से 30% Cryptocurrency Tax (Section 115BBH) भी लागू होता है।

कन्क्लूजन

194S के अधीन 1% Crypto TDS  का नियम सिर्फ टैक्स कटौती नहीं है, बल्कि यह सरकार के लिए ट्रांजेक्शन ट्रैकिंग सिस्टम का हिस्सा है। इसलिए हर निवेशक के लिए यह समझना जरूरी है कि टीडीएस कब कटता है, किसे जमा करना होता है और इसे ITR में कैसे क्लेम किया जाता है। अगर आप नियमित रूप से क्रिप्टो ट्रेड करते हैं, तो हर ट्रांजेक्शन का रिकॉर्ड रखना और समय पर ITR फाइल करना भविष्य में टैक्स से जुड़ी समस्याओं से बचा सकता है।

डिस्क्लेमर 

यह आर्टिकल केवल जानकारी और शिक्षा के उद्देश्य से लिखा गया है। टैक्स से जुड़े नियम समय-समय पर बदल सकते हैं, इसलिए किसी भी वित्तीय या टैक्स निर्णय से पहले आधिकारिक स्रोत या योग्य टैक्स सलाहकार से सलाह जरूर लें।


पूजा सूर्यवंशी एक स्किल्ड क्रिप्टो राइटर हैं, जिनके पास 6 वर्षों का अनुभव है और वे क्रिप्टो रेगुलेशन, ब्लॉकचेन और Web3 के कॉम्पलेक्स टॉपिक्स को आसान भाषा में समझने योग्य बनाने के लिए जानी जाती हैं। वे डीप रिसर्च और एनालिटिकल एप्रोच के साथ आर्टिकल्स, ब्लॉग और न्यूज़ लिखती हैं, जिनमें SEO पर विशेष ध्यान दिया जाता है ताकि रीडर्स का जुड़ाव बढ़ सके। पूजा की राइटिंग क्रिएटिव एक्सप्रेशन और टेक्निकल अप्रोच का एक बेहतरीन मिश्रण है, जो रीडर्स को जटिल विषयों को स्पष्टता के साथ समझने में मदद करता है। क्रिप्टो स्पेस के प्रति उनकी गहरी रुचि उन्हें इस उद्योग में एक अच्छे राइटर के रूप में स्थापित कर रही है। अपने कंटेंट के माध्यम से, उनका उद्देश्य अपने रीडर्स को क्रिप्टो की तेजी से बदलती दुनिया में गाइड करना है।

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भारत में सेक्शन 194S के तहत किसी भी Virtual Digital Asset (जैसे Bitcoin, Ethereum या NFT) के ट्रांसफर पर 1% TDS काटा जाता है। यह टैक्स प्रॉफिट पर नहीं बल्कि पूरी ट्रांजेक्शन वैल्यू पर लागू होता है।
यदि किसी साल में Specified Person के लिए कुल crypto ट्रांजेक्शन ₹50,000 से ज्यादा और अन्य व्यक्तियों (कंपनी, फर्म आदि) के लिए ₹10,000 से ज्यादा हो जाता है, तो सेक्शन 194S के तहत 1% TDS लागू हो जाता है।
हाँ, crypto को लॉस में बेचने पर भी 1% TDS कटता है क्योंकि यह प्रॉफिट पर नहीं बल्कि ट्रांजेक्शन की पूरी वैल्यू पर लागू होता है।
अगर आप WazirX या CoinSwitch जैसे crypto एक्सचेंज पर ट्रेड करते हैं, तो ज्यादातर मामलों में एक्सचेंज खुद 1% TDS काटकर सरकार को जमा कर देता है।
Crypto ट्रांजेक्शन पर कटा हुआ TDS आपके Form 26AS या AIS में दिखाई देता है। ITR फाइल करते समय आप इसे टैक्स क्रेडिट के रूप में क्लेम कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर TDS रिफंड भी ले सकते हैं।