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AI से डेटा सेंटर तक: भारत बना US Tech Giants का नया पसंदीदा ठिकाना

AI रेस में भारत बना US Tech Giants का फेवरेट हब, जानिए रिपोर्ट

AI की दुनिया में रेस तेज होती जा रही है और इस दौड़ में भारत तेजी से US Tech Giants का पसंदीदा बाजार बनता जा रहा है। Microsoft, Google, Amazon जैसी दिग्गज कंपनियां भारत में डेटा सेंटर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और Artificial Intelligence सेवाओं में अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं।

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Source-  Bitinning X Post 


इसकी सबसे बड़ी वजह है भारत की 100 करोड़ से ज्यादा डिजिटल फ्रेंडली आबादी, तेजी से बढ़ता इंटरनेट यूजर बेस और सरकार की नई नीतियां जो विदेशी निवेश को बढ़ावा दे रही हैं।


Wall Street Journal की रिपोर्ट के अनुसार, भारत इस समय अमेरिका के लिए सबसे Hot टेक मार्केट्स में से एक बन चुका है। खास बात यह है कि भारत सिर्फ एक बड़ा कंज्यूमर मार्केट नहीं रह गया है, बल्कि अब Artificial Intelligence डेवलपमेंट और डिप्लॉयमेंट का ग्लोबल हब बनने की ओर बढ़ रहा है।


भारत सरकार की नई AI नीति ने बदला निवेश का माहौल

भारत सरकार ने हाल ही में Union Budget 2026 में बड़ा ऐलान किया है। इसके तहत इंडिया में मौजूद डेटा सर्विस सेंटरों से विदेशी बाजारों को दी जाने वाली सेवाओं पर मिलने वाली कमाई पर 20 साल की टैक्स छूट दी जाएगी। इस फैसले का उद्देश्य विदेशी टेक कंपनियों को भारत में अपने डेटा सेंटर और AI ऑपरेशन स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करना है।


IT Minister Ashwini Vaishnaw के मुताबिक, यह कदम इंडिया को एक बड़े AI Hub के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम साबित होगा। सरकार चाहती है कि India न सिर्फ AI यूजर बने, बल्कि Artificial Intelligence सर्विसेज, डेटा प्रोसेसिंग और क्लाउड ऑपरेशन में भी दुनिया का लीडर बने।


भारत क्यों बन रहा है अमेरिकी AI कंपनियों का पसंदीदा बाजार?

भारत में Artificial Intelligence निवेश की सबसे बड़ी वजह है यहां की विशाल डिजिटल आबादी। इंडिया में स्मार्टफोन यूजर की संख्या तेजी से बढ़ रही है और हर स्मार्टफोन यूजर दुनिया के किसी भी दूसरे देश की तुलना में ज्यादा मोबाइल डेटा इस्तेमाल करता है। 


Ericsson की रिपोर्ट के मुताबिक, मोबाइल डेटा कंजंप्शन के मामले में India ग्लोबल लीडर बन चुका है। इसके अलावा, Boston Consulting Group की रिपोर्ट बताती है कि India में करीब 62% लोग जनरेटिव AI Tools का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। 


इससे साफ है कि इंडिया सिर्फ टेक्नोलॉजी कंज्यूमर नहीं, बल्कि AI को अपनाने वाला एक बड़ा बाजार भी बन चुका है।


Microsoft, Amazon और Google ने किए बड़े निवेश

पिछले कुछ सालों में अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों ने इंडिया में एआई और डेटा सेंटर सेक्टर में भारी निवेश किया है।


  • Microsoft ने India में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लाउड सर्विस और डिजिटल स्किल ट्रेनिंग के लिए करीब $17.5 बिलियन निवेश का ऐलान किया।

  • Amazon ने इंडिया में एआई, एक्सपोर्ट और रोजगार के लिए करीब $35 बिलियन लगाने की योजना बनाई है।

  • Google ने अक्टूबर में दक्षिण भारत में डेटा सेंटर और अंडरसी केबल नेटवर्क के लिए $15 बिलियन के निवेश की घोषणा की थी और इसे अमेरिका के बाहर अपना सबसे बड़ा एआई हब बताया था।


भारत का फोकस: सस्ता, तेज और बड़े लेवल पर एआई डिप्लॉयमेंट

Wall Street Journal की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की रणनीति अमेरिका और चीन से थोड़ी अलग है। जहां अमेरिका और चीन बड़े और महंगे एआई मॉडल बनाने पर फोकस कर रहे हैं, वहीं भारत का लक्ष्य है कम लागत में बड़े लेवल पर एआई सेवाएं लागू करना।


