भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सरकारी रुख लगातार सख्त होता जा रहा है। बीते कुछ वर्षों में टैक्स और रिपोर्टिंग से जुड़े कई नियम लागू किए गए हैं और अब सरकार एक और बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। वर्ष 2027 से भारत अन्य देशों के साथ क्रिप्टो लेन-देन से जुड़ी जानकारी साझा करेगा।
Source- X Post
इसका सीधा असर उन निवेशकों पर पड़ सकता है, जो विदेशी एक्सचेंजों के ज़रिए ट्रेडिंग करते हैं। इस कदम को Transparency बढ़ाने और Tax निगरानी मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
भारत जिस वैश्विक सिस्टम से जुड़ने जा रहा है, उसे Crypto-Asset Reporting Framework (CARF) कहा जाता है। यह फ्रेमवर्क OECD (Organisation for Economic Co-operation and Development) द्वारा तैयार किया गया है।
CARF के तहत सदस्य देश आपस में क्रिप्टो ट्रांजैक्शन की जानकारी साझा करते हैं, ठीक उसी तरह जैसे कई देशों के बीच बैंक खातों का डेटा एक्सचेंज किया जाता है। भारत ने इस सिस्टम को अपनाने की सहमति दे दी है और अनुमान है कि 2027 से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डेटा शेयरिंग शुरू हो जाएगी।
सरकार का मानना है कि इससे क्रिप्टो मार्केट में Transparency बढ़ेगी और सीमा-पार Transaction पर बेहतर निगरानी संभव होगी।
वर्तमान में बड़ी संख्या में भारतीय निवेशक विदेशी Crypto Exchange पर ट्रेडिंग कर रहे हैं। इससे सरकार के सामने कई चुनौतियाँ खड़ी होती हैं, जैसे Tax की सही निगरानी न हो पाना और अवैध Transaction का जोखिम।
इसी वजह से International सहयोग के ज़रिए जानकारी साझा करने का फैसला लिया गया है।
इसके अलावा, Budget 2026 में भारत सरकार ने Crypto रिपोर्टिंग से जुड़े नियमों को और स्पष्ट किया था। तय समय पर जानकारी न देने या गलत विवरण देने पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इससे पहले भी क्रिप्टो से होने वाली आय पर टैक्स और ट्रांजैक्शन-आधारित TDS जैसे नियम लागू किए जा चुके हैं। नए कदमों से एक्सचेंजों और निवेशकों दोनों की जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।
डेटा शेयरिंग शुरू होने के बाद विदेशी प्लेटफॉर्म्स पर की गई ट्रेडिंग को छुपाना आसान नहीं रहेगा। टैक्स विभाग को ट्रांजैक्शन की बेहतर जानकारी मिल सकेगी, जिससे टैक्स चोरी पर अंकुश लग सकता है।
हालांकि, इसके कुछ संभावित नकारात्मक पहलू भी हैं।
कुछ निवेशकों को अपनी वित्तीय प्राइवेसी कम होने का डर हो सकता है। वहीं, नियमों की सख्ती के कारण छोटे निवेशकों के लिए प्रक्रिया थोड़ी कठिन बन सकती है। इसके अलावा, कुछ विदेशी एक्सचेंज भारतीय बाजार से दूरी बना सकते हैं, जिससे विकल्प सीमित हो सकते हैं।
भारतीय सरकार क्रिप्टो ट्रेडिंग को पूरी तरह प्रतिबंधित करने के बजाय उसे एक नियंत्रित और पारदर्शी ढांचे में लाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। 2027 से अंतरराष्ट्रीय डेटा शेयरिंग शुरू होने पर विदेशी एक्सचेंजों के ज़रिए की गई गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा सकेगी। इससे टैक्स अनुपालन बेहतर होने की संभावना है और सिस्टम अधिक साफ दिखाई दे सकता है।
हालांकि, निवेशकों के लिए यह ज़रूरी होगा कि वे नियमों को समझकर ही कोई भी वित्तीय फैसला लें और केवल विश्वसनीय जानकारी के आधार पर आगे बढ़ें।
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Disclaimer: यह लेख केवल सूचना और शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। क्रिप्टोकरेंसी में निवेश जोखिमपूर्ण हो सकता है। निवेश से पहले किसी वित्तीय सलाहकार से परामर्श करना उचित रहेगा।
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