भारत का मजबूत IT सर्विस सेक्टर, अनुभवी इंजीनियरों की बड़ी संख्या और कम ऑपरेशन लागत इसे एआई डिप्लॉयमेंट के लिए आदर्श बनाते हैं। इसका मतलब है कि यहां हेल्थकेयर, एजुकेशन, फाइनेंस, एग्रीकल्चर और गवर्नेंस जैसे सेक्टर में एआई समाधान तेजी से और सस्ते में लागू किए जा सकते हैं।


Indian Government का मानना है कि इससे India विकासशील देशों के लिए एक मॉडल बन सकता है, जहां सीमित संसाधनों में भी एआई का बड़े लेवल पर इस्तेमाल संभव हो। जल्द ही नई दिल्ली में India AI Impact Summit 2026 का आयोजन होने वाला है, जहां इस पूरे विजन को आगे बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी।


टैक्स क्लैरिटी से खत्म हुई कंपनियों की बड़ी चिंता

पहले विदेशी कंपनियों को इस बात को लेकर चिंता रहती थी कि इंडिया में बने डेटा सेंटर से मिलने वाली विदेशी कमाई पर टैक्स कैसे लगेगा। इससे कानूनी विवाद और ज्यादा टैक्स बोझ का खतरा बना रहता था।


लेकिन नई टैक्स नीति के बाद यह अनिश्चितता काफी हद तक खत्म हो गई है। अब कंपनियां भारत को सिर्फ घरेलू बाजार के लिए नहीं, बल्कि ग्लोबल सर्विस हब के तौर पर देख रही हैं। इससे भारत में बड़े पैमाने पर क्लाउड सर्विस, डेटा एनालिटिक्स और एआई ऑपरेशन स्थापित हो रहे हैं।


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कन्क्लूजन: India का AI भविष्य अवसर भी और जिम्मेदारी भी

भारत सरकार जल्द ही नई दिल्ली में India AI Impact Summit 2026 का आयोजन करने जा रही है, जहां इस पूरे विजन को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी। सरकार का मानना है कि भारत को OpenAI जैसी कंपनियों से मुकाबला करने के बजाय, एआई के प्रैक्टिकल और कम लागत वाले इस्तेमाल पर ध्यान देना चाहिए।


हालांकि, इसके साथ-साथ डेटा प्राइवेसी, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल एथिक्स जैसे मुद्दों पर भी मजबूत नियम बनाने की जरूरत है ताकि एआई का इस्तेमाल सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से हो सके।


Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और समाचार उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारियां विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स, सार्वजनिक स्रोतों और सोशल मीडिया पोस्ट्स पर आधारित हैं। किसी भी निवेश, बिजनेस या टेक्नोलॉजी से जुड़े निर्णय लेने से पहले पाठकों को स्वयं रिसर्च करने या विशेषज्ञ सलाह लेने की सलाह दी जाती है।

Shubham Sharma पिछले 4 वर्षों से Web3, ब्लॉकचेन, NFT और क्रिप्टोकरेंसी पर गहराई से लेखन कर रहे हैं। वे मार्केट ट्रेंड्स को जल्दी पहचानने, तकनीकी अपडेट्स को सरल भाषा में समझाने और भारतीय क्रिप्टो निवेशकों को विश्वसनीय जानकारी प्रदान करने के लिए जाने जाते हैं। Shubham ने कई प्रमुख क्रिप्टो मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स के लिए योगदान दिया है और उनका उद्देश्य पाठकों को तेजी से बदलती Web3 दुनिया में सटीक, निष्पक्ष और इनसाइटफुल कंटेंट देना है।

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भारत की बड़ी डिजिटल आबादी, सस्ता डेटा, मजबूत IT इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकार की निवेश-फ्रेंडली नीतियां इसे US Tech कंपनियों के लिए पसंदीदा AI डेस्टिनेशन बना रही हैं।
नई नीति के तहत भारत में डेटा सर्विस सेंटर से विदेशी बाजारों को दी जाने वाली सेवाओं पर मिलने वाली कमाई पर 20 साल की टैक्स छूट दी जाएगी, जिससे विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
Microsoft ने $17.5 बिलियन, Amazon ने करीब $35 बिलियन और Google ने लगभग $15 बिलियन निवेश की घोषणा की है।
भारत कम लागत में बड़े स्तर पर AI डिप्लॉयमेंट पर फोकस कर रहा है, जिससे हेल्थकेयर, एजुकेशन, फाइनेंस और गवर्नेंस जैसे सेक्टर्स में AI तेजी से लागू हो रहा है।
इससे बेहतर डिजिटल सर्विसेज, सस्ती AI-सॉल्यूशंस, ज्यादा रोजगार के मौके और टेक्नोलॉजी तक आसान पहुंच संभव होगी